आज के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जीवन परिचय Yogi Adityanath Biography in Hindi

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Yogi Adityanath Biography

गेरुआ लिबाज, माथे पर लाल तिलक, चेहरे पर लालिमा के ओज, भाषा शैली ऐसी की सारे विरोधी पस्त और प्रखर राष्ट्रवाद का नायक। जी हाँ कुछ ऐसी ही पहचान रखते हैं हिन्दू हृदय सम्राट महंत योगी आदित्यनाथ की।

एक महंत से राजनीति में कदम रखने वाले योगी आदित्यनाथ देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री है। विवादित बयान, आक्रामक तेवर और हिन्दू वाली छवि के बदौलत भारतीय राजनीति का रंग रूप बदलने वाले योगी अपने मेहनत और संघर्ष के सहारे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे।

तो चलिये दोस्तों ऐसे व्यक्तित्व रखने वाले योगी आदित्यनाथ की जीवनी के बारे में पुरी विस्तार से जानते हैं-


योगी आदित्यनाथ की जीवनी

योगी आदित्यनाथ की शिक्षा

योगी आदित्यनाथ द्वारा लिखी गयी किताबें

योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक करियर

योगी आदित्यनाथ के विवाद

योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री कब बनें?


यूपी के सबसे दबंग CM योगी आदित्यनाथ की जीवनी | Early Life Story Of Yogi Adityanath In Hindi

योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि भले ही उत्तर प्रदेश हो लेकिन उनकी जन्मभूमि उत्तराखंड है। योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक छोटे से गांव बचूर एक राजपूत परिवार में हुआ था।

जन्म के बाद धार्मिक रीति रिवाजों का पालन करते हुए योगी आदित्यनाथ के पिता आंनद सिंह बिष्ट और माता सावित्री देवी ने योगी आदित्यनाथ का पुरा नाम अजय सिंह बिष्ट रखा।

योगी आदित्यनाथ बचपन से ही बहुत तेज तर्रार स्वभाव के थे। हालांकि समाज और धर्म के प्रति सेवा की भावना अजय सिंह बिष्ट के बचपन से ही मन मे थी।

योगी आदित्यनाथ के परिवार में सात भाई-बहनों में अजय सिंह अपने माता-पिता की पांचवी सन्तान है। योगी जी से बड़े उनकी तीन बहने,एक बड़ा भाई और दो छोटे भाई है।

योगी आदित्यनाथ की शिक्षा Yogi Adityanath Education और सन्यासी बनने की कहानी

अजय सिंह बचपन से ही पढ़ने में बहुत तेज थे। योगी आदित्यनाथ की शिक्षा की शुरूआत 1977 में टिहरी में एक प्राइमरी स्कूल में हुई। जहाँ पर उन्होंने 1987 में हाई स्कूल की परीक्षा पास की और दो साल बाद सन 1989 में ऋषिकेश में श्री भारत मंदिर कॉलेज से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की।

इसके बाद में 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई ह्यूमति नन्दन बहुगुणा यूनिवर्सिटी से किया और B.Sc. की परीक्षा पास किया। पढ़ाई के दौरान गुरु गोरखनाथ पर शोध करने का अवसर प्राप्त हुआ।

जिसके चलते अजय सिंह को शोध के लिए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर आना पड़ा। शोध के दौरान अजय की मुलाकात गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैधनाथ से हुई।

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महंत अवैधनाथ के सम्पर्क में आने से योगी आदित्यनाथ का पुरा जीवन ही बदल गया। इस मुलाकात से योगी जी के विचार में बहुत परिवर्तन हुआ और महज इक्कीस साल की उम्र में घर और समाज को छोड़कर एक शिष्य के रूप में गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवैधनाथ का शरण में आ गए।

योगी आदित्यनाथ ने महंत अवैधनाथ से शिक्षा ली और सन 1994 में सन्यासी बन गए। जिसके चलते इनका नाम अजय सिंह बिष्ट से बदलकर योगी आदित्यनाथ रख दिया गया।

सन्यासी बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने कई सामाजिक और धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम किये। जिसके चलते वो गोरखधाम के सन्यासियों में लोकप्रिय हो गए।

योगी आदित्यनाथ द्वारा लिखी गयी किताबें | Yogi Adityanath Books

कम उम्र में ही योगी आदित्यनाथ ने यौगिक सत्कर्म, हठयोग, स्वरूप एवं साधना तथा हिन्दू राष्ट्र नेपाल नाम की पुस्तकें भी लिखी है।

गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित होने वाली वार्षिक पुस्तक योगवाणी के योगी आदित्यनाथ प्रधान संपादक है तथा हिन्दवी साप्ताहिक समाचार पत्र के प्रधान संपादक रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक करियर Yogi Adityanath Political Journey

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योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक जीवन

दोस्तों अब आपको बताते हैं कि कैसे योगी आदित्यनाथ ने सियासी गलियारों में दस्तक कैसे दी?

सन 1996 में योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन का शुरुआत हुआ। उनके भीतर के आक्रामक छवि को पहचानते हुए गोरखनाथ के महंत अवैधनाथ ने 1996 में चुनाव अभियान का प्रभारी नियुक्त किया क्योंकि महंत अवैधनाथ खुद गोरखपुर के सांसद थे।

योगी आदित्यनाथ को चुनाव अभियान का प्रभारी बनाने के कुछ समय बाद महंत अवैधनाथ ने राजनीतिक जीवन से सन्यास ले लिया और अपना उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ को नियुक्त कर दिया।

सन 1998 में हुए 12वीं लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ पहली बार गोरखपुर लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल भी किया।

उस 12वीं लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ सबसे कम उम्र में चुनाव जीत कर संसद भवन पहुँचे। उस समय योगी आदित्यनाथ की उम्र मात्र 26 साल थी।

साल 1999 में फिर लोकसभा चुनाव हुआ वो फिर दोबारा गोरखपुर से चुनाव लड़े और दोबारा सांसद चुने गए।

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तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने योगी आदित्यनाथ के कंधों पर संसद में सक्रिय उपस्थिति एवं संसदीय कार्य में रुचि रखने के चलते योगी आदित्यनाथ को कमेटी ऑफ बोर्ड, सिविल सप्लाई,डिपार्टमेंट ऑफ सुगर,मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर जैसे महत्वपूर्ण पदों का जिम्मा सौंपा दिया।

योगी आदित्यनाथ 1998 से लगातार गोरखपुर का प्रतिनिधित्व करते रहे तथा 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ लगातार पांचवीं बार सांसद बने।

पौड़ी गढ़वाल से गोरखपुर और अब लखनऊ पहुंचे योगी सियासी दुनिया के शहंशाह बनते जा रहे हैं। कभी गोरखपुर की सीमाओं तक सीमित रहने वाले योगी आदित्यनाथ आज भाजपा जैसी बड़ी पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में पुरे देश में अपना जलवा बिखेर रहे हैं।

राजनीति की सीढ़ियां चढ़ने के बाद योगी आदित्यनाथ ने धर्म के प्रचार प्रसार, हिन्दू धर्म के दायरा को बढ़ाने और हिन्दू धर्म विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए उन्होंने एक संगठन की जरूरत महसूस की।

योगी आदित्यनाथ को एक ऐसा संगठन की जरूरत थी जिसमें बीस बाइस साल का युवा पुरे जोश से लबरेज हो। जिसकी विचार धारा दक्षिण पंथी हो साथ ही वो धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर कुछ भी करने को तैयार हो जाये।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने 2002 में कुछ कट्टर हिन्दूवादी विचारधारा के लोगों को एक साथ जोड़कर हिन्दू युवा वाहिनी संगठन की स्थापना की।

धीरे-धीरे इस संगठन ने पांव पसारते हुए उत्तर प्रदेश के कई और इलाकों में फैल गयी। योगी की इस विशेष सेना ने सूबे की हर जिले में अपनी इकाई स्थापित की और अपना हिंदूवादी संगठन के रूप में अपना रुतबा कायम किया।

योगी आदित्यनाथ के इस सेना पर 2005 में जबरन धर्मांतरण कराने जैसे आरोप लगे थे। इन आरोपों का विरोध कई बार योगी ने संसद में भी किया है।

बीते कई सालों से योगी आदित्यनाथ के भगवा दामन पर आरोपों के कई दाग लगे हैं मगर इसके बावजूद योगी आदित्यनाथ के हिंदूवादी सोच और आक्रामक तेवर में कहीं कोई कमी नहीं आयी।

योगी आदित्यनाथ के विवाद

योगी आदित्यनाथ के बढ़ते ग्राफ के बीच उनके कई सियासी दुश्मन भी पैदा हो गए। 7 सिंतबर 2008 को योगी आदित्यनाथ पर आजमगढ़ में जानलेवा हिंसक हमला हुआ। इस हमले में वे बाल-बाल बचे थे।

यह हमला इतना बड़ा था कि सौ से ज्यादा गाड़ियों के काफिले को हमलावरों ने घेर लिया और लोगों को लहूलुहान कर दिया। 

यहीं नहीं योगी आदित्यनाथ को 2007 में गोरखपुर दंगों के दौरान उस समय गिरफ्तार किया गया जब मुहर्रम के दौरान फायरिंग में एक हिन्दू व्यापारी की जान चली गयी थी।

इस मसले को हिन्दू युवा वाहिनी की सेना ने जोर शोर से उठाया। पूछे जाने पर उस समय वहाँ के जिलाधिकारी ने बताया कि वह बुरी तरह से जख्मी है तब अधिकारियों ने योगी आदित्यनाथ को उस जगह पर जाने से मना कर दिया। 

इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन के मना करने के बावजूद श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। तब तत्कालीन सरकार ने इस हिंसा के लिए हिन्दू युवा वाहिनी को जिम्मेदार ठहराया और हिन्दू युवा वाहिनी कार्यकर्ताओं समेत योगी आदित्यनाथ पर हिंसा की साजिश रचने का आरोप लगाया और ग्यारह दिनों के लिए जेल भेज दिया गया।

उनके गिरफ्तारी से लोगों में गुस्सा इस कदर भर गया कि मुंबई-गोरखपुर गोदान एक्सप्रेस के कुछ डिब्बों को आग के हवाले कर दिए गए। जिसका आरोप उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी पर लगा।

देखते-ही-देखते पुरा गोरखपुर इस हिंसा के चपेट आ गया। साथ ही ये दंगे पूर्वी उत्तर प्रदेश के छः जिलों और तीन मंडलों में भी फैल गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद लोगों के दबाव के कारण सरकार को मजबूरन वहाँ के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तबादला करना पड़ा।

योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू समाज को संगठित कर राष्ट्रवादी शक्ति के माध्यम से हजारों धर्मांतरित हिंदुओ की घर वापसी भी करवाई। गोरक्षा के लिए आम लोगों को जागरूक कर के गोवंशों का संरक्षण एवं संवर्धन करवाया।

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उन्होंने हिन्दू पुनर्जागरण अभियान से प्रभावित होकर गांवों और शहरों में बैठे युवाओं ने उनके इस अभियान में खुद को पुरी तरह समर्पित कर दिया। वे इस दौरान धर्म के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से देश की सेवा में लगे रहे हैं।

सियासी सफर के दौरान योगी आदित्यनाथ के कुछ ऐसे बयान भी सामने आए जो खूब चर्चे में रहे और इनके विरोधी इन बयानों को लेकर लगातार निशाना साधते रहे।

योगी आदित्यनाथ का सबसे चर्चित बयान दादरी में हुए हिंसा के बाद सामने आया। उन्होंने कहा कि यूपी सरकार के मंत्री आजमखान के दिये जाने वाले बयान के बदले बर्खास्त किये जाने की मांग की।

अगस्त 2014 में योगी आदित्यनाथ लव जिहाद को लेकर उनका एक वीडियो भी सामने आया था जिसे लेकर काफी हल्ला मचा था और ये वीडियो काफी चर्चा में रहा था।

इस वीडियो में योगी आदित्यनाथ ने अपने समर्थकों से कहा था कि अगर मुस्लिम समुदाय कोई हिन्दू लड़की का धर्म परिवर्तन करवाते हैं तो हम सौ मुस्लिम लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे।

बाद में इसके बारे में पूछे जाने पर योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि मैं इस मुद्दे पर कोई सफाई नहीं देना चाहता।

दोस्तों योगी के चर्चित बयानों का सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं था। फरवरी 2015 में योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अगर उन्हें अनुमति मिले तो देश के मस्जिदों के अंदर गौरी गणेश के मूर्ति स्थापित करवा देंगे। वे कहते थे कि पुरी दुनिया में भगवा झंडा फहरा देंगे।

उन्होंने कहा था कि जब मक्का में कोई गैर मुस्लिम नहीं जा सकता, बेटिकन सिटी में कोई गैर ईसाई नहीं जा सकता है लेकिन यहाँ सब लोग आ सकते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने योग करने के बारे में एक बार कहा था कि जिन लोगों को योग करने में अपने धर्म की हानि पहुंच रही है उनको भारत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि जिनको सूर्य नमस्कार करने में दिक्कत हो रही है उन्हें समुंदर में डूबकर जान दे देना चाहिए।

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यहीं नहीं योगी आदित्यनाथ ने अगस्त 2015 में एक बार कहा था कि मुस्लिमों को भी जनसंख्या नियंत्रण में भाग लेना होगा क्योंकि उनके उच्च प्रजनन दर से जनसंख्या असंतुलन हो सकता है। 

साल 2009 में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लगातार पांचवी बार सांसद चुने गए। इस दौर में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रहा था।

योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री कब बनें?

12 सिंतबर 2014 में योगी के गुरु महंत अवैधनाथ का निधन हो गया। निधन के बाद योगी आदित्यनाथ को उनका उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया और गोरखपुर में गुरु गोरखनाथ मंदिर के उन्हें महंत की उपाधि से नवाजा गया।

दो दिन बाद उन्हें नाथ सम्प्रदाय के पारंपरिक अनुष्ठान के मुताबिक उन्हें मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया। महंत बनते ही योगी आदित्यनाथ का कद और बड़ा हो गए।

उत्तर प्रदेश के अलावा पुरे देश में योगी आदित्यनाथ के चर्चे होने लगें। साल 2014 में लोकसभा चुनाव में भी योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर सीट पर कब्जा किया।

ये योगी के लोकप्रियता का ही नतीजा था जो साल 2014 में आम चुनावों में बीजेपी पूर्वांचल में कमल खिला पाई और 2017 के विधानसभा चुनाव में सूबे में विरोधियों का सफाया कर दिया।

फिर क्या था,योगी आदित्यनाथ 45वर्ष की उम्र में 19 मार्च 2017 का वो दिन जब इस महंत के सर पर देश के सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री पहनाया गया । महंत से देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में पद और गोपनीयता की शपथ ली और बाइस करोड़ लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने का अपना कारवाँ शुरू किया।

आज योगी आदित्यनाथ अपने कामों और वादों के सहारे सूबे के सत्ता पर काबिज होकर विकास के लिए नए मुकाम हासिल कर रहे हैं। जिससे पुरे देश में योगी आदित्यनाथ के काम की खूब वाहवाही हो रही है।

योगी आदित्यनाथ के ये राजयोग लीला अभी आगे कहाँ तक पहुचेगी ये तो भविष्य में छुपा है मगर उनके समर्थक योगी आदित्यनाथ को सियासत के शिखर यानी प्रधानमंत्री के रूप में भी देखना चाहते हैं। योगी आदित्यनाथ को इस लंबे सफर के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।

तो दोस्तों आपको योगी आदित्यनाथ की जीवनी जानकर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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