Garud Puran In Hindi | गरुड़ पुराण की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी

Garud Puran In Hindi | गरुड़ पुराण की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी

Garud Puran In Hindi PDF | गरुड़ पुराण के अनुसार क्या आत्महत्या भी भगवान के मर्जी से होता है, मरने के बाद आत्मा का क्या होता है?


दोस्तों, आज आप सभी को गरुड़ पुराण की ऐसी दो कथा के बारे में बताने वाले हैं जिसको जानने के बाद आपके आंखों पर से अनगिनत पर्दे उठ जाएंगे। आज आपको यहाँ ऐसी-ऐसी अनमोल ज्ञान मिलने वाली है जो आपके लिए बहुत जरूरी है।


इस पोस्ट में हम जानेंगे कि गरुड़ पुराण के अनुसार क्या आत्महत्या भी भगवान के मर्जी से होता है, आदमी के मरने के उसके आत्मा का क्या हाल होता है?


इन्हीं सब महत्वपूर्ण बातों के पीछे की पूरी सच्चाई जानने के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।


Garun Puran Katha In Hindi | लोग आत्महत्या क्यों करते हैं?


आप सभी ने एक पुरानी कहावत तो सुनी ही होगी कि जो भगवान चाहेंगे वो होकर रहेगा। हमारे आसपास कई सारी ऐसी घटनाएं होती है जिसे देखकर हम ये सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि क्या ये भी भगवान के ही मर्जी से हुआ है या इसके पीछे की सच्चाई कुछ और ही है।


हमारे आसपास घटित होने वाली घटनाओं में से एक घटना आत्महत्या भी है। हम सब जानते हैं कि जो हो रहा है सब भगवान की मर्जी से हो रहा है तो क्या आत्महत्या भी भगवान के मर्जी से होता है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ना होगा।


इस सवाल का जवाब जानने से पहले आइये जानते हैं कि कर्म क्या होता है? आप सब एक बात हमेशा सुनते होंगे कि हम जो कर रहे हैं वो इस जन्म के भाग्य के अनुसार हो रहा है। हम आज जो भी है अपने भाग्य के बदौलत है। जबकि ये बात बिल्कुल गलत है।


गीता के अनुसार हमें अपने कर्म के अनुसार ही अगले जन्म का भाग्य लिखा जाता है। हम किस योनि में जन्म लेंगे ये भी हमारे इस जन्म के कर्म पर निर्भर है, आज हम जो भी फल भोग रहे हैं वह हमारे पिछले जन्मों का कर्म के कारण होता है।


इस बात में कितनी सच्चाई है इस बात की जानकारी के लिए हमें कर्म के सिद्धांत को बारीकी से समझना होगा।


आप इस दुनिया में है तो आपका कर्म करना ही पड़ेगा। आप सोते-जागते हमेशा कर्म ही करते रहते हैं। कर्म का सम्बंध हमारे शरीर, मन, मस्तिष्क और चित की गति से है। अभी किये गए कर्म के आधार पर ही अगले कर्म का निर्धारण होता है।


शरीर, मन और वाणी के द्वारा किया गया क्रिया को कर्म कहा जाता है। कर्म तीन प्रकार के होते हैं- संचित, प्रारब्ध और क्रियमाण।


कई जन्मों में किया गया कर्म संचित कर्म कहलाता है। इसमें पिछले जन्म के कर्म से लेकर इस जन्म में किया गया कर्म शामिल होता है। संचित कर्म का वो भाग जो हमें इस जन्म में भोगना पड़ता है उसमें हम प्रारब्ध कहते हैं। क्रियमाण कर्म उस क्रिया को कहते हैं जो हम अभी कर रहे हैं।


कर्म करना कितना जरूरी है इसकी महत्ता तुलसीदास ने रामचरितमानस में एक श्लोक में ही बता दिया था- "कर्म प्रधान विश्व करि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा"। अर्थात आप जैसा कर्म करेंगे वैसा ही फल आपको प्राप्त होगा।


इसी आधार पर कुछ लोगों के मन में ये सवाल उत्पन्न होता है कि जब सबकुछ पिछले जन्म के आधार पर हो रहा है तो अगर कोई आत्महत्या करता है तो क्या वह पिछले जन्म में किये गए कर्म के आधार पर करता है, क्या ये आत्महत्या पहले ही निश्चित था?


अगर आप भी यही सोच रहे हैं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, आत्महत्या निश्चित नहीं होता है क्योंकि ईश्वर ने हमें पिछले जन्म के आधार पर सिर्फ परिस्थियां दी है। जिस पर किसी का अधिकार नहीं होता है। लेकिन भगवान ने हमें मनोस्थिति भी दी है। जो हम पर निर्भर होता है न कि ईश्वर के ऊपर।


आप अपने मनोस्थिति को जिस तरह उपयोग करेंगे उसका वैसा ही परिणाम भी भुगतना होगा। जब आप कभी अपने दुखों से तंग आकर अवसाद में चले जाते हैं तो आपको लगता है कि अब इस जीवन में कुछ भी नहीं बचा है। अब जी कर क्या करेंगे? इस तरह जीने से तो अच्छा है कि आत्महत्या कर लेता हूँ।


आपके जिस मन में आत्महत्या करने का विकल्प है उसी मन में तो भगवान की भक्ति करने का भी विकल्प मौजूद होता है। आप आत्महत्या के जगह पर भगवान की भक्ति भी तो कर सकते हैं। मतलब कि आपके पास आत्महत्या और भक्ति दोनों का विकल्प मौजद था। फिर आपने सही रास्ते छोड़कर गलत रास्ते को क्यों चुना?


आप अपने परिस्थिति को बदल नहीं सकते हैं क्योंकि ये आपके हाथ में नहीं है लेकिन मनोस्थिति को तो बदल सकते हैं वो तो आपके हाथ में है।


परिस्थितियां जरूर आपके भाग्य से आता है लेकिन आप उन परिस्थितियों को किस तरह संभालते हैं ये केवल आपके मनोस्थिति पर निर्भर करता है। एक बात और आप भली भांति जानते हैं कि मनोस्थिति आपके हाथ में होता है भगवान के हाथ में नहीं।


आप इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि मान लीजिये कि आप किसी परीक्षा में बैठे हैं। परीक्षा में आपको बहुविकल्पीय प्रश्न आते हैं। आप वहाँ उनमें से किसी एक को चुनने के लिए स्वतंत्र होते हैं। ठीक इसी तरह हमारे साथ भी होता है।


हमारे मन में हमेशा कुछ न कुछ चलता रहता है। हर रोज हजारों विचार हमारे मन में आते हैं और जाते हैं। कुछ विचार एक बार आकर चले जाते हैं तो कुछ बार-बार आते हैं। जो विचार बार-बार आते हैं उस पर हम अमल करना शुरू कर देते हैं।


ये विचार कर्म में बदल जाता है। ये विचार अगर सुविचार होंगे तो अच्छे कर्म बन जाते हैं और गलत विचार आते हैं तो गलत कर्म बन जाते हैं। इस तरह हम कह सकते हैं कि हमारे अच्छे और बुरे कर्म हमारे विचारों पर निर्भर करता है।


मन में कोई न कोई विचार हमेशा आता ही रहता है और हम कर्म के बाद कर्म करते चले जाते हैं। इसलिए अक्सर आप साधु-संतों को ये कहते हुए सुना होगा कि अगर इस जन्म में और अगले जन्म में सुखी रहना चाहते हो तो "मनसा वाचा कर्मणा"। अर्थात कभी किसी का मन से, कर्म से और वचन से बुरा न करो।


आप अपने परिस्थितियों को कभी बदल नहीं सकते हैं लेकिन अपने कर्म को बदलकर अपना जीवन जरूर बदल सकते हैं। ये सुख और दुख जीवन का अभिन्न हिस्सा है।


आप अपने भाग्य के निर्माता खुद है। अगर आपका कर्म अच्छा होगा तो आप हर परिस्थिति से लड़ सकते हैं और अगर आपका कर्म बुरा है तो आपके मन में आत्महत्या का ख्याल जरूर आएगा। इसलिए आप समझ गए होंगे कि आत्महत्या भगवान की मर्जी से नहीं होता है बल्कि आपके वजह से होता है।


इसलिए गरुड़ पुराण में आत्महत्या को महापाप माना गया है। गरुड़ पुराण में आत्महत्या करने वालों के लिए बताया गया है कि उनके आत्मा को कई तरह के कष्ट झेलने पड़ते हैं और उसकी मुक्ति भी आसानी से नहीं हो पाती है।


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गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा का क्या हाल होता है | Garud Puran Ki Katha


कहा जाता है कि मृत्यु मानव जीवन का सबसे बड़ा सत्य है। लेकिन मृत्यु के बाद क्या होता है ये कोई नहीं जानता है। मृत्यु के बाद क्या होता है, आत्मा कैसे शरीर का त्याग करता है, आदमी मरने के बाद कहा जाता है? इन सभी सवालों का जवाब आपको सिर्फ और सिर्फ गरुड़ पुराण में मिलेगा।


एक बार भगवान विष्णु के सवारी गरुण भगवान से पूछते हैं कि हे प्रभु! आदमी के मरने के कितने दिनों बाद आत्मा यमलोक पहुँचती है? इस बात का जवाब देते हुए भगवान ने कहा कि मनुष्य का आत्मा मरने के 47 दिन बाद यमलोक पहुँचता है।


आइये आपको बताते हैं कि गरुड़ पुराण के अनुसार इंसान के मृत्यु के 47 दिन तक आत्मा का क्या हाल होता है? इस रहस्य को जानने के लिए आप इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ियेगा।


गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद आदमी का आवाज चली जाती है। जैसे ही मनुष्य का शरीर सांस लेना बंद कर देता है, वैसे ही उसे एक दिव्य दृष्टि मिलती है। ये दिव्य दृष्टि आत्मा को इसलिए मिलती है ताकि वो पूरी दुनिया को एक समान देख सके।


इसके बाद आत्मा को यमलोक लेन के लिए यमदूत आते हैं। कहा जाता है कि आत्मा को ले जाने के लिए एक नहीं बल्कि दो यमदूत धरती पर आते हैं। यमदूतों को देखते ही आत्मा डर के मारे चीखने चिल्लाने लगता है।


फिर जैसे ही आत्मा शरीर से बाहर आता है यमदूत उस आत्मा के गले में एक पाशव बांध देते हैं। फिर यमदूत उसे यमलोक लेकर जाते हैं। कहा जाता है कि अगर आत्मा शुद्ध हो तो उसे ले जाने के लिए स्वयं परमात्मा का वाहन लेने आते हैं।


लेकिन अगर आत्मा बुरे हो तो उसे गर्म रेत और अंधेरे रास्ते से लेकर जाया जाता है। अगर आत्मा ने कोई पाप किया है तो जसे यमलोक पहुँचने के बाद काफी यातनाएं दी जाती है। इसके बाद उस बुरी आत्मा को धरती पर आने के लिए छोड़ दिया जाता है।


जिसके बाद वो आत्मा अपना अंतिम रस्म खुद अपनी आंखों से देखता है। मौत के 12 दिनों तक आत्मा अपनों के घर में रहती है। फिर 13वें दिन जब उस आत्मा का पिंडदान हो जाता है तो दोबारा यमदूत उसे वापस ले जाने के लिए आते हैं।


लेकिन आत्मा के लिए इसके बाद का रास्ता काफी कठिन होता है। आपके जानकारी के लिए बता दें कि गरुण पुराण के अनुसार अगर आत्मा को स्वर्ग की प्राप्ति होती है तब तो ये रास्ता काफी आसान होता है, लेकिन अगर आत्मा बुरी है तो उसे बैतरनी नदी को पार करना होता है।


अब आप सोच रहे होंगे कि बैतरनी नदी क्या होता है? आपके बता दें कि गंगा नदी के रौद्र रूप को बैतरनी नदी कहा जाता है। जी हां आपने बिल्कुल सही सुना। ये गंगा की भयानक और खौफनाक रूप है। कई पुराणों में लिखा गया है कि बैतरनी नदी का जल लाल रंग का होता है। इस नदी में आग के अंगारे होते हैं और इसमें बेहद डरावने जीव पाए जाते हैं।


कर्मों के अनुसार आत्मा को इस नदी से ले जाया जाता है। अगर आत्मा ने बहुत पाप किया है तो उसे नदी पर घसीटकर ले जाया जाता है। इस दौरान आत्मा को ऐसे लगता है कि जैसे उसको कोई काट रहा हो, उसे कोई जला रहा है, उसके शरीर के टुकड़े किया जा रहा है।


वहीं पर अगर आत्मा चाहे कितना भी पाप किये हो लेकिन एक भी पूण्य किया है तो उस आत्मा को बैतरनी नदी के ऊपर वाहन से ले जाया जाता है। खासतौर पर अगर महापापी इंसान कभी भी अपने जीवन में एक बार भी गौदान किया हो तो उसे बैतरनी नदी के ऊपर से होकर वाहन के द्वारा ले जाया जाता है।


आपको बता दें कि बैतरनी नदी का ये सफर 47 दिनों का होता है। कस दौरान पापी आत्मा को कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती है। 47 दिन के बाद आत्मा बैतरनी नदी को पार कर यमलोक पहुचती है।


आज से हम है उम्मीद करते हैं कि आप कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहेंगे। आप हमेशा सबका भला करने की कोशिश करेंगे। आप अगर अच्छा कर्म करेंगे तो आपके साथ भी अच्छा ही होगा।


आपको गरुड़ पुराण की कथा सुनकर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा। साथ ही आपको गरुड़ पुराण के अनुसार बताये गए कौन सा बात सबसे अच्छा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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