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Fatima Sheikh Indian Educator Biography Wikipedia in Hindi

Fatima Sheikh Indian Educator Biography Wikipedia in Hindi

फातिमा शेख का जीवन परिचय, जन्म, लाइफ स्टोरी, विकिपीडिया | Fatima Sheikh (Indian Educator) Biography, Wikipedia, Life Story, Google Doodle


हम अपने देश के ऐसे कई सारे महान आत्माओं को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं। इन महान हस्तियों को भूलने के साथ-साथ हम समाज के प्रति किये गए उनके सराहनीय कार्यों को भी भूलते जा रहे हैं।


लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल कभी किसी को नहीं भूलता है। अपने देश के समाज सुधार में अहम भूमिका निभाने वाली फातिमा शेख को उनके आज 191वें जन्मदिन पर गूगल ने शानदार डूडल बनाकर उनको सम्मानित किया है।


कौमी एकता की प्रतीक और देश की प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख के नाम से देश के बहुत ही कम लोग परिचित हैं।


गूगल के डूडल बनाने के साथ ही सभी लोग ये जानने के लिए बेचैन हो गए हैं कि आखिर फातिमा शेख कौन थीं जिनके लिए Google ने इतना बड़ा सम्मान दिया है? आइये इस पोस्ट में हम आपको फातिमा शेख की जीवनी से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से बताते हैं।


फातिमा शेख कौन थी (Who Was Fatima Sheikh in Hindi)

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Fatima Sheikh Biography

भारत की महान महिला समाज सुधारक फातिमा शेख का जन्म 9 जनवरी 1831 को पुणे, भारत में हुआ था। घर में वह अपने भाई उस्मान के साथ रहती थी। फातिमा शेख एक भारतीय महिला शिक्षिका (Indian Educator) थी, जो महान समाज सुधारकों ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगी थी।


सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख ने दलित, मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के उन समुदायों को पढ़ाया, जिन्हें वर्ग, धर्म या लिंग के आधार पर शिक्षा से वंचित किया गया था। इसी के चलते फातिमा शेख को आधुनिक भारत की पहली महिला मुस्लिम शिक्षक कहा जाता है।


उस समय दलित बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा देखकर इन्होंने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के स्कूल में दलित बच्चों को शिक्षित करने का काम शुरू किया। इनके साथ-साथ ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने भी दलित समुदायों के बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाने का सराहनीय प्रयास किया।


फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले की मुलाकात उस समय हुई थी जब ये दोनों एक अमेरिकी मिशनरी Cynthia Farrar द्वारा संचालित टीचर ट्रेनिंग संस्थान में नामांकित किया गया था। इसके बाद ये दोनों एक दूसरे से काफी करीबी दोस्त बन गयी।


फातिमा शेख के सराहनीय कार्य | Fatima Sheikh Social Work in Hindi


भारतीय महिलाओं की आइकॉन फातिमा शेख को न सिर्फ भारत की पहली शिक्षक माना जाता है बल्कि इनके समाज सुधारक कार्यों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। फातिमा शेख ने 1848 में स्वदेशी पुस्तकालय की स्थापना की, जो लड़कियों के लिए भारत के पहले स्कूलों में से एक था।


फातिमा शेख ने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को उस समय साथ दिया था, जब कुछ कट्टरपंथियों को महिलाओं को शिक्षित करने की इनकी मुहिम पसंद नहीं आयी और इन दोनों को घर से निकाल दिया गया था। तब शेख ने न सिर्फ इन दोनों को अपने घर में रहने के लिए जगह दी, बल्कि लड़कियों की शिक्षा के लिए पुणे में स्कूल खोलने के लिए जगह भी दी।


फातिमा शेख ने सावित्रीबाई फुले के साथ उस समय लड़कियों को पढ़ाने का काम शुरू किया जब शूद्रों से घृणा अपने चरम सीमा पर थी। उस समय शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं था।


ऐसी विपरीत परिस्थितियों में फातिमा शेख ने न सिर्फ स्कूल में पढ़ाया करती थी, बल्कि हर घर में जाकर लड़कियों को शिक्षा का महत्व समझाती थी और शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करती थीं। जिसके कारण इनको समाज के कुछ वर्गों का काफी आक्रोश भी झेलना पड़ा। लेकिन फातिमा ने हार नहीं मानी और लगातार अपना काम जारी रखा।


फातिमा बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए दिन रात मेहनत करती थी। इन्होंने सावित्रीबाई फुले के उन सभी पांचों स्कूलों में पढ़ाया था जो फुले ने स्थापित किया था। इन्होंने कभी किसी बच्चे के धर्म-जाति के आधार पर नहीं बांटा, बल्कि हर धर्म के बच्चों को काफी स्नेह से शिक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य किया।


इनका कदम सिर्फ सीमित बच्चों तक पढ़ा कर रुकने वाला नहीं था। इन्होंने 1851 में मुंबई में दो और स्कूलों की स्थापना में बखूबी भाग लिया।


फातिमा शेख जैसी देश में कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने देश व समाज की बेहतरी के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। लेकिन सरकार और समाज ने आजतक इनको वो सम्मान नहीं दिया जिनकी वो हकदार थी। लेकिन गूगल कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है।


हालांकि भारत सरकार ने 2014 में अन्य अग्रणी भारतीय शिक्षकों के साथ-साथ उर्दू पाठ्यपुस्तकों में उनकी प्रोफ़ाइल को प्रदर्शित करके उनकी उपलब्धियों पर नई रोशनी डाली। इनके कई सारे सराहनीय प्रयास के लिए गूगल ने 9 जनवरी 2022 को उनकी 191वीं जयंती पर डूडल बनाकर सम्मानित किया।


हम सभी को ऐसे महान समाज सेवी आत्माओं को सम्मान करने की जरूरत है, ताकि हमारे देश और समाज में इनके तरह कई सारे लोग बनें।


आप कमेंट करके बताइये कि आपको फातिमा शेख की जीवनी (Fatima Sheikh Biography in hindi) से हम सभी को क्या सीख लेनी चाहिए। साथ ही फातिमा शेख जैसी महान आइकॉन को किस तरह से सम्मानित करने की जरूरत है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजियेगा।


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सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको CSK ने IPL 2022 के लिए ट्रायल के लिए बुलाया है?

सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको CSK ने IPL 2022 के लिए ट्रायल के लिए बुलाया है?

सुभ्रांशु सेनापति का जीवन परिचय, रिकॉर्ड, जीवनी, करियर | Subhranshu Senapati Biography, Wikipedia, Career, Record, IPL Team, Salary, Success Story In Hindi


दोस्तों दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीग आईपीएल 2022 की तैयारी सभी टीमों ने शुरू कर दी है। हर टीम अगले सीजन के लिए अपनी तैयारी में कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। एक तरफ अगले कुछ दिनों में IPL 2022 का मेगा ऑक्शन शुरू होने वाला है उससे पहले ही सभी टीमों ने अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को चुनना शुरू कर दिया है।


इसी बीच आईपीएल 2021 की चैंपियन टीम चेन्नई सुपरकिंग्स ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसे सभी क्रिकेट प्रेमी हैरान रह गए। उनके इस निर्णय के लिए सभी दिग्गज को अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा है।


हुआ यूं कि चेन्नई सुपरकिंग्स ने आईपीएल 2022 की नई टीम की तैयारी शुरू कर दी है। टीम ने 2022 के लिए खिलाड़ियों का ट्रायल लेना शुरू कर दिया है। इसी बीच चेन्नई ने एक ऐसे खिलाड़ी को ट्रायल के लिए बुलाया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था।


इस खिलाड़ी का नाम है- सुभ्रांशु सेनापति। आखिर सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको चेन्नई सुपरकिंग्स जैसी दिग्गज आईपीएल टीम ने अपने टीम में ट्रायल के लिए शामिल किया है। इनके बारे में हर कोई जानने के लिए बेचैन है।


अगर आप भी सुभ्रांशु सेनापति की जीवनी से जुड़े एक-एक चीजों को विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ियेगा। आपको Shubhanshu Senapati Biography in hindi के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।


सुभ्रांशु सेनापति कौन है | Who Is Shubhanshu Senapati In Hindi


आईपीएल 2022 के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स टीम में शामिल किए गए सुभ्रांशु सेनापति का जन्म उड़ीसा के आदिवासी बहुल क्षेत्र केंदुझार में हुआ था। ये उड़ीसा क्रिकेट टीम के कप्तान है। ये दांये हाथ के बल्लेबाज और तेज गेंदबाज है।


इन्होंने बेहद ही कम समय में अपनी धुंआधार बल्लेबाजी के वजह पूरे देश में अपनी एक खास पहचान बनाई है। इनके तूफानी बल्लेबाजी शैली को देखते हुए ही आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपरकिंग्स ने अपनी टीम में शामिल करने के लिए ट्रायल पर बुलाया है।


Shubhranshu Senapati Bio, Wiki, Date Of Birth, Age, Team, Net Worth, Personal Details

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Shubhranshu Senapati Biography

पूरा नाम: शुभ्रांशु प्रदीप सेनापति
निकनेम: शुभ्रांशु
जन्म (Date Of Birth): 30 दिसंबर 1996
जन्मस्थान (Birthplace): केंदुझार, ओड़िसा
उम्र (Age): 25 वर्ष
हाइट: N/A
वजन: N/A
धर्म (Religion): हिंदू
वैवाहिक जीवन: अविवाहित
घरेलू टीम: ओड़ीसा
आईपीएल टीम: चेन्नई सुपरकिंग्स
बैटिंग स्टाइल: दाएं हाथ के बल्लेबाज
गेंदबाजी स्टाइल: दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज
सैलरी (Salary): N/A
नेट वर्थ (Net Worth): 2 करोड़ रुपये
राष्ट्रीयता: भारतीय


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शुभ्रांशु सेनापति का घरेलू क्रिकेट करियर | Shubhranshu Senapati Career In Hindi


शुभ्रांशु ने अपने करियर की शुरुआत रणजी ट्रॉफी के 2016-17 सत्र में ओड़िसा टीम के लिए खेलते हुए किया था। तब वे टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हुए थे। अपने दूसरे मैच में ही इन्होंने सौराष्ट्र के खिलाफ खेलते हुए दूसरी पारी में अपना पहला अर्धशतक बनाया। उनके इस बेहतरीन पारी के बदौलत ओड़ीसा की टीम ने 32 रनों से मैच जीतने में कामयाब रही।


इसके बाद शुभ्रांशु रुकने वाले नहीं थे। फिर इन्होंने दिल्ली जैसी मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ 76 रनों की शानदार पारी खेली। लेकिन ये अब भी अपने पहले शतक का इंतजार कर रहे थे। इन्होंने अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक राजस्थान के खिलाफ खेलते हुए लगाया था।


इन्होंने इस दौरान 137 रनों की विशाल पारी खेलकर सलामी बल्लेबाज रंजीत सिंह के साथ 200 से अधिक रनों की साझेदारी कर हारती हुई टीम को ड्रा करवाया। हालांकि ये अपने पहले सीजन में क्रिकेट छोटे प्रारूपों में उतने सफल नहीं रहे थे।


शुभ्रांशु कटक और भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में जाकर क्रिकेट खेलने के बजाय केंदुझार में भी खेलना जारी रखा। इन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए कभी किसी कोचिंग संस्थान या क्रिकेट क्लब के जॉइन नहीं किया। इन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे वरिष्ठ क्रिकटरों को खेलते हुए देखकर ही अपने खेल में निखार लाता गया।


शुभ्रांशु ओडिशा प्रीमियर लीग की चैंपियन टीम चिलिका के अहम सदस्य भी थे। इस लीग में शानदार प्रदर्शन के बदौलत वे टीम में स्थायी जगह पर बनाने में कामयाब रहे।


इसके बाद अंडर19 में उनके शानदार प्रदर्शन ने तो सबका दिल जीत लिया। इनके शानदार प्रदर्शन का इनाम भी मिला और इनको ओड़ीसा टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया। इनके प्रतिभा से तो हर कोई वाकिफ था। लेकिन इनके बारे में लोगों के बीच चर्चा तब शुरू हुई जब इन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ 179 रन की बेहद ही धुंआधार पारी खेली। इस दौरान इन्होंने तीन पारियों में 248 रन बनाए।


इनके बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत ही इनको रणजी टीम में शामिल कर लिया गया। अपने रणजी टीम में सेलेक्शन को सही ठहराते हुए इन्होंने शानदार प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया और टीम को क्वार्टर फाइनल तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई।


इनका 2017-18 का घरेलू सीजन भी काफी बेहतरीन रहा। इन्होंने 8 पारियों में 53.37 की बेहतरीन औसत से 427 रन बनाए। इस दौरान शुभ्रांशु ने दो शतक लगाया और ओड़ीसा टीम के लिए मध्यक्रम में अपना स्थान हमेशा के लिए पक्का कर लिया।


शुभ्रांशु सेनापति को CSK ने क्यों बुलाया जानें असली वजह


शुभ्रांशु को CSK द्वारा टीम में शामिल करने का मुख्य वजह है इनका घरेलू क्रिकेट में शानदार और धुंआधार प्रदर्शन। इन्होंने इस साल विजय हजारे ट्राफी में अपनी टीम के तरफ से टॉप स्कोरर रहे। इन्होंने इस दौरान कुल 5 मैच खेले और 1 शतक, 2 अर्धशतक सहित 275 रन बनाए।


वहीं जिसको लेकर इनकी हर जगह चर्चा हो रही है वो है टी20 क्रिकेट में प्रदर्शन। ओड़ीसा के इस बल्लेबाज ने इस साल टी20 फॉर्मेट में खेले गए सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 5 मैचों में 138 रन बनाए। जिसमें उन्होंने 5 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के लगाए।


शुभ्रांशु ने अपने छोटे से टी20 क्रिकेट करियर में 26 मैचों में 637 रन बनाए हैं। इस दौरान इन्होंने 50 चौके और 24 छक्के लगाए हैं। इन्हीं दोनों टूर्नामेंट में इनके द्वारा किए शानदार प्रदर्शन के बदौलत CSK ने सेनापति को ट्रायल के लिए बुलाया है।


चेन्नई सुपरकिंग्स ने खुद इसके बारे में ट्वीट करके जानकारी दी। जिसके बाद ओडिशा क्रिकेट ने खुद ट्वीट करके अपनी खुशी प्रकट किया।


इनके शानदार करियर को देखते हुए ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज लोचान मोहंती और सेक्रेटरी संजय बेहेरा को उम्मीद है कि शुभ्रांशु सेनापति चेन्नई सुपरकिंग्स के ट्रायल में सफल रहेंगे और टीम में अपना जगह बनाने में कामयाब रहेंगे।


आपको शुभ्रांशु सेनापति को लेकर क्या लगता है, क्या ये IPL के सबसे सफल टीमो में से एक चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) के ट्रायल में सफल हो पाएंगे और टीम में जगह बनाने में कामयाब रहेंगे। अपना राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।


साथ ही अगर आपको शुभ्रांशु सेनापति की जीवनी पसंद आई हो तो इसे सही जरूर करें धन्यवाद।

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Myntra CEO Nandita Sinha Biography, Wikipedia, Salary, Education

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नंदिता सिन्हा का जीवन परिचय | Nandita Sinha (Flipcart) Biography, Age, Success Story In Hindi


फैशन और सौंदर्य जगत की सबसे मशहूर E-Commerce कम्पनियों में से एक Myntra ने 12 नवंबर 2021 को नंदिता सिन्हा को कम्पनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ, CEO) नियुक्त किया है।


नंदिता 1 जनवरी 2022 से अपना पदभार संभालेगी। बेहद कम उम्र में इतनी ऊंची पड़ हासिल करने के वजह से नंदिता आज हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। सब जानना चाहते हैं कि आखिर Myntra New CEO नंदिता सिन्हा कौन है, जिनको कम्पनी का सबसे बड़ा पड़ देने का निर्णय किया गया है।


अगर आप नंदिता सिन्हा की जीवनी के बारे में हर एक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ियेगा। आपको नंदिता सिन्हा के जीवन से जुड़े ऐसी जानकारी मिलेगी जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तो आइये बिना देर किए Nandita Sinha Biography In Hindi के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं।


Myntra सीईओ नंदिता सिन्हा कौन है (Who Is Nandita Sinha In Hindi)


नंदिता सिन्हा वर्तमान में e-commerce की दिग्गज कम्पनी Flipcart में Customer Growth, Media & Engagement की वाईस प्रेसिडेंट है। फ्लिपकार्ट में 2013 से जुड़ने के बाद से ही नंदिता ने कम्पनी के कई बड़े पदों पर अपनी सेवायें दी है।


इन्होंने फ्लिपकार्ट की सबसे बड़े selling event में से एक Big Billion Days की सफलता में अहम भूमिका निभाई।


Myntra के वर्तमान सीईओ Amar Nagaram ने लगभग 3 साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। जिसके बाद Nandita Sinha को कम्पनी का सीईओ बनाया गया है। कम्पनी ने ये फैसला नंदिता के 15 साल से भी अधिक ई-कॉमर्स क्षेत्र में अनुभव और शानदार नेतृत्व को देखते हुए लिया गया है।


आपके जानकारी के लिए बता दें कि नंदिता ई-कॉमर्स क्षेत्र में ऐसी पहली महिला होगी जो कम्पनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पदभार संभालेगी।


फ्लिपकार्ट में अपने 8 साल के कार्यकाल के दौरान नंदिता ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए अपने सफल बिजनेस माइंड का परिचय दिया है। फ्लिपकार्ट में शामिल होने से पहले इन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड में भी काम कर चुकी है। इसके अलावा नंदिता ई-कॉमर्स साइट MyBabyCart.com की सह-संस्थापक भी रह चुकी है।


इनके नियुक्ति के बाद फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने अपने बयान में कहा कि "मुझे पूरा विश्वास है कि Myntra के कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में नंदिता अहम भूमिका निभाएगी।"


इतने बड़े पद पर नियुक्ति के बाद नंदिता ने बयान जारी करते हुए कहा कि "मैं अपने इस नई भूमिका को लेकर बहुत उत्साहित हूं। Myntra के बहुत ही प्रतिभाशाली टीम के साथ काम करते हुए मुझे पूरी उम्मीद है कि myntra के फैशन को लोकतांत्रिक बनाने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में अपने जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभाऊंगी।"


नंदिता सिन्हा फ्लिपकार्ट की शिक्षा (Nandita Sinha Flipkart Educational Qualification)

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Nandita Sinha

नंदिता ने Faculty Of Management Studies (FMS), Delhi यूनिवर्सिटी से 2005 में Marketing & Strategy में MBA किया है। इसके अलावा इन्होंने 2003 में IIT BHU से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।


Nandita Sinha Flipkart Salary & Net Worth


Myntra की नई सीईओ नंदिता सिन्हा की सैलरी और नेट वर्थ के बारे में बात किया जाए तो इन्होंने अभी तक इसके बारे में कभी किसी को नहीं बताया है। लेकिन आप इनके काम और ऊंचे पद को देखते हुए सैलरी और नेटवर्थ का अंदाजा लगा ही सकते हैं।


Nandita Sinha Flipkart Bio, Wiki, Age, Linkedin, Personal Details


पूरा नाम: नंदिता सिन्हा
निकनेम: नंदिता
जन्म (Date Of Birth): 1986
जन्मस्थान (Birthplace): N/A
उम्र (Age): 35 वर्ष
प्रोफेशन (Profession): ई-कॉमर्स क्षेत्र
अनुभव (Experience): 15 साल
पद: वाईस प्रेसिडेंट, फ्लिपकार्ट और Myntra सीईओ
वर्तमान नियुक्ति: वाईस प्रेसिडेंट, फ्लिपकार्ट कस्टमर ग्रोथ, मीडिया और एंगेजमेंट
उच्चतम शिक्षा: एमबीए
वैवाहिक जीवन: विवाहित
हस्बैंड नाम: N/A
धर्म (Religion): हिन्दू
राष्ट्रीयता: भारतीय


Nandita Sinha Linkedin


अगर आप नंदिता सिन्हा से जुड़ना चाहते हैं अथवा उनके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप इनके Linkedin profile को फॉलो कर सकते हैं।

Nandita Sinha Linkedin Profile


दोस्तों, हमें उम्मीद है कि आपको Nandita Sinha Ki Jivani काफी पसंद आई होगी। साथ ही आपको नंदिता सिन्हा के जीवन से जुड़े हर जानकारी प्राप्त हो गई होगी। अगर आपको Nandita Sinha Biography In Hindi पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।

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अभिनेता पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography

अभिनेता पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography

पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography, Wikipedia, Age, Death Cause, Life Story In Hindi


दोस्तों, कोरोना महामारी के बाद लोगों में हार्ट अटैक की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। जब से कोरोना ने दस्तक दी है तब से देश के बड़े-बड़े कलाकारों ने दिल का दौरा पड़ने से इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं।


पिछले कुछ दिनों में इरफान खान, सिद्धार्थ मल्होत्रा, ऋषि कपूर इत्यादि ने दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु के शिकार हो चुके हैं। एक के बाद एक कई बड़े एक्टर इस साल दिल का दौरा पड़ने से दुनिया छोड़ चुके हैं।


अब एक कन्नड़ अभिनेता और साउथ सुपरस्टार पुनीत राजकुमार का भी 29 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। पुनीत के निधन से पूरा फ़िल्म जगत शोक में डूबा हुआ है। इनके निधन पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शोक जताया है।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि साउथ के सुपरस्टार अभिनेता पुनीत राजकुमार कौन है? अगर आप भी इनके जीवन से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो Puneet Rajkumar Biography In Hindi को जरूर पढिये।


पुनीत राजकुमार कौन है (Who Is Puneet Rajkumar In Hindi)


पुनीत राजकुमार दक्षिण भारत के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक थे। ये एक्टर होने के साथ-साथ एक सफल सिंगर और प्रोड्यूसर भी है। इन्होंने अब तक 29 फिल्मों में काम किया है। ये साउथ के सुपरस्टार आर राजकुमार के बेटे और केएफआई के प्रमुख स्टार शिवराज कुमार  हैं। जिनका 29 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से बैंगलोर के एक अस्पताल में 46 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।


इनके निधन की खबर सुनते ही पूरा फ़िल्म जगत सदमे है। हर कोई इनके परिवार के लिए सम्वेदना व्यक्त कर रहा है।


Puneet Rajkumar Bio, Wiki, Age, Religion, Death, Date Of Birth


पूरा नाम: पुनीत राजकुमार
निकनेम: पुनीत, अप्पू, पावर स्टार
जन्म/ Date Of Birth: 17 मार्च 1975
जन्मस्थान/ Birthplace: चेन्नई
उम्र/ Age: 46 वर्ष
मृत्यु/ Death: 29 अक्टूबर 2021, बैंगलुरू
धर्म/ Religion: हिन्दू
पहला फ़िल्म: वसंत गीता, 1980
अंतिम फ़िल्म: राजकुमार, 2017
प्रोफेशन/ Profession: अभिनेता, सिंगर, प्रोड्यूसर
फ़िल्म इंडस्ट्री: कन्नड़ फ़िल्म
राष्ट्रीयता: भारतीय


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पुनीत राजकुमार का परिवार (Puneet Rajkumar Family)


पिता का नाम: आर राजकुमार

माता का नाम: पर्वतम्मा राजकुमार

वाइफ का नाम: अश्विनी रेवनाथ

बच्चे: द्रिथि और वन्धिता


पुनीत राजकुमार का करियर (Puneet Rajkumar Success Story In Hindi)


दोस्तों, पुनीत राजकुमार बतौर एक्टर एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में केवल 5 साल के उम्र में अपना करियर शुरू किया था। 1980 में इन्होंने पहली बार टेलीविजन की दुनिया में एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में 'वसंत गीता' से की थी।


इसके बाद 1981 में 'भाग्यवन्त' फिर 1982 में Chalisuva, 1983 में Eradu Nakshatragalu और फिर 1985 में Bettada Hoovu एक के बाद एक धमाकेदार फिल्में देकर इन्होंने बचपन मे ही सबको अपने एक्टिंग का दीवाना बना लिया।


Bettada Hoovu में रामु के किरदार के लिए तो इनको नेशनल फ़िल्म अवार्ड फ़ॉर बेस्ट चाइल्ड का अवार्ड भी दिया गया। इनको शानदार अभिनय के लिए कर्नाटक स्टेट बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का खिताब दिया गया।


इन्होंने अबतक 29 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है। इनकी गिनती कन्नड़ फ़िल्म में सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में होती है। इनकी एक्शन फिल्मों को लोग काफी पसंद करते हैं।


इनकी बतौर अभिनेता के रूप में अंतिम फ़िल्म 2017 में आई राजकुमार थी। जिसमे इन्होंने सिद्धार्थ का बेहतरीन रोल अदा किया था।


इन्होंने सिंगिंग में भी अपना हाथ आजमाया। 2008 में आई वंशी फिल्म में जोते जोतेयली गाना तो उस साल की सबसे सुपरहिट गानो में से एक रही थी।


इन्होंने अपने पिता के इच्छानुसार बैंगलोर में एक होटल का निर्माण भी करवाया है। ये अपनी माता के साथ खुद को फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों में भी व्यस्त रहते हैं।


पुनीत राजकुमार की मृत्यु कैसे हुई (Puneet Rajkumar Death Cause In Hindi)


पुनीत को 29 अक्टूबर 2021 को जिम में एक्सरसाइज करने के दौरान दिल का दौरा पड़ा। जिसके बाद उनको बैंगलोर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ कार्डियक अरेस्ट होने से इनका निधन हो गया।


इनके निधन के समाचार सुनकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दुख प्रकट किया है और कहा है कि दुःख के इस घड़ी में मेरी संवेदनायें परिवार के साथ है।


दोस्तों आपको Puneet Rajkumar Biography In Hindi के बारे में जानकर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

कौन थे कानो जिगोरो जिनके लिए Google ने डूडल बनाया | Kano Jigoro Biography

कौन थे कानो जिगोरो जिनके लिए Google ने डूडल बनाया | Kano Jigoro Biography

Kano Jigoro Martial Artist Biography Wikipedia, Death Cause, Education, Life Story In Hindi (कानो जिगोरो की जीवनी, लाइफ स्टोरी, मृत्यु का कारण, जुडो का आविष्कार)


दोस्तों, आज हम एक ऐसे महान हस्ती के बारे में जानने वाले हैं जिसने इस पूरी दुनिया को एक बहुत अनमोल भेंट दिया है। जिसके बिना आज शायद कोई मार्शल आर्ट का नाम नहीं सुनता, जिसके बिना कोई जुडो का नाम नहीं सुनता।


हाँ हम बात कर रहे हैं जुडो के आविष्कार करने वाले कानो जिगोरो के बारे में, जिसने अपनी जिद के बदौलत इस दुनिया को बहुत ही मूल्यवान तोहफा दिया। इनके सम्मान में गूगल ने 161वें जन्मदिन पर शानदार डूडल बनाकर सम्मानित किया है।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानो जिगोरो कौन थे? इनके किस जिद ने जुडो का आविष्कार कराया? अगर आप कानो जिगोरो की जीवनी से जुड़ी हर बात को जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढियेगा।


कानो जिगोरो कौन थे (Who Was Kano Jigoro In Hindi)


कानो जिगोरो का जन्म जापान के मिकेज शहर में 28 दिसंबर 1860 को एक शराब बनाने वाले परिवार में हुआ था। तब से ही इस महान शखस का जन्मदिन हर साल 28 तारीख को पूरी दुनिया सम्मान के साथ मनाती है।


यहाँ तक कि Google ने भी इनके सम्मान में 28 अक्टूबर 2021 को कानो जिगोरो के 161वें जन्मदिन पर बहुत ही शानदार डूडल बनाकर सम्मानित किया।


कानो जिगोरो दुनिया भर में प्रसिद्ध जुडो के संस्थापक थे। इसके अलावा वे एक जापानी शिक्षक और एथलीट भी थे। आपको बता दें कि जूडो पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने वाला पहला जापानी मार्शल आर्ट था और आधिकारिक रूप से ओलंपिक खेलों में हिस्सा बनने वाला पहला आर्ट था।


इन सबका श्रेय केवल और केवल कानो को ही जाता है। पूरी दुनिया में इनके द्वारा ही काले और सफेद बेल्ट का उपयोग एवम मार्शल आर्ट के सदस्यों के बीच सापेक्ष रैंकिंग दिखाने के लिए डैन रैंकिंग की शुरुआत की गई थी।


कानो अपने पूरे जीवनकाल में एक शिक्षक के भांति पूरी जीवन बिताये। चाहे वो 1898 से 1901 तक शिक्षा मंत्रालय में प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में हो अथवा वर्ष 1900 से 1920 तक टोक्यो हायर नार्मल स्कूल के अध्यक्ष के रूप में। इन्होंने अपना अधिकांश समय शिक्षा के क्षेत्र में ही बिताया।


आपको बता दें कि कानो ने 1910 के दशक के जापान के पब्लिक स्कूल के कार्यक्रमों में जूडो और केंडो को हिस्सा बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


शिक्षा के अलावा कानो अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी अग्रणी थे। इनकी मुख्य उपलब्धियों में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) का पहला एशियाई सदस्य होना शामिल है। जिसमें इन्होंने वर्ष 1909 से 1938 तक अपनी सेवा देते रहे।


फिर कानो यहीं पर रुकने वालों में से नहीं थे। इन्होंने वर्ष 1912 और 1936 के बीच आयोजित अधिकांश ओलंपिक खेलों में आधिकारिक तौर पर जापान का प्रतिनिधित्व किया और 1940 के ओलंपिक खेलों के लिए एक प्रमुख प्रवक्ता के रूप में सेवारत हुए।


कानो के आधिकारिक सम्मान और अलंकरण में "फर्स्ट ऑर्डर ऑफ मेरिट",  ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन और थर्ड इंपीरियल की डिग्री भी शामिल था।


कानो को उनके शानदार उपलब्धियों के चलते 14 मई 1999 को इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन (IJF) हॉल ऑफ फ़ेम के पहले सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।


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कानो जिगोरो की जीवन कहानी (Kano Jigoro Life Story In Hindi)

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कानो के पिता कानो जिरोसाकू एक दत्तक पुत्र थे। वे वर्षों से चली आ रही पारिवारिक बिजनेस में न जाकर एक पुजारी और शिपिंग लाइन में एक वरिष्ठ क्लर्क के रूप में काम किया। इनके पिता को शिक्षा से काफी लगाव था। वे चाहते थे कि उनका बेटा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर कुछ अच्छा करे।


इसके लिए उन्हें कानो जिगोरो को उच्च शिक्षा देने में कोई कमी नहीं की। उन्होंने उस समय के सबसे विद्वान शिक्षक रहे नव-कन्फ्यूशियस विद्वान यामामोटो चिकुन और अकिता शुसेत्सु जैसे शिक्षकों के पास कानो को पढ़ने के लिए भेजा।


जब कानो केवल 9 साल का था तब कानो के माता की मृत्यु हो गयी। जिसके बाद इनके पिता अपना पूरा परिवार लेकर जापान की राजधानी टोक्यो लेकर आ गए। इन्होंने अपने बेटे कानो का दाखिला एक निजी स्कूल में करा दिया।


1874 में उन्होंने अपने बेटे कानो को अंग्रेजी और जर्मन भाषा में अच्छी पकड़ बनाने के लिए यूरोपीय देशों द्वारा संचालित एक निजी स्कूल में भेज दिया।


किशोरावस्था में इनके शरीर का छोटे आकार और बौद्धिक स्वभाव के कारण अक्सर छात्र उनको धमकाया करते थे। कभी-कभी तो कुछ छात्र इनको स्कूल के बाहर पीटने भी लगते थे।


जिससे तंग आकर कानो जिगोरो ये सोचने लगे कि ऐसा क्या किया जाए कि उनका भी शरीर मजबूत हो। इसी बीच इनकी मुलाकात एक ऐसे आदमी से हो गयी जो जुजुत्सु करना जानता था। उसने कानो को बताया कि अगर तुम ये सिख जाते हो तो तुम्हारा शरीर भी मजबूत बन जायेगा।


उस आदमी ने इनको सिखाया कि कैसे एक छोटा और कमजोर आदमी भी एक मजबूत और हटे कटे आदमी को धूल चटा सकता है?


इसके बाद तो मानो कानो के शरीर मे बिजली कौंध गयी। उन्होंने तुरन्त ही फैसला कर लिया कि अब वे जुजुत्सु जरूर सीखेंगे। पिता का लाख मना करने के बावजूद जिगोरो ने जुजुत्सु सीखने के लिए उतावले हो गए।


कुछ समय तक तो इनके पिता भी बेटे को ऐसा करने से बचने के लिए कहते रहे। लेकिन बेटे की गहरी रुचि और लगन को देखते हुए उन्होंने ये कहकर हामी भर दी कि तुमको इस क्षेत्र में महारत हासिल करनी होगी। तभी तुमको ये सीखने दिया जाएगा। कानो ने भी पिता को इस बात के लिए हामी भर दी।


फिर एक बार जब कानो जिगोरो जुडो की तरफ गए फिर तो पूरी दुनिया को जुडो का पाठ पढ़ाकर ही छोड़ा। आज पूरी दुनिया में कानो के द्वारा बनाया गया जुडो को बड़ी संख्या में लोग सीखते हैं।


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कानो जिगोरो ने जुडो का आविष्कार कैसे किया?


जूडो का जन्म पहली बार जुजुत्सु के बीच हुए एक मैच के दौरान हुआ था, जब कानो ने अपने बड़े प्रतिद्वंद्वी को मैट पर लाने के लिए एक पश्चिमी कुश्ती चाल को शामिल किया था। जुजुत्सु में उपयोग की जाने वाली सबसे खतरनाक तकनीकों को हटाकर, उन्होंने "जूडो" बनाया, जो कानो के व्यक्तिगत ऊर्जा का अधिकतम कुशल उपयोग और स्वयं एवम दूसरों की पारस्परिक समृद्धि पर आधारित एक सुरक्षित और सहकारी खेल है।


वर्ष 1882 में, कानो ने टोक्यो में अपना खुद का एक मार्शल आर्ट जिम 'कोडोकन जूडो संस्थान' खोला, जहां उन्होंने वर्षों तक जूडो का विकास किया। उन्होंने इस खेल में 1893 में महिलाओं का खेल में स्वागत किया।


कानो जिगोरो की मृत्यु कैसे हुई (Kano Jigoro Death Cause In Hindi)


वर्ष 1934 के बाद से ही कानो ने खराब स्वास्थ्य के कारण सार्वजनिक जगहों पर अपने हुनर का प्रदर्शन दिखाना बन्द कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार इनके गुर्दे की पथरी के कारण इनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा। जिसके बाद से ही लोगों को लगने लगा था कि कानो जिगोरो अब ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेंगे।


इतनी शारीरिक परेशानियों के बावजूद कानो ने ओलंपिक जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना नहीं छोड़ा। जिसके बाद 4 मई 1938 को कानो की एक समुद्र यात्रा में बहुत ही दुखद निधन हो गया।


इनके मृत्यु का कारण उस समय निमोनिया को बताया गया था। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके भोजन में जहर देकर मारने की भी बात कही गयी थी। लेकिन इनके मृत्यु का असली सच क्या है अभी तक इसकी कोई पुख्ता सबूत नहीं है।


कानो के मरने के साथ जूडो नहीं मरा। इसके बजाय, 1950 के दशक के दौरान, जूडो क्लब दुनिया भर में उभरे, और 1964 में जूडो को टोक्यो ओलंपिक में एक ओलंपिक खेल के रूप में पेश किया गया और 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में फिर से शुरू किया गया।


आखिरकार कानो जिगोरो के मरने के बाद जुडो को जो सम्मान वो दिलाना चाहते थे वो मिल गया। बहरहाल, उनकी असली विरासत उनका आदर्शवाद था।


कानो ने 1934 में दिए एक भाषण में कहा था "सूर्य के नीचे कुछ भी शिक्षा से बड़ा नहीं है। एक व्यक्ति को शिक्षित करके और उसे अपनी पीढ़ी के समाज में भेजकर, हम आने वाली सौ पीढ़ियों का योगदान देते हैं।"


कानो 1909 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के पहले एशियाई सदस्य बने और 1960 में IOC ने जूडो को एक आधिकारिक ओलंपिक खेल के रूप में मंजूरी दी।


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पूरा नाम: कानो जिगोरो
निकनेम: कानो
जन्म: 28 अक्टूबर 1860
जन्मदिन/ Date Of Birth: 28 अक्टूबर
जन्मस्थान/ Birthplace: जापान के मिकेज शहर
मृत्यु/ Death: 4 मई 1938
मृत्यु स्थल: हिकावा मारू जापान
उम्र/ Age: 77 वर्ष
प्रोफेशन: शिक्षक, एथलीट
पॉपुलर होने का कारण: जुडो के संस्थापक
मार्शल आर्ट स्टाइल: जुडो जुजुत्सु


Kano Jigoro Family


पिता का नाम: कानो जिरोसाकू
माता का नाम: N/A
वाइफ का नाम: N/A


दोस्तों आपको जुडो के संस्थापक कानो जुगोरो की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा। साथ ही आपने Kano Jigoro Biography In Hindi पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।।

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कौन थे ओटो विचर्ले | Otto Wichterle Biography Wikipedia In Hindi

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आज हम बात करने वाले हैं एक ऐसे शख्स के बारे में जिनके सम्मान में गूगल ने बहुत ही बेहतरीन doodle बनाकर सम्मानित किया है। लेकिन क्या आप जानते हैं उस शख्स का नाम क्या है? Google ने जिस शख्स का इतना बेहतरीन डूडल बनाया है उसका नाम Otto Wichterle है।


गूगल ने 27 अक्टूबर 2021 को इनके 108वें जन्मदिन पर बहुत ही शानदार डूडल बनाकर ओटो विचर्ले को सम्मानित किया है।


आखिर कौन थे Otto Wichterle जिनको गूगल ने इतना बड़ा सम्मान दिया है? अगर आप Otto Wichterle Biography In Hindi के बारे में पूरी विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।


ओटो विचर्ले कौन थे (Who Was Otto Wichterle In Hindi)

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Who Was Otto Wichterle

दोस्तों, ओटो विचर्ले एक चेक केमिस्ट थे। चेक रिपब्लिक के प्रोस्टेजोव में जन्में ओटो विक्टेरल को इनको आधुनिक सॉफ्ट कांटेस्ट लेंस के आविष्कार के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। सबसे बड़ी उन्होंने ये कांटेक्ट लेंस घर पर ही बनाया था। इनके पिता का नाम कारेल था, जो एक सफल फॉर्म मशीन फैक्ट्री और छोटे कार प्लांट के सहमालिक थे।


पिता का बिजनेस को संभालने के बजाय ओटो ने साइंस क्षेत्र में अपना जीवन बिताने का सोचा और पिता का लाख समझाने के बाद भी इन्होंने विज्ञान को ही अपना जीवन बना लिया।


ओटो विचर्ले की शिक्षा (Otto Wichterle Education)


ओटो प्रोस्टेजोव में हाइ स्कूल की शिक्षा प्राप्त करने के बाद 1936 में प्राग इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से जैविक रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इन सबके अलावा ओटो को मेडिसिन में भी काफी रुचि रहती थी।


ओटो विचर्ले ने 1936 में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद विश्वविद्यालय में ही रहकर 1939 में रसायन शास्त्र में अपनी दूसरी डॉक्टरेट थीसिस प्रस्तुत किया। लेकिन विश्वविद्यालय ने किसी भी अन्य गतिविधियों को रोक दिया।


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जुडो के संस्थापक कानो जिगोरो कौन थे?


Otto Wichterle Career In Hindi


हालांकि ओटो ने वहाँ के कार्यो में अनुसंधान में शामिल होने और अपने वैज्ञानिक कार्यों को जारी रखने में सक्षम थे। वहां इन्होंने प्लास्टिक के तकनीकी अविष्कार का नेतृत्व किया। इसके बाद 1941 में ओटो विचर्ले की टीम ने पॉलियामाइड धागे को फेंकने और स्पूल करने की प्रक्रिया का आविष्कार किया। इस प्रकार ओटो ने सिलोन नाम के तहत पहला चेकोस्लोवाक सिंथेटिक फाइबर बनाया।


इनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब  1942 में किसी कारणवश गेस्टापो द्वारा विचरले को कैद कर लिया गया था लेकिन कुछ महीनों के बाद रिहा कर दिया गया था।


द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑटो विचर्ले विश्वविद्यालय में लौट आए। वे जैविक रसायन विज्ञान में विशेषज्ञ थे और सामान्य और अकार्बनिक रसायन विज्ञान पढ़ाने में इनको महारथ हासिल था। उन्होंने एक अकार्बनिक रसायन शास्त्र एक पुस्तक लिखी, जिसकी अवधारणा अपने समय से आगे थी।


1949 में उन्होंने प्लास्टिक की तकनीक के साथ अपने दूसरे डॉक्टरेट का विस्तार किया और प्लास्टिक प्रौद्योगिकी के एक नए विभाग की स्थापना के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया। 1952 में उन्हें प्राग में इनके शानदार उपलब्धि को देखते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी का डीन बनाया गया।


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जन्म/ Date Of Birth: 27 अक्टूबर 1913
जन्मस्थान/ Birthplace: मोरविया, ऑस्ट्रिया हंगरी
मृत्यु/ Dead: 18 अगस्त 1998
उम्र/ Age: 84 वर्ष
प्रोफेशन: केमिस्ट
प्रसिद्धि का कारण: आधुनिक सॉफ्ट कांटेक्ट लेंस
राष्ट्रीयता: चेक


ओटो विचर्ले की उपलब्धियां (Otto Wichterle Achievements In Hindi)


Otto Wichterle ने अपनी उपलब्धियों के माध्यम से न केवल अपने देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों में अपनी शानदार उपलब्धियों और गतिविधियों के कारण पूरी दुनिया में विख्यात थे।


इनकी शानदार उपलब्धियों में से प्रमुख इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योर एंड एप्लाइड कैमिस्ट्री (आईयूपीएसी) था। उन्होंने 1957 और 1965 में इसके Prague symposia की तैयारी में भाग लिया। जिसमे इनके शानदार प्रयास को सभी प्रतिभागियों ने खूब सराहा।


विचरले बहुत अधिक संख्या में पुस्तक लिखने के लिए प्रख्यात थे। वे कार्बनिक, अकार्बनिक और मैक्रोमोलेक्यूलर रसायन विज्ञान, बहुलक विज्ञान और जैव चिकित्सा सामग्री के विभिन्न पहलुओं पर कई स्वतंत्र पुस्तकों के लेखक हैं।


पोलीमराइजेशन, फाइबर, बायोमेडिकल सामग्री का संश्लेषण और आकार देना, उत्पादन के तरीके और बायोमेडिकल उत्पादों से संबंधित मापने के उपकरण। इन सभी पर इन्होंने अपने हुनर से काफी सफलता हासिल की। 

1990 में, उन्हें चेकोस्लोवाकिया के विघटन तक चेकोस्लोवाक विज्ञान अकादमी का अध्यक्ष बनाया गया था और उसके बाद चेक गणराज्य के विज्ञान अकादमी के मानद अध्यक्ष बनाया गया। विचरले विज्ञान की कई विदेशी अकादमियों के सदस्य थे, उन्होंने कई विश्वविद्यालयों से कई पुरस्कार और मानद डॉक्टरेट प्राप्त किए।


क्षुद्रग्रह संख्या 3899 का नाम 1993 में विचरले के नाम पर ही रखा गया था। इसके अलावा, चेक गणराज्य में ओस्ट्रावा (पोरूबा जिले में) में एक हाई स्कूल का नाम भी इन्हीं के नाम पर रखा गया था।


दोस्तों, हमें उम्मीद है कि आपको Otto Wichterle Biography In Hindi काफी पसंद आई होगी। अगर आपको Otto Wichterle की जीवनी पसन्द आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।

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संजीव गोयनका कौन है | Sanjiv Goenka Biography, Wikipedia, IPL Team

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Sanjiv Goenka Biography, Wikipedia, Family, Net Worth, IPL Team, Story In Hindi (संजीव गोयनका की जीवनी, इतिहास, फैमिली, विकिपीडिया, नेट वर्थ, आईपीएल टीम)


दोस्तों, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि आईपीएल के अगले सीजन में 8 नहीं बल्कि 10 टीमें खेलती हुई नजर आने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक ये दो टीमें RPSG ग्रुप ने 7090 करोड़ सबसे बड़ी बोली लगाकर लखनऊ टीम का मालिकाना हक हासिल कर लिया है तो वही CVC Capital ने 5600 करोड़ की दूसरी सबसे बड़ी बोली लगाकर अहमदाबाद के मालिकाना हक हासिल कर लिया है।


आईपीएल के इस महा नीलामी के बाद जो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहा वो है RPSG ग्रुप के चैयरमैन और लखनऊ टीम के मालिक संजीव गोयनकाके बारे में। आखिर हो भी क्यों न क्योंकि इन्होंने तमाम दिग्गजों के बोली को पछाड़ते हुए 7090 करोड़ की सबसे बड़ी बोली लगाई।


लेकिन आखिर सबलोग जानना चाहते हैं कि आखिर इतनी बड़ी बोली लगाने वाले संजीव गोयनका कौन है? तो अगर आप भी संजीव गोयनका की जीवनी के बारे में पूरी विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढियेगा।


    संजीव गोयनका कौन है (Who Is Sanjiv Goenka In Hindi)


    दोस्तों, संजीव गोयनका एक फ़िल्म निर्माता होने के अलावा Firstsource Solutions Limited के निदेशक मंडल के अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह RP-Sanjiv Goenka Group के अध्यक्ष भी है।


    वह CESC Limited अध्यक्ष भी हैं और Phillips Carbon Black Limited and Spencer’s Retail Limited जैसी कई कंपनियों के बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं।


    गोयनका वर्तमान में कोलकाता में कनाडा के मानद कौंसल हैं। आपको बता दें कि इन्होंने अप्रैल 2001 में, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था।


    वह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, (IIT-Khadagpur) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हैं और वर्तमान में भारतीय प्रबंधन संस्थान, (IIM-Kolkata) के बोर्ड में कार्यरत हैं।


    इन सबके अलावा गोयनका भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के साथ-साथ अखिल भारतीय प्रबंधन संघ (AIMA) के पूर्व अध्यक्ष और व्यापार और उद्योग पर प्रधान मंत्री परिषद के सदस्य भी थे। वह Woodlands Medical Centre Ltd. Kolkata के निदेशक मंडल के वर्तमान अध्यक्ष भी हैं।


    लेकिन पूरी देश मे इनका नाम चर्चा में तब आया जब इन्होंने आईपीएल 2021 के दो नई टीमों के नीलामी के दौरान 7090 करोड़ की सबसे बड़ी बोली लगाकर लखनऊ फ्रेंचाइजी को अपने साथ कर लिया।


    संजीव गोयनका की कम्पनी RPSG Group की एक झलक


    कम्पनी का पूरा नाम: RP- Sanjiv Goenka Group
    चेयरमैन: संजीव गोयनका
    फाउंडर: संजीव गोयनका
    स्थापना: 13 जुलाई 2021
    हेडक्वॉर्टर: कोलकता, पश्चिम बंगाल
    प्रोडक्ट्स: आईटी सेक्टर, इलेक्ट्रिक समान, रिटेलिंग, मीडिया, स्पोर्ट्स इत्यादि
    कम्पनी का रेवेन्यू: 3.6 बिलियन डॉलर (26900 करोड़)
    कुल एसेट्स: 47405 करोड़
    कुल कर्मचारी: 50 हजार से अधिक
    ऑफिसियल वेबसाइट: www.rpsg.in


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    पूरा नाम: संजीव गोयनका
    जन्म/ Date Of Birth: 29 जनवरी 1961
    जन्मस्थान/ Brthplace: पश्चिम बंगाल
    उम्र/Age: 61 वर्ष
    कंपनी: RPSG Group
    कारोबार: पावर एंड नेचुरल रिसोर्सेज, कार्बन ब्लैक, रिटेल, मीडिया एंड एंटरटेनमेंट और आईटी एंड एजुकेशन में सीईएससी लिमिटेड, फर्स्टसोर्स सॉल्यूशंस लिमिटेड, फिलिप्स कार्बन ब्लैक लिमिटेड और सारेगामा इंडिया लिमिटेड
    आईपीएल टीम: लखनऊ
    धर्म/ Religion: हिन्दू
    राष्ट्रीयता: भारतीय


    संजीव गोयनका का परिवार (Sanjiv Goenka Family)


    पिता का नाम: आर पी गोयनका
    माता का नाम: सुशीला देवी गोयनका
    भाई का नाम: हर्ष गोयनका
    पत्नी का नाम: प्रीति गोयनका
    बच्चे (Children): शास्वत गोयनका, अवर्णा जैन


    संजीव गोयनका की शिक्षा (Sanjiv Goenka Education)


    संत जेवियर कॉलेज कोलकता पश्चिम बंगाल से इन्होंने अपनी शिक्षा प्राप्त की है।


    संजीव गोयनका की कुल सम्पति (Sanjiv Goenka Net Worth)


    इतने बड़े साम्राज्य के मालिक संजीव गोयनका की कूल सम्पति के बारे में बात किया जाए तो इनके पास 4.3 बिलियन डॉलर से भी अधिक सम्पति है। इसके अलावा इनके पास RP-Sanjiv Goenka Group का एक लाख से भी शेयर है।


    संजीव गोयनका के सफलता का मंत्र


    सन 1820 में रामदत्त गोयनका के द्वारा एक फैमिली बिजनेस के रूप में इस कम्पनी की स्थापना के बाद से इस कम्पनी ने लगातार बदलते समय के साथ-साथ अपने बिजनेस में भी बदलाव करते हुए कई सारे विविधता भरे बिजनेस शुरू किए हैं।


    जिसमें बैंकिंग, कपड़ा, चाय और जूट के डोमेन से लेकर आईटी और संचार, मनोरंजन, बिजली, पारेषण, टायर और जीवन विज्ञान इत्यादि शामिल है।


    आज के समय में संजीव गोयनका भारत के एक बहुत बड़े बिजनेसमैन के रूप में जाने जाते हैं। जिनका मानना है कि प्रबंधन में उद्यमशीलता की लकीर लाने के लिए कड़ी मेहनत, स्पष्ट दृष्टि और साहस के सदियों पुराने गुणों का कोई प्रतिस्थापन नहीं है।


    उसके लिए, सफलता का कोई रहस्य नहीं है जो दृढ़ता, तैयारी, कड़ी मेहनत और सीखने से नहीं आता है। हमें कोई भी काम को सफल अथवा असफल बनाने के लिए उसे सबसे पहले शुरू करना जरूरी होता है।


    दोस्तों, हमें उम्मीद है कि आपको आईपीएल के नई टीम के मालिक sanjiv goenka biography in hindi काफी पसंद आई होगी। अगर आपको Sanjiv Goenka Biography पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।।

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    दोस्तों जेईई एडवांस 2021 का परिणाम 15 अक्टूबर को शुक्रवार को घोषित कर दिया गया है। भारत के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक इस परीक्षा के टॉपर्स की सूची जारी कर दी गई है। IIT-JEE Advance 2021 में जयपुर के मृदुल अग्रवाल ने न केवल परीक्षा में टॉप किया बल्कि आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षा में अब तक का सर्वोच्च नम्बर लाकर इतिहास रच दिया है।


    इन्होंने इस परीक्षा में 360 में से 348 अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का पूरे भारत में डंका बजा दिया है। मृदुल 2011 के बाद से इस परीक्षा में 96.66 फीसदी अंक हासिल करने वाले पहले विद्यार्थी बन गए हैं।


    लेकिन क्या आप जानते हैं कि आईआईटी जेईई एडवांस परीक्षा में अपनी शानदार प्रतिभा से पूरे देश में डंका बजाने वाले मृदुल अग्रवाल कौन है, इनके सफलता के पीछे की कहानी क्या है, इनका सक्सेस मन्त्र क्या है?


    अगर आप मृदुल अग्रवाल की जीवनी के बारे में हर जानकारी पूरी विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें।


    मृदुल अग्रवाल कौन है (Who Is JEE Topper Mridul Agarwal In Hindi)


    दोस्तों, मृदुल अग्रवाल राजस्थान के जयपुर के रहने वाले हैं, जिन्होंने आईआईटी जेईई एडवांस 2021 परीक्षा में टॉप न सिर्फ किये हैं, बल्कि 96.66% अंक लाने वाले पहले कैंडिडेट बन गए हैं।


    जेईई एडवांस परीक्षा में 2012 के बाद से चली आ रही रिकॉर्ड को तोड़कर मृदुल ने अपनी प्रतिभा ला लोहा मनवाया है। इनसे पहले 2012 में जेईई एडवांस में 96% अंक लाकर टॉप करने वाले कैंडिडेट को इन्होंने 96.66% अंक लाकर इस रिकॉर्ड को अपने नाम कर लिया है।


    मृदुल अग्रवाल की शिक्षा (Mridul Agarwal Educational Qualification)


    बचपन से ही मेधावी छात्र रहे मृदुल ने कंप्यूटर इंजीनियर बनने का सपना देखा था। इसके लिए इन्होंने कक्षा 9वीं से अपने करियर को रफ्तार देने के लिए Allen Career Institute में 4 साल के क्लासरूम प्रोग्राम में अपना दाखिला लिया।


    मृदुल ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई CBSE बोर्ड से पूरा किया है, जिसमें इनको 98.2% अंक हासिल किये थे। दिन में 12 से 14 घंटे तक बिना थके लगातार फोकस होकर पढ़ाई करने का नतीजा ये रहा कि जेईई एडवांस 2021 में टॉप करके ही दम लिया। मृदुल अब आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक करना चाहते हैं।


    मृदुल अग्रवाल का परिवार (Mridul Agarwal Family)


    मृदुल अग्रवाल के पिता का नाम प्रदीप अग्रवाल है, जो रक निजी कम्पनी में फाइनेंस हेड है। इनके माता का नाम पूजा अग्रवाल है, जो गृहणी है। इनका एक छोटा भाई भी है जो 7वीं कक्षा में पढ़ता है।


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    मृदुल अग्रवाल का जीवन परिचय (Mridul Agarwal Date Of Birth, Age, Religion, Bio, Wiki)

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    Mridul Agarwal Biography

    पूरा नाम: मृदुल अग्रवाल
    निकनेम: मृदुल
    जन्म/ Date Of Birth: 2003
    जन्मस्थान/ Birthplace: जयपुर, राजस्थान
    उम्र/ Age: 19 वर्ष
    हाइट/ Height: N/A
    फेमस फ़ॉर: जेईई एडवांस 2021 टॉपर
    मार्क्स/ Marks: 360 में से 348
    अंक प्रतिशत: 96.66%
    धर्म/ Religion: हिन्दू
    वैवाहिक जीवन: अविवाहित
    राष्ट्रीयता: भारतीय


    मृदुल अग्रवाल के सफलता की कहानी (Mridul Agarwal Success Story In Hindi)


    जेईई मेंस परीक्षा में 100 प्रतिशत अंक लाने के बाद मृदुल ने जेईई एडवांस में भी 96.66% अंक हासिल कर पूरे देश मे अपने नाम का परचम लहराया है। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को अपना आदर्श मानने वाले मृदुल को शुरू से ही इनके जैसा बनने का सपना था। इनका कहना है कि मैं भी एक दिन सुंदर पिचाई जैसा बनने की पूरी कोशिश करूंगा।


    इनका सपना इंजीनियरिंग में मास्टर की डिग्री हासिल कर के खुद का स्टार्टअप करने का है। मृदुल कहते हैं कि मैं भारत के विकास में उल्लेखनीय योगदान देना चाहता हूँ।


    अपने सफलता के बारे में बात करते हुए इन्होंने इंटरव्यू में बताया कि "मेरी सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और मेरे गुरुजनों को जाता है। जिन्होंने मुझे अपना रास्ता चुनने को लेकर कभी दबाव नहीं बनाया। मैं सभी गुरुजनों का आभारी हूँ, जिनके सही मार्गदर्शन के बदौलत ही मैं आज यहाँ तक पहुँच सका हूँ।"


    इनका मानना है कि आपको माता-पिता, गुरुजन, दोस्त कुछ देर के लिए मोटिवेट कर सकते हैं, लेकिन कोई भी आपको 24×7 मोटिवेट नहीं रख सकता है। इसलिए हमें अपने लक्ष्य को लेकर खुद ही मोटिवेट रहना चाहिए। तभी हमें सफलता मिल पाएगी।


    इनका अगला सपना आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने का है। आपको बता दें कि आईआईटी खड़गपुर ने टॉप 100 छात्रों के लिए एक साल का स्कॉलरशिप देने का फैसला किया है लेकिन मृदुल ने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ने का फैसला किया है।


    मास्टर की डिग्री के लिए इनका सपना अमेरिका में स्थित एमआईटी या स्टैंडफोर्ड जैसी दुनिया की टॉप एजुकेशन संस्थान से डिग्री हासिल करने का है।

    एमआईटी में एडमिशन कैसे लें?


    मृदुल पढ़ाई के साथ-साथ खेलने और कूदने पर भी काफी ध्यान देते हैं। इनको अपने दोस्तों के बर्थडे पार्टी में जाना काफी पसंद है। ये बर्थडे पार्टी में जाना कभी नहीं भूलते हैं। इनको जब भी कभी पढ़ाई में मन नहीं लगता है तो अपने माता-पिता के साथ घूमने चले जाते हैं।


    दोस्तों, हमें पूरी उम्मीद है कि आपको जेईई एडवांस 2021 टॉपर मृदुल अग्रवाल की जीवनी काफी पसंद आई होगी। अगर आपको मृदुल अग्रवाल की बायोग्राफी पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।।

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