Heart Touching True Friendship Story | मेढ़क और मछली की कहानी

Heart Touching Short Friendship Story In Hindi With Moral | मेढ़क और मछली की दोस्ती

इस Short Hindi Friendship Moral Story में आप सबको एक मेढक और कुछ मछलियों के मातृभूमि के प्रति ऐसा प्रेम भरी कहानी सुनाने जा रहे हैं जो आपको भी अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम को और बढ़ा देगा।

इस सच्ची मित्रता Short story in Hindi with moral से आपको ये सिख मिलेगी कि अगर आपका साथी कभी किसी मुसीबत में फस जाए तो उसको साथ देना चाहिए, न कि उसको मुसीबत में छोड़कर चले जायें। तो चलिए दोस्तों इस बेहतरीन best short hindi story with moral को शुरू करते हैं।

सच्ची मित्रता | True Friendship  Short Story In Hindi With Moral


एक गाँव के किनारे एक तालाब था। तालाब बहुत गहरा था। गर्मी के मौसम में भी उसका पानी नहीं सूखता था। तालाब में तरह तरह की रंग-बिरंगी मछलियां और मेंढक रहते थे। उस गांव के लोग कभी उस तालाब के मछलियों को नहीं मारते थे।

प्रायः मछलियों को खाने के लिए वहाँ के लोग आटे की गोलियाँ बनाकर तालाब में डाला करते थे। तालाब के किनारे मछलियां और मेंढक बड़ी शांति से रहते थे।

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एक बार बरसात के मौसम में पानी नहीं बरसा। तालाब का पानी सूखने लगा। मेढक और मछलियां व्याकुल होकर रहने लगे। तालाब में इतना पानी कम रह गया कि तेज गर्मी से पानी नीचे तक गर्म हो जाता था। गर्म पानी से मछलियों को बहुत कष्ट होने लगा।

एक दिन तालाब के किनारे पीपल के पेड़ पर बैठे पक्षी भी ठंडे स्थान की ओर भागने लगे। मेढक के झुण्ड भी फुदक फुदक कर जाने की तैयारी करने लगे। पर बेचारी मछलियां कहाँ जाती, कैसे जाती? देखते-देखते दो दिन में पूरा तालाब सुना हो गया। तालाब के सारे जीव अपनी अपनी जान बचाने के लिए तालाब को छोड़कर दूसरे जगह अपना ठिकाना ढूंढ लिये।

उसी तालाब में एक मेढक भी रहता था, वह उस तालाब को छोड़कर कहीं नहीं गया। उसके साथियों ने कहा भी चलने के लिए पर उसे अपने जन्मभूमि को छोड़कर जाना पसंद नहीं आया। एक मछली ने मेढक से कहा- “मेढक भाई तुम ये तालाब छोड़कर क्यों नहीं गए ?”

मेढक ने कहा- “मुझे अपनी जन्मभूमि बहुत प्यारी है, मैंने इसी तालाब में जन्म लिया है। इसी में पलकर बड़ा हुआ हूं। सुख-दुख में तुम लोगों ने मेरा साथ दिया है। भला तुमलोगों को छोड़कर मैं कैसे जा सकता हूँ? यह मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगता।”

मेढक की बात सुन कर मछलियों ने कहा- “मेढक भाई हम मछलियां तो मजबूर हैं। हम तो आपकी तरह फुदक-फुदक कर कहीं जा भी नहीं सकते और न पक्षियों की तरह उड़कर कहीं जा सकते हैं। पर तुम तो कहीं दूसरे जगह पर जाकर अपनी प्राण बचा सकते हो।”

मेढक ने कहा- “मैं तुमलोगों का साथ छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा। सबका सब दिन बराबर नहीं होते। दुःख के दिन सबके पास आते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद सुख का नया सबेरा भी होता है। हमें अपने ईश्वर पर विश्वास करना चाहिए। वह बड़ा दयालु है। वह सब पर कृपा करता है। दुःखी प्राणी की प्रार्थना में बड़ा बल होता है।”

शाम को सभी मछलियां एक जगह पर मेढक के साथ जमा हुई। सबने मिलकर बहुत देर तक भगवान से प्रार्थना की। सबके मन में यह आशा थी कि भगवान उनके सच्चे मन से किया गया प्रार्थना अवश्य सुनेगा।

जिस समय मेढक और मछलियों में बाते हो रही थी, गांव का एक बालक राम सब सुन रहा था। राम ने गाँव में जाकर गाँववालों को यह सारी बाते बतायी- जीव जंतुओं में भी अपनी मिट्टी से बहुत प्रेम होता है। आज हम जैसे मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उनकी परवाह नहीं करते।

आओ आज सभी लोग वर्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। गांव वालों ने भी सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना किया और संयोग से उसी दिन आकाश में काले बादल घिर गये। जोरो से वर्षा हुई और तालाब में फिर से पानी भर गया।

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हमारी मातृभूमि से बढ़कर इस दुनिया में कहीं और स्वर्ग नहीं है। इसलिए अगर हमें अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए जान भी देनी पड़े तो हमें पीछे नहीं हटना चाहिए। हमेशा धीरज से काम लेना चाहिए। अगर हम धीरज से काम लेंगे तो बड़ा से बड़ा मुश्किल हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती।

देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा आगे रहना चाहिए। परिस्थिति चाहे कैसा भी क्यो न हो अपनी मातृभूमि से अच्छा कभी नहीं हो सकता। जिस घर में आपको जगह मिली है, उस घर को कभी त्यागना नहीं चाहिए।

आपको इस Short Hindi Friendship Moral Story से क्या सीख मिली और आप अपने जीवन में क्या क्या परिवर्तन लाये कृपया अपनी राय और सुझाव जरूर दें।
धन्यवाद!!

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