राजनीति के शहंशाह अमित शाह का जीवन परिचय | Amit Shah Biography In Hindi

Amit shah biography in hindi,Story of amit shah in hindi
Amit Shah Biography

Amit Shah Biography & Success Story In Hindi: आज अगर कहा जाए कि भारतीय राजनीति का चाणक्य कौन है तो शायद हर किसी के जुबान पर बस एक ही नाम होगा अमित शाह। जी हाँ दोस्तों इस पोस्ट में Amit Shah Biography in Hindi के बारे में पुरी विस्तार से जानेंगे।

मार्च 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले दिल्ली में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक चल रही थी। इस बैठक के कई मुद्दों में से एक मुद्दा ये था कि पार्टी के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी किस राज्य से चुनाव लड़ेंगे।

इस पर भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने सुझाव देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी को बिहार के पटना से चुनाव लड़ाना चाहिए। तभी बैठक में एक सधी हुई आवाज ने इस पर असहमति जताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी पटना से नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ेंगे।

राजनाथ सिंह ने इस सुझाव को नकारते हुए कहा कि वो भाजपा के अध्यक्ष है और वो उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ते आये हैं इसलिए नरेंद्र मोदी को किसी और जगह से चुनाव लड़ना चाहिए।

लेकिन उस शख्स ने राजनाथ सिंह के इस सुझाव की ओर ध्यान भी नहीं दिया और बैठक को अगले मुद्दे की वो बढ़ा दिया गया। बैठक खत्म होने के बाद उस शख्स ने राजनाथ सिंह को फिर से उस सुझाव पर गौर करने के लिए कहा।

वो शख्स इस फैसले पर किसी भी तरह का समझौता करने के लिए तैयार नहीं था और ये उसका कोई दम्भ भी नहीं था। वो पहले इस बात का निष्कर्ष निकाल चुका था कि अगर उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म के जाल को काटना है तो  प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़वाना होगा।

लेकिन उस शख्स के बार बार कहने राजनाथ सिंह को इस बात के लिए राजी होना ही पड़ा और इस तरह नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चुनाव लड़ा।

उसके बाद क्या हुआ, चुनाव के नतीजे क्या हुए इस बात को पुरा देश जानता है। लेकिन ऐसा साहसिक फैसला लेने वाला शख्स था कौन? वो शख्स थे,भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह

ये भी पढ़ें:- उत्तर प्रदेश के दबंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कहानी।

वो अमित शाह जिन्होंने नरेंद्र मोदी को पीएम मोदी बनाया,वो अमित शाह जिनके कार्यकाल में भाजपा ने जीत के सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले,वो अमित शाह जिन्होंने भाजपा के सदस्यों की संख्या दो करोड़ से ग्यारह करोड़ से भी ज्यादा पहुंचा दिया।

लेकिन दोस्तों यहाँ एक बात कहना चाहूंगा कि अमित शाह आखिर अमित शाह बने कैसे? तो चलिए दोस्तों अमित शाह के जीवन परिचय को पुरी विस्तार से जानते हैं।


● अमित शाह का जन्म और प्रारंभिक जीवन

● अमित शाह का परिवार

● अमित शाह की कुल सम्पति

● अमित शाह की शिक्षा

● अमित शाह का राजनीतिक करियर

● अमित शाह से जुड़ी विवाद


अमित शाह का जन्म और प्रारंभिक जीवन Amit Shah Early Life In Hindi

दोस्तों अब आपको अमित शाह की जीवनी के बारे में बताते हैं। अमित शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई में एक गुजराती कारोबारी के घर हुआ था। अपने जिंदगी के शुरुआती 16 साल अमित शाह गुजरात में अपने पैतृक गांव मेहसाणा में ही बिताए।

अमित शाह का परिवार Amit Shah Family

● पिता का नाम: अनिलचन्द्र शाह
● माता का नाम: कुसुमबेन शाह
● पत्नी का नाम: सोनल शाह
● बेटे का नाम: जय शाह

अमित शाह की कुल सम्पति Amit Shah Net Worth

2014 में गांधीनगर से लोकसभा चुनाव के समय दायर हलफनामे के अनुसार अमित शाह और उनकी पत्नी की कुल सम्पति लगभग 39 करोड़ रुपये है।

Amit Shah Education अमित शाह की शिक्षा

अमित शाह अपनी शुरुआती शिक्षा मेहसाणा में ही भी पुरी की। मानसा के इस स्कूल में पढ़ने वाले उनके साथी सहपाठी बताते हैं कि अमित शाह ने अपना पहला चुनाव सातवीं कक्षा में मॉनिटर के लिए लड़ा था, जिसमें उन्हें पचास बच्चों में से अकेले 75 प्रतिशत वोट मिले थे। ये अमित शाह के जीवन का पहला चुनाव था।

उनके साथी सहपाठी बताते हैं कि अमित शाह में गजब की प्रतिभा है। वो एक जादूगर की तरह किसी की भी गुणों को पहचान लेते थे और जिस भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ठान लेते थे उसको पुरा करके ही दम लेते थे।

अमित शाह सोलह साल की उम्र में मेहसाणा से अहमदाबाद आ गए जहाँ उन्होंने आरएसएस जॉइन कर लिया और आरएसएस की ही एक इकाई ABVP यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया। 

महज दो साल के अंदर ही अमित शाह को ABVP की गुजरात इकाई का सन्युक्त सचिव बना दिया गया।

ये भी पढ़ें:- भारत के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सफलता के राज।

1980 का दशक अमित शाह की जिंदगी के लिए काफी मायने रखता है। यही वी दशक था जिसमें अमित शाह ने अपनी राजनीतिक और धार्मिक जमीन तैयार करनी शुरू कर दी।

आरएसएस के साथ-साथ उस वक्त अमित शाह का झुकाव एक संत की तरफ भी था,जिनका नाम था स्वामी वामदेव जी महाराज।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रहने वाले स्वामी वामदेव दक्षिणामी परम्परा के सन्त थे। वामदेव उन पांच महंतों में से एक थे जिन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के लिए सबसे पहले मुहिम छेड़ी थी।

अमित शाह ने वामदेव से ही हिंदुत्व के सारे गुण सीखे हैं। वामदेव के ही कहने पर अमित शाह ने पहली बार साल 1986 में हरिद्वार में हुए कुम्भ में हिस्सा लिया था।

उस कुंभ के दौरान वामदेव अमित शाह को किसी न किसी महंत के पास भेजते थे। अमित शाह उस महंत के पास जाते और उनके साथ कुछ समय बिताते। उसके बाद वो उसी डेरे के संतों के साथ लंगर खाते और फिर दक्षिणा लेकर वापस आ जाते।

इस दक्षिणा से अमित शाह कुम्भ में एक साईकल किराये पर लेते थे और उसी साईकल पर बैठकर कुम्भ का चक्कर लगाते थे। कुम्भ में हुए अनुभवों ने अमित शाह का पुरा जीवन ही बदल दिया और उन्हें पहली बार हिन्दू धर्म की महानता का पता चला।

अमित शाह का राजनीतिक करियर और नरेंद्र मोदी से मुलाकात Amit Shah Political Career

Amit shah political career in hindi,amit shah life story in hindi
Amit Shah Career

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की पहली मुलाकात 1980 में अहमदाबाद में संघ की शाखा के दौरान हुई थी। लेकिन नरेंद्र मोदी और अमित शाह की दोस्ताना पनपना 1987 में शुरू हुआ, जब दोनों ने आरएसएस से बीजेपी में कदम रखा था।

ये वी वक्त था साल 1986 में जब लालकृष्ण आडवाणी को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था और इसके बाद आरएसएस ने अपने सदस्यों की भाजपा में जॉइन करवाना शुरू कर दिया था।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों में एक समानता थी। वे दोनों हमेशा लीक से हटकर सोचते थे। यहीं बात उनको सबसे अलग करती थी।

अमित शाह को पहला मौका 1991 में मिला जब उनको गुजरात के गांधीनगर से चुनाव लड़ रहे लालकृष्ण आडवाणी की कैंपेन का जिम्मा सौंपा गया।

उस वक्त तक नरेंद्र मोदी और अमित शाह में बहुत गहरी दोस्ती हो चुकी थी और अब तो लालकृष्ण आडवाणी का हाथ भी उनके सर पर था।

साल 1995 में जब भाजपा ने पहली बार गुजरात में सरकार बनाई तो उसमें भी नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अहम भूमिका निभाई।

ये भी पढ़ें:- बॉलीवुड की क्वीन कंगना रनौत की जीवनी।

उस वक्त कांग्रेस का ग्रामीण क्षेत्रों में काफी मजबूत पकड़ थी। उनके उसी पकड़ को तोड़ने के लिए नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने एक नई योजना बनाई। उन्होंने हर गांव में मुखिया के बाद दूसरे नम्बर का प्रभाव रखने वाले आदमियों को जोड़ना शुरू कर दिया।

ऐसे में इन दोनों ने उस समय लगभग आठ हजार ऐसे लोगों नेटवर्क तैयार किया जो मुखिया का चुनाव हार चुके थे। उनके इस रणनीति से भाजपा ने गुजरात में पहली बार सरकार बना सकी।

इसके बाद साल 1995 में ही शंकर सिंह बघेला के साथ मोदी के साथ हुए मतभेदों के चलते नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय सचिव बनाकर गुजरात से बाहर दिल्ली भेज दिया गया और अमित शाह गुजरात में ही रहकर भाजपा के संगठन को और मजबूत करते रहे।

अमित शाह ने 1997 में सक्रिय रूप से राजनीति में पहला कदम रखा जब उन्होंने गुजरात की सरखेज सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। कहा जाता है कि अमित शाह को टिकट दिलवाने में नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा हाथ था।

लेकिन अमित शाह भी मोदी के पीछे कंधे से कंधा लगाकर हर जंग में उनके साथ खड़े रहे। साल 1998 में जब केशुभाई पटेल दूसरी बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने और उन्होंने मोदी से मतभेद करना शुरू कर दी तब भी अमित शाह अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने इस जंग में चट्टान बनकर उनके साथ खड़े रहे।

वो अकेले ही मोदी के लिए गुजरात में सकारात्मक प्रभाव तैयार करते रहे। जिसके चलते 2001 में नरेंद्र मोदी पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद साल 2002 में अमित शाह की मेहनत रंग लाई जब उन्होंने गुजरात सरकार में गृह मंत्री और ट्रांसपोर्ट और कानून मंत्री बनाया गया।

इसके बाद अमित शाह ने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा और वे धीरे-धीरे राजनीति के सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए चले गए। 2006 में गुजरात मे अमित शाह गुजरात जैश एसोसिएशन के अध्यक्ष बनें। फिर साल 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष के पद पर भी अपनी सेवाएं दी।

अमित शाह ने आते ही यहाँ पर भी नए नियम और कानून बनाये। पहले चौबीस रणजी मैच खेलने वाले खिलाड़ी को ही बीसीसीआई की तरफ से पेंशन मिलती थी। लेकिन अमित शाह ने एक नया कानून बनाया जिसके तहत अगर कोई खिलाड़ी गुजरात के लिए एक भी रणजी मैच खेलता है तो उसे आजीवन पेंशन दी जाएगी।

Amit Shah Controversy अमित शाह से जुड़ी विवाद |Amit Shah Criminal History In Hindi

इन सबके बीच अमित शाह को काफी विवादों का भी सामना करना पड़ा। चलिये कुछ विवादों के बारे में बताते हैं।

● सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस : 2010 में अमित शाह के राजनीतिक करियर में मुश्किलें आनी शुरू हुई,जब सीबीआई ने उन्हें 2005 में सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में गिरफ्तार कर लिया। उस वक्त अमित शाह को तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा था।

गुजरात में प्रवेश पर रोक: इस केस जमानत भी मिली तो एक शर्त पर कि वो दो साल तक गुजरात नहीं जा सकते।

लेकिन अमित शाह तो अमित शाह ठहरे। इन दो सालों में अमित शाह ने दिल्ली में रहकर पार्टी के बड़े नेताओं के साथ अपने सम्पर्क बनाने शुरू कर दिए और फिर 2013 का साल आया।

2014 में लोकसभा चुनाव होने थे और पिछली बार दो लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद इस बार भाजपा कोई भी मौका हाथ से गंवाना नहीं चाहती थी।

ये भी पढ़ें:- शेयर मार्केट के बादशाह वारेन बफेट की जीवनी।

अमित शाह ये बात अच्छे से जानते थे कि पार्टी के पास नरेंद्र मोदी के मजबूत छवि जैसा और कोई नेता नहीं है। जानकारी के मुताबिक 2013 में जब नरेंद्र मोदी को बीजेपी का इलेक्शन कैंपेन का चेयरमैन चुना गया तो अमित शाह ने कहा था कि हम बस इसी बात का इंतजार कर रहे थे।

अमित शाह ने 2014 में पार्टी महासचिव के तौर पर कार्य किया और उन्होंने उत्तर प्रदेश में वो कर दिखाया जो सपने में भी किसी ने नहीं सोचा था।

उस चुनाव में उत्तर प्रदेश के अस्सी लोकसभा सीटों में से 73 सीट भाजपा के झोली में डाल दी। जिसके चलते 2014   में हुए लोकसभा चुनाव भाजपा 282 सिटें जितने में कामयाब रही और नरेंद्र मोदी ने देश के 15वें प्रधानमंत्री पद के रूप में शपथ ली।

दरअसल में अमित शाह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में टेक्नोलॉजी का  भरपुर उपयोग किया। उन्होंने सोशल मीडिया से वोटरों को रिझाने के लिए लखनऊ कार्यालय की काया ही पलट दी।

अमित शाह ने एक आईटी सेल का गठन किया और बीजेपी के इस वॉर रूम में एक कॉल सेंटर भी बनाया गया। जिससे पार्टी के कार्यकर्ता मिस्ड कॉल देकर पार्टी के कार्यक्रमों की जानकारी लेते थे और इस सेंटर के जरिये भाजपा ने बीस हजार नए कार्यकर्ताओं को भी जोड़ लिया।

इस वॉर रूम को चलाने के लिए आरएसएस से आने वाले सुनील बंसल ने बताया कि अमित शाह ने साफ तौर पर कह दिया था कि पार्टी कार्यकर्ताओं को अपनी बात सुनाने के लिए घण्टों नेताओ का इंतजार नहीं करना पड़े।

इसके लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को फोन दिए गए जिससे कि कार्यकर्ता पुरा रिपोर्ट शाम को सुनील बंसल को देते थे और सुनील बंसल वो रिपोर्ट अमित शाह को देते थे।

इसके जरिये ही कार्यकर्ताओं को चौकस रहने में मदद मिली। जिससे भाजपा ने उत्तर प्रदेश के आम लोगों तक पहुँच बना ली।

2014 से ही अमित शाह ने पिछले पर्दे से निकलकर सामने पर्दे पर अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया और महज 49 साल की उम्र में अमित शाह बीजेपी के सबसे कम उम्र के युवा अध्यक्ष बनें।

अमित शाह के बीजेपी अध्यक्ष बनने के साथ ही आरएसएस  कैडर के सदस्यों की एंट्री होनी शुरू हो गयी। अमित शाह ने इस बात को सुनिश्चित किया है कि भाजपा और आरएसएस में तालमेल बना रहे।

अमित शाह ने इस बात को सुनिश्चित करने की कोशिश की पार्टी में ज्यादा उम्र के नेताओं को धीरे धीरे रिटायरमेंट देना शुरू की जाए और नए युवा नेताओं की ड्रीम टीम तैयार की जाये।

अमित शाह कड़े फैसले लेने से कभी पीछे नहीं हटते हैं। जिसकी पहली मिशाल देखने को मिली साल 2014 में हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा हुए चुनावों में। जहाँ अमित शाह ने भाजपा को दोनों राज्यों में पहली बार पार्टी की सरकार बनवाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

इसके बाद अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी का करिश्मा लगातार जारी रहा। उधर साल 2016 में अमित शाह को सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट भी मिल गयी।

साल 2017 में अमित शाह को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की कमान सौंपी गई और रिजल्ट ऐसा मिला जिसके बारे में कोई सोचा भी नहीं था। भाजपा ने उस चुनाव में 403 में से 312 सिटें जितने में कामयाब रही और यूपी में सरकार बनाई।

अमित शाह के राजनीति से भाजपा देश की एक एक किला जीतती चली गयी और अमित शाह के कार्यकाल में भाजपा और उनके सहयोगी दलों ने 21 राज्यों में सरकार बनाने में सफल रही। ये करिश्मा भाजपा ने इससे पहले कभी नहीं देखा था।

2019 लोकसभा चुनाव में अमित शाह की भूमिका

इस जब 2019 के लोकसभा चुनावों में अमित शाह ने भाजपा के लिए लोकसभा के 300 सीटों का नारा दिया तो ज्यादातर लोगों ने इसे चुनावी जुमला ही समझा।

लेकिन अमित शाह ने इस चुनाव में ऐसी रणनीति तैयार किया कि पुरे देश में कांग्रेस और यूपी में महागठबंधन की हवा निकाल दी और 2019 के लोकसभा चुनावों का नतीजा आया तो भाजपा ने 303 सिटें जीतकर इतिहास रच दिया। इस तरह अमित शाह का 300 के पार का नारा भी सफल हो गया।

अमित शाह चुनावी मैदान में भी इस कदर खेलते हैं कि उनके विरोधी भी उनकी सराहना किये बिना नहीं रह पाते। यहीं कारण था कि जब 2019 के चुनाव के नतीजे आये तो जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री रही महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर नरेंद्र मोदी को जीत के लिए बधाई दी और साथ मे ये भी कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस को भी एक अमित शाह की जरूरत है।

अपने दमदार फैसलों से भाजपा को सफलता की बुलंदियों पर पहुचाने के बाद 30 मई 2019 को पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर अमित शाह गृहमंत्री का पदभार संभालने का जिम्मा लिया। जिसको उन्होंने बखूबी निभाया।

नरेंद्र मोदी के लिए हर जीत का रास्ता खोलने वाले अमित शाह उनके साथ अपने हर रिश्ते काफी सरल और व्यवहारिक रखते हैं। यहीं कारण है कि जब अमित शाह ने नरेंद्र मोदी के साथ रिश्ते को लेकर पूछा गया तो उनका जवाब ये था कि अगर मैं नरेंद्र मोदी का हर काम करने में सक्षम हूँ तो मैं उनका बेस्ट मैन हूँ। अगर कोई मुझसे भी अच्छी तरह काम करने में सक्षम है तो वो उनका बेस्ट मैन है। इसमें कुछ भी पर्सनल नहीं है।

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लिए गए साहसिक फैसलें

● जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म करना: वर्षों से चली आ रही जम्मू कश्मीर में धारा 370 को पूर्ण रूप से खत्म करना। साथ में जम्मू कश्मीर से लेह लद्दाख को अलग कर केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना। अगर ये देश की सबसे जटिल फैसला इतनी आसानी से सफल हुआ तो इसका पुरा श्रेय अमित शाह को ही जाता है।

CAA और एनआरसी का लागू करना: अवैध रूप से वर्षों से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए भारी विरोध के बावजूद इसको लागू करना और देशहित में न्याय करना। इन सबमें अमित शाह का सबसे बड़ा रोल रहा।

योगी आदित्यनाथ को यूपी का मुख्यमंत्री घोषित करना: अमित शाह के साहसिक फैसलों में से एक फैसला ऐसा रहा जिसके बारे में किसी ने सोचा नहीं था। वो ये था योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री घोषित करना। सबके विरोध के बावजूद अमित शाह ने ये फैसला लिया और उसका नतीजा ये है कि आज योगी आदित्यनाथ अपने काम को लेकर पुरे देश में मॉडल बने हुए हैं।

दोस्तों अमित शाह की जीवनी से हमें ये सिख  मिलती है कि अगर अच्छे फैसले लेने के लिए कुछ कड़े फैसले भी लेना पड़े तो इससे पीछे नहीं हटना चाहिए, क्योंकि यहीं कड़ा फैसला एक दिन सफलता दिलाती है।

साथियों उम्मीद करता हूँ कि आपको Amit Shah Biography In Hindi काफी पसंद आया होगा। अगर आपको अमित शाह की बायोग्राफी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

ये भी पढ़ें:- भारत के दानवीर रतन टाटा की जीवनी।