5 मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी | Short Motivational Story In Hindi

5 मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी | Short Motivational Story In Hindi

5 Best Real Life Short Motivational Stories In Hindi

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5 Motivational Stories In Hindi

कहते हैं कि प्रेरणा के अभाव में आदमी अपने जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। ये बात सही भी है कि जब तक आपको किसी काम को करने के लिए कोई प्रेरणा नहीं मिलता है आप उस काम को नहीं करते हैं।


इसलिए हम आपके लिए ऐसी 5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां लेकर आये हैं जो आपको अंदर किसी भी काम को करने की प्रेरणा जगा देगी। तो चलिए बिना किसी देरी के top 5 real life short motivational stories in hindi शुरू करते हैं।


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1. डर पर जीत:

ये मोटिवेशनल कहानी है दो दोस्तों की, जो एक छोटे से गांव में रहते थे। एक बार वे दोनों किसी काम से शहर गए और वापस अपने गांव लौट रहे थे। उनको अपने गांव तक पहुंचने के लिए एक घने जंगल से गुजरना था। जब वे दोनों उस जंगल से गुजर रहे ठगे तो एक दोस्त को प्यास लगी और वो पानी ढूंढने के लिए रास्ता भटक गए।


थोड़ी ही देर बाद शाम हो गयी और रात होने ही वाली थी। अचानक उन दोनों की नजर एक गुफा पर पड़ी जो कि चारों तरफ से पेड़ों से घिरी हुई थी। उन्होंने सोचा कि रात गुजारने का यहीं जगह ठीक है। फिर दोनों ने कुछ लकड़ी इकट्ठा की और आग जलाकर बैठ गए।


रात का वक्त था और गुफा के अंदर आग जल रही थी। बाहर बिल्कुल अंधेरा था और कुछ जानवरों की आवाजें सुनाई दे रही थी। उन दोनों में से जो एक दोस्त था वो अंदर ही अंदर डरने लगा क्योंकि उसने भूत-प्रेत की कुछ कहानियां सुनी हुई थी।


उसने सुना था कि रात के वक्त जंगल में भयानक आत्मायें भटकती है और अगर उनको रात में कोई आदमी मिल जाये तो वो उसको नहीं छोड़ते हैं।


जब उस लड़के ने अपने दोस्त से उन भूत प्रेतों की बात अपने दोस्त से बताई तो उसके दोस्त ने उससे हँसते हुए पूछा कि क्या तूने कभी किसी भूत को देखा है?
तो उसने कहा कि मैंने तो नहीं देखा मगर मेरे जान-पहचान के कुछ लोग हैं जिन्होंने इनको देखा है।


फिर उसके दोस्त ने उसे बहुत समझाने की कोशिश किया कि इस तरह की बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं। अब तुम सो जाओ और मुझे भी सोने दो अब मुझे बहुत तेज नींद आ रही है।


ये कहकर उसका दोस्त वहीं सो गया। लेकिन उसका एक और दोस्त जो अंदर से बिल्कुल डरा हुआ था वो सोने की बहुत कोशिश किया लेकिन उसको डर से नींद नहीं आ रही थी। उसको लग रहा था कि शायद यहाँ पर कहीं कोई है।


उस आग के वजह से पत्थरों पर परछाइयां बन रही थी तो उसको भी देख कर वो डर रहा था। फिर कुछ घन्टे तक ऐसे ही चलता रहा क्योंकि वो भी थका हुआ था तो उसको भी कुछ देर के बाद नींद आ गयी।


जैसे ही उसको नींद आया उसके कुछ देर बाद ही उसको बुरा सपना दिखाई देने लगा। उसने देखा कि सपने में एक बहुत ही भयानक परछाईं उसके नजदीक बढ़ती हुई आ रही है। लड़का अंदर ही अंदर बहुत डरते जा रहा था।


वो देख रहा था कि परछाई उसके और पास चली आ रही थी और उस परछाई में एक हाथ उसको नजर आ रहा था जिसके बड़े-बड़े नाखून थे। धीरे-धीरे वो हाथ उसकी तरफ बढ़ता चला गया और उसके गले तक पहुँचने ही वाला था कि तभी वो डर कर के उठ गया।


फिर उसने अपने दोस्त को जोर से पकड़कर के उठाया और उसने अपने दोस्त को बताया कि उसके साथ में क्या हुआ है? लड़के की बात सुनकर उसका दोस्त फिर से हँसने लगा।


फिर उस दोस्त ने लड़के से कहा कि अगर अब तुमको दोबारा से परछाईं दिखे तो तुम वहीं कहना जो मैं तुमको कहने को कह रहा हूँ। फिर देखते हैं कि अब तेरा परछाईं क्या कर लेता है? तुमको अपने अंदर ही अंदर बोलना है कि मैं तुझसे नहीं डरता हूँ सामने आकर दिखा।


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उसके दोस्त ने वैसा ही करने को कहा। फिर दोनों सो गए। थोड़ी ही देर बाद दोबारा से उसके सपने में वहीं परछाईं नजर आयी और वो परछाईं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी। लेकिन इस बार वो उस परछाई से डरा नहीं बल्कि उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर के उसने वहीं कहा कि मैं तुझसे नहीं डरता सामने आकर दिखा। वो बार-बार ऐसा ही कहता रहा।


जैसे-जैसे वो ऐसा बोलने लगा परछाईं छोटी होती चली गयी और उससे दूर होने लगी। वो बोलता रहा वो परछाईं छोटी होती रही और धीरे-धीरे वो परछाईं गायब हो गयी। बिल्कुल ऐसा ही हमारी जिंदगी में होता है।


हमारे अंदर जितने भी डर है उससे हम जितना भी डरेंगे हम उतना ही छोटे होते चले जाते हैं और वो डर उतने ही बड़े होते चले जाते हैं। लेकिन अगर हम अपने डरों से नहीं डरते हैं बल्कि उसका डंटकर सामना करते हैं तो दुनिया का ऐसा कोई भी डर नहीं है जो कि हमें डरा पाये।


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2. प्रेरणा देने वाली कहानी:

एक बार की बात है जब कुछ साइंटिस्ट ने मिलकर नया एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने एक बहुत बड़ा पिंजरा लिया और बहुत सारे बन्दरों को एक साथ रख दिया। वहाँ पर एक सीढ़ी लगा दी। उस सीढ़ी के सबसे ऊपर कुछ केले रख दिये।


फिर वैज्ञानिकों ने मिलकर ऑफ ये उपाय किया कि जैसे ही कोई बन्दर केले लेने के लिए ऊपर चढ़े उसके ऊपर ठंडे पानी की बारिश करने लगते। जैसे ही कोई बन्दर ऊपर चढ़ता उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता तो वे तुरंत नीचे उतर जाते थे। फिर पानी को बंद कर दिया जाते थे।


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फिर दुबारा से कोई बन्दर केले लेने के लिए सीढ़ी पर चढ़ता दुबारा उस पर पानी गिरा दिया जाता था और बन्दर फिर नीचे आ जाते थे। बन्दरों ने इसका मतलब ये निकाला कि जैसे ही कोई सीढ़ी के ऊपर चढ़ता है तो उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता है।


फिर उसके बाद में जैसे ही कोई भी बन्दर सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश भी करता तो बाकी के बन्दर सब इकट्ठे होकर के उसको पकड़ते फिर मारते-पीटते हुए उसको नीचे गिरा देते थे। फिर दुबारा कोई बन्दर ऐसा करता था तो उसके साथ भी ऐसा ही किया जाता था।


फिर उन वैज्ञानिकों ने एक नई तरकीब सोची। उन्होंने 5 बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नए बन्दर को उस पिंजरे के अंदर डाल दिया। अब उस नए वाले बन्दर को इन सब बातों के बारे में नहीं पता था। उसको जैसे ही सीढ़ी के ऊपर केले नजर आए वो तुरन्त सीढ़ी के ऊपर चढ़ने लगा।


अबकी बार वैज्ञानिकों ने कोई बारिश नहीं किया लेकिन फिर भी उसको बाकी के बन्दरों ने पकड़ा और पीटना शुरू कर दिया। इस बन्दर को समझ नहीं आया कि उसको क्यों मारा जा रहा है? फिर उसने दुबारा शुरू कोशिश किया। इस बार जैसे ही उसने दुबारा सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश किया तो बन्दरों ने फिर से उसको मारना शुरू कर दिया।


इस तरह होता देख नए बन्दर के दिमाग में ये बैठ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना है। जो भी इस सीढ़ी पर चढ़ेगा उसको मार पड़ेगी। लेकिन सीढ़ी पर चढ़ने के लिए क्यों मार पड़ती है उसको कुछ मालूम नहीं था, पर उसके दिमाग में ये बैठ गया कि अब सीढ़ी पर नहीं चढ़ना है और ना ही किसी को चढ़ने देना है।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने चार बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नया बन्दर को अंदर डाल दिया। वो नया वाला बन्दर भी वैसा ही किया जो इसके पहले वाले बन्दर ने किया था। वो अंदर जाते ही केले लेने के लिए जैसे ही सीढ़ी पर चढ़ा बाकी के  चार बन्दरों ने उसे पीटना शुरू कर दिया और उसको नीचे गिरा दिया।


उसको कुछ समझ नहीं आया और उसने दुबारा कोशिश किया फिर उसको बन्दरों ने पिट कर नीचे उतार दिया। उस बन्दर को भी कुछ दिन में समझ में आ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना और उसने सीढ़ी पर चढ़ना बंद कर दिया।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने तीनों बन्दरों को एक-एक करके बाहर निकाला और उनके जगह पर तीन नए बन्दरों को अंदर डाल दिया। अब ये पांचों बन्दर नए थे। लेकिन किसी को भी ये पता नहीं था कि उस सीढ़ी पर चढ़ना मना क्यों है? लेकिन उन सबके दिमाग में ये बैठ गया था कि सीढ़ी पर चढ़ने से मार पड़ती है। फिर बन्दरों ने सीढ़ी पर चढ़ना ही बंद कर दिया। जबकि अब कोई ठंडे पानी की बारिश भी नहीं हो रही थी।


वो चाहते तो आराम से सीढ़ी पर चढ़ते, केले को तोड़ते और आपस में बांटकर के खा लेते। बिल्कुल ये सब बात भी हमारे जीवन में लागू होता है। हजारों साल पहले कोई रीति-रिवाज बनी होती है। उसके पीछे कोई न कोई वजह होती है लेकिन वो वजह खत्म होने के बाद भी वो प्रथा चलती रहती है।


वो रीति-रिवाज चलती रहती है परंतु किसी भी ये जानने की हिम्मत नहीं होती है कि वो क्यों कर रहे हैं और किसलिए कर रहे हैं? बस सबको ये पता है कि ऐसा ही होता है।


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जैसा कि आपने जो अभी कहानी सुनी उसमें बन्दर है जो ये जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, उनको किसी से सवाल पूछना नहीं आता है। परंतु हम तो इंसान है हम किसी से कोई भी सवाल पूछ सकते हैं। लेकिन अगर हम अनजाने में कोई हमेशा की तरह गलती कर रहे हैं और किसी से उसके बारे में जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं तो फिर हमारे में और जानवरों में कोई अंतर नहीं है।


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3. युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी:

एक छोटा सा गांव था। वहाँ पर एक आदमी पहाड़ पर पत्थर तोड़ने का काम करता था। उसको अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वो पूरा दिन काम करता, मेहनत करता और शाम को जो पैसा मिलता था उसे लेकर अपने परिवार के साथ में समय बिताता और चैन से सो जाता।


एक दिन की बात है जब वो आदमी अपना काम खत्म करके अपने घर जा रहा था तो रास्ते में चलते-चलते उसके मन में एक ख्याल आया कि ये भी कोई जिंदगी है कि सुबह से शाम तक मैं पत्थर तोड़ने का काम करता हूँ और शाम को मुझे थोड़े से पैसे मिलते हैं। इसमें मुश्किल से मेरा और मेरे परिवार का गुजारा हो पाता है।


काश! कुछ ऐसा हो जाये, मुझे कोई ऐसी शक्ति मिल जाये कि जो भी मैं चाहता हूँ वो सच हो जाये। वो अपने घर पर गया और खाना खाया लेकिन उसका ध्यान खाने पर नहीं था। उसके दिमाग में यहीं चल रहा था कि काश! मैं भी अमीर होता। वो आदमी यहीं सोचते-सोचते सो गया।


रात को सोते वक्त उसने सपने में देखा कि जब वह रोज की तरह वो अपना काम खत्म करके अपने घर लौट रहा था तभी अचानक उसने से एक बहुत बड़ा घर देखा। उस घर को देखकर उसके मन में आया कि काश! ये घर मेरा होता और मैं इस घर का मालिक होता।


उसके ऐसा सोचते ही वो उस घर का मालिक बन गया। उसको यकीन ही नहीं ह रहा था कि उसने जो सोचा वो बन चुका है। लेकिन उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी क्योंकि उसको अपने घर के बाहर जोड़ से कुछ शोर सुनाई दिया।


जब उसने बाहर देखा तो पाया कि एक बहुत बड़ी रैली निकल रही है और उस रैली के बीच एक बहुत बड़ा नेता हाथ हिला रहा है। वहाँ पर जितने भी लोग खड़े थे सब उसके नाम के नारे लगा रहे थे। सब उसके आगे हाथ जोड़कर खड़े थे, सब उसको देखने के लिए तड़प रहे थे।


तब उसको ये एहसास हुआ कि उस नेता के आगे मैं कितना छोटा हूँ। उसके मन में ख्याल आया कि काश! मैं एक इतना बड़ा नेता होता और मेरे पास भी उतनी ही पावर होती जितना कि इसके पास में है। बस उसको इतना सोचने की देर थी कि वो नेता बन गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसके आसपास में हजारों लोगों की भीड़ थी और सब उसको देखने के लिए तरस रहे थे।


लेकिन उसकी ये खुशी भी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। धूप बहुत तेज थी। उस नेता को इतनी धूप और गर्मी में रहने की आदत नहीं थी। धूप की वजह से उसको चक्कर आ गया और वो बेहोश होकर गिर पड़ा।


फिर उसको ये एहसास हुआ कि एक नेता सबसे ताकतवर नहीं है ये जो सूरज है यही सबसे ताकतवर है। फिर उसको ये मन में आया कि काश! मैं सूरज बन जाता तो मेरे आगे कोई नहीं टिक पायेगा। 


उसको इतना सोचने की देर थी कि वो सूरज बन गया और वो खुशी से पागल हो गया क्योंकि वो पूरी दुनिया को रोशन कर रहा था। पूरी दुनिया में ऐसा कोई नहीं था जो उसकी रोशनी की रोक सके।


लेकिन उसको ये खुशी भी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। कुछ देर के बाद आसमान में कुछ काले बादल आये जिसने सूरज की रोशनी को रोक दिया। फिर उसको गए एहसास हुआ कि इस दुनिया में ऐसा भी कोई है जिसमें सूरज के प्रकाश को रोकने का दम है।


फिर उसके मन मे गए ख्याल आया कि काश! मैं बादल बन जाता। उसको इतना सोचना था कि वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसको ऐसा लगा कि मैं आसमान में उड़ रहा हूँ। मैं जहाँ चाहे वहाँ जा सकता हूँ।


लेकिन कुछ देर बाद वहां पर बहुत तेज हवाएं आयी और उन बादलों को उड़ा कर ले गयी। फिर उसको ये समझ आया कि गए जो बादल है वो सूरज की रोशनी को तो रोक सकता है लेकिन इन हवाओं को नहीं रोक सकता। फिर उसको एहसास हुआ कि काश! मैं हवा बन जाऊं और वो हवा बन गया।


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हवा बनने के बाद में उसको एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव हुआ। वो जब मर्जी आराम से बहता और जब मर्जी तूफान बन करके जिसको भी चाहे उड़ा करके ले जाता। उसको ये विश्वास होने ही लगा था कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली मैं हूँ तभी उसकी सामना एक बड़े से पहाड़ से हुई।


उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी लेकिन वो उस पहाड़ को इतना सा भी नहीं हिला सका। तब उसको ये एहसास हुआ कि इस दुनिया में कोई और भी है जो इस हवा से भी शक्तिशाली है, जिसमें हवा को भी रोकने का दम है।


फिर उसके मन में आया कि काश! मैं पहाड़ होता। उसको इतना सोचना था कि वो पहाड़ बन गया। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। उसको एक जानी पहचानी से आवाज सुनाई दी। साथ ही साथ उसको कहीं से दर्द होने लगा।


उसको एहसास हुआ कि कोई ऐसा है जो उसको तोड़ रहा है, उसको मार रहा है। दर्द से वो चीखने लगा और उसके मन में ये आया कि काश! मैं वो बन जाऊं जो कि इस पहाड़ को तोड़ने का दम रखता है।


लेकिन इस बार उसकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हुई और वो जोर से रोने लगा, चीखने-चिल्लाने लगा, उसने अपनी पूरी जान लगा दी लेकिन वो इस बार वैसा नहीं बन पाया। उसका दर्द बढ़ता ही चला था और दर्द की वजह से जैसे ही उसकी नींद खुली तो उसके सामने एक शीशा था और शीशे में उसने खुद को देखा तो उसको समझ आ गया कि वो क्यों नही बन पा रहा था जो वो बनना चाहता था क्योंकि असलियत में वहीँ हूँ।


इंसान के साथ भी वैसा ही होता है। वो जो होता है उसको लगता है कि वो सबसे कमजोर है जबकि ऐसा नहीं होता है। आप बस ते सोचिए कि आज आप जैसे भी है दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर है। आप हर मुश्किल को क्षण भर में खत्म कर सकते हैं। अगर आप ऐसी सोच रखते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको दुःखी नहीं कर सकता।


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4. सच्चे दोस्त:

ये मोटिवेशनल कहानी है दो सच्चे दोस्तों की। उनकी दोस्ती की शुरुआत कुछ ही दिन पहले एक हॉस्पिटल के कमरे में हुई थी। जहाँ पर वे दोनों एडमिट थे। दोनों दोस्तों में से जो एक दोस्त था उसको कुछ ही दिन पहले पैरालिसिस का अटैक आया था। जिसकी वजह से उसकी गर्दन के नीचे की पूरी बॉडी लकवाग्रस्त हो गया था और वो अपनी उंगली तक नहीं हिला सकता था।


पूरे दिन उसके पास जो भी नर्स आती थी उनसे एक ही बात कहता था कि मुझे कोई ऐसी इंजेक्शन दे दो जिससे कि मैं मर जाऊं। अब मैं जीना नहीं चाहता अब मैं ऐसी जिंदगी जी करके क्या करूँगा।


उसका जो दोस्त उस कमरे में था जो चल-फिर नहीं सकता था। वो रोज सुबह और शाम को उस कमरे में खिड़की के पास में जाकर के खड़ा हो जाता था और अपने दोस्त को बताता था कि उस खिड़की के बाहर क्या चल रहा है?


बिल्कुल नीला आसमान, सफेद बादल, उड़ते हुए पंक्षी और हल्की-हल्की हवा प्रकृति की सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं। मतलब बाहर क्या हो रहा है वो सबके बारे में बताता था। शुरू में जब उसने बताना शुरू किया तो उसके दोस्त पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ रहा था लेकिन धीरे-धीरे उसको बाहर की दुनिया देखने की चाह होने लगी।


अब वो सुबह का इंतजार करने लगा कि जल्दी से सुबह हो और मेरा दोस्त मुझे बताए कि बाहर में क्या हो रहा है?  कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन जब वो उठा तो उसने देखा कि सामने वाला बेड खाली है।


फिर उसने नर्स को बुलाया और पूछा कि क्या उस लड़के को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी है। तो नर्स ने कहा कि उन्होंने तो आपको बताया ही होगा कि उनके पास कुछ ही दिन बाकी है और कल रात को उनकी मृत्यु हो गयी है।


के सुनकर के उसकी पूरी उम्मीद टूट गई क्योंकि केवल उसका दोस्त ही था जिसने उसने बाहर की दुनिया से जोड़ा हुआ था। जिसके वजह से वो जान पाता था कि बाहर की दुनिया में क्या हो रहा है और ये दुनिया कितनी खूबसूरत है?


कुछ दिन तक तो ऐसे ही चलता रहा और वो लड़का अब जीने की चाह छोड़ दी। लेकिन दूसरे तरफ से उसको कहीं न कहीं एक नई चाह पैदा हुई कि काश! मरने से पहले एक बार मैं खुद अपनी आंखों से इस खिड़की के बाहर देखूं कि ये दुनिया कैसी है?


जैसे-जैसे उसके अंदर ये चाह बढ़ने लगी उसके अंदर एक अजीब सी एनर्जी महसुस होने लगी। फिर एक दिन उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी और किसी तरह से वो बेड से नीचे गिरा और दीवाल पकड़ के वो किसी तरह से उस खिड़की के पास पहुचा और खिड़की को पकड़ के खड़ा हुआ वो खिड़की के बाहर देखा।


लेकिन खिड़की के बाहर देखते ही वो लड़का गुस्से से भर गया। उसने नर्स को जोर से आवाज लगाई और जैसे ही नर्स आयी और उसने नर्स से पूछा कि ये तुमने क्या किया, इस खिड़की के बाहर तुमने काली दीवार क्यों खड़ी कर दी?


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नर्स को समझ नहीं आया कि वो लड़का क्या बोल रहा है और वो बोली मुझे यहाँ आये हुए 5 साल हो गए। जब से मैं यहां आयी हूँ तब से ये काली दीवारें यहां पर है। तब जाकर उसको ये समझ आया कि उसका दोस्त उससे झूठ बोल रहा था और उसने नर्स से पूछा- अगर ये काली दीवार पिछले 5 साल से यहां है तो मेरे दोस्त ने मुझसे झूठ क्यों कहा?


ऐसा सुनकर उसके नर्स ने थोड़ा सा मुस्कुराई और बोली- मैं ये तो नहीं जानती कि उन्होंने आपसे झूठ क्यों कहा? लेकिन मैं इतना जरूर जानती हूँ कि जो भी कुछ उन्होंने आपसे कहा इसी वजह से आप अभी अपने पैरों पर खड़े हैं।


इस मोटिवेशनल कहानी से हमें ये सीखने को मिलता है कि जो हमारे शब्द है उसमें इतनी पावर है जिसकी कोई सीमा नहीं है। वो किसी आदमी को गिरा भी सकता है और किसी को उठा भी सकता है। तो अब आपके ऊपर है कि अपने इस पावर को सही तरह से उपयोग करते हैं या फिर उसका गलत इस्तेमाल।


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5. मुझे चमत्कार चाहिए:

एक बार एक छोटी सी बच्ची हाथ में मिट्टी की गुल्लक लेकर के भागती हुई मेडिकल के दुकान पर गयी। वो काफी देर तक वहाँ पर खड़ी रही लेकिन दुकानदार का उस पर ध्यान नहीं गया क्योंकि दुकान पर बहुत सारे लोग खड़े हुए थे।


भीड़ ज्यादा होने की वजह से बार-बार दुकानदार से बोलने के बाद भी जब उसने ध्यान नहीं दिया तो उस बच्ची को गुस्सा आया और उस मिट्टी की गुल्लक को वहीं दुकानदार के काउंटर पर जोर से रख दिया।


जिसके बाद वहाँ पर जितने भी लोग थे और दुकानदार था सब उस बच्ची को देखने लगे गए। फिर उस दुकानदार ने उस बच्ची से पूछा कि क्या बात है, आपको क्या चाहिए?


बच्ची ने बड़े ही भोलेपन से बोली कि मुझे एक चमत्कार चाहिए। ये सुनकर दुकानदार को और ना ही वहाँ पर जितने भी लोग थे उन सभी को कुछ समझ नहीं आया। सारे लोग उसकी तरफ देखने लगे। फिर दुकानदार ने बच्ची से कहा कि बेटा यहां चमत्कार तो नहीं मिलता है।


बच्ची को लगा कि दुकानदार झूठ बोल रहा है तो बच्ची ने कहा कि मेरे गुल्लक में बहुत पैसे हैं। आप बताओ आपको कितने पैसे चाहिए। लेकिन मैं आज यहां से चमत्कार लेकर के ही जाऊंगी।


उसी दुकान पर एक दूसरा आदमी खड़ा था। उसने उस बच्ची से पूछा कि आपको चमत्कार क्यों चाहिए? तब उस बच्ची ने अपनी पूरी बात बताई। अभी कुछ दिन पहले मेरे भाई के सर में बहुत तेज दर्द हुआ तो मेरे पापा और मम्मी उसको हॉस्पिटल ले गए। लेकिन मेरा भाई कई दिन तक घर नहीं आया।


मैंने कई बार अपने पापा से पूछा कि भाई कहाँ है? लेकिन मेरे पापा ने मुझे कुछ नहीं बताया। उन्होंने बार-बार यहीं कहा कि वो कल आ जाएगा लेकिन वो आ ही नहीं रहा। फिर मैंने देखा कि मम्मी रो रही है और पापा मम्मी सर कह रहे थे कि उसके इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए उतने मेरे पास में नहीं है। अब उसको कोई चमत्कार ही बचा सकता है।


तब मुझे लगा कि मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं है तो क्या हुआ मेरे पास में तो है। मेरे पास जितने भी पैसे थे वो सारे लेकर के मैं इस दवाई के दुकान पर आ गयी। फिर उस आदमी ने उस बच्ची से पूछा कि तुम्हारे पास में कितने पैसे है?


ये सुनते ही उस बच्ची ने अपनी गुल्लक उठायी और जमीन पर पटक कर के तोड़ दिया और पैसे गिनने लगी। बाकी सब लोग उसको खड़े होकर उसको देख रहे थे। थोड़ी देर बाद उसने सारे पैसे अपने हाथ में लिए और बोली मेरे पास पूरे उन्नीस रुपये हैं।


वो जो आदमी वहाँ खड़ा था वो थोड़ा सा मुस्कुराया और बोला- तुम्हारे पास में तो पूरे पैसे हैं इतने का ही तो चमत्कार मिलता है। ये सुनकर वो बच्ची बहुत खुश हो गयी और बोली चलो मैं अपने पापा से आपको मिलवाती हूँ। बाद में पता लगा कि वो आदमी कोई आदमी नहीं था बल्कि उस शहर का बहुत बड़ा न्यूरोसर्जन था।


उसने सिर्फ उन्नीस रुपये में उस बच्ची के भाई की सर्जरी किया और कुछ ही दिन बाद उसका भाई ठीक होकर के घर वापस आ गया। फिर कुछ दिन बाद वो बच्ची, उसका भाई और उसके मम्मी-पापा चारों एक जगह पर बैठे हुए बात कर रहे थे कि उसकी मम्मी ने उसके पापा से पूछा कि अब तो आप बता दो कि ये चमत्कार आपने किया कैसे? तो उन्होंने अपनी बेटी की तरफ देखा और बोले कि ये चमत्कार मैंने नहीं इसने किया है।


इस प्रेरणादायक कहानी से सीखने वाली एक बहुत बड़ी बात है जो हम इस छोटी सी बच्ची से सीख सकते हैं की जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें कोई रास्ता नहीं नजर आता है और हम हिम्मत हार जाते हैं।


तब हमारे अंदर एक बच्चा होता है जो कोशिश करने से कभी भी पीछे नहीं हटता है। वो हार मानने को तैयार नहीं होता है क्योंकि उसको ना शब्द का ज्ञान नहीं होता है। वो बच्चा जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है क्योंकि वो हर हाल में कोशिश करता ही रहता है और फिर आपने एक प्रसिद्ध वाक्य तप सुना ही होगा- कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


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