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Best Motivational Story In Hindi For Students Success

Best Motivational Story In Hindi For Students Success

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Motivational story in hindi for success

Motivational Story In Hindi For Success: भरोसा अगर ऊपर वाले पर है तो जो तकदीर में लिखा है वहीं मिलेगा। लेकिन अगर भरोसा खुद पर है तो ऊपर वाला भी आपकी तकदीर वैसी ही लिखेगा जो आप चाहोगे।

दोस्तों आज की हमारी ये प्रेणादायक कहानी भी इसी अटूट विश्वास की कहानी है, जिसमें एक पढ़ा लिखा बच्चा अपने अटूट विश्वास के दम पर अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर देता है।


दोस्तों आप यकीन मानिए अगर आपने इस प्रेणादायक कहानी को अच्छे से समझ लिया तो आपका विश्वास और मनोबल भी कई गुना बढ़ जाएगा।


Real Life Short Inspirational Story In Hindi For Success | जिंदगी बदल देगी


दोस्तों ये बेस्ट मोटिवेशनल कहानी है आज से 125 साल पहले जापान के एक छोटे से गांव में एक किसान के घर में जन्में लड़के का, जिसका नाम कोनोसुके मात्सुशिता था। 


कोनोसुके मात्सुशिता जब केवल नौ वर्ष का था तब उसके पिता को आर्थिक रूप से परेशानियों की वजह से गांव की सारी जमीन बेचनी पड़ी और अपना घर तक भी छोड़ना पड़ा।


गांव में सब कुछ गवां चुके उसके पिता परिवार सहित शहर में आ गए। परिवार के पालन पोषण करने के लिए छोटे-मोटे काम करने लगे। परिवार के मदद के लिए दो वर्ष के कोनोसुके मात्सुशिता को भी अपनी बचपन की दुनिया छोड़ एक दुकान पर काम करने लगा।


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कोनोसुके मात्सुशिता हमेशा सूरज की पहली किरण उठने के साथ उठता, दुकान में अच्छे से साफ सफाई करता और साथ में दुकान के कुछ छोटे-छोटे काम निपटा कर वो अपने मालिक के बच्चों को देखभाल और सेवा में लग जाता था।


कुछ महीने इसी तरह बीत गए लेकिन कुछ महीनों बाद उस दुकान के मालिक को मंदी झेलने के बाद कोनोसुके मात्सुशिता को दुकान से निकाल दिया। उसके बाद कोनोसुके ने एक साईकल बनाने वाले के दुकान पर काम करना शुरू किया।


उस जमाने में साईकल को लग्जरी गाड़ी समझी जाती थी और वहाँ साईकल इंग्लैंड से मंगाया जाता था। उस दुकान पर साईकल बेचने के साथ और भी कुछ लोहे का समान बेचा जाता था। कोनोसुके मात्सुशिता को वहाँ अन्य कामों के साथ-साथ अन्य टेक्निकल टूल्स के बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला।


कोनोसुके वहां लगभग पांच वर्ष काम किया और पन्द्रह वर्ष की उम्र में वो कुछ नया ढूंढने लगा जहाँ काम के साथ साथ वो कुछ नया सिख सकें। भविष्य में बिजली के जरूरत की बढ़ती सम्भावनाओं को देखकर उसने उसी क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने के लिए तय कर लिया।


एक दिन उसे ओसाका इलेक्ट्रिक लाइट कम्पनी का एक विज्ञापन मिला। जिसमें कम्पनी को कुछ नए मजदूर की जरूरत थी। उसने वहां काम करने के लिए अप्लाई किया और उसको वहाँ काम भी मिल गयी। वहाँ काम के दौरान उसको काफी कुछ सीखने को मिलने लगा।


धीरे-धीरे समय बीतने लगा समय के साथ कोनोसुके मात्सुशिता जहाँ एक ओर नौकरी के दौरान बहुत कुछ सीख रहा था वहीं दूसरी ओर वो अपनी खाली समय में इलेक्ट्रिसिटी से सम्बंधित बहुत सारी पुस्तकें पढा करता था। साथ में छोटे-मोटे एक्सपेरिमेंट भी करता रहता था।


बिस वर्ष की उम्र में उसका विवाह हो जाने के बाद उसकी जिम्मेदारी और बढ़ गयी। बाईस वर्ष की उम्र तक वो कम्पनी में अपनी काबिलियत से टेक्निकल इंस्पेक्टर बन गया जो उस समय बहुत बड़ा पद माना जाता था।


इसी दौरान उसने अपने खाली समय का इस्तेमाल करते हुए एक नया इलेक्ट्रिकल सॉकेट बनाया और अपने बॉस को दिखाया। लेकिन उसके बॉस को उसका ये आईडिया पसन्द नहीं आया। 


उसके बॉस ने ये कह कर रिजेक्ट कर दिया कि ये मार्केट में नहीं चलेगा, इसकी कोई वैल्यू नहीं है। लेकिन कोनोसुके को अपने बनाये हुये इलेक्ट्रिकल सॉकेट पर पुरा भरोसा था।


उसे विश्वास था कि ये मार्केट में बहुत चलेगा। उसने अपने विश्वास के दम पर खुद का काम करने की ठान ली। उसने इस बारे में अपने दोस्तों से बात किया। लेकिन उसके सभी दोस्तों ने कहा कि अपनी लगी हुई नौकरी को छोड़कर खुद का काम करने का विचार एक पागलपन है और वो भी उस प्रोडक्ट के लिए जिसको इस कम्पनी के बॉस ने पहले ही रिजेक्ट कर दिया हो।


वो मार्केट में चलेगा भी की नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं थी, ऊपर से तुम ज्यादा पढ़े-लिखे भी नहीं हो और ना ही तुम्हारे पास कोई बिज़नेस करने का कोई अनुभव है। तुम्हारा कामयाब होना लगभग नामुमकिन है।


लेकिन दोस्तों उसे खुद पर बहुत विश्वास था और अपने उस प्रोडक्ट पर भी बहुत भरोसा था कि ये लोगों को जरूर पसन्द आयेगी। उसने एक बड़ा फैसला लिया और अपनी नौकरी छोड़ दिया।


कोनोसुके अपनी थोड़ी सी जमा पूंजी के साथ कुछ जरूरी टूल्स खरीद ली और अपने साथ काम करने वाले दो वर्कर, अपने छोटे भाई और अपनी पत्नी के साथ घर पर ही एक बहुत छोटे फैक्टरी के साथ काम शुरू कर सॉकेट बनाने लगा। खुद ही जगह-जगह जाकर उस सॉकेट को बेचने की कोशिश करने लगा। लेकिन उसके इलेक्ट्रिक सॉकेट को सभी जगह रिजेक्ट कर दिया जाता था।


कुछ महीने ऐसे ही गुजर गए। कुछ छोटे-छोटे ऑर्डर मिले पर कोनोसुके मात्सुशिता को अपना और परिवार का गुजारा करना बहुत मुश्किल हो गया था। उसके हालात बेहद खराब हो गए। बुरे हालातों को देखते हुए उसके साथी वर्कर काम छोड़ दिया और अब मात्र तीन लोग ही काम करने के लिए बचे थे।


आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गयी कि घर का खर्च चलाने के लिए उसे अपने घर का समान तक बेचने पड़े। फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। उसे अपने सपनों को पुरा करने के लिए कुछ कर्ज भी लेना पड़ा।


इतने कर्ज और प्रोडक्ट का रिजेक्शन मिलने से वो बहुत परेशान हो गया। हर दिन अपने बनाये सॉकेट को बेचने लिए वो नई-नई कोशिश करता पर हर बार वो फेल हो जाता। कई बार उसको लगता था कि उसे अपने सपने को छोड़ कर फिर से अपनी पुरानी नौकरी को शुरू करना चाहिए।


लेकिन उसका विश्वास उसे कुछ दिन और कोशिश करने के लिए प्रेरित करता। वो फिर से निकल जाता था एक और कोशिश करने के लिए। परन्तु फिर से रिजेक्ट होकर लौट जाता था।


हालात बद से बद्तर होने लगे। उस दिवालिया हो चुके इंसान के पास नौकरी ही एक मात्र विकल्प बच गया था। उसे अपने आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए केवल एक नौकरी ही विकल्प बच गया था। यहीं राय उसके दोस्तों की भी थी कि उसे अपनी जिद छोड़ फिर से नौकरी कर लेनी चाहिए।


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लेकिन दोस्तों उसको अब भी अपने प्रोडक्ट पर इतना विश्वास था कि वो हार मानने के लिए तैयार ही नहीं था। वो लगातार कोशिश करता रहा। उसको विश्वास था कि एक न एक दिन जरूर सफल होकर रहूंगा।


तभी एक दिन अचानक उसकी कम्पनी को एक हजार सॉकेट बनाने का पहला ऑर्डर मिला। उसको लगा कि अब उसका मेहनत सफल जरूर होगा। साथियों उस दिन के बाद उसके बिज़नेस ने रफ्तार पकड़ ली और उसकी कम्पनी तेजी से तरक्की करने लगी।


फिर उसे कभी भी अपने जीवन में पीछे मुड़ कर नहीं देखना पड़ा। आज उस कम्पनी में करीब ढाई लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। दोस्तों आपको बता दें कि आज उस कम्पनी का टोटल टर्न ओवर 70 बिलियन डॉलर है।


ये सब उस व्यक्ति ने कर के दिखाया जो ना ज्यादा शिक्षित था और ना ही उसके पास कोई ज्यादा पैसा था। लेकिन उसके पास अगर कुछ था तो बस उसका विश्वास, जो एकदम अटल था। जो कोई भी मुसीबत उसको हिला नहीं सकती थी।


दोस्तों उस शख्स की बनाई हुई कम्पनी का नाम है पैनासोनिक(panasonic)। जिसके प्रोडक्ट आज क्वालिटी की पहचान है।


दोस्तों कोनोसुके मात्सुशिता का देहांत 94 वर्ष की उम्र में हो गया लेकिन उसके बनाई गई पैनासोनिक कम्पनी आज पुरे विश्व में फैल चुकी है। इतनी बड़ी कम्पनी को बनाने की नीव थी केवल एक व्यक्ति का विश्वास। वो विश्वास जो बिना सपनों को पुरा किये रुकने वाला नहीं था।


Motivational Story In Hindi For Success In Life से मिलने वाली सिख


दोस्तों ये मोटिवेशनल कहानी एक व्यक्ति के विश्वास की थी। क्या आपके पास भी कोई ऐसी वजह है जिसके लिए आप अपना सबकुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार हो जाये?


दोस्तों मुझे कंमेंट करके जरूर अपनी राय बताइयेगा, क्योंकि मुझे हमेशा आपके प्यार और सपोर्ट की जरूरत रहती है। एक बात और कहना चाहूंगा इस बेस्ट मोटिवेशनल स्टोरी को अपनों के पास जरूर शेयर कीजियेगा।


क्या पता आपका एक शेयर आपके किसी अपने को बता सकता हैं कि विश्वास में कितनी ताकत होती है ? क्या पता आपका कोई अपना अपने साथ इस देश का भी नाम रौशन कर दें।


दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि ये motivational story in hindi for success आपके अंदर छुपे हुए डर को खत्म करेगा। जीवन में कुछ क्रांत्ति करने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसे ही ज्ञानवर्धक स्टोरी के बारे में जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहे।
धन्यवाद।


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