Panchtantra Ki Kahani in Hindi | पंचतंत्र की नई कहानियां

Panchtantra Ki Kahani in Hindi | Panchtantra Short Stories In Hindi With Moral | पंचतंत्र की कहानियां

 

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आज के इस Short Hindi Moral Story में आप सबको एक बहुत ही प्रेणादायक कहानी सुनने को मिलेगी। इस कहानी को सुनने से आप सीखेंगे कि किसी के साथ गलत करने पर उसका अंजाम गलत ही होता है।

 

आपको ये कहानी सिख देगी कि अगर किसी के साथ बुरा करेंगे तो उसका फल आपको जरूर भोगना पड़ेगा। ये कहानी खास कर के उन लोगों के लिए हैं, जो किसी को कोई चीज़ देते हैं पर उसमें मिलावट कर के देते हैं, जिससे सामने वाले को नुकसान उठाना पड़ता है।

 

लेकिन ये मिलावट कैसे खुद को नुकसान पहुंचा सकती है, इस कहानी में आपको जानने को मिलेगा। तो चलिए दोस्तों ये panchtantra ki kahani in hindi शुरू करते हैं।

 

Panchtantra Short Stories In Hindi For Class 9 | जैसा को तैसा पंचतंत्र की कहानी

 

किसी नगर में दानी नामक एक व्यापारी रहता था। उसका काम नाम के एकदम विपरीत था, अर्थात न तो वह स्वयं देता था और न अपने परिवारजनों को दान करने देता था।जब भी कोई साधु उसके दरवाजे पर खड़ा होकर भीख मांगता तो वह कह देता आगे बढ़ो और वह इतना कह कर उनको भीख नहीं देता था।

 

वह व्यापारी, दानी अथवा धर्मी तो था ही नहीं। हाँ वह अधर्म अवश्य करता था। उसके किराने की दुकान थी। वह जो भी समान बेचता, उसमें मिलावट करके ही बेचता था। वो व्यापारी मिलावट का काम अकेले करे, ऐसी बात नहीं थी। वह अपने घरवालों को भी मिलावट करके समान बेचने को प्रोत्साहित करता था। लोग अशुद्ध सामग्री खरीदकर घर ले जाते और अक्सर बीमार रहते थे।

 

दानी के पुत्र का नाम धनेश था। वह अक्सर अपने पिताजी से पूछ बैठता था- पिताजी, “आप समान में मिलावट क्यों करते हैं ?” इस पर उसके पिताजी कह देते थे- बेटा, अगर शुद्ध सामग्री दिया जाएगा तो उनके शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए समान में मिलावट करके बेचना पड़ता है। वह व्यापारी अपने बेटे को भी मिलावट करके समान बेचना सिखा दिया था।

 

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मगर धनेश अक्सर देखता कि पिता जी घर के लिए भी सामग्री निकालते थे, लेकिन उसमें किसी तरह का मिलावट नहीं करते थे। उसके बेटे धनेश ने सोचा कि इससे तो हम भी बीमार हो जायेंगे। ये सोच कर वह भी मिलावट कर देता था।

 

इसकी जानकारी न ही दानी को हो पाती थी और न ही पिताजी के सिखाये अनुसार मिलावट करता था, तो इसकी चर्चा अन्य जगह करना उचीत भी नहीं समझा। इसलिए धनेश मिलावट तो कर देता लेकिन किसी को बताता नहीं था।

दानी घर के लिए हमेशा शुद्ध सामग्री निकलता था, मगर उसको नहीं पता था कि वो मिलावट का समान खा रहा है। उसको इस बात का अनुभव अवश्य होता था, की उसके खाने के सामग्री में मिलावट किया गया है। मगर वह पूछ नहीं पाता था क्योंकि वह विश्वास नहीं कर पाता था कि उसके खाने में भी मिलावट की गई है।

 

पंचतंत्र की नई कहानियां

 

इसी कारण एक दिन दानी इतना बीमार पड़ गया कि उसे बिस्तर से उठना तक मुश्किल हो गया। अब वह खाट पर ही पड़े-पड़े भोजन करता, दूध पीता। अक्सर दूध देने की जिम्मेदारी धनेश पर आ जाती थी। वह देखता जो दूध माँ ने पिता जी के लिए दिया है, वह तो शुद्ध है, अर्थात उसमें मिलावट नहीं की गई है।

 

धनेश सोचता था कि यदि पिताजी को ऐसे शुद्ध दूध दिया गया तो वे और अधिक बीमार हो जाएंगे। ये विचार कर वह आधा दूध पी जाता और आधे दूध में पानी मिलककर अपने पिताजी को दे देता।

 

दानी दूध पीता तो उसको अनुभव अवश्य होता था कि इसमें पानी अधिक मात्रा में मिला हुआ है, मगर ये बात मन से तुरंत निकाल देता था क्योंकि दूध घर का था। इसलिये सोचता कि पानी मिलाने का प्रश्न ही नहीं उठता था।

 

मगर दानी को एक बार संदेह हो गया की उसके खाने में कुछ मिलावट जरूर किया गया है। उसने एक दिन अपने दूध पीने का समय हुआ तो उसने खिड़की से देखकर इसका सच जानने की कोशिश किया। उसने अपने पुत्र का काम देखा तो हैरान रह गया। दानी देखा कि पुत्र आधा दूध पी गया और उसके आधे दूध में पानी मिलाकर उसने अपने पिता को दूध थमा दिया।

 

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दानी ने अपने बेटे को बुलाकर कहा- बेटा, धनेश क्या घर में दूध खत्म हो गया है ?

धनेश ने कहा- पिताजी आप ही ने तो हमें सिखाया है, की शुद्ध सामग्री हमारे शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है। लेकिन मैं जब भी देखता हूँ मम्मी आपको दूध बिना पानी मिलाये देती है। मैंने सोचा आपको अगर शुद्ध दूध दिया जायेगा तब तो आपकी बीमारी और बढ़ सकती है। आपकी बीमारी ज्यादा न बढ़े, यही सोच कर मैंने मिलावट करके दूध देना उचित समझा।

 

बेटे के इस बात को सुनकर दानी को लज्जा आ गयी। बुरी शिक्षा देने का परिणाम दानी ने देख लिया था। तब से उसने अपने बेटे और परिवारजनों को किसी भी सामग्री में मिलावट नहीं करने की शिक्षा दी। यहाँ तक कि वह मिलावट से होने वाली हानियाँ भी गिनाने लगा। और बताने लगा मिलावट से कितनी बीमारियां हो सकता है। 

 

इतना ही नहीं, वह अब जब भी कोई घर के दहलीज पर आता उसे भोजन अवश्य देता, वह पूरा शुद्ध। उसके बाद से दानी कभी किसी के साथ कोई मिलावट नहीं करता था।

 

Moral Education in Hindi | पंचतंत्र की कहानी से शिक्षा

 

आप सबसे यहाँ एक बात कहना चाहूंगा, “अगर आप किसी के साथ बुरा करेंगे तो किसी न किसी रूप में भगवान आपके साथ जरूर बुरा करेगा। आप किसी के साथ अच्छा करेंगे तो हर तरफ से आपके साथ अच्छा होगा।” एक बात हमेशा याद रखियेगा ‘बुरे कर्मों का फल हमेशा बुरा ही होता है।’

 

उम्मीद करता हूं, कि आपको इस Panchtantra stories in hindi से काफी सिख मिलेगी। साथियों आपको इस कहानी से थोड़ा भी सिख मिलें, तो हमेशा सबके भले के बारे में सोचे कभी किसी का अहित करने की न सोचें।

 

 

आपके ये famous hindi short moral stories कैसी लगी, और आप इस कहानी से क्या क्या सीखे हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

 

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