छठ पूजा करने का नियम और पूजा विधि 2022 | Chhath Puja Complete Information In Hindi

छठ पूजा करने का नियम और सम्पूर्ण पूजा विधि, सामग्री 2022 | चैती छठ पूजा कैसे करें, विधि, सामग्री | Chhath Puja Vidhi In Hindi

 

नमस्कार दोस्तों! हमलोगों का सबसे प्यारा पर्व अर्थात महापर्व के नाम से मशहूर छठ पूजा की तैयारी जोरों पर है। ये पर्व ही ऐसा है कि कोई चाह कर भी इसको मिस करना नहीं चाहता है। ये पर्व तो मानो सभी हिंदुओं के दिलों में बस गया है। हर कोई इस पर्व को लेकर इतना उत्साहित रहता है कि उसके इस उत्साह का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है।

 

ये पर्व हम सबको जितना खुशी देता है उतना शायद ही कोई पर्व खुशी देता है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि हर साल लाखों महिलाएं छठ पूजा का व्रत पहली बार करती है। उनको अच्छे से पता नहीं होता है कि छठ पूजा कैसे करें?

 

ऐसे में हम सभी को महापर्व छठ पूजा की विधि और उसके पूजा के बारे में जान लेना अतिआवश्यक है। आप सभी जानते हैं कि हमें कोई पूजा का फल तभी प्राप्त होता है जब हम उसे पूरी विधिपूर्वक करें।

 

तो आइए हम सभी छठ पूजा के बारे में पूरी जानकारी विस्तार से जानते हैं।

 

Chaiti Chhath Puja Kab Hai 2022 | छठ पूजा कब है 2022?

 

हमारे हिंदू सनातन धर्म में चैत्र मास को काफी पवित्र महीना माना जाता है। इस महीने में हमारे कई त्योहार आता है। उनमें से ही एक त्योहार छठ पूजा है। आप सभी लोग जानते हैं कि छठ पूजा को हिंदू धर्म के लोग कितना धूमधाम से मनाते हैं। इस मास में चैत्र नवरात्र के आरंभ होने के साथ विक्रम संवत 2079 का आरंभ, चैती छठ, रामनवमी, कामदा एकादशी व्रत, सतुआनी समेत कई प्रमुख पर्व और त्यौहार हैं।

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार दो अप्रैल को रेवती नक्षत्र एवं इन्द्र योग में हिंदू नव संवतसर का आरंभ तथा कलश स्थापना के साथ चैती नवरात्र का भी आरंभ होगा। वहीं, पांच अप्रैल से चैती छठ नहाय-खाय के साथ आरंभ होने के बाद 6 अप्रैल को खरना, 7 अप्रैल को सन्ध्या अर्ध्य, आठ अप्रैल को सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व छठ का समापन होगा। वहीं, इसी महीने के 10 अप्रैल को रामनवमी का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

 

छठ पूजा का पर्व क्यों मनाया जाता है?

 

छठ पूजा का व्रत बहुत ही सुखदाई और मनवांछित फल देने वाला होता है। ये व्रत संतान की सुरक्षा, पति की सुरक्षा और घर की सुरक्षा से किया जाता है। खासकर के सन्तान की सुरक्षा के लिए तो ये व्रत जरूर करना चाहिए।

 

अगर आपका कोई संतान नहीं है तो भी आपको ये व्रत संतान प्राप्ति के लिए अवश्य करना चाहिए। छठ मैया की कृपा से आपको संतान का सुख अवश्य प्राप्त होगा।

 

इसके अलावा कुष्ठ रोगियों को ये व्रत जरूर करना चाहिए। छठ का व्रत कुष्ठ रोगियों को अपने रोग के निवारण के लिए जरूर करना चाहिए। छठ पूजा का व्रत कई तरह के बीमारियों को दूर करता है।

 

कुंवारी लड़कियां छठ व्रत कर सकती है कि नहीं?

 

छठ पूजा कुंवारी कन्यायें नहीं करती है। यह व्रत शादीशुदा महिलाओं को ही करना चाहिए। हाँ यदि किसी लड़की का कोई विशेष मन्नत है तो कर सकती है। लेकिन इसके लिए बड़े-बुजुर्गों का सलाह अवश्य लेना चाहिए।

 

छठ व्रत कैसे छोड़े | छठ व्रत छोड़ने का नियम

 

आप सभी जानते हैं कि छठ व्रत करना कितना कठिन होता है। हर कोई के लिए इस पर्व को कर पाना आसान नहीं होता है। ऐसे में अगर कोई आदमी शारीरिक रूप से अस्वस्थ है या फिर वो छठ पूजा कर पाने में असमर्थ हो रहे हैं तो ऐसे लोगों को अपने बहु बेटियों को छठ व्रत दे सकती है।

 

अब आप ये जानने के लिए उत्सुक होंगे कि छठ व्रत कैसे छोड़ा जाता है? आइये विस्तार से आपको बता देते हैं। अगर आपकी कोई बहु है तो सास को अपने बहु के साथ छठ व्रत करना होगा।

 

फिर आप जितने सूप में अर्घ्य देती हैं उतना सूप आप जिसको देना चाहती है अर्थात अपने बहु को दे दें। कुछ लोग पंडित जी को भी बुलाकर उनसे छठ व्रत दूसरे को दिलवा देते हैं। आप चाहे तो ऐसा भी कर सकती है।

 

अगर आपके घर में कोई बहु बेटी छठ लेने के लिए नहीं है तो फिर आप पंडितजी को बुलाकर पूजा अर्चना कर भगवान को प्रणाम करके आप जो अर्घ्य देती है उसका एक सूप पानी में बहा दीजिये। इस तरह भी आप छठ व्रत को छोड़ सकते हैं।

 

ये था छठ व्रत छोड़ने का नियम। अगर आप कभी छठ व्रत करने में असमर्थ होते हैं तो आप इस नियम के अनुसार छठ व्रत छोड़ सकती है।

 

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छठ पूजा कैसे करते हैं – Chhath Puja Kaise Karen In Hindi

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छठ पूजा के समय अपने पूरे घर को अच्छे से सफाई जरूर करें। खास करके आप छठ पूजा का जहाँ खाना बनाएगी उस जगह को अच्छे से जरूर साफ करना चाहिए।

 

एक बात खास करके ध्यान देना चाहिए कि आप जिस चूल्हे पर कभी मांसाहारी भोजन बनाये हुए हैं उस पर भूलकर भी छठ व्रत का कोई भी प्रसाद नहीं बनाना चाहिए। हो सके तो आप छठ व्रत के लिए कोई अलग से नया चूल्हे का उपाय कर लें।

 

छठ पूजा करने वाले लोग दीपावली के दिन से ही लहसुन और प्याज खाना छोड़ देते हैं। बहुत सारे लोग पूरे कार्तिक मास में लहसुन प्याज का सेवन नहीं करते हैं। आप चाहे तो ऐसा कर सकती है या फिर कम से कम दीपावली के बाद से लहसुन प्याज नहीं खाना चाहिए।

 

फिर नहाय खाय के दिन आपको अच्छे से अपने बालों को धोकर नहा लेना चाहिए। इस दिन आपको नदी या तालाब में ही नहाना चाहिए। अगर आपके पास कोई नदी या तालाब नहीं है तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्न्नान करें। नहाने के बाद पूजा-पाठ करने के बाद ही भोजन करना चाहिए। आपको नहाय खाय के दिन क्या नहीं खाना चाहिए आइये जानते हैं।

 

नहाय-खाय के दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए?

 

जो लोग छठ व्रत करते हैं वे अच्छे तरह से जानते होंगे कि इस व्रत में नहाय-खाय का कितना बड़ा महत्व होता है। इसलिए आपको क्या खाना चाहिए क्या नहीं खाना चाहिए आइये पूरी विस्तार से जानते हैं।

 

छठ व्रत में नहाय खाय के दिन भूलकर भी अपने खाने में लहसुन प्याज और मसूर के दाल का उपयोग नहीं करना चाहिए। मसूर के दाल को पूजा के लिए शुद्ध नहीं माना जाता है। इसके अलावा आप बैगन, मूली और कद्दू का सेवन बिल्कुल भी न करें। छठ व्रत करने वालों के लिए नहाय-खाय के दिन सरसों तेल का भी उपयोग नहीं करना चाहिए।

 

अगर आप नहाय-खाय के दिन शुद्ध घी का उपयोग करते हैं तो काफी बढ़िया है लेकिन कुछ लोग घी नहीं खरीद सकते हैं तो आपको इस दिन रिफाइंड तेल या सूर्यमुखी के तेल में खाना बनाना चाहिए। इस दिन आपको चने का दाल या फिर अरहर का डाल जरूर बनाना चाहिए।

 

आपको इस दिन लौकी का बना हुआ सब्जी जरूर खाना चाहिए, क्योंकि नहाय-खाय के दिन लौकी के सब्जी को बहुत शुभ माना जाता है।

 

पीरियड में छठ पूजा कैसे करें?

 

अगर आपके पीरियड का पांचवा दिन है तो ही आपको छठ व्रत करना चाहिए, क्योंकि पीरियड के 5वें दिन से देवी का पूजा शुरू हो जाता है। अगर आपके पीरियड का तीसरा दिन या अभी पहला और दूसरा है तब तो आपको अर्घ्य नहीं देना चाहिए, क्योंकि देवताओं का पूजा पीरियड के 7वें दिन के बाद ही किया जाता है।

 

अगर आपको अर्घ्य देना ही है तो आप किसी और से अर्घ्य दिलवा सकती है। आप पीरियड के दौरान आप छठ व्रत हर काम कर तो सकती है लेकिन पूजा पाठ से थोड़ी दूरी बनाये रखें। अगर पीरियड के 5 दिन हो गए हैं तो आप पूजा भी कर सकती है।

 

लेकिन पीरियड के 5वें दिन या उससे कम दिन पर सूर्य देव का अर्घ्य नहीं दिया जाता है। नियम के अनुसार पीरियड के 7वें दिन के बाद से अर्घ्य देना शुभ रहेगा। लेकिन अगर आपके पीरियड का 6 दिन बीत गए हैं और आप अर्घ्य देना चाहती है तो छठे दिन भी अर्घ्य दे सकती है।

 

छठ पूजा का व्रत कैसे करते हैं – सम्पूर्ण पूजा विधि

 

अगर आप छठ पूजा का व्रत करने जा रही है तो आपको छठ पूजा का नियम भी अवश्य पता होना चाहिए। अगर आपको पूरे अच्छे तरह से ये पता नहीं है कि छठ पूजा का व्रत कैसे करें तो आइए हम आपको छठ पूजा की सम्पूर्ण विधि के बारे में पूरी विस्तार से बताते हैं।

 

छठ पूजा के लिए सबसे जरूरी होता है उसका सामग्री इकट्ठा करना। आइये छठ पूजा का सामग्री के बारे जानते हैं।

 

नहाय – खाय पूजा सामग्री: चावल, चने का दाल या अरहर का दाल, घी, मसाला, लौकी, सेंधा नमक या नमक और हल्दी।

 

नहाय खाय का प्रसाद: इस दिन नहा-धोकर आपको ऊपर बताये गए पूजा सामग्री से चावल दाल और लौकी का सब्जी बना लेना है। फिर छठ मैया को भोग लगाकर ही खुद खाना खाएं और घरवालों को खिलाये।

 

खरना के दिन का छठ पूजा सामग्री: साठी का चावल, आटा, मीठा और रोज का पूजा समान।

 

खरना के दिन का प्रसाद: इस दिन व्रतियों को कांच की चूड़ियां या लहठी, लाल या पिला रंग का कोई भी वस्त्र पहनकर ही पूजा करना चाहिए। साठी के चावल का खीर और रोटी बनने के बाद आपको पुनः छठ मैया को पूजा करके भोग लगाकर केवल खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करना चाहिए।

 

छठ पूजा की सामग्री लिस्ट इन हिंदी – chhath puja samagri list in hindi

 

बांस का टोकरी या डलिया, बांस या पीतल के सूप, सिंदूर, बड़ी इलायची, ठेकुआ, सेब, संतरा, पानीफल, शरीफा, केला, पानी वाला नारियल, अनानास, अमरूद, मीठा नींबू, खट्टा नींबू, हल्दी का पौधा, अदरक का पौधा, अरूई, सुथनी, गन्ना, मीठा/गुड़, लड्डू, लोटा, दूध, शहद, घी, आटा, पान, सुपारी, मूली, कद्दू, बोरी, माचिस, अगरबत्ती, नए कपड़े इत्यादि।

 

ध्यान रहे कि आप जिस बांस के डलिया में छठ पूजा का पूरा समान रख रहे हैं वो पूरी तरह सजा होना चाहिए और ढँका हुआ होना चाहिए।

 

छठ पूजा का अर्घ्य देने का नियम

 

जितने भी व्रती लोग हैं उनको घाट पर जाने के बाद एक लोटे में गंगाजल या पानी में सिंदूर और फूल डालकर पानी में खड़े होकर सूर्यदेव को जल दें। फिर इसके बाद अगरबत्ती जलाकर वहाँ पूजा आरती करें।

 

इसके बाद आपने जितना कलसुप लिया है उन सबको लेकर एक-एक करके पानी में खड़े होकर सूर्य की ओर मुह करके परिक्रमा करना चाहिए।

 

इसके बाद आपको छठ मैया के पास बैठकर उनकी सच्चे मन से पूजा करें। अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद शाम को वापस अपने घर आ जाएं। अगर आप कोसी भरती है तो गन्ने के मदद से अपने घर पर छठ मैया का कोसी भरें। आप ये काम छठ घाट पर या अपने घर पर भी कर सकती है।

 

आपको अभी कुछ भी खाना-पीना नहीं है। इसके बाद आपको सुबह सूर्य निकलने से पहले 4 या 5 बजे उठकर नहा धोकर पूजा की तैयारी कर लें। पूजा की तैयारी करने के बाद छठ घाट पर जाएं।

 

यहाँ आपको पुनः छठ मैया का पूजा करना है और अर्घ्य देने की तैयारी करें। सुबह अर्घ्य देने के लिए आपको गाय के दूध की आवश्यकता होगी, क्योंकि सुबह में सूर्य का अर्घ्य गाय के दूध से ही दिया जाता है।

 

सुबह के समय सूर्य निकलने के बाद उनके तरफ मुह करके गाय के दूध से अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद महिलाओं को नाक से लेकर मांग तक 5 बार सिंदूर लगाना चाहिए। इसके बाद आपको अपने घर आ जाना है।

 

घर आकर आपको पारणा करना चाहिए। इतना करने के बाद आपका छठ व्रत पूरा हुआ।

 

हमें पूरी उम्मीद है कि आपको छठ पूजा का सम्पूर्ण नियम पता चल गया होगा। साथ ही आप ये भी जान गए होंगे कि छठ पूजा कैसे किया जाता है?

 

अगर आपको छठ पूजा के बारे में कोई और जानकारी प्राप्त करना है तो कमेंट करके जरूर पूछिएगा। आप सभी को हमारे तरफ से छठ पूजा की ढेरों शुभकामनाएं।

 

FAQ About Chhath Puja 2022 In Hindi

 

1. 2022 में चैती छठ पूजा कब है?

Ans: 5 अप्रैल को नहाय खाय, 6 अप्रैल को खरना, 7 अप्रैल को सायंकाल का अर्घ्य और 8 अप्रैल को पारणा।

2. छठ पूजा में सूप का क्या महत्व है?

Ans: सूप के द्वारा ही सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूप के बिना छठ पूजा अधूरा है।

3. छठ पूजा का खरना कब है?

Ans: 6 अप्रैल 2022 को

4. पीरियड में छठ व्रत कर सकते हैं कि नहीं?

Ans: हाँ।

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