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सफलता दिलाने वाली 7 छोटी प्रेरणादायक कहानियां | Top 7 Hindi Story

सफलता दिलाने वाली 7 छोटी प्रेरणादायक कहानियां | Top 7 Hindi Story

Real Life Top 7 Short Inspirational Stories In Hindi With Moral For Students | 7 प्रेरणादायक कहानियां

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7 प्रेरणादायक कहानियां

दोस्तों कहते हैं कि दुनिया के आधे से भी ज्यादा लोग केवल जिंदगी में इसलिए सफल नहीं हो पाते क्योंकि उनके अंदर क्षमता होते हुए भी किसी काम को करने के प्रेरणा के अभाव में कुछ कर नहीं पाते। कहा जाता है कि अगर मंजिल को पाने का रास्ता दिख जाए तो फिर मंजिल को हासिल करना आसान हो ही जाती है।

लेकिन सबके सामने बस एक ही समस्या आती है कि उनको रास्ते दिखाए कौन? तो दोस्तों आज आप सभी को Real Life Top 7 Short Inspirational Stories In Hindi With Moral For Students सुनाने जा रहे हैं जो आपको सही रास्ते पर चलते हुए अपने हर लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

चालाक मंत्री

माँ की प्यारी सीख

स्वच्छता क्यों जरूरी

समय का महत्व

मेहनत का फल

चालाक लोमड़ी और मूर्ख कौवा

निडर बालक

1. चालाक मंत्री | Real Life Short Hindi Moral Story For Success Life

किसी जमाने में एक बादशाह था। वह अपने लिए दस जंगली कुते पाले हुए थे। उसके मंत्रियों में से जब कोई मंत्री गलती करता तो बादशाह उनको कुतों के सामने फेंकवा दिया करता था। कुते उसकी बोटियां नोच-नोचकर मार देते थे।

एक बार बादशाह के एक खास मंत्री ने कोई गलत मशवरा दे दिया। जो बादशाह को पसन्द नहीं आया। उसने आदेश दिया कि मंत्री को कुतों के आगे फेंक दिया जाए।

मंत्री ने बादशाह से प्रार्थना किया कि हुजूर मैंने दस साल आपकी सेवा में दिन रात एक किये हैं और आप एक गलती पर मुझे इतनी बड़ी सजा दे रहे हैं। आपका आदेश सर आंखों पर लेकिन मेरे इतने दिनों की सेवा के बदले मुझे बस दस दिनों की मोहलत दे दीजिए। फिर आप मुझे उन कुतों में फेंक देना।

बादशाह ये सुनकर दस दिन की मोहलत देने के लिए राजी हो गया। मंत्री वहाँ से सीधा उन कुतों के रखवाले के पास गया और जाकर कहा- मुझे दस दिन इन कुतों के साथ गुजारने दें और इनकी रखवाली मैं करूँगा।

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रखवाला मंत्री के बातों को सुनकर चौंका लेकिन फिर भी उसने कुतों की रखवाली के लिए दस दिनों की इजाजत दे दी। उन दस दिनों में मंत्री ने उन कुतों के खाने-पीने,रहने,ओढ़ने-बिछौना, नहलाने तक के सारे काम अपने जिम्मा लेकर उन कुतों की सेवा करने लगा।

दस दिन बाद जब पूरे हुए तब बादशाह ने अपने सिपाहियों से मंत्री को कुतों के सामने फिकवाया। लेकिन वहाँ खड़ा हर शख्स इस मंजर को देखकर हैरान हो गया कि आजतक कितने ही मंत्री इन कुतों के आगे अपनी जान गवां बैठे थे और आज यहीं कुते इस। मंत्री के तलवे चाट रहे हैं।

बादशाह ये सब देखकर हैरान हो गया। उसने मंत्री से पूछा इन कुतों को आज क्या हो गया है? मंत्री ने जवाब दिया- मैं आपको यहीं दिखाना चाहता था कि मैंने इन कुतों की सिर्फ दस दिन सेवा किया और ये मेरे उन दस दिनों में किये गए एहसान को भूल नहीं पा रहे हैं।

यहाँ अपनी जिंदगी की दस साल आपकी सेवा करने के लिए दिन रात एक कर दिए लेकिन आपने मेरी एक गलती पर मेरी सारी जिंदगी की एहसान और सेवा को पल भर भुला दिया।

बादशाह को अपनी गलती का एहसास हो गया। अक्सर देखा गया है कि इंसान अपने चाहने वालों के साथ जानवरों के जैसा सलूक करता है। मगर जानवरों में भी इतनी समझ जरूर होती है कि अगर कोई इंसान उसकी सेवा करताहै तो वो उस इंसान की कभी हानि नहीं पहुचाता है।

जबकि जरूरत इस बात है कि हमको किसी छोटे से बच्चे के एहसान को भी जिंदगी के आखिरी सांस तक नहीं भूलना चाहिए। यहीं जिंदगी की असली मतलब होता है।

2. माँ की प्यारी सिख | Real Life Short Inspirational Story In Hindi With Moral For Kids

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माँ की प्यारी सीख

चेतन अपनी माँ के साथ एक बहुत अच्छे घर में रहता था। वह बहुत अच्छा लड़का था और सदा अपनी माँ का कहना मानता था। चेतन की माँ बहुत अच्छे पकवान बनाती थी। चेतन को पकवान खाना बहुत पसंद था।

एक दिन चेतन की माँ ने बहुत बढ़िया कूकीज बनाकर एक बड़ी जार में रख दी और फिर बाजार चली गयी। बाजार जाने से पहले चेतन की माँ उसको कहकर गयी थी कि अपना गृह कार्य समाप्त करने के बाद वह कुकीज खा सकता है।

चेतन बहुत खुश हुआ। उसने जल्दी से अपना गृह कार्य समाप्त करके अपनी माँ के घर लौटने से पहले ही उसने कुकीज खाने के बारे में सोचा। इसीलिए वह एक स्टूल पर चढ़ गया। फिर उसने जार के अंदर हाथ डालकर डेढ़ सारे कुकीज निकालने की कोशिश की। पर जार का मुह छोटा होने के कारण वह अपना हाथ बाहर नहीं निकाल सका।

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उसी समय उसकी माँ बाजार से लौट आयी। जब उसने चेतन को देखा तो वह हँसने लगी और फिर अपने बेटे चेतन से कहा- चेतन हाथ से डेढ़ सारी कुकीज छोड़कर केवल दो या तीन कुकीज हाथ में पकड़कर हाथ बाहर निकालो।

माँ की बात मानकर जब उसने सिर्फ दो कुकीज हाथ में पकड़ी तब वह आसानी से अपना हाथ बाहर निकाल सका। तब उसकी माँ ने प्यार से कहा- ऐसा करने से तुमने क्या सीखा?
चेतन ने कहा- माँ मैंने आज सीखा कि किसी भी चीज का ज्यादा लालच करना अच्छी बात नहीं है। हमें हर चीज को उतना ही मात्रा में लेनी चाहिए जितनी की हमें जरूरत हो। आज से मैं कभी भी लालच नहीं करूंगा।

3. स्वच्छता क्यों जरूरी है ? Real Life Short Inspirational Story In Hindi With Moral For Class 8

अशोक सातवीं कक्षा का मॉनिटर था। स्कूल के नियमानुसार सभी छात्रों की प्रार्थना के समय उपस्थिति अनिवार्य थी। अनुपस्थित छात्र को कठोर सजा होती थी। एक दिन की बात है जब अशोक ने देखा कि मुरली प्रार्थना के समय उपस्थित नहीं था।

अशोक ने क्लास में जाकर मुरली से कहा- मुरली तुम प्रार्थना में उपस्थित क्यों नहीं थे? तुम तो जानते हो न कि हमारे अध्यापक प्रार्थना में उपस्थिति को लेकर कितने सख्त है?

इससे पहले मुरली कुछ बोल पाता अध्यापक कक्षा में आ गए। अध्यापक ने कक्षा में आते ही अशोक से पूछा कि सारे बच्चे प्रार्थना में उपस्थित थे कि नहीं।
अशोक ने जवाब दिया- हाँ सर! सारे बच्चे उपस्थित थे केवल मुरली को छोड़कर।

अध्यापक ने मुरली से पूछा- ये क्या मुरली तुम प्रार्थना में क्यों नहीं आये? सारे बच्चे मुरली को सजा देने की मांग करने लगे। मुरली का स्वभाव और आचरण बहुत अच्छा था। वह पढ़ने में भी बहुत अच्छा था। उसकी लिखावट सारे बच्चों से अच्छी थी। वह अपनी किताबें बहुत अच्छी तरह से रखता था। इसलिए कुछ लड़कों को छोड़कर कक्षा के सारे बच्चे मुरली से बहुत जलते थे।

अध्यापक ने मुरली से पूछा- तुमको पता है कि प्रार्थना में उपस्थित नहीं रहने वालों को कड़ी सजा दी जाती है। क्या मैं जान सकता हूँ कि तुम प्रार्थना में क्यों नहीं आये?

मुरली ने जवाब दिया- सर मैं कक्षा में समय पर आया था। लेकिन मैं देखा कि सभी बच्चे प्रार्थना के लिए निकल चुके थे। मैं भी अपनी किताबें रखकर निकलने ही वाला था। पर मैंने देखा कि पूरे कक्षा में सभी जगह कूड़ा-कचड़ा पड़ा हुआ है। सारी कक्षा गन्दी हो गयी थी।

सर आपने ही तो कहा था कि स्वच्छता ही भगवान है। हमारी कक्षा के स्वच्छता प्रमुख ने अपना काम ठीक तरह से नहीं किया था। इसलिए मैंने पूरी कक्षा साफ कर दी। इसलिए मैं प्रार्थना के लिए समय पर नहीं पहुंच सका।

सर आपने ही तो सिखाया है कि कोई भी काम खराब नहीं होता है। इसलिए मैंने ये काम खुद किया। अगर मैंने कुछ गलत किया है तो कृप्या मुझे क्षमा कर दें। फिर भी अगर मैं दोषी हूँ तो आप मुझे कोई भी सजा दे सकते हैं।

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अध्यापक मुरली के स्वभाव से बहुत खुश हुए। उन्होंने मुरली से कहा- मुरली तुमने तो बहुत अच्छा काम किया है। अगर सारे बच्चे तुम्हारे जैसे विचार के हो जाये तो हमारा स्कूल आदर्श स्कूल बन जायेगा। अध्यापक ने मुरली को सजा देने के बजाय उसकी महानता की बहुत सराहना की।

4. समय का महत्व | Real Life Short Inspirational Story In Hindi With Moral For Class 2

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समय का महत्व कहानी

अजय नाम का एक लड़का था। वह पाठशाला से परीक्षा खत्म होने के बाद उदास होकर घर आया। उसकी माँ ने कहा- अजय बेटा! क्या बात है, आज तुम्हारा परीक्षा अच्छा नहीं गया?
अजय ने कहा- माँ मैं स्कूल देर से पहुंचा। मेरी बस छूट गयी थी।

पिताजी ने कहा- बेटा! समय की परवाह करनी चाहिए। समय का बड़ा महत्व है।
अजय ने कहा- पिताजी समय रहते मैं पूरा प्रश्न पत्र हल नहीं कर पाया। आखिरी प्रश्न छूट गया।
पिताजी ने कहा- तुम्हे मालूम है कि वक्त ओर स्टेशन नहीं पहुँचे तो गाड़ी छूट जाती है।
माँ ने कहा- ये सच है कि समय के अभाव में अच्छे-अच्छे मौके हाथ से निकल जाते हैं।

पिताजी ने कहा- इसीलिए बड़े-बूढ़े कहते हैं कि समय ही धन है। वह अनमोल है।
अजय ने कहा- माँ! आज से मैं वादा करता हूँ कि अब अपना हर काम ठीक समय पर करूँगा।
माँ ने प्यार से अजय का सर सहलाते हुए कहा- बेटा! सभी महापुरुष समय के पाबंद थे। जैसे - महात्मा गांधी, एपीजे अब्दुल कलाम, बिल गेट्स, रतन टाटा, एलन मस्क आदि।

ये सभी समय के बड़े पाबंद थे। वे अपना-अपना काम ठीक समय पर किया करते थे। उनके जीवन में आलस्य का कोई स्थान नहीं था। इसीलिए उन्होंने अपने जीवन में इतनी बड़ी सफलता हासिल की। अगर आपको भी समय का सही इस्तेमाल करना नहीं आता तो ये पोस्ट आपके लिए बहुत जरूरी है। आपको इसे जरूर पढ़नी चाहिए।

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पिताजी ने भी अजय को समझाया- ठीक है जो हुआ वो हुआ आगे से अपने समय का सही तरीके से इस्तेमाल करना। अजय, तुम अब जाओ और हाथ-मुह धोकर नाश्ता कर लो।

5. मेहनत का फल | Real Life Short Inspirational Story In Hindi With Moral For Freinds

एक बार की बात है। जब दो दोस्त संजय और मनोज दोनों बेरोजगार थे। उन्होंने अपने परिचित गुरुजी से अपनी परेशानी बतायी और कहा- गुरुजी! हमें कुछ रुपये दीजिये ताकि हम इन रुपयों से कुछ काम कर सकें।

गुरुजी ने उन दोनों दोस्तों को एक-एक हजार रुपये दिए। साथ ही ये कहा- एक साल के अंदर तुम्हें इन रुपयों को लौटाना होगा। दोनों दोस्तों ने गुरुजी की बात मान ली। फिर वे रुपये लेकर चल पड़े। रास्ते में संजय ने कहा- हमें इन रुपयों से कोई अच्छा काम शुरू करनी चाहिए। पर मनोज ने कहा- नहीं! तुमको जो करना है करो अब मैं कुछ दिन अच्छे स्थानों पर घूमने जाऊँगा और मौज-मस्ती करूँगा।

एक साल बीत जाने के बाद दोनों दोस्त गुरुजी के पास पहुँचे। गुरुजी ने पहले मनोज से पूछा- तुमने उन रुपयों का क्या किया? क्या लौटाने के लिए रकम लाये हो?
मनोज ने मुह लटकाकर जवाब दिया- गुरुजी! किसी ने धोखा देकर वे रुपये ठग लिए। फिर गुरुजी ने संजय से पूछा- तुमभी खाली हाथ आये हो क्या?

संजय ने मुस्कुराकर जवाब दिया- ये लीजिए आपके एक हजार रुपये और एक हजार अतिरिक्त रुपये मेरे तरफ से। फिर गुरुजी ने पूछा- तुम इतने रुपये कहाँ से कमा लाये? क्या तुमने किसी को धोखा तो नहीं दिया?

संजय ने कहा- मैंने तो अपने सूझबूझ से ये रुपये कमायें हैं। एक किसान को परेशान देखकर उसके सारे फल खरीद लिये। फिर उन फलों को शहर में जाकर बेच दिया। इसके बाद वो किसान मुझे प्रतिदिन मुझे फल लेकर देता और मैं उन्हें बेच देता।

कुछ दिनों के बाद मैंने शहर में दुकान ले ली और फलों का कारोबार शुरू कर दिया। इतना कहकर उसने गुरुजी को मदद करने के लिए धन्यवाद दिया और वो अतिरिक्त रुपये किसी जरूरतमंद के सहायता के लिए रखने का आग्रह किया।

गुरुजी संजय से बहुत खुश हुए। उन्होंने मनोज से कहा- अगर तुम भी समझदारी और मेहनत से काम करते तो तुम भी सफल हो सकते थे। संजय ने कहा- अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है। समय का सम्मान करो और समय का महत्व समझो। सफ़लता तुम्हारी कदम जरूर चूमेगी।

6. चालाक लोमड़ी और मूर्ख कौवे की कहानी | Real Life Short Inspirational Story In Hindi For Class 1

बहुत पुरानी बात है। एक कौवा भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। परन्तु उसके हाथ कुछ नहीं लगा। वह थका हुआ एक पेड़ पर जाकर बैठ गया। तभी उसे जेल जगह पर प्लेट में रोटी दिखाई दिया। कौवे ने रोटी को अपने चोंच से उठा लिया और उड़ने लगा।

बहुत से कौवे उसके पीछे-पीछे उड़ने लगे। वो रोटी को उस कौवे से छीनना चाहते थे। लेकिन कौवा किसी तरह सबको चकमा देकर भागने में कामयाब रहा और एक पेड़ पर जाकर बैठ गया।

एक भूखी लोमड़ी उधर से ही गुजर रही थी। लोमड़ी ने कौवे के चोंच में रोटी देखा तो उसके मुंह में भी पानी आ गया। उसने जल्द ही उस कौवे से रोटी लेने की योजना बनाई और उसने कौवे की तरफ देखते हुए बोली- अरे कौवे भाई, तुम कितने खूबसूरत हो? 

मैं अपना परिचय तुम्हें दे दूं। मैं एक भोली भाली लोमड़ी हूँ। मेरी सहेलियों ने मुझे बताया है कि तुम्हारी आवाज में गजब की मिठास है। क्या यह बात सही है?

कौवा यह सुनकर हैरान रह गया। आजतक किसी ने कौवे की आवाज की तारीफ नहीं कि थी। परंतु वह चुप रहा। कौवे से फिर लोमड़ी ने कहा- कौवे भाई क्या तुम अपने मधुर आवाज में मेरे लिए एक गाना नहीं गा सकते हो?

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परंतु कौवा अभी भी मौन ही था। लोमड़ी फिर बोली क्या तुम अपनी प्यारी बहन की इतनी सी भी इच्छा पूरी नहीं कर सकते? तुम कितने सुंदर हो, तुम्हारे पंखों की सुंदरता तो देखते ही बनती है। मेरे लिए एक गाना गाओ ना कौवे भैया।

कौवा उस लोमड़ी के झांसे में आ गया। उसने अपनी चोंच खोली और कांव-कांव करने लगा। फिर क्या था, रोटी उसकी चोंच से निकलकर जमीन पर आ गिरा। लोमड़ी ने झट से उस रोटी को खा गई। लेकिन कौवे को जबतक ये बात समझ में आता तब तक लोमड़ी वहाँ से जा चुकी थी। कौवा उदास हो गया। अब पछताय होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत।

इसीलिए तो कहते हैं कि चापलूसों से बचो। इन पर कभी भी विश्वास नहीं करना चाहिए।

7. निडर बालक | Real Life Short Inspirational Story In Hindi With Moral For Kids

किसी गाँव में एक बालक रहता था। वह बड़ा ही निडर था। वो अकेले ही घूमते-घूमते दूर नदी के किनारे चला जाता था और थोड़ी देर बाद लौट आता था। उसके पिताजी उसे बहुत प्यार करते थे। उनको लगा कि किसी दिन वह नदी में न गिर जाए। इसीलिए उन्होंने एक दिन अपने बेटे से कहा- बेटा! तुम अकेले नदी के किनारे मत जाया करो।
लड़के ने पूछा- क्यों?

पिताजी ने बड़े ही प्यार से उसे समझाया कि बेटा, वहाँ भूत रहते हैं। भूत की बात सुनकर उस लड़के के मन में इतना डर भर गया कि वो अब घर से निकलता भी नहीं था।

वह हमेशा डरा हुआ रहता था। जरा-जरा सी बात पर उसे लगता था कि उसके सामने भूत आकर खड़ा हो गया है। उसके पिताजी यह देखकर बहुत हैरान हो गए। उन्होंने ये कभी नहीं सोचा था कि लड़का भूत की बात से इतना डर जाएगा।

तब उन्होंने एक दिन अपने लड़के के हाथ में एक धागा बांध दिया और कहा- अब तुमको भूत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। यह देखो भगवान तुम्हारे साथ है। वो लड़का खुश हो गया और फिर से बाहर घूमने लगा। लेकिन के दिन संयोग से उसके हाथ का धागा टूटकर कहीं गिर गया।

लड़का घबराया हुआ अपने पापा के पास गया और खाली कलाई दिखाते हुए बोला- पापा भगवान तो चले गए। अब मैं क्या करूँ? तब उसके पापा ने उसको समझा कर कहा- नदी के किनारे कोई भूत-प्रेत नहीं था और ना ही उस धागे में कोई भगवान थे। ये तो हमारे बनाये हुए थे। आदमी को डरना नहीं चाहिए। जिसका दिल मजबूत होता है उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाता।

बालक को अब असली बात समझ में आ गयी और वह आनंद से रहने लगा। तो दोस्तों आप भी किसी के बहकावे में नहीं आइये और निडर होकर अपनी जिंदगी जीये।

दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि आपको ये Real Life Top 7 Short Inspirational Stories In Hindi With Moral for students काफी पसंद आया होगा। आपको ये 7 प्रेरणादायक कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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