Acharya Prashant Biography, Wikipedia & Quotes In Hindi

Acharya Prashant Biography, Wikipedia & Quotes In Hindi

Acharya Prashant Biography Wikipedia, Age, Wiki, History, Family In Hindi | आचार्य प्रशांत की जीवनी


Acharya Prashant Biography: हम भारत के एक ऐसे शख्स की जीवनी के बारे में जानने वाले हैं जिन्होंने न सिर्फ भारत के लोगों के जीवन को बदलने में अहम भूमिका निभाई बल्कि दुनिया भर के लाखों लोगों को अपना मुरीद बना लिया।


जरा आप सोचकर देखिये जिस लड़के ने IIT और IIM जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों शिक्षा प्राप्त करने के बाद किसी बड़े मल्टीनेशनल कंपनियों में उच्च पदों पर काम करने बजाय अध्यात्म की राह पर चलने का रास्ता चुना हो उसे कितने लोगों के ताने सुनने पड़े होंगे।


माता-पिता को कैसा महसूस हुआ होगा? ये लड़का न सिर्फ आइआइटी और आईआईएम जैसे परीक्षाओं को पास किया था बल्कि सिविल सर्विसेज का एग्जाम पास करने के बावजूद भी अध्यात्म की दुनिया को चुना।


इस लड़के के फैसले ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर इसने ऐसा क्यों किया? ये लड़का कोई और नहीं बल्कि आचार्य प्रशान्त जी ही थे।


आखिर उनके इस फैसले का असली वजह क्या रहा होगा, आइये हम इस अनुसनी कहानी को आचार्य प्रशांत की जीवनी के माध्यम से पूरी जानकारी विस्तार से जानते हैं।


Table Of Contents:

आचार्य प्रशांत का जीवन परिचय

आचार्य प्रशांत का परिवार

आचार्य प्रशांत का बचपन

आचार्य प्रशांत की शिक्षा

आचार्य प्रशांत का करियर

Acharya Prashant Contact Number

Acharya Prashant Important Books

आचार्य प्रशांत के 10 अनमोल वचन


आचार्य प्रशांत का जीवन परिचय | Who Is Acharya Prashant In Hindi

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Acharya Prashant Biography In Hindi

दोस्तों आचार्य प्रशांत जी का जन्म 7 मार्च 1978 को उत्तर प्रदेश के आगरा में महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। बचपन से ही काफी तीव्र बुद्ध के थे। ये परिवार के 3 भाई-बहनों में बड़े है।


आचार्य प्रशांत के पिता एक सरकारी अफसर हुआ करते थे और माता जी एक गृहणी थी। जन्म आगरा में होने के बाद इनके बचपन का अधिकांश समय उत्तर प्रदेश में ही बीता।


पूरा नाम- प्रशांत त्रिपाठी

निकनेम- प्रशांत

जन्म- 7 मार्च 1978

उम्र(Age)- 43 वर्ष

पत्नी का नाम- N/A

जन्मस्थान- आगरा, उत्तर प्रदेश

आईएएस रैंक- N/A

प्रोफेशन- धर्मगुरु, वक्ता

फीस/Fees- N/A

धर्म- हिन्दू

नेट वर्थ- N/A

राष्ट्रीयता- भारतीय


आचार्य प्रशांत का परिवार | Acharya Prashant Family


दोस्तों आचार्य प्रशान्त जी के परिवार में उनके अलावा इनके माता-पिता और तीन भाई-बहन है। पिताजी सरकारी नौकरशाह थे और माता एक गृहणी का काम करती थी। तीनों भाई-बहनों में प्रशांत जी सबसे बड़े थे। इनके वाइफ नाम के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है।


आचार्य प्रशांत का बचपन | Acharya Prashant Early Life Story In Hindi


आचार्य प्रशांत जी बचपन से ही शरारती बच्चे होने के साथ-साथ हर चीज के बारे में जानने के लिए गहरा चिंतन करने वाले बच्चे थे। उनके इस स्वभाव को माता-पिता के अलावा इनके टीचर भी समझ गए थे।


उनके गुरु के अनुसार ये शुरू से ही कभी मजाकिया अंदाज में सबसे व्यवहार करते थे तो पल भर में ही किसी बात को लेकर गम्भीर हो जाते थे। उनके इस स्वभाव को दोस्तों ने भी अभी तक नहीं भूले हैं।


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शुरू से ही आचार्य प्रशांत जी की गिनती क्लास के सबसे तेज विद्यार्थियों में होती थी। क्लास में हमेशा टॉप करने के वजह से उनको कई बार अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। आचार्य जी के क्लास में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उनके माताजी को कई बार 'Mother Queen' के अवार्ड से भी सम्मानित किया न चुका है।


आचार्य प्रशांत जी शिक्षक के अनुसार इनके हर विषय में अभूतपूर्व ज्ञान के चलते सभी टीचर हैरान रहते थे। वे कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा विद्यार्थी कभी नहीं देखा था कि जो हर विषय में इतना कुशल हो।


उनके विलक्षण प्रतिभा को देखते हुए राज्य के तत्कालीन राज्यपाल ने बोर्ड परीक्षा में नया बेंचमार्क खड़ा करने और NTSE स्कॉलर बनने के लिए अवार्ड देकर सम्मानित किया था।


Acharya Prashant Qualification | आचार्य प्रशांत की शिक्षा


आचार्य प्रशांत जी बहुत ही छोटे उम्र यानी 5 वर्ष की उम्र से ही पढ़ने के काफी शौकीन थे। पहले से ही पिताजी के घर की लाइब्रेरी में मौजूद आध्यात्मिक साहित्य, उपनिषद और दुनिया के बेहतरीन किताबों को लेकर घर के किसी कोने में जाकर पढ़ा करते थे।


उन किताबों को पढ़ने में उनको इतना मन लगता था कि वे खाना-पीना भूल जाते थे।


आप इनके विलक्षण प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि मात्र 10 वर्ष के उम्र तक होते-होते पिताजी के लाइब्रेरी में मौजूद सारी किताबों को पढ़ डाली थी। इतनी सारी किताबों को पढ़ने के बावजूद इनको पढ़ने से मन नहीं भरता था और पिताजी से दूसरा किताब लाने की जिद्द करने लगते थे।


इन्होंने मात्र 11 साल की उम्र में अपनी पहली कविता लिखकर सबको हैरान कर दिया था। इनके कविता के हर एक शब्द में इतना गहरा रहस्य छिपा रहता था जिसको समझ पाना सबके बस की बात नहीं थी।


राजधानी लखनऊ में कई साल बिताने के बाद 15 वर्ष की उम्र में पिताजी का ट्रांसफर होने के चलते गाजियाबाद जाकर रहना पड़ा। कहते हैं कि परिस्थितियों के अनुरूप इंसान को बदलते रहना चाहिए। ठीक ऐसा ही कुछ आचार्य प्रशांत जी ने भी किया।


देर रात तक जगकर पढ़ाई पूरी करने के बाद सोते समय आसमान को निहारते रहते थे। आकाश को अक्सर निहारने की ये आदत उनके कविता को और रहस्यमयी बनाती गयी। जिसके बाद उनका अधिकतर कविता आसमान और चांद से ही प्रेरित है।


धीरे-धीरे आचार्य प्रशांत जी का ध्यान एकेडेमिक शिक्षा से हटकर रहस्यमयी चीजों को जानने की तरफ आकर्षित होने लगा। लेकिन ध्यान हटने के बाद भी एकेडेमिक शिक्षा में इनका प्रदर्शन काफी शानदार रहा और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में इनका एडमिशन हो गया।


आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने छात्र राजनीति में गहरे लगाव से लेकर, डिबेट और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। उनके हर क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए कई अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।


एक कार्यक्रम में तो उनको 'बेस्ट एक्टर अवार्ड' से भी सम्मानित किया गया था। जहाँ उन्होंने न तो कुछ बोला था और न ही कोई अभिनय किया था।


आचार्य प्रशांत जी अपने आसपास के लोगों को देखकर उन्होंने ये देखा कि मानव की पीड़ा के जड़ में ही एक अधूरी धारणा छुपी हुई है।


उसके बाद से ही लोगों के अंदर इस छुपी पीड़ा को दूर करने के लिए आचार्य जी ने इंडियन सिविल सर्विसेज(IAS) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसी संस्थाओं से जुड़कर उन्होंने लोगों की सेवा करनी चाही।


जिसके बाद उन्होंने इंडियन सिविल सर्विसेज और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) अहमदाबाद में दाखिला ले लिया। लेकिन आचार्य प्रशांत जी को सिविल सर्विसेज में रैंक कम होने के वजह से उनको पसंदीदा IAS की सीट नहीं मिल पाई।


जिसके बाद उन्होंने पहले ही देख लिया था कि सरकारी नौकरशाह बनकर समाज को क्रांतिकारी बदलाव नहीं ला सकते हैं जो वो चाहते हैं। जिसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज को छोड़कर IIM में अपना एडमिशन ले लिया।


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आचार्य प्रशांत जी ने IIM में दो साल बिताने के बाद अपनी अकादमिक शिक्षा पूरी की। लेकिन अपने ज्ञान को सिर्फ डिग्री और प्लेसमेंट तक ही सीमित नहीं रखना चाहते थे। उनको जीवन में कुछ अलग करना था, जो अभी भी पूरा होता नहीं दिख रहा था।


आचार्य प्रशांत का करियर | Acharya Prashant Full Life Story In Hindi


आचार्य प्रशांत नियमित रूप से गांधी आश्रम के पास स्थित NGO में जाकर बच्चों को पढ़ाकर अपना समय व्यतीत किया करते थे। इसके अलावा ग्रेजुएट बच्चों को NGO का खर्च चलाने के लिए गणित विषय भी पढ़ाते थे।


इसके अलावा उन्होंने मानव में छिपी अज्ञानता को थिएटर के माध्यम से भी समाज के बीच लाने की पूरी कोशिश की। उन्होंने खामोश, अदालत जारी है, द नाईट ऑफ जनवरी 16th, पगला घोड़ा और गैंडा जैसी नाटकों में अपने दमदार अभिनय के साथ अपने डायरेक्शन में भी छाप छोड़ा। इसके अलावा उन्होंने एक ही बार दो नाटकों को एक साथ डायरेक्ट भी किया था।


आचार्य प्रशांत जी IIM अहमदाबाद ऑडिटोरियम के अलावा शहर के बाहर भी अपने शानदार परफॉर्मेंस दिए। जहाँ उनको लोगों का काफी प्यार मिला।


इन छोटे-छोटे नाटकों के बाद आगे बड़े मंचों पर भी अपना हुनर दिखाने के लिए तैयारी करते रहते थे। समय बीतने के साथ-साथ उनको पढ़ाई में भी काफी मन लगता था। आगे उनको किन-किन चुनौतियों का सामना करना होगा और आगे क्या करना होगा ये सब उनको अब समझ आने लगा था।


उन्होंने अपने पाठ्यक्रम के द्वारा अपनी आध्यात्मिक शिक्षा का ज्ञान अनेकों लोगों तक पहुचाने लगे।


कॉरपोरेट जगत में कुछ समय बिताने के बाद जब इनको लगा कि गए काम उनके सपनों में बाधा बन रहा है तो इन्होंने 28 साल की उम्र में कॉरपोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया और मानव जीवन में गहरा परिवर्तन लाने के लिए अद्वैत लाइफ एजुकेशन की स्थापना की।


शुरुआती दिनों में वे कॉलेज के विद्यार्थियों को सेल्फ डेवेलपमेंट सिखाना शुरू किया और प्राचीन साहित्यों को आसानी से समझाने की कोशिश किया।


उनके इस प्रयास को लोगों के द्वारा काफी प्रशंसा मिली। मगर इन सबके अलावा उनको एक नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। उनकी चुनौती ये थी कि अभी की शिक्षा व्यवस्था में परीक्षा पास करने और डिग्री हासिल करना सबसे बड़ा मकसद होता है।


लेकिन व्यक्तिगत विकास कैसे हो, इसका ज्ञान कोई भी किताब में नहीं मिलता है। ये बात कॉलेज के विद्यार्थियों को पहुँचाना इतना आसान नहीं था। उनके माता-पिता को भी ये बातें समझा पाना इतना आसान नहीं होता था।


लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लोगों तक अपनी बात पहुँचाने की पूरी कोशिश करते रहे। उनके इस प्रयास ने लोगों के जीवन को बदलने में काफी बड़ा रोल निभाया।


इसके बाद 30 साल की उम्र में आचार्य जी ने अपने संवाद के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुचाने के लिए अपना काम तेजी से आगे बढ़ाया। अपने इस संवाद को ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से भी लाखों लोगों तक पहुँचाया। आप इनके अनमोल ज्ञान का वीडियो इनके यूट्यूब चैनल पर जाकर देख सकते हैं।


आप इनके जीवन को बदल देने वाली वीडियो को जरूर देखना चाहिए जिसने लाखों लोगों को जीवन बदलने में सबसे अहम भूमिका निभाई।


Acharya Prashant Contact Number


दोस्तों अगर आप आचार्य प्रशांत जी से जुड़ना चाहते हैं और उनके अनमोल विचारों को अपने जीवन में शामिल करके अपने जीवन को बदलना चाहते हैं तो आप निचे दिए गए नम्बर के माध्यम से contact कर सकते हैं।

+91-9650585100, +91-9643750710

Email to - requests@advait.org.in


Acharya Prashant Important Books Name

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आप इनके द्वारा लिखी गयी books को भी मंगाकर पढ़ सकते हैं जो निश्चय ही आपके जीवन को सही दिशा में बदलने का रास्ता दिखायेगा।


आचार्य प्रशांत जी द्वारा लिखी गयी कुछ महत्वपूर्ण किताबें:

●प्रेम

● अहम्

● डर

● विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई, और मौज

● शक्ति

● सर्वसार उपनिषद्

● हीरा जनम अमोल है

● कामवासना

● भागे भला न होएगा

● श्री कृष्ण

● अकेलापन और निर्भरता

● जाका गला तुम काटिहो

● सत्यं शिवं सुन्दरम्

● स्त्री

● रात और चाँद

● लिखनी है नई कहानी?

● क्रांति

● वेदांत

● सफलता

● श्वेताश्वतरोपनिषद

● उपनिषद्

● सम्बन्ध

● प्रेम सीखना पड़ता है

● भारत

● हे राम!

● हिंदी

● आध्यात्मिक भ्रांतियाँ

● गुरु बेचारा क्या करे

● पैसा


आचार्य प्रशांत के 10 अनमोल विचार | Acharya Prashant 10 Motivational Quotes In Hindi


1. जीवन रंगमंच की तरह है, इसमें समझदारी से अपना किरदार निभाए।

2. अगर जीवन में परेशान रहते हैं तो हो सकता है कि आपको जीवन जीने का तरीका पता नहीं है।

3. जरूरत से अधिक अपेक्षायें और कुछ नहीं है बस क्रोध का निमंत्रण है।

4. अपने खुद के जीवन का निरक्षण करें फिर आप सत्य को पहचान पाएंगे।

5. किसी व्यक्ति को उसकी ऊँची आवाज़ से नहीं पहचाने, बल्कि उसके मौन की गहराई से पहचाने।

6. आपके अंदर कितना भी खामियां हैं आप बस ये जाने कि सबसे परफेक्ट है।

7. जिंदगी की परीक्षा में कोई भी प्रश्न दोहराया नहीं जाता है।

8. यदि आप दूसरों का शोषण मर सकते हैं तो आप खुद का भी शोषण कर लेंगे।

9. खेल में खिलाड़ियों से लड़ने के बजाय बजाय खेल से लड़ें।

10. डर से उत्पन्न होने वाली क्रिया से और डर उत्पन्न होता है।


उम्मीद है कि दोस्तों आपको आचार्य प्रशांत की जीवनी काफी अच्छी और प्रेरणादायक लगी होगी। अगर आपको Acharya Prashant Biography In Hindi पसन्द आया हो तो इसे शेयर करना न भूलियेगा धन्यवाद।


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