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बच्चों के लिए 3 बेहतरीन रोचक कहानियां | Top 3 Short Hindi Moral Stories

बच्चों के लिए 3 बेहतरीन रोचक कहानियां | Top 3 Short Hindi Moral Stories

Top 3 Short Hindi Moral Stories For Kids | बच्चों के लिए 3 अनमोल कहानियां

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Short Hindi Moral Stories

आज आप सभी को भी इस Top 3 Short Hindi Moral Stories For Kids में बहुत ही सुंदर-सुंदर कहानी पढ़ने को मिलेगी। आपको इन तीनों कहानियों में एक से बढ़कर एक ज्ञानवर्धक बात जानेंगे जो आपके निजी जीवन के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। तो चलिए ज्ञान का पिटारा शुरू करते हैं।

दो घड़े की कहानी | Best Short Hindi Inspirational Story With Moral For Class 5

बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में भीम नाम का एक कलाकार आदमी रहता था। वो बहुत गरीब था और उसका घर भी मिट्टी का बना हुआ था। एक बार की बात है जब भीम दो घड़ा में कहीं से पानी भर कर घर ला रहा था।

पहला घड़ा में छोटा-सा छेद था और चू रहा था जबकि दूसरा घड़ा बिल्कुल सही था। एक दिन जब भीम उन्हीं दोनों घड़ा में पानी भरकर ला रहा था तो दूसरे घड़े ने फूटे हुए घड़े से हसंते हुए कहा- तुम फुट चुके हो और मालिक तुमको उपयोग भी नहीं कर रहा है। तुम मालिक का आधा पानी तो ऐसे ही बर्बाद कर दे रहे हो। वहीं मुझे देखो पूरा पानी से भरा हुआ हूँ। इस तरह मालिक का सबसे ज्यादा सहायता तो मैं करता हूँ। मैं तुमसे अच्छा हूँ।

दूसरा घड़ा हमेशा अपने को ऊंचा समझता था और टूटे हुए घड़ा को नीचा दिखाता रहता था। फूटा हुआ घड़ा अपने को हमेशा नीच समझता था। उसको लगता था कि वो अपने मालिक के लिए कुछ नहीं कर पा रहा है और उसको बहुत शर्मिंदगी महसूस होती थी। वो अब दूसरे घड़े से तंग आ चुका था।

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एक दिन जब भीम पानी ला रहा था तो टूटा हुआ घड़ा ने कहा- भीम! कृप्या मुझे दूसरे किसी अच्छे घड़े से बदल दो।
भीम ने कहा- लेकिन क्यों?
फूटे हुए घड़े ने कहा- मालिक! मैं अब पूरा घड़ा भरकर पानी लाने के काबिल नहीं हूँ। मैं अब फुट गया हूँ और चू रहा हूँ। अब मैं उपयोग करने के लायक नहीं रह गया हूँ।

भीम ने तुरंत फूटे हुए घड़े का दर्द समझ लिया और कहा- तुम बुरा महसूस मत करो। तुम इन फूलों को देखो। ये वहीँ फूल है जो तुम्हारे चू रहे पानी के कारण इतने बड़े होकर इतना सुंदर हो गए हैं। जब मैं पानी लेकर आता हूँ तो इस बात का हमेशा ध्यान रखता हूँ कि तुम्हारा पानी इन फूलों पर गिरे और ये हरे-भरे रहे। और क्या तुम जानते हो कि इन फूलों को कहाँ पर चढ़ाया जाता है?

इन फूलों को रोज सुबह-सुबह भगवान पर चढ़ाया जाता है और इन्हीं फूलों से भगवान की प्रार्थना होती है। क्या तुम सोच रहे हो कि इन फूलों के लिए तुम कितने उपयोगी हो? अब तुम सोचो कि तुम ज्यादा काबिल हो कि वो जो तुमको नीच दिखा रहा है। तुमको अगर कोई एक तरफ से गलत साबित कर रहा है तो तुम अपने दूसरे तरफ देखो उसमें तुम्हारी अच्छाई छुपी हुई है। तुम बस अपने अच्छाई को देखकर खुश रहो।

फूटा हुआ घड़ा खुश हो गया और उसने भीम को बहुत-बहुत धन्यवाद दिया। दूसरे घड़े को भीम की बातों से बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई और उसने फूटे हुए घड़े से माफी मांगते हुए कहा- मुझे क्षमा कर दो। मैं अंजाने में बहुत बड़ी गलती कर दी।

भीम ने फिर दोनों घड़ों को समझाते हुए कहा- तुम दोनों मेरे लिए उपयोगी हो। तुम दोनों जब साथ होते हो तो मेरी बहुत मदद करते हो। आज के बाद तुम दोनों एक दूसरे के साथ खुश रहना।

इस प्रेरणादायक हिंदी कहानी से हमें यहीं सीख मिलती है कि हमें कभी भी किसी की कमजोरी और छोटे होने को लेकर मजाक नहीं उड़ानी चाहिए। हमें हमेशा एक दूसरे के साथ हमेशा मिलजुल कर रहना चाहिए।

हाथी की मित्रता | Best Short Hindi Inspirational Story With Moral For Class 2

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हाथी की मित्रता

बहुत पुरानी बात है। जंगल में एक हाथी किसी मित्र की तलाश में घूम रहा था। उसे पेड़ पर एक बंदर दिखाई दिया। उसने बन्दर से कहा- बन्दर भाई! आप मुझसे दोस्ती करोगे।
बन्दर बोला- आप हमसे आकार में कितने बड़े हैं और आप मेरी तरह पेड़ पर झूल भी नहीं सकते हैं। भला आपकी और मेरी दोस्ती कैसे हो सकती है?

अगले दिन उसकी मुलाकात एक खरगोश से हुई। हाथी ने फिर खरगोश से कहा- खरगोश भाई! क्या तुम मेरे से दोस्ती करना पसंद करोगे।
खरगोश ने कहा- आपका शरीर मुझसे कितना बड़ा है और बड़े शरीर लेकर मेरे बिल में भी नहीं घुस सकेंगे। फिर आप ही बताइए मेरी और आपकी दोस्ती कैसे मुमकिन हो सकती है?

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हाथी अब मेढक के पास गया और बोला- मेरा कोई मित्र नहीं है। मेढ़क भाई, अगर तुम मुझे अपना मित्र बना लो तो तुम्हारी बड़ी कृपा होगी।
मेढ़क ने कहा- तुम इतने बड़े और मैं इतना छोटा। भला हम दोनों की दोस्ती कैसे हो सकती है? फिर तुम मेरी तरह फुदक भी तो नहीं सकते। तुम किसी और के पास जाओ।

तभी हाथी को अचानक पास से गुजरती हुई एक लोमड़ी दिखाई दी। उसने लोमड़ी को रोककर पूछा- क्या मैं तुम्हारा मित्र बन सकता हूँ? देखो ना मत कहना मैं बड़ी उम्मीद लेकर तुम्हारे पास आया हूँ। बोलो बनोगी न तुम मेरी मित्र।
लोमड़ी बोली- ना बाबा ना! अपना इतना बड़ा आकार भी तो देखो। गलती से तुम्हारे पांव के नीचे आ गयी तो चटनी बन जाऊंगी।

हाथी उदास हो गया और सोचने लगा! कमाल है कोई मुझे अपना मित्र बनाना ही नहीं चाहता।
अगले दिन हाथी ने देखा कि जंगल के सभी जानवर बहुत तेजी से एक तरफ भाग रहे थे। उसने लोमड़ी से पूछा कि क्या हुआ है जो सब इस तरह भाग रहे हो?
लोमड़ी ने कहा- हाथी दादा,पीछे शेर है वो हम सबको मार कर खा जाना चाहता है। इसलिए हम सभी जानवर जान बचाकर भाग रहे हैं।

शेर जानवरों के पीछे हाथ धोकर पड़ा था। हाथी में शेर को रोककर पूछा- आप जंगल के राजा है। फिर क्यों व्यर्थ में इन सभी जानवरो के जान के पीछे पड़े हो? सारे जानवरों को एक ही दिन में मार कर खा जाओगे क्या?

शेर ने अकड़ते हुए कहा- हाथी! तुम अपनी रास्ता देखो। तुम मेरे बीच में मत पड़ो। मुझे जो दिल में आएगा वो करूँगा।
हाथी को समझ आ गया कि ये ऐसे मानने वाला नहीं है। उसने शेर को जोर से एक लात मारी और शेर के होश ठिकाने आ गए। शेर डरकर वहाँ से भाग गया।

फिर हाथी ने जब सारे जानवरों को ये खुशखबरी सुनाई तो सबको खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सभी ने हाथी को धन्यवाद दिया और कहा- हमारा मित्र बनने के लिए सचमुच तुम्हारा आकार बिल्कुल ठीक है। तभी तो कहते हैं कि मित्र वहीं अच्छा होता है जो मुसीबत में काम आये।

एक चींटी और एक कबूतर की कहानी | Short Hindi Inspirational Story With Moral For Class 1

एक बार की बात है जब एक चींटी पेड़ पर से तलाब में गिर गई। पेड़ पर बैठे एक कबूतर ने देखा कि चींटी किसी तरह अपनी जान बचाने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है। चींटी को डूबता देख उसने एक पत्ते को झट से तोड़ा और चींटी के पास फेंक दिया। चींटी झट से पत्ते पर चढ़ गई और कबूतर की तरफ देखते बड़ी कृतज्ञता व्यक्त की और धन्यवाद दिया।

वह बहुत थक गई थी। कुछ सप्ताह बीत जाने के बाद एक बहेलिया जंगल में आया। बहेलियों का तो काम ही होता है पक्षियों को पकड़ना। उसने कुछ दाने जमीन पर फेंके और अपना जाल जमीन पर बिछा दिया और चुपचाप बैठे किसी पक्षी के जाल में फंसने के इंतजार करने लगा।

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वहीं से वो चींटी गुजर रही थी। जब उसने बहेलिए की सारी तैयारी देखी। तभी उसने देखा कि वहीं कबूतर जिसने उसका जान बचाया था वो जमीन और दाने देखकर जाल में फंसने के लिए नीचे उतर रहा था।

चींटी ने ये सब देखते ही कबूतर का जान बचाने के लिए बहेलिए के पैर पर इतनी जोर से काटा कि बहेलिए के मुह से चीख निकल गयी। बहेलिए जोर से चिलाने लगा। कबूतर ने देखा कि ये चींखने की आवाज कहाँ से आ रही है तभी जब उसकी नजर बहेलिए पर पड़ी तो कबूतर को सब कुछ समझ आ गया।

वह दूसरी दिशा में उड़ गया और उसकी जान बच गयी। चींटी भी कबूतर का जान बचाकर अपने काम पर चल दी। तभी तो कहते हैं कि कर भला तो हो भला।

तो दोस्तों आपको ये Top 3 Short Hindi Stories With Moral For Kids कैसी लगी और आपको ये तीनों कहानियों से क्या सीख मिली हमें कमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही अगर आपको ये कहानी पसन्द आये तो अपने दोस्तों के बीच शेयर करना न भूलें।

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