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जिंदगी बदलने वाली 5 मोटिवेशनल कहानियां | 5 Motivational Stories

जिंदगी बदलने वाली 5 मोटिवेशनल कहानियां | 5 Motivational Stories

Top 5 Short Motivational Stories In Hindi For Success Life | जीवन को बदल देने वाली 5 अच्छी प्रेरणादायक कहानियां

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Top 5 Motivational Stories In Hindi

आज हम जीवन को बदल देने वाली 5 अच्छी प्रेरणादायक कहानी के बारे में जानेंगे जो हमारे जीवन को अच्छी सीख देगी। इन 5 हिंदी कहानियों में जीवन से जुड़ी हर प्रकार की कठिनाइयों को कैसे दूर कर सकते हैं? ये 5 कहानियां आपके जीवन से जुड़ी हर सवालों का जवाब देगी। तो चलिए बिना किसी देरी के उन कहानियों के बारे में जानते हैं।


असली शांति की परिभाषा | Real Life Short Inspirational Stories In Hindi


एक बार की बात है जब एक बहुत बड़ी पेंटिंग संस्था ने ये प्रचार करवाया कि जो भी पेंटर शांति को प्रदर्शित करने वाली सबसे अच्छी पेन्टिंग बनाएगा उसको 10 मिलियन डॉलर आ इनाम मिलेगा।


ये बात देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गयी और पूरी दुनिया से हजारों पेंटर अपनी-अपनी पेंटिंग उस contest में भाग लेने के लिए भेजी। उन हजारों पेंटिंग में से मात्र 100 पेंटिंग को जजों ने फाइनल के लिए चुना और उन 100 पेंटरों को प्रदर्शनी में बुलाया गया। साथ ही साथ मीडिया को भी बुलाया गया।


उन मीडिया वालों के साथ हजारों के संख्या में भीड़ जमा हुई थी। इस contest का इनाम इतना ज्यादा था कि सबको ये जानने की उत्सुकता थी कि इतना बड़ा इनाम आखिर कौन जीतेगा? वो पेंटिंग कैसी होगी, कितनी सुंदर होगी, उसको बनाने वाला कौन होगा? ऐसे-ऐसे सवाल लोगों के मन मे चल रहे थे।


आखिरकार वो दिन आ गया जब उसका विजेता घोषित किया जाने वाला था। वहाँ पर सब पेंटिंग बहुत ही सुंदर थी और एक से बढ़कर एक थी। उसमें से कुछ पेंटिंग ऐसी थी जिसको देखने के लिए पर सबसे ज्यादा भीड़ थी। उन सब पेंटिंग में से एक पेंटिग ऐसी थी जिसमें बिल्कुल साफ पानी की नदी बह रही था, जिसके पीछे कुछ पहाड़ थे और उन बर्फ जमी हुई थी, फिर पहाड़ के पीछे से सूर्य का प्रकाश निकल रहा था।


एक और पेंटिंग ऐसी थी जिसमें पेंटर ने बड़े ही खूबसूरती से शांति को दर्शाया था। यानी कि एक झील में बिल्कुल शांत पानी थी। इतना शांत पानी था कि उसके अंदर के सारे चीज को बड़े ही आसानी से देखा जा सकता था, उसमें बिल्कुल अंधेरे आसमान में तारे चमक रहे थे और एक चांद चमक रहा था।


उसके अलावा एक पेंटिंग ऐसी थी जिसमें बिल्कुल सफेद बादल थे, नीला आसमान था और बिल्कुल हरे- हरे घास थे। यानी कि ये सब पेंटिंग ऐसी थी जिसको देखकर मन को शांति और सुकून कैसे मिले ये सारे गुण उस पेंटिंग में थी।


सारी पेंटिंग एक से बढ़कर एक थी जिसके चलते contest बहुत ही कड़ा बन चुका था। इसलिए जजों को किसी एक पेंटर को विजेता घोषित करना काफी मुश्किल हो गया था। लेकिन आखिरकार किसी तरह एक विजेता को चुना गया और एक पेंटिंग को उन सबमें से चुना गया। सामने सारे लोग, मीडिया वाले, और बहुत सारे लोगों की भीड़ इकट्ठा थी। जबकि जिज्ञासा बढ़ती ही जा रही थी कि आखिर इसका विजेता कौन होगा?


तभी जजों ने उस पेंटिंग को सबके सामने लाया तो वहाँ बैठे सारे लोग हैरान रह गए और सब एक-दूसरे का मुह देखने लगें। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार हो क्या रहा है? इसका कारण था कि जिस पेंटिंग को विजेता के लिए चुना गया था वो दूर-दूर तक शांति को नहीं दर्शा रही थीं। तो सबको लगा कि शायद जजों से कोई गलती हुई है या फिर गलती से किसी दूसरे पेंटिंग को दिखा दिया गया है।


उनमें से कुछ पेंटर्स एक साथ गए और जाकर के उनसे पूछा- क्या ये गलती से कहीं दूसरी पेंटिंग तो आपने नहीं दिखा दी है? तो वहाँ पर बैठे जज ने कहा- नहीं इसी पेंटिंग को आज के विजेता के लिए चुना गया है। सारे पेंटर्स ये जवाब सुनकर गुस्से से भर गए और सबने मिलकर इसका बहिष्कार किया।


ये देखकर सारे मीडिया वाले अपनी-अपनी जगह से उठकर उन जजों के पास गए और उनसे पूछा कि आप इस पेंटिंग को विजेता होने का कारण बताइये। ये सुनकर जज थोड़ा मुस्कुराए और बोले- एक बार ध्यान से देखिए इस पेंटिंग को। शायद आपको कुछ नजर आए जो आपको दूर से नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि आप सबने ने एक चीज तो देख ली कि इस पेंटिंग में आंधी है, तूफान है, चारो तरफ सब तहस-नहस हो रहा है, आसमान में बिजली कड़क रही है, काले बादल है।


लेकिन आपने अभी तक एक चीज नहीं देखी कि इस पेंटिंग में एक घर भी है। उस घर में एक छोटी सी खिड़की है। जहाँ पर एक आदमी खड़ा हुआ है। ध्यान से जाकर के देखिये वो जो आदमी खड़ा होकर बाहर देख रहा है उसके चेहरे पर कोई डर नहीं है बल्कि एक हल्की सी मुस्कान है। एक ठहराव है, एक सुकून है और यहीं है शांति का असली मतलब


यानी कि शांति का ये मतलब नहीं है कि हमारे बाहर सबकुछ शांत है और फिर हम शांत है क्योंकि ऐसी दूसरी तरफ जिसका मन शांत है उसके बाहर चाहे कुछ भी हो रहा है चाहे बाहर आंधी-तूफान क्यों न आ रहा हो, चाहे उसके आसपास सब तहस-नहस ही क्यों न हो रहा हो लेकिन वो अंदर से हमेशा शांत रहेगा। यहीं है शांति का असली मतलब।


एक छोटे बच्चे की प्रेरणादायक कहानी | Top Motivational Stories In Hindi For Kids


एक बार की बात है। एक छोटे से गांव में एक आदमी रहता था। उसके घर के पास में एक पहाड़ था। जहाँ पर वो रोज सुबह में जाता और थोड़ी देर के लिए वो बैठता और फिर वापस आ जाता। रोज की तरह ही वो सुबह-सुबह उस पहाड़ पर जा रहा था। पीछे से उसका छोटा सा बेटा आया और आकर के उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं भी आपके साथ चलूंगा।


उसने पहले तो अपने लड़के को समझाया और मना किया। फिर कहा- रास्ता छोटा है और चढ़ाई बहुत ज्यादा है तो तुम मेरे साथ नहीं चल पाओगे। लेकिन जब उसका बेटा नहीं माना तो दोनों पहाड़ पर चढ़ने लगे।


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अकबर बीरबल की बेहद ही रोचक कहानी।


पिता ने बेटे का हाथ कस के पकड़ा हुआ था। बाएं हाथ की तरफ पहाड़ थे और दाहिने हाथ के तरफ गहरा खाई था। रास्ता बहुत ही पतला और छोटा था। वे दोनों पहाड़ की चोटी पर पहुचने ही वाले थे कि रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर आता था।


पिता को पता था कि रास्ते में ये पत्थर रोज आता है और बगल से निकल गया क्योंकि वो रोज आता था। लेकिन जो उसका बेटा था उसका ध्यान कहीं और था। उसका घुटना उस पत्थर से जाकर टकड़ा गया और जोर चीखने लगा। जैसे ही वो चीखा उसकी आवाज उन पहाड़ों में गूंजने लगी। 


इससे पहले उस बच्चे ने कभी भी अपनी आवाज नहीं सुनी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है और थोड़ा सा घबरा गया। उसे लगा कि शायद कहीं कोई है जो छुपकर के उसे देख रहा है और उसका मजाक उड़ा रहा है।


फिर उस बच्चे ने बोला कि कौन हो तुम? फिर वो आवाज पहाड़ों से टकड़ा कर उसको सुनाई दिया। जब उस बच्चे ने दुबारा अपनी आवाज सुनी तो उसको गुस्सा आ गया। उसे लगा कि कौन है जो मेरा मजाक उड़ा रहा है? फिर उसने गुस्से से कहा- मैं तुमको छोडूंगा नहीं। फिर जैसे ही उसने इस आवाज को सुना वो लड़का घबरा गया।


उसके पिता ये देखकर समझ गए कि ये क्या हो रहा है? उसने अपने पिता का हाथ और जोर से पकड़ लिया। उसने कहा- कौन है जो मुझे इतना तंग कर रहा है? उसके पिता ये सुनकर थोड़ा सा मुस्कुराए और खाई की तरफ देखकर जोर से बोले- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


ये सुनकर वो बच्चा हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आया कि उसके साथ हो क्या रहा है? वहीं इंसान जो उसका मजाक उड़ा रहा है, उसको तंग कर रहा है वो मेरे पिता से कह रहा है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


उसके पिता ने अपने बेटे के तरफ देखा और समझ गए कि उसके मन में क्या चल रहा है? तो उन्होंने दुबारा जोर से कहा- तुम बहुत अच्छे हो। ऐसा सुनकर उनका बेटा भी थोड़ा सा मुस्कुराया और अपने पिता से पूछा कि ये क्या हो रहा है?


फिर उसके पिता ने अपने बेटे को समझाया और कहा- ये जो तुम आवाज सुन रहे हो ये किसी और की नहीं है बल्कि ये तुम्हारी ही आवाज है जो पहाड़ों में गूंज रही है जो इन पहाड़ों में गूंज रही है। तुम्हे अपनी ही आवाज सुनाई दे रही है। जैसा तुम बोलते हो ठीक वैसा ही तुमको सुनाई देता है।


अगर तुम गुस्से से कुछ कहोगे तो तुमको गुस्से वाला आवाज ही सुनाई देगा लेकिन अगर तुम कुछ कहोगे तो वो आवाज भी अच्छी सुनाई देगी। बिल्कुल इसी तरह हमारी जिंदगी में भी होता है। जैसा तुम अपने मन में इस जिंदगी के बारे में सोचते हो ठीक उसी तरह ये जिंदगी भी बिल्कुल तुम्हारे लिए वैसी ही हो जाती है।


अगर तुम मन ही मन अपने आप को ये बोलते रहोगे की मेरी जिंदगी तो बहुत बुरी है तो तुम्हारी जिंदगी सच में बहुत बुरी हो जाएगी। वहीं पर अगर तुम अपने जिंदगी से प्यार करोगे तो तुम्हारी जिंदगी भी तुमसे प्यार करेगी। ये बात सुनकर लड़का बहुत आश्चर्यचकित हो गया।


फिर वे दोनों उस पहाड़ की चोटी पर गए। लेकिन बच्चे के दिमाग में ये बात घूम रही थी और फिर वो बच्चा खिलखिलाकर हँसा और उसने अपने दोनों हाथों को खोलते हुए अपनी पूरी ताकत लगाकर बोला- ये जिंदगी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


जीवन को सीख देने वाली कहानी | Short Inspirational Moral Stories For Adults In Hindi


एक बार की बात है, एक बहुत बड़ा नेता एक साधु के छोटे से आश्रम में गया क्योंकि उसने उस साधु के बारे में बहुत कुछ सुना था। उसके मन में एक बात आया कि मैं भी एक बार जाकर उस साधु को देखता हूँ कि आखिर लोग उस साधु की इतनी तारीफ क्यों करते हैं?


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जब वो नेता उस आश्रम में गया तो उसने देखा कि एक छोटे से कमरे में कालीन बिछा हुआ था और वहाँ पर कुछ लोग बैठे हुए थे और उनके सामने साधु जी बैठे हुए थे। वो नेता अंदर गया तो उसके साथ चार बॉडीगार्ड भी थे और उसको ये आदत थी कि वो जहाँ पर भी जाता था लोग अपनी जगह पर खड़े हो जाते थे, उसकी तरफ देखते तय, हाथ जोड़ते थे,अपनी सर झुकाते थे लेकिन यहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।


साधु ने उसकी तरफ देखा तक नहीं, क्योंकि साधु किसी के सवाल का जवाब दे रहे थे। नेता को ऐसा देखकर गुस्सा आ गया। उसको लगा कि ये मेरी बेइजती है तो उस नेता ने साधु के बात को बीच में ही काटते हुए गुस्से से बोला- मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ। साधु उसकी तरफ देखते हुए बोले- आप थोड़ा देर रुकिए, पहले मैं इनके सवाल का जवाब दे लूँ उसके बाद मैं आपसे बात करूँगा। तबतक आप चाहे तो बैठ सकते हैं।


साधु को बस इतना कहना था कि उस नेता का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और उसने अपना सारा गुस्सा साधु के ऊपर निकाल दिया। अभी तक वो नेता बहुत तमीज से बात कर रहा था, आदर से बात कर रहा था लेकिन अब वो गाली गलौज पर उतर आया। नेता ने साधु से कहा- तुझे पता भी है मैं कौन हूँ और तू किससे बात कर रहा है?


साधु ने मुस्कुराते हुए कहा- मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन है और आप कहाँ से आये हैं? लेकिन आप जो कोई भी है, अगर आप चाहते हैं कि मैं आपसे बात करूं या आपके सवाल का जवाब दूं तो आपको कुछ देर रुकना होगा।


साधु के ऐसा कहते ही नेता गुस्से से पागल हो गया और वहीँ सबके सामने चीखने चिल्लाने लगा। अब मैं तुझे असली औकात दिखाऊंगा। तूने मुझसे पंगा लेकर ठीक नहीं किया। तुझे पता भी है मैं तेरे बारे में क्या सोचता हूँ? साधु ने फिर उसकी तरफ देखा और बड़े ही प्रेम से कहा- मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं? आप जो चाहे मेरे बारे में सोच सकते हैं।


फिर उस नेता ने बोला कि तू ये सुनना चाहता है कि नहीं या फिर मैं  सबके सामने तुझे बताऊंगा कि मैं तेरे बारे में क्या सोचता हूँ? तू एक बहुत ही घटिया इंसान है, तू कोई साधु नहीं है ढोंगी है, पाखंडी है और जितने लोग यहाँ बैठे हैं उन सबको तुम बेवकूफ बना रहे हो। 


तेरा बस एक ही मकसद है कि इन लोगों के जेब में जितना भी पैसा है वो सब तेरे पास में आ जाये। तू अपने फायदे के लिए इनलोगों का इस्तेमाल कर रहा है और अब मैं तुझे नहीं छोड़ने वाला। तेरा असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने पर्दाफाश करके रहूँगा।


उस नेता के इतना बोलने के बाद भी उस साधु के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बनी ही रही। ये देखकर वो और गुस्से से तिलमिला गया। उसने बोला कि अब मैं यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकने वाला। लेकिन अभी भी तेरे पास में मौका है अगर तू मुझसे माफी मांग लेगा तो हो सकता है कि मैं तुझे माफ कर दूं।


इतना सब होने के बाद भी साधु शांत था और उनके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान झलक रही थी। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर साधु ने अपनी आंखें खोली और हाथ जोड़कर कहा- मुझे आपसे कोई गिला-शिकवा नहीं है। मेरे मन में आपके लिए कोई भी गलत ख्याल नहीं है, जो भी अभी आपने मेरे बारे में कहा वो आपकी सोच थी तो मुझे आपमें कोई भी बुराई नजर नहीं आती, मुझे आप एक भले इंसान लगते हैं।


साधु के इतना कहते ही नेताजी के दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच गया। उनके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी क्योंकि उस साधु ने वहीं कहा जो बाकी सब लोग उसको कहते थे। वो नेता खुश होकर अपने घर को चला गया और जाकर के अपने पिताजी के साथ में बैठ गया। उसके पिताजी की आंखे बंद थी और वो ध्यान में थे।


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पूरी जिदंगी उन्होंने सिर्फ लोगों की सेवा की और बदले में किसी से कुछ भी नहीं मांगी। थोड़ी देर बाद जब उन्होंने अपनी आंखें खोली और अपने बेटे को सामने देखा तो उनके बेटे के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। जो आज से पहले उन्होंने कभी नहीं देखी थी। फिर उसने एक-एक करके बताया कि आज उसके साथ क्या-क्या हुआ? मतलब उसने साधु के साथ घटी हर एक घटना को पूरे विस्तार से अपने पिता को बताया।


जब उसके पिताजी ने ये सब सुना तो वे थोड़े से मुस्कुराए और बोले- साधु ने तुम्हारी तारीफ नहीं कि है क्योंकि उन्होंने वो नहीं कहा जो तुम हो बल्कि उन्होंने वो कहा जो वो खुद है। वहीं तुमने उनको जो कुछ कहा वो ये नहीं कहा कि जो वो है बल्कि तुमने वो कहा जो तुम खुद हो।


यहीं बात वेदों में भी कही गयी है। ये दुनिया तुम्हें वैसी नहीं दिखती है जैसा ये दुनिया है बल्कि ये दुनिया वैसी ही दिखती है जो तुम खुद हो। जिसकी नजर जैसी है उसके लिए ये दुनिया वैसी ही है। अगर तुम अपनी दुनिया को बदलना चाहते हो तो इसका सिर्फ एक ही तरीका है अपनी नजरिया बदल लो।


गुस्से को कंट्रोल और काबू कैसे करें? Short Inspirational Stories For Students In Hindi


ये कहानी है एक छोटी सी बच्ची की। जिसको बात-बात पर बहुत गुस्सा आता था। जब उसको गुस्सा आता था तो वो ये नहीं देखती थी कि उसके सामने कौन है? जो उसके मन में आता था वो सब बोल देती थी। कई बार तो वो कुछ चीजें उठाती और जमीन पर जोर से पटक देती थी।


उसके माँ-बाप अपनी लड़की के ऐसी बर्ताव को लेकर बहुत परेशान रहते थे। उनको समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? उस बच्ची को वे बहुत समझाने की कोशिश किये लेकिन वो बच्ची समझने को तैयार ही नहीं थी।


फिर उसकी माँ ने उसकी टीचर से बात की क्योंकि एक ट्यूशन टीचर ही ऐसी थी जिसकी वो बात सुनती थी। उसकी टीचर ने उसके माँ-बाप से कहा- आप चिंता न करो। आने वाले कुछ दिनों में आपकी बेटी बिल्कुल ठीक हो जाएगी। उसकी माँ को समझ नहीं आया लेकिन उन्होंने सोचा कि कोशिश करने में क्या जाता है?


रोज की तरह ही जब वो टीचर आयी तो उसने उस बच्ची को कहा कि आज हम पढ़ाई नहीं करेंगे बल्कि हम एक गेम खेलेंगे। फिर टीचर ने उस बच्ची को एक घर के पीछे ले गयी और उन्होंने उस बच्ची को कहा- गेम ये है कि जब भी तुमको गुस्सा आये तो तुमको एक कील लेनी है और यहाँ पर आकर के इस दीवाल में गाड़ देना है।


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फिर उस बच्ची ने उस टीचर से पूछा कि इससे क्या होगा तो उस टीचर ने कहा- जब ये गेम खत्म हो जाएगा तो तुम्हें अंत में एक पुरस्कार दिया जाएगा। उस बच्ची ने भी उस दिन से ऐसा ही करना शुरू कर दिया जैसा कि उस टीचर ने कहा था। उसको जब भी गुस्सा आता तो वो जाती और जाकर के एक कील इस दीवार में गाड़ देती।


उस लड़की को बहुत गुस्सा आने के वजह से पहले ही दिन वहाँ पर 10 से ज्यादा कीलें गड़ गयी। लेकिन उन किलों को गाड़ने के लिए बार-बार उन दीवारों के पीछे जाना पड़ता था और जाकर के उस कील को गाड़ना पड़ता था। इससे बचने के लिए उसके दिमाग में एक सवाल आया कि जितनी मेहनत मैं इस कील को गाड़ने में लगाती हूँ उससे कम मेहनत में अपने गुस्से को काबू कर सकती हूँ।


अगले दिन वहाँ पर 8 कीलें गड़ी, फिर उसके अगले दिन 5 फिर चार फिर तीन फिर दो फिर 1 फिर एक ऐसा भी दिन आया जब उसको एक बार भी उसको गुस्सा नहीं आया और उस दिन एक भी कील उस दीवार में नहीं गड़ी।


वो बच्ची बहुत खुश हो गई। उसने खुशी से अपने टीचर के पास गई और जाकर के उनको बताया कि देखो मैम आज मैंने एक भी कील उस दीवार में नहीं गाड़ी क्योंकि मेरे को एक बार भी गुस्सा नहीं आया। ये सुनकर मैम ने उसको थोड़ी सी शाबाशी दी और उसके साथ उस दीवार के सामने के जाकर के खड़ी हो गयी।


अब मैम ने उस बच्ची को कहा की अभी गेम खत्म नहीं हुआ है। अब तुम्हें जिस भी दिन बिल्कुल गुस्सा नहीं आता है उस दिन के अंत में एक कील को इस दीवार से निकाल दोगी। बच्ची ने भी वैसा ही करना शुरू कर दिया। लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब उस दीवार से सारी कीलें बाहर निकल गयी।


फिर वो बच्ची बहुत खुश हो गयी और उसने अपनी मैम के पास जाकर के बोला कि अब उस दीवार में एक भी कील नहीं है। टीचर बच्ची के साथ में जाकर उस दीवाल के सामने खड़ी हो गयी और उसने देखा कि अब एक भी कील नहीं है इस दीवाल में। मैम ने उस बच्ची को उसकी फेवरेट चॉकलेट उसको गिफ्ट दिया और कहा कि तुम इस प्राइज को जीत गयी हो।


बच्ची बहुत खुश हो गयी। फिर टीचर ने उस बच्ची से पूछा कि क्या तुमको इस दीवाल में कुछ नजर आ रहा है? बच्ची ने कहा- नहीं मैम, मुझे तो कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। इसमें से सारी कीलें बाहर निकल गयी है। तो उस टीचर ने कहा- ध्यान से देखो शायद तुमको इसमें कुछ नजर आए।


उस बच्ची ने दुबारा देखा और कहा- जो कीलें मैंने दीवार में गाड़ी थी उसकी कुछ निशान मुझे नजर आ रहे हैं। फिर उसकी मैम ने इस बच्ची से कहा- क्या तुम इस निशान को मिटा सकती हो? बच्ची सकपका गयी और बोली मैम भला ये कैसे हो सकता है?


मैम ने जवाब दिया- जिस तरह तुम इस दीवाल से कील को तो निकाल सकती हो लेकिन उसमें पड़े निशान को नहीं मिटा सकती। ठीक उसी तरह से होता है जब तुम गुस्सा करती हो। जब तुम किसी पर भी गुस्सा करती हो तो उनके दिल पर बहुत चोट लगती है, बहुत दर्द होता है और वहाँ पर एक निशान बन जाता है।


उस निशान को चाह कर भी तुम हटा नहीं सकती। फिर चाहे तुम उनसे जितना मर्जी माफी मांग लो। ये सुनकर उस बच्ची को अपनी गलती का एहसास हो गया और वो रोने लगी। बच्ची वहाँ से भागती हुई अपनी माँ के पास गई और जाकर उनके गले लग गयी।


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फिर उसने बोला- माँ मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी। आज के बाद मैं कभी भी गुस्सा नहीं करूँगी। उस दिन के बाद उस बच्ची ने कभी गुस्सा नहीं किया।


जिंदगी बदलने वाली कहानी | Real Life Short Motivational Stories For Students In Hindi


एक बार एक लड़की ने एंट्रेंस एग्जाम पास करने के लिए बहुत से कोशिश किया लेकिन उसके बाद भी वो एग्जाम पास नहीं कर पाई। जिसके वजह से वो अंदर से पूरी तरह से टूट गयी। जिसके चलते वो बहुत परेशान रहने लगी। उसके पिता से अपनी बेटी की ऐसी हालत नहीं देखी गयी।


फिर उन्होंने एक दिन अपनी बेटी को बुलाया और कहा कि तुम मेरे साथ एक बार किचन में चलो मुझे तुमको कुछ दिखाना है। किचन में उन्होंने पहले से ही गैस स्टोव के ऊपर तीन बर्तन रखे हुए थे। फिर उन्होंने उन तीनों बर्तन के अंदर पानी भरा। एक बर्तन के अंदर कुछ आलू डाले, एक के अंदर कुछ अंडे और एक के अंदर कुछ कॉफी बिन्स। उन तीनों को उबलने के लिए छोड़ दिया।


बीस मिनट तक उन तीनों को उबलते हुए हो गए और बाप बेटी वहीं पर खड़े होकर एक-दूसरे को देख रहे थे। इतने देर से वहाँ पर खड़े रहने से बेटी को थोड़ा गुस्सा आया और पिता से बोली- आप यहां खड़े होकर क्या कर रहे हो?


उसके पिता ने कहा- सिर्फ एक मिनट रुको तुमको सब समझ आ जायेगा। फिर उसके बाद उन्होंने एक-एक करके उन तीनों गैस स्टोव को बंद कर दिया। उसमें से आलू निकाले और एक प्लेट में रख दिये, दूसरे बर्तन में से अंडे निकालकर उसको एक बर्तन में रख दिये और फिर तीसरे बर्तन में से वो कॉफी बिन्स निकाले और उसको भी एक प्लेट में रख दिये।


फिर उन्होंने अपनी बेटी से कहा- तुम्हें क्या दिख रहा है तो ऐसा सुनकर उनकी बेटी को गुस्सा आ गया। उसने बोला कि इसमें देखना क्या है- एक में अंडे है, एक में आलू है और एक में कॉफी बिन्स है।


फिर उसके पिता ने कहा- एक बार इनको छूकर के देखो शायद तुम्हें कुछ समझ में आ जाये। तो उस लड़की ने सबसे पहले आलू को छुआ और थोड़ा सा दबाया यो वो बिल्कुल सॉफ्ट हो चुके थे। उसके बाद उस लड़की के पिता ने उन अंडों को तोड़ा तो वो थोड़े हार्ड थे और फिर उन्होंने कॉफी वाला कप उठाकर कहा- एक बार इसको सूंघ के देखो तो जब उनकी बेटी ने उसको सूंघा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी।


फिर उन्होंने अपनी बेटी से कहा- तुमने ध्यान से देखा कि क्या हुआ है यहाँ पर? ये तीनों ने बिल्कुल भी एक ही परिस्थितियों को झेला लेकिन तीनों ने अलग-अलग तरीके से व्यवहार किया।


पहला जब हमने आलू को पानी मे डाला था उस समय ये बहुत हार्ड था लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद में ये बिल्कुल सॉफ्ट हो गए यानी कि कमजोर पड़ गए। दूसरे थे अंडे जो गर्म पानी में जाने से पहले अंदर से बिल्कुल भी कमजोर थे लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद अंदर से मजबूत हो गए। तीसरी थी कॉफी जिसने ऐसा कुछ किया जो इन दोनों से अलग था।


यानी कि उसने गर्म पानी में जाकर खुद को नहीं बदला बल्कि उस गर्म पानी को ही बदल दिया। बिल्कुल इसी तरह से हमारी जिंदगी में भी होता है। तुम्हारे ऊपर है कि तुमको इन तीनों में से क्या बनना है? 


पहला आलू के जैसा यानी कि तुम्हारी जिंदगी में कोई मुश्किल आये तो तुम पूरी तरह से टूट जाओ, कमजोर पड़ जाओ। दूसरा उस अंडे के जैसा यानी कि जैसे ही तुम्हारी जिंदगी में कुछ मुश्किलें आये वो मुश्किलें तुमको तोड़े नहीं बल्कि तुम अंदर से और स्ट्रांग हो जाओ या फिर तीसरा यानी कि कॉफी के जैसा।


यानी कि जब तुम्हारी जिंदगी में कुछ मुश्किलें आये तो तुम उन मुश्किलों का ना सिर्फ डंटकर के सामना करो बल्कि अपनी जिंदगी को हो बदल दो।

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