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दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति से मशहूर अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय

दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति से मशहूर अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय

Albert Einstein Biography In Hindi | दुनिया के सबसे व्यक्ति अल्बर्ट आइंस्टीन की जीवनी

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अल्बर्ट आइंस्टीन की जीवनी


अल्बर्ट आइंस्टीन: पूरे मानव इतिहास का सबसे बुद्धिमान व्यक्ति। जो अपने खोज और सिद्धान्तों के बदौलत बीसवीं सदी के प्रारंभिक 20 वर्षों तक विश्व के विज्ञान जगत में छाए रहे। आइंस्टीन अपने उपलब्धि के दम पर दुनिया को अंतरिक्ष, समय और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत दिए।


वो इतने महान और लोकप्रिय इंसान थे कि जब भी वो बाहर घूमने बाहर निकलते थे तो लोग उनको रास्ते पर रोककर उनके दिये गए सिद्धांत की व्याख्या पूछने लगते थे।


जिसके चलते अल्बर्ट आइंस्टीन इस पूछताछ से बचने के लिए एक तरीका निकाला। जिसमें वो सब लोगों से कहते थे कि माफ कीजिये जिसे आप प्रोफेसर अल्बर्ट आइंस्टीन समझ रहे हैं दरअसल में मैं वो नहीं हूँ।


वो हमेशा कहते थे कि मेरे अंदर कोई खास गुण नहीं है। मैं तो बस केवल ऐसा व्यक्ति हूँ जिसमें जिज्ञासा कूट-कूट कर भरी हुई है। दोस्तों आप एक बात जानकर हैरान हो जायेंगे कि अल्बर्ट आइंस्टीन हमेशा से इतने बुद्धिमान नहीं थे। बल्कि पढ़ाई में बहुत कमजोर होने के कारण बचपन में उनको मंदबुद्धि भी कहा जाने लगा था।


पर ये तो कुछ भी नहीं है, क्योंकि इसके अलावा भी ऐसे बहुत सारी बातें हैं जिसको जानकर आप आश्चर्य से भर जाओगे। तो अगर आप सच में जानना चाहते हैं कि कैसे अल्बर्ट आइंस्टीन एक मंदबुद्धि बालक से दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति बनें तो इस पोस्ट को पूरा पढें।


Albert Einstein Success Life Story In Hindi | दुनिया के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति अल्बर्ट आइंस्टीन की आत्मकथा


जर्मनी के एक यहूदी परिवार में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च सन 1879 को हुआ था। आइंस्टीन पिता का नाम हर्मन आइंस्टीन और माता का नाम पॉलिन आइंस्टीन था। 


जब वो पैदा हुए थे तो उनके अंदर एक ऐसी अनोखी चीज़ थी जो उनको किसी भी सामान्य बच्चे से अलग बनाती थी। क्योंकि उनका सिर किसी भी सामान्य बच्चे से कहीं ज्यादा बड़ा था। वो एक असामान्य बच्चे के रूप जन्मे थे।


इसके बावजूद भी उनका दिमाग इतना तेज था कि आजतक उनका मुकाबला कोई नहीं कर पाया। 60 साल उनके इस दुनिया को छोड़ कर जाने का हो गया है लेकिन आज भी दुनिया उनके सिद्धान्तों के बिना कमजोर है। यहीं वजह है कि हर कोई जानना चाहता है कि आखिर उनके दिमाग में क्या खास था कि उन्हें उस मुकाम तक ले गया कि आज उन्हें दुनिया भर में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति के नाम से जाना जाता है।


जैसे-जैसे वो थोड़े बड़े होने लगे तो उनको शुरुआत में बोलने में भी कठिनाई होती थी। लगभग 4 साल की उम्र में तो अल्बर्ट आइंस्टीन कुछ भी नहीं बोल पाते थे। मगर एक दिन जब वो अपने माता-पिता के साथ रात का भोजन कर रहे थे तो उन्होंने अपनी 4 साल की चुपी तोड़ते हुए कहा सुप बहुत गर्म है। अपने बेटे के इस तरह बोलने से आइंस्टीन के माता-पिता एकदम हैरान रह गए और बहुत खुश हुए।


साथियों आइंस्टीन कभी भी अपने जूतों में मोजे नहीं पहना करते थे। इस बात के बारे में पूछे जाने पर वो कहते थे कि उनके पैरों की उंगलियां बहुत बड़ी थी। बचपन में उंगली बड़ी होने के कारण उनके मोजे बार बार फट जाते थे। जिसके चलते उन्होंने मोजे पहनना ही छोड़ दिया।


 अल्बर्ट आइंस्टीन बचपन में अपने उम्र के बच्चों के साथ खेलने जाना बिल्कुल पसंद नहीं करते थे। उन्होंने अपनी एक अलग ही दुनिया बना रखी थी। वो हमेशा पेड़-पौधों और इस ब्रह्मांड के बारे में सोचते रहते थे। उनके मन में हमेशा यह बात रहती थी कि आखिर ये दुनिया चलती कैसे है?


Albert Einstein Education In Hindi | अल्बर्ट आइंस्टीन की कहानी


आइंस्टीन के मन में विज्ञान के प्रति जागरूकता तब पैदा हुई जब उनकी उम्र मात्र पांच साल की थी। उनके पिता ने उन्हें एक मैग्नेटिक कंपस लाकर दिया था। जिसे देखकर आइंस्टीन बहुत खुश हुए। लेकिन जब मैग्नेटिक कम्पस का सुई हमेशा उतर दिशा की तरफ रहती थी तो उनके दिमाग में हमेशा एक सवाल उठता था कि आखिर ये सुई हमेशा उतर दिशा की ओर कैसे और क्यों होता है।


अपने बोलने में होने वाले कठिनाई के कारण उन्होंने स्कूल जाना बहुत बाद में शुरू किया। आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कूल उन्हें जेल की तरह लगता था। क्योंकि उनके अध्यापकों द्वारा पढ़ाई गयी चीजे आधी अधूरी होती थी। वो समझाने से ज्यादा रटाने पर ध्यान देते थे।


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इसीलिए अल्बर्ट आइंस्टीन अपने अध्यापकों से अजीबोगरीब सवाल पूछा करते थे। जिसकी वजह से आइंस्टीन को उनके अध्यापकों ने मंदबुद्धि कहना शुरू कर दिया था। दोस्तों बार-बार मंदबुद्धि कहे जाने के कारण अल्बर्ट आइंस्टीन को ये एहसास होने लगा कि उनकी बुद्धि अभी तक विकसित नहीं हुई है। इसलिये उन्होंने एक बार अपने अध्यापक से पूछा कि मैं अपने बुद्धि का विकास कैसे कर सकता हूँ।


इस सवाल को सुन कर उनके अध्यापक ने एक लाइन में कहा अभ्यास ही सफलता का मूलमंत्र है। दोस्तों अध्यापक की ये बात आइंस्टीन के मन मे बैठ गयी। उस दिन से उन्होंने ये दृढ़ निश्चय कर लिया कि सबसे आगे बढ़कर दिखाएंगे। उस दिन के बाद आगे बढ़ने की चाहत हमेशा उनके मन मे बैठी रहती थी। अगर पढ़न में मन नही लगता था फिर भी वो किताब हाथ से नहीं छोड़ते थे। हमेशा अपने मन को समझाते और वापस पढ़ने लगते थे।


कुछ ही समय में उनके अभ्यास का सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगा। जिसे देखकर उनके अध्यापक भी ढंग रह गए। और आगे चलकर उन्होंने अध्ययन के लिए गणित जैसे जटिल विषय का चुनाव किया। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के वजह से उनकी आगे की पढ़ाई में थोड़ी समस्या होने लगी। शौक और मौज-मस्ती में एक पैसा भी खर्च नहीं करते थे।

चलिये आइंस्टीन से जुड़ी एक मशहूर किस्सा आपको बताता हूँ।


अल्बर्ट आइंस्टीन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य


एक दिन की बात है जब बहुत तेज बारिश हो रही थी। अल्बर्ट आइंस्टीन अपने हैट को बगल में दबाये जल्दी-जल्दी अपने घर जा रहे थे। छाता नहीं होने की वजह से वो भीग गए थे। तभी उन्हें रास्ते में एक सज्जन पुरुष मिले। तभी उस आदमी ने पूछा तेज बारिश हो रही है। तुम अपने हैट को सर ढकने के बजाय उसको अपने कोट में दबाये हुए जा रहे हो। तुम्हारा सर भीग नहीं रहा है।


ये बात सुनकर आइंस्टीन बोले सर भीग रहा है परंतु वो बाद में सुख जाएगा। लेकिन हैट अगर गिला हो गया तो खराब हो जाएगा और ना तो मेरे पास उतने पैसे हैं और ना ही समय है कि नया हैट खरीद सकूँ।


अपने कठिन परिश्रम और अभ्यास की मदद से आइंस्टीन ने गणित और भौतिक विज्ञान में महारत हासिल किया। दोस्तों शिक्षा को लेकर उनका विचार था कि शिक्षा वो होता है जो आपको तब भी याद रहे जब आप सबकुछ भूल गए हो।


अल्बर्ट आइंस्टीन की खोज और आविष्कार| Albert Einstein Discoveries In Hindi

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अल्बर्ट आइंस्टीन 


समय के साथ आइंस्टीन इतने बुद्धिमान हो गए कि उन्होंने बहुत सारी अदभुत खोज की। आज की दुनिया उनको थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी यानी सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E=mc2 के लिए जानती है।


सैद्धान्तिक भौतिकी और प्रकाश विद्युत उत्सर्जन की खोज के लिए सन 1921 में अल्बर्ट आइंस्टीन को नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। सन 1952 में अमेरिका ने आइंस्टीन को इजराइल का राष्ट्रपति बनने की पेशकश की। परन्तु आइंस्टीन ने उनका प्रस्ताव ये कहकर ठुकड़ा दिया कि वह राजनीति के लिए नहीं बने हैं।


उन्होंने दिखा दिया कि एक मंदबुद्धि का लड़का भी अपनी मेहनत, लगन और परिश्रम के बल पर संसार में कुछ भी कर सकता है। अल्बर्ट आइंस्टीन इतने बुद्धिमान थे कि वो अपने दिमाग में ही पूरा रिसर्च के बारे में सोच कर उसका प्लान कर लेते थे। जो उनके लैब के प्रयोग से ज्यादा सटीक होता था। इसीलिए अल्बर्ट आइंस्टीन को इतिहास का सबसे जीनियस व्यक्ति कहा जाता है। इसीलिए अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्मदिन 14 मार्च को पूरी दुनिया में जीनियस डे के नाम से मनाया जाता है।


लेकिन अल्बर्ट आइंस्टीन का मानना था कि प्रत्येक इंसान जिसने धरती पर जन्म  लिया है वो जीनियस है। लेकिन यदि किसी मछली को आप पेड़ पर चढ़ने की योग्यता से जाँच करोगे तो वो अपनी पूरी जिंदगी ये समझ कर जियेगी कि वो मूर्ख है।


अल्बर्ट आइंस्टीन को अपने निजी गतिविधियों के कारण जर्मनी छोड़कर अमेरिका में अपनी शरण लेनी पड़ी। वहाँ उनको बहुत से विश्वविद्यालयों ने अपने यहाँ प्रोफेसर का पद देने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन दोस्तों आइंस्टीन ने प्रिंसटन विश्वविद्यालय को उसके शांत और बौद्धिक वातावरण के कारण आचार्य बनना स्वीकार कर लिया।


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जब आइंस्टीन पहली बार उस विश्वविद्यालय पहुंचे तो वहाँ के प्रशासनिक अधिकारी ने कहा आप प्रयोग के लिए आवश्यक उपकरणों की सूची दे दीजिए। ताकि आपके कार्य के लिए उन्हें जल्दी ही मंगवाया जा सकें। दोस्तों इस बात पर आइंस्टीन ने बड़े ही सहजता से कहा कि आप मुझे केवल एक ब्लैकबोर्ड, कुछ चौक, कागज और पेंसिल दे दीजिए। यह सुनकर वहाँ का अधिकारी हैरान हो गया।


साथियों इससे पहले वो अधिकारी कुछ बोलता आइंस्टीन ने कहा हाँ एक बड़ी टोकरी मंगा लीजिये, क्योंकि अपना काम करते समय मैं बहुत सारी गलतियां भी करता हूं और छोटी टोकरी जल्दी से भर जाती है। क्या आप जानते हैं- आइंस्टीन गलतियां करने से कभी नहीं डरते थे। बल्कि अल्बर्ट आइंस्टीन का विचार था कि जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं किया हो उसने अपने जीवन में कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं किया होगा।


अल्बर्ट आइंस्टीन बहुत अलग-अलग तरह से प्रयोग करते थे। उनका प्रयोग करने का तरीका एक दूसरे से बहुत अलग होता था। आइंस्टीन का सिद्धांत अजीब था वो कहते थे सबसे बड़ा पागलपन तो ये है कि एक ही काम को हमेशा करते रहना और हमेशा अलग परिणाम की आशा करना।


अभी तक मैंने अल्बर्ट आइंस्टीन के बारे में वो सब बातें बताई जिससे पता चलता है कि वो कितने महान व्यक्ति थे। लेकिन अब जो मैं आपको बताने जा रहा हूँ उसको सुनकर आप चौक जायेंगे। क्योंकि हमारे जीनियस नम्बर एक कि यादाश्त कुछ खास अच्छी नहीं थी। उन्हें तारीख और फोन नम्बर याद रखने में भी बहुत मुश्किल होती थी।


एक बार जब अल्बर्ट आइंस्टीन से किसी ने उनका टेलीफोन नम्बर पूछा तो वे पास में ही रखे टेलीफोन डायरेक्टरी में ढूंढने लगे। उनको ऐसा करते देख उनके सहकर्मी आश्चर्यचकित होकर बोला आपको खुद का टेलीफोन नम्बर भी याद नहीं है। इस पर आइंस्टीन ने कहा भला मैं ऐसे किसी भी चीज़ को क्यों याद रखूं जो किताब में ढूंढन आसानी से मिल जाती है।


 अल्बर्ट आइंस्टीन व्यवहारिक दुनिया की भी बहुत सी बातों को अक्सर भूल जाया करते थे। चलिये इस बात से जुड़ी कुछ किस्से आपको सुनाता हूँ।


Top 2 Interesting Facts About Albert Einstein In Hindi


● पहला किस्सा- ये बात उस समय की है जब आइंस्टीन प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में कार्यरत थे। एक दिन उनके यूनिवर्सिटी से घर वापस आते समय वे अपने खुद के घर का ही पता भूल गए। यद्यपि प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के अधिकांश लोग उनको पहचानते थे लेकिन जिस टैक्सी में वे बैठे थे उस टैक्सी का ड्राइवर उन्हें नहीं पहचानता था।


आइंस्टीन ने गाड़ी चला रहे उस ड्राइवर से कहा क्या तुमको अल्बर्ट आइंस्टीन के घर का पता मालूम है ? ड्राइवर ने कहा प्रिंसटन में भला उन्हें कौन नहीं जानता। यदि आप उनसे मिलना चाहते हैं तो मैं आपको उनके घर पहुंचा सकता हूँ। तब आइंस्टीन ने उस ड्राइवर से कहा कि मैं ही आइंस्टीन हूँ। मैं अपने घर का पता भूल गया हूँ। उनके इस बात को जानकर ड्राइवर ने उनके घर तक पहुँचाया। आइंस्टीन के बार-बार आग्रह करने के बाद भी ड्राइवर ने उनसे किराया नहीं लिया।


● दूसरा किस्सा- एक बार आइंस्टीन प्रिंसटन से कहीं जाने के लिए ट्रेन से सफर कर रहे थे। लेकिन जब  टिकट चेकर उनके पास आया तो वो अपने टिकट ढूंढने के लिए अपने जेब को टटोलने लगे। जब जेब में टिकट नहीं मिला तो उन्होंने अपना सूटकेस में चेक किया और जब उसमे भी नहीं मिला तो वो अपने सीट के आसपास खोजने लगे।


टिकट चेकर आइंस्टीन को अच्छी तरह से पहचानता था। फिर टिकट चेकर ने कहा यदि आपका टिकट नहीं मिल रहा है और गुम हो गई है तो कोई बात नहीं। मुझे विश्वास है कि आपने टिकट ली होगी। यह कहकर टिकट चेकर दूसरे का टिकट चेक करने लगा।


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जब उसने देखा कि आइंस्टीन अभी तक अपने सीट के नीचे टिकट ढूंढ रहे हैं तो टिकट चेकर ने फिर से कहा कि आप टिकट के लिए परेशान न हो आपसे टिकट नहीं मांगा जाएगा। आइंस्टीन ने टिकट चेकर की बात सुनकर कहा आप टिकट नहीं लेंगे ठीक है पर बिना टिकट के कैसे पता चलेगा कि मैं जा कहाँ रहा हूँ। 


अल्बर्ट आइंस्टीन की मृत्यु कैसे हुई थी | Albert Einstein Death story in Hindi


18 अप्रैल 1955 को महान आइंस्टीन की 76 साल को उम्र में अमेरिका के न्यू जर्सी शहर में मृत्यु हो गयी। अपने पूरे जीवनकाल में अल्बर्ट आइंस्टीन ने अनेकों किताबें और लेख प्रकाशित किये। उन्होंने 300 से भी अधिक वैज्ञानिक और लगभग 150 गैर वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रकाशित किये।


आज हम विज्ञान के जिन आविष्कारों का उपयोग अपने दैनिक जीवन में कर रहे हैं। इंटरनेट, सैटेलाइट के द्वारा जो जानकारियां हमें प्राप्त हो रही है उन अभी आविष्कारों में अल्बर्ट आइंस्टीन का भी महान योगदान है। यहाँ तक कि अल्बर्ट आइंस्टीन के सिद्धान्तों के बदौलत ही आज नए नए आविष्कार सम्भव हो पा रहे हैं।


लेकिन आइंस्टीन को अपने जीवन में सबसे ज्यादा दुःख तब हुआ था जब उनके वैज्ञानिक आविष्कारों के कारण परमाणु बम का आविष्कार हुआ था। जिससे कि हिरोशिमा और नागासाकी जैसे नगर ध्वस्त हो गए थे।


Albert Einstein Brain Stolen Story In Hindi | अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग

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अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग


आइंस्टीन के मृत्यु के बाद उनके शव परीक्षण के दौरान एक वैज्ञानिक ने उनके परिवार की अनुमति के बिना उनका दिमाग निकाल लिया था। यह अनैतिक कार्य डॉ थॉमस हार्वे ने उनके दिमाग पर रिसर्च करने के लिए किया था। उसके बाद आइंस्टीन का दिमाग बिस सालों तक एक जार में बंद रहा।


सन 1975 में उनके बेटे हेन्स की आज्ञा से उनके दिमाग को 240 भागों में बांटकर कई वैज्ञानिकों के पास भेजा गया। जिनको जाँचने के बाद उन्होंने पाया कि उनके दिमाग में किसी भी आम इंसान से ज्यादा सेल्स मौजूद है।


अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग का वजन 1230 ग्राम था जो नॉर्मल इंसान से काफी छोटा था। क्योंकि एक नॉर्मल इंसान का वजन 1410 ग्राम होता है।


जब वैज्ञानिकों ने अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग को आगे जाँच करना शुरू किया तो वे हैरान रह गए। उन्होंने जाँच में पाया कि उनके दिमाग में wrinkle parietal operculum लापता है। जिसके कारण उनके दिमाग के parietal lobe का आकार सामान्य दिमाग से 20 प्रतिशत बड़ा था।


वैज्ञानिकों का कहना है कि यहीं वजह है कि आइंस्टीन के पास गणितीय कौशल और चीज़ों को इमैजिन करने की शक्ति सामान्य दिमाग से ज्यादा थी। और उनके दिमाग में न्यूरॉन्स का घनत्व  सामान्य आदमी से 17 प्रतिशत ज्यादा थी। जिस वजह से आइंस्टीन को ज्यादा ब्रेन पार्ट मिलती थी।


वैज्ञानिकों का मानना था कि इसी वजह से अल्बर्ट आइंस्टीन की एकाग्रता और दूरदर्शिता सामान्य आदमी से कहीं ज्यादा था। वैज्ञानिक कहते हैं कि आइंस्टीन के दिमाग में ज्यादा फोल्ड थी जो उनके तिव्र बुद्धि का एक कारण था।


अल्बर्ट आइंस्टीन का दिमाग 40 टुकड़े में अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर के Mutter Museum में रखा गया है। आज साइंस चाहे कितनी भी तरक्की कर ली है इसके बावजूद आज भी आइंस्टीन की तीव्र बुद्धि और दिमाग एक पहेली बनी हुई है। वैज्ञानिकों को आशा है कि भविष्य में किसी बेहतरीन टेक्निक के जरिये आइंस्टीन के दिमाग को और भी बेहतर तरीके से जानने में कामयाबी मिलेगी।


डॉ थॉमस हार्वे ने अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग के साथ सही किया या गलत आप कमेंट करके अपनी राय जरूर दें।


अल्बर्ट आइंस्टीन के प्रसिद्ध 20 कथन/सुविचार | Top 20 Albert Einstein Quotes In Hindi


1: जिंदगी जीने के केवल दो तरीके है। पहला यह कि आपके नजर में कुछ भी चमत्कार नहीं है, दूसरा यह कि आपके लिए दुनिया की हर चीज चमत्कार है।


2 : यदि मानव को जीवित रखना है तो हमको नयी सोच की आवश्यकता होगी।


3 : एक सफल व्यक्ति बनने से अच्छा है कि एक मूल्यवान व्यक्ति बनने की कोशिश करें।


4 : क्रोध मूर्खों के सीने में बसता है।


5 : यदि आप जीवन में खुश रहना चाहते हैं तो किसी व्यक्ति या वस्तु से लगाव रखने के बजाय अपने लक्ष्य से लगाव रखें।


6 : भगवान के सामने सारे लोग समान है। जो जितना मूर्ख है उतना ही बुद्धिमान।


7 : संयोग भगवान का बचा हुआ एकमात्र सीक्रेट रास्ता है।


8 : इंसान को सफल होने के लिए उसके अनुसार क्या होना चाहिए ये जरूरी नहीं है।


9 : अपनी सर्वोत्तम क्षमताओ के अनुसार राजनितिक मामलो में दोषसिद्धि हर नागरिक का कर्तव्य है।


10 : सूचना का प्राप्त होना ज्ञान होना नहीं होता है।


11 : मनुष्य के हालात उससे ज्यादा मजबूत होते है।


12. हमारे जीवन में वक्त बहुत कम है अगर कुछ करना है तो उसकी शुरुआत अभी से करना होगा।


13: किसी का व्यक्तित्व उसके सुंदरता से नहीं बल्कि उसके मेहनत और काम करने से बनता है।


14: व्यक्ति की कीमत इससे नहीं है कि वो क्या प्राप्त कर सकता है, बल्कि इसमें है कि वो क्या दे सकता है।


15: एक अच्छा खिलाड़ी बनने के लिए गेम का नियम पता होना बहुत जरूरी है।


16: आपके जोखिम से ही आपके विश्वास की पहचान होती है।


17 : कठिनाइयों से घबराइए नहीं क्या पता उसमें ही आपका अवसर छिपा हो?


18 : शिक्षा का असली मतलब वो होता है जब आप सबकुछ भूल गए हैं फिर भी आपको वो याद रहता है।


19: अगर आपका तथ्य आपके सिद्धान्त से मेल नहीं खाते हैं तो आप अपने तथ्य को ही बदल डालिये।


20: धर्म के बिना विज्ञान अपाहिज है और विज्ञान के बिना धर्म नेत्रहीन है।


आप हमें जरूर बताइयेगा कि आपको अल्बर्ट आइंस्टीन की जीवनी आपको कैसी लगी। अगर आपको अल्बर्ट आइंस्टीन की ये जानकारी ज्ञानवर्धक लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें ताकि सबको उनके बारे में पता चल सके।
धन्यवाद।


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