बुद्धिमान व्यापारी और गरीब मजदूर की कहानी | रोचक लघु कथा

Best Short Hindi Moral Story For  | प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद लघु कहानी

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इस प्रेरणादायक कहानी हम में एक बेहद गरीब मजदूर और एक बुद्धिमान व्यापारी की कहानी के बारे में सुनेंगे। इस कहानी से हम जानेंगे कि कैसे व्यापारी ने अपनी सुझबुझ से अपनी और उस मजदूर की रक्षा किया।

इस प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद लघु कहानी से सीखेंगे “अगर हम किसी का बिना स्वार्थ के सहायता करते हैं, तो कहीं न कहीं हम खुद की ही सहायता करते हैं”। तो चलिए इस प्रेरणादायक हिंदी कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं।

बहुत ही प्रेरणादायक रोचक लघु कथा| Short Inspirational Stories In Hindi With Moral

बहुत दिन पहले उतर भारत के एक गाँव मे एक गरीब मजदूर रहता था। वह गाँव पहाड़ों और जँगलो के किनारे बसा हुआ था। इसलिए अक्सर जंगलों में रहने वाले डाकू रात के समय इस गांव पर धावा बोल दिया करते थे। डाकुओं को गांव वालों के पास से जो कुछ भी मिलता था, उसे वह छीनकर ले जाते थे।

एक बार एक व्यापारी इस गांव में आया। चूंकि रात बहुत ज्यादा हो चुकी थी, इसलिये उसने मजदूर के घर के दरवाजे पर दस्तक दी। मजदूर ने दरवाजा खोला। व्यापारी ने मजदूर से कहा- “मैं शहर की ओर जा रहा था। लेकिन यही पर काफी रात हो गयी है। क्या आप रात गुजारने के लिए अपने घर पर मुझे जगह दे सकते हो ?

मजदूर बहुत भला आदमी था, उसने घर आये अजनबी मेहमान का स्वागत करते हुए कहा- “क्यों नहीं ? आईये, यह आपका ही तो घर है। आप यहाँ पर निश्चिन्त होकर रात गुजार सकते हैं।”

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मजदूर ने अपने घर का रुखा- सूखा खाना बड़े प्रेम और आदर पूर्वक व्यापारी को खिलाया। फिर उसके सोने का प्रबंध कर दिया।

आधी रात के करीब कुछ शोर सुनकर व्यापारी की आंखे खुल गयी। उसने देखा कि घर का मालिक वह मजदूर अपने हाथों में एक पोटली लिए इधर- उधर बडी बेचैनी से चक्कर काट रहा है।

व्यापारी यह सब होता देख कुछ समझ नहीं पाया और उसने उत्सुकता से मजदूर से पूछा- “क्यों ? क्या बात है ?”

मजदूर ने व्यापारी से कहा- साहब डाकुओं ने इस गांव पर धावा बोल दिया है। मैने बेहद मेहनत से पांच सौ रुपये अपनी बेटी की शादी के लिए बचाये थे। मुझे डर है कि ये रुपये डाकू ले जायेंगे। अब आप ही बताइये की मुझे क्या करने चाहिए ?

व्यापारी ने मजदूर को फौरन सलाह दी अरे आप इतना परेशान क्यों हो रहे हो। जल्दी से सामने गड्ढा खोदकर अपने इस धन की पोटली को छुपा दो।

मजदूर ने व्यापारी का सलाह माना और झटपट एक गड्ढा खोदकर उसमें अपने धन की पोटली को छुपा दिया।

थोड़े ही देर में पांच- सात डाकुओं का एक दल मजदूर के मकान में घुस आए। उनके सरदार ने कड़कड़ाती हुई आवाज में पूछा-“अपना सारा धन हमारे हवाले कर दो।”

मजदूर गिड़गिड़ाते हुए अपनी गरीबी बताने लगा तो सरदार ने अपने आदमियों को हुक्म दिया कि वे लोग मजदूर के घर की तलाशी लें। डाकू घर की तलाश लेना शुरू करते इससे पहले ही व्यापारी बोल पड़ा- “आप लोग इस घर की तलाशी न लें। मैं बताता हूँ इसने अपना धन कहाँ छुपाया है ?”

फिर व्यापारी ने सामने इशारा करते हुए कहा- “आप लोग यहाँ खोदे।” आनन फानन में डाकुओं ने वह जगह खोद डाली। कुछ ही समय मे धन की पोटली उनके हाथ लग गयी। उन्होंने धन की पोटली ली और मजदूर को गालियाँ देते हुए चले गए।

इधर यह सब होता देखकर मजदूर ने सोच लिया कि हो न हो यह व्यापारी डाकुओं का आदमी है, और ये उनसे मिला हुआ है। तभी इसने खुद मुझे धन को गड्ढे में छुपाने की सलाह दी और फिर इसी ने उन डाकुओं को धन का पता भी बता दिया।

मजदूर ने जब यह देखा कि वह व्यापारी डाकुओं के साथ नहीं गया है तो उसे आश्चर्य हुआ।

डाकुओं के जाने के बाद मजदूर ने दरवाजा बंद कर लिया और व्यापारी के पास पहुंच कर गुस्से में बड़ी देर तक उसे बुरा भला कहता रहा। व्यापारी ये सब देख कर मुस्कुराता रहा। जब मजदूर का जी भर गया और वह खुद चुप हो गया तब सहज भाव में व्यापारी ने कहना शुरू किया भाई, अब मेरी बात सुनो।

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दरअसल मैंने तुम्हारे धन का पता डाकुओं को बता कर तुम्हारे साथ होने वाले नुकसान के साथ-साथ अपने आप को भी भारी नुकसान से बचाया है। अगर मै तुम्हारे पोटली को नहीं बताता तो डाकू तुम्हारे घर की तलाशी लेते फिर उनके हाथ मेरी पोटली लग जाती, जिसमें मेरा ढाई हजार रुपये नगद और सोने के कुछ जेवर है। इसलिये मैंने डाकुओं को तुम्हारी पोटली का पता बताकर उनका ध्यान उस ओर कर दिया और उन्होंने घर की तलाशी नहीं ली।

वह व्यापारी ने अपने पोटली में से छः सौ रुपये निकालकर मजदूर को देते हुए कहा- “यह लो तुम्हारे पांच सौ रूपये और एक सौ रुपये तुम्हारी बिटिया को उसकी शादी पर मेरी ओर से।”

मजदूर व्यापारी की सूझबूझ और  बुद्धिमानी देखकर दंग रह गया।

इस कहानी से शिक्षा Moral Education Story in Hindi

● अगर कोई आपके द्वार पर सहायता मांगने आये, तो कभी उसको मना नहीं करना चाहिए। बल्कि उसको जितना हो सकता है, उतना ही सहायता कीजिये। अगर कोई किसी के द्वार पर सहायता मांगने के लिए जाता है, तो वो आपसे बहुत उम्मीदें लेकर आपके पास जाता है। ऐसे में आपका प्रथम कर्तव्य बनता है कि उसका सहायता अवश्य करें।

● अगर आपका कोई थोड़ा भी सहायता किया हो। आपको कभी भी किसी बुरे समय में साथ दिया हो, तो आपका भी उसके प्रति ये कर्तव्य है, कि उस आदमी के एहसान कभी नहीं भूलना चाहिए। अगर वो किसी मुसीबत में है तो उसकी सहायता के लिए हमेशा आगे रहना चाहिए। यहीं आपका धर्म भी है।

आपको इस Short Hindi Moral Story से क्या-क्या सीख मिली। आपने अभी तक कितने ऐसे जरूरतमंद लोगों का मदद किया है। आप comment करके अपनी कहानी जरूर शेयर कीजिये, कि अपने कितने लोगों को कैसे सहायता प्रदान की।

आपको ये प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद लघु कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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