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लवलीना बोरगोहेन का जीवन परिचय | Lovlina Borgohain Biography In Hindi

लवलीना बोरगोहेन का जीवन परिचय | Lovlina Borgohain Biography In Hindi

महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की जीवनी | Lovlina Borgohain Biography Wikipedia In Hindi


दोस्तों आज हम भारत के एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में जानने वाले हैं जिनका जीवन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा है। लेकिन उन्होंने अपने मेहनत और हौसले के दम पर आज अपना और अपने देश का नाम टोक्यो ओलंपिक में रोशन कर रही है।


जी हाँ हम बात कर रहे हैं महिला मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन के बारे में। जिन्होंने ओलंपिक जैसे खेलों में न केवल अपना नाम शामिल करने में सफल रही बल्कि ओलंपिक में अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में पहुँच चुकी है। इसी के साथ लवलीना ने देश के नाम ओलंपिक पदक नाम कर दिया है।


हम सभी देशवासियों के तरफ से लवलीना बोरगोहेन को इस जीत की हार्दिक बधाई देनी चाहिए। इसके साथ ही पूरे देश के लोग चाहते हैं कि लवलीना बोरगोहेन के जीत का ये सिलसिला ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर ही खत्म हो।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में अपना और भारत का नाम रोशन करने वाली मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन कौन है? अगर नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं। इस article में हम मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की जीवनी के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं।


लवलीना बोरगोहेन कौन है? Who Is Lovlina Borgohain


लवलीना बोरगोहेन ओलंपिक में क्वालीफाई करने वाली असम की पहली महिला बॉक्सर है और शिव थापा के बाद असम की दूसरी बॉक्सर है जिसने राष्ट्रीय टीम में देश का प्रतिनिधित्व किया है।


इन्होंने न सिर्फ ओलंपिक में क्वालीफाई किया बल्कि सेमीफाइनल में पहुँचकर अपने और अपने देश के नाम पदक पक्का किया। टोक्यो ओलंपिक में इनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए सभी देशप्रेमी को लवलीना बोरगोहेन से और भी उम्मीद बढ़ गयी है।


क्वार्टर फाइनल मुकाबले जितने के साथ ही लवलीना बोरगोहेन असम राज्य की पहली ऐसी नागरिक बन गयी हैं जो ओलंपिक में पदक जीता हो।


अगर लवलीना ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत जाती है तो देश की पहली बॉक्सर होगी। आज पूरा देश लवलीना के लिए गोल्ड मेडल जीतने के लिए दुआ कर रहा है।


लवलीना बोरगोहेन का जीवन परिचय | Boxer Lovlina Borgohain Biography, Wiki In Hindi

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Lovlina Borgohain Biography In Hindi

असली नाम/Real Name- लवलीना बोरगोहेन

निकनेम- लवलीना

जन्म/Date Of Birth- 2 अक्टूबर 1997

जन्मस्थान- गोलाघाट, असम

उम्र/Age- 24 वर्ष

हाइट/Height- 5 फिट 10 इंच

प्रोफेशन- मुक्केबाजी (Boxer)

वजन/Weight- 70kg

वजन कैटेगरी/Weight Category- 69kg

जाती/Caste- असामी

धर्म/Religion- हिन्दू

वैवाहिक जीवन- अविवाहित

स्कूल- बर्पथर गर्ल्स हाई स्कूल, गोलाघाट

कोच का नाम- पदुम बोरो, शिव सिंह

राष्ट्रीयता- भारतीय


लवलीना बोरगोहेन का परिवार


पिता नाम- टिकेन बोरगोहेन
माता का नाम- मामोनी बोरगोहेन
बहन का नाम- लीचा और लीमा बोरगोहेन
भाई का नाम- N/A


मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन का करियर और मेडल


लवलीना के पिता ने अपने बेटी के सपने को पूरा करने के लिए कई संघर्ष झेलने पड़े। आपको बता दें कि लवलीना बोरगोहेन ने अपनी बड़ी बहन से प्रेरित होकर पहले किकबॉक्सिंग से करियर की शुरुआत किया था, लेकिन इनको तो और कुछ बनना था।


लवलीना ने किकबॉक्सिंग को छोड़कर अपना पूरा फोकस मुक्केबाजी पर लगा दिया। एक बार मुक्केबाजी में अपना पैर जमाने के बाद लवलीना कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई सारे पदक अपने नाम किये।


इसी दौरान प्रसिद्ध मुक्केबाजी कोच पदुम बोरो ने लवलीना के प्रतिभा को पहचाना और 2012 से ही ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया था। लेकिन आगे चलकर देश के मुख्य महिला मुक्केबाजी कोच शिव सिंह से ट्रेनिंग लेने को कहा।


यहाँ पर भी लवलीना ने अपने प्रदर्शन से कोच का दिल जीत लिया। लेकिन लवलीना के करियर में सबसे अहम पड़ाव तब आया जब इन्होंने 2017 में वियतनाम में हुए एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने हुनर का परिचय दिया।


इसके बाद लवलीना 2018 में वेल्टरवेट कैटेगरी में ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपना परचम लहराया और इसी के साथ 2018 मे ही कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना स्थान पक्का किया।


इसके अलावा लवलीना ने नई दिल्ली में हुए 23 नवम्बर 2018 में ही AIBA वीमेन वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के वेल्टरवेट कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता इसके बाद रूस में 2019 में हुए वर्ल्ड वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपना नाम एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने लाने में कामयाब रही।


इसके बाद 2020 में एशिया और ओशिनिया बॉक्सिंग ओलंपिक क्वालीफ़ायर में उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी को 5-0 से धूल चटाकर जीत हासिल किया और अपने इस शानदार प्रदर्शन के बदौलत टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया।


लवलीना बोरगोहेन का टोक्यो ओलंपिक में प्रदर्शन | Lovlina Borgohain Latest News In Hindi


अपने शानदार को लवलीना ने टोक्यो ओलंपिक में भी जारी रखते हुए 5वें दिन अपना पहला मुकाबला जीतकर पदक की उम्मीद बढा दी है। लवलीना ने 69 kg वेट कैटेगरी में अपने पहले मैच में जर्मनी की एपेट्ज नेदिन को हराकर दूसरे राउंड में जगह बना ली है।


भारतीय महिला मुक्केबाज लवलीना ने टोक्यो ओलंपिक में धमाकेदार शुरुआत करते हुए यह बाउट 3-2 से जीतकर अपना कदम आगे बढ़ाया।


इसके बाद सेमीफाइनल में इनका मुकाबला पूर्व ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी चीनी खिलाड़ी से होने वाला था। सभी को ये उम्मीद थी कि लवलीना के लिए ये मुकाबला जितना काफी मुश्किल होगा।


लेकिन एक बार फिर लवलीना ने वो कर दिखाया जिसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं होगा। उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में चीनी ताइपे निएन चिन चेन को 4-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है।


जहाँ 4 अगस्त को इनका मुकाबला विश्व के नम्बर एक खिलाड़ी और मौजूदा विश्व चैंपियन तुर्की के बुसेनाज सुरमेनेली से होगा। आपको बता दें कि बॉक्सिंग में सेमीफाइनल में जगह बना लेने पर कम से कम ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो जाता है। लेकिन हम सभी देशवासियों को उम्मीद है कि लवलीना देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर ही वापस लौटे।


Lovlina Borgohain Awards


लवलीना बोरगोहेन को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए 2020 में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के द्वारा इनको अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।


इसी के साथ लवलीना असम राज्य के तरफ से अर्जुन अवार्ड पाने वाली केवल 6वीं नागरिक है।


हमें उम्मीद है कि आपको लवलीना बोरगोहेन का जीवन परिचय काफी पसंद आया होगा।अगर आपको लवलीना बोरगोहेन की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

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Priya Malik Wrestler Biography Wikipedia, Story In Hindi

Priya Malik Wrestler Biography Wikipedia, Story In Hindi

Priya Malik Wrestler Biography Wikipedia In Hindi | प्रिया मलिक का जीवन परिचय


एक ऐसी खिलाड़ी जिसे कुछ दिनों पहले तक कोई नाम भी नहीं जानता था, लेकिन गुमनाम रहकर कुछ ऐसा कारनामा किया कि पूरा देश इस लड़की के नाम की चर्चा करने लगा। हर किसी के लब्ज पर बस एक ही नाम है प्रिया मलिक


जी हाँ प्रिया मलिक का नाम सुर्खियों में तब आया जब इन्होंने 24 जुलाई 2021 को हंगरी के बुडापेस्ट में विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।


महिला बॉक्सर प्रिया मलिक की जीवनी


आइये प्रिया मलिक की जीवनी पूरी विस्तार से जानते हैं।

कोरोना महामारी के चलते एक साल देर से शुरू हुआ टोक्यो ओलंपिक में कई देशों के खिलाड़ी पदक जीतने के लिए अपनी जी जान लगाने को तैयार है। ओलपिंक के बीच हंगरी के बुडापेस्ट में 24 जुलाई 2021 को कुछ ऐसा ही कारनामा हुआ जिसे सुनकर पूरा देश खुशियों से झूम उठा।


24 जुलाई को प्रिया मलिक ने विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया। उनके इस जीत से खुश होकर देश के हर कोने-कोने से बधाइयाँ देने का तांता लग गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके इस सफलता पर बधाई दी।


लेकिन एक लड़की होने के नाते प्रिया मलिक को इतना बड़ा मुकाम हासिल करना इतना भी आसान नहीं था। कितनी सारी चुनौतियों को पार कर उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है। उनके इस सफलता के पीछे सालों के मेहनत का फल स्वर्ण पदक के रूप में मिला है।


पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन करने वाली प्रिया मलिक की जितनी भी तारीफ किया जाए उतना कम है। पूरा देश आज उनपर गर्व महसूस कर रहा है।


आपको बता दें कि प्रिया मलिक ने ये कारनामा 73 किलो के वर्ग में किया। अपने इसी सफलता के साथ उन्होंने पूरे देश के लोगों को ये बता दिया कि आने वाले समय में वह देश के लिए और भी पदक लाने वाली है।


इनके बारे में जानकर आपको ये जानने की बहुत उत्सुकता होगी कि प्रिया मलिक कौन है और इनकी कहानी क्या है?


प्रिया मलिक कौन है? Who Is Wrestler Priya Malik In Hindi

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Priya Malik Biography In Hindi

प्रिया मलिक चौधरी भरतसिंह मेमोरियल स्कूल निडानी की खिलाड़ी है। आपको बता दें कि प्रिया मलिक हरियाणा की रहने वाली है। इनके पिता का नाम जयभगवान निडानी है। प्रिया को यहाँ तक पहुँचने में इनके पिता का काफी योगदान रहा है। प्रिया के पिता ने अपने बेटी का हर समय हौसला बढ़ाया है और हर मुश्किल में साथ दिया है।


उनके इस योगदान को प्रिया मलिक ने सार्थक करते हुए आज देश के लिए गोल्ड मेडल लेकर अपना और अपने देश का नाम रोशन किया है।


प्रिया के पिता भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं और अभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अपने पिता की तरह की प्रिया देश के लिए कुछ बड़ा करने की ठानी और आखिरकार उसे पूरा कर के ही दम लिया।


पहलवान प्रिया मलिक का करियर | Priya Malik Wrestler Career In Hindi


भरतसिंह मेमोरियल स्कूल में प्रिया मलिक के कोच का नाम अंशुमलिक है। कोच के सही मार्गदर्शन से प्रेरणा लेकर प्रिया ने 2019 में खेलो इंडिया मिशन के तहत गोल्ड मेडल हासिल कर अपने क्षमता का परिचय दिया।


प्रिया मलिक ने 2020 में राष्ट्रीय स्कूल खेल चैंपियनशिप में कई सारे पदक जीते हैं। इसके अलावा साल 2020 में ही प्रिया मलिक ने बिहार के पटना में हुए राष्ट्रीय कुश्ती कैडेट प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर अपने प्रतिभा का लोहा मनवाया।


प्रिया ने इन सबके अलावा कई सारे राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतकर अपनी दावेदारी पेश किया।


इसके बाद प्रिया ने सफलता के इस सफर को बरकरार रखते हुए 24 जुलाई 2021 को हंगरी के बुडापेस्ट में विश्व कैडेट कुश्ती चैंपियनशिप में बेलारूस की महिला पहलवान को हराकर स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को झूमने का मौका दे दिया। हम सभी को देश की इस बहादुर बेटी पर गर्व महसूस होना चाहिए।


प्रिया मलिक का अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना है। हम सभी को उम्मीद है कि प्रिया यहाँ भी अपने प्रतिभा के अनुरूप अपने प्रदर्शन से छाप छोड़ने में कामयाब रहेगी।


हम सभी उम्मीद करते हैं कि प्रिया मलिक अपने सफलता के इस कदम को और आगे तक बढ़ाते हुए देश के लिए और भी मेडल जीतेगी।


हमें उम्मीद है कि आपको पहलवान प्रिया मलिक की जीवनी काफी पसन्द आयी होगी। आपको प्रिया मलिक का जीवन परिचय कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा धन्यवाद।।

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Pooja Yadav IPS Biography, Wikipedia, Lifestyle In Hindi

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आईपीएस पूजा यादव की जीवनी | Pooja Yadav IPS Biography Wikipedia In Hindi


आज हम एक ऐसे साहसिक और खूबसूरत महिला आईपीएस अधिकारी के बारे में बात करन वाले हैं, जिन्होंने बहुत ही कम समय में पूरे देश में अपने नाम का परचम लहराया है।


जी हाँ हम बात कर रहे हैं देश की सबसे खूबसूरत महिला अधिकारी के रूप में मशहूर आईपीएस पूजा यादव के बारे में। इन्होंने न केवल अपनी खूबसूरती से लोगों के दिलों में जगह बनाई बल्कि अपने कार्यकाल में एक से बढ़कर सराहनीय कार्य करके अपना कार्य क्षमता का परिचय भी दिया है।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि आईपीएस पूजा यादव कौन है और इनका स्टोरी क्या है? अगर नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं आज के इस पोस्ट में हम पूजा यादव आईपीएस की जीवनी के बारे में उनके जीवन से जुड़ी एक-एक बात के बारे में जानेंगे। जिसको जानकर आप भी इनके जज्बे को सलाम करेंगे।


कौन है आईपीएस पूजा यादव? Who Is IPS Pooja Yadav In Hindi


दोस्तों आईपीएस पूजा यादव 2018 बैच की एक ऐसी महिला आईपीएस अधिकारी है, जिनकी गिनती देश के सबसे खूबसूरत महिला अफसरों में होती है। इनके नाम की चर्चा तब पूरे देश में होने लगी थी,जब इन्होंने 2016 बैच के आईएएस अधिकारी विकल्प भारद्वाज से शादी कर लिया था।


वर्तमान में इनका पोस्टिंग गुजरात के थराड जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप हैं। ये जितने अपने काम को लेकर चर्चा में रहती है उससे कहीं ज्यादा चर्चा इनकी खूबसूरती को लेकर होती है।


इनकी खूबसूरती के आगे बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज़ भी फिंके पड़ जाते हैं। लाखों लोग इनके खूबसूरती के दीवाने हैं। पूजा यादव के खूबसूरती के वजह से ही सोशल मीडिया पर लाखों फैंस है। ये सोशल मीडिया पर हमेशा एक्टिव रहती है।


पूजा यादव आईपीएस का जीवन परिचय | IPS Pooja Yadav Biography Wikipedia In Hindi

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Pooja Yadav IPS Biography In Hindi

असली नाम/Real Name: पूजा यादव

निकनेम: पूजा

जन्म/Date Of Birth: 20 सितम्बर 1988

जन्मस्थान: हरियाणा

उम्र/Age: 32 वर्ष

हाइट/Height: 5 फिट 1 इंच

रंग: गोरा

बैच: 2018

प्रोफेशन: आईपीएस अधिकारी

कैडर: गुजरात

शौक: ट्रेवलिंग करना

कांटेक्ट नम्बर- N/A

जाती/Caste: यादव

धर्म/Religion: हिन्दू

सैलरी: 90 हजार से 1 लाख

नेट वर्थ: 30 लाख

पिता का नाम: N/A

माता का नाम: N/A

राष्ट्रियता: भारतीय


Pooja Yadav IPS Education


पूजा यादव की प्रारंभिक शिक्षा गांव से ही पूरी हुई है। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने Biotechnology & Food Technology से M.Tech की पढ़ाई पूरी है।


पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने कनाडा और जर्मनी में कुछ सालों तक काम की है। लेकिन विदेश में काम करने के दौरान इनको एहसास हुआ कि दूसरे देश में काम करने से अच्छा है कि मैं अपने देश के लोगों को सेवा करूँ।


जिसके बाद इन्होंने वापस आकर भारत के बेस्ट जॉब के लिए UPSC की पढ़ाई शुरू कर दी। पहले प्रयास में असफल होने के बाद पूजा और मेहनत की। जिसके बाद 2018 में दूसरे प्रयास में UPSC परीक्षा क्रैक करने में सफल हो गयी।


वर्तमान में इनका पोस्टिंग 25 सितम्बर 2020 से गुजरात के थराड जिले में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में है।


Pooja Yadav IPS Marriage | पूजा यादव का वैवाहिक जीवन

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दोस्तों पूजा यादव ने 18 फरवरी 2021 को 2016 बैच के आईएएस अफसर विकल्प भारद्वाज के साथ शादी कर ली। इन दोनों की पहली मुलाकात लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडेमिक ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) में हुई थी। यहीं से ये एक दूसरे को चाहने लगे थे।


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इनके पति विकल्प भारद्वाज का कैडर केरल है लेकिन शादी के बाद इन्होंने गुजरात कैडर में ट्रांसफर करने की मांग अपने सीनियर अधिकारियों से की है।


आईपीएस पूजा यादव का करियर | Pooja Yadav IPS Success Story In Hindi


आइये अब पूजा यादव की सफलता दिलाने वाली कहानी के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं कि कैसे उन्होंने अपने बेहतरीन काम से इतना नाम कमाया है?


दोस्तों गुजरात के बनासकांठा जिले में थराड ऐसा तालुका है जहाँ ओर कानून व्यवस्था को बनाये रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि इस तालुका की सीमा पाकिस्तान और राजस्थान से सटा हुआ है।


इसलिए गुजरात के बनासकांठा जिले के थराड तालुके में आपराधिक मामले बहुत ज्यादा होता है। यहाँ कानून व्यवस्था को बनाये रखने के लिए कितने सारे पुलिस अफसर आये पर सफल नहीं हो पाए। लेकिन इस तालुके के कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी जब देश की सबसे खूबसूरत और तेजतर्रार महिला आईपीएस अफसर पूजा यादव के कंधे पर आई तो मानो अपराधियों ने अपना डेरा ही बदल दिया।


लेकिन 2018 बैच की आईपीएस अधिकारी पूजा यादव का ये सफर इतना भी आसान नहीं रहा है। इनके इस सफर में बचपन से ही अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।


हरियाणा के इस लेडी सिंघम का बचपन उस माहौल में गुजरा है, जहाँ आज भी बेटे और बेटियों में भेदभाव साफ नजर आता है। लेकिन कहते हैं न कि अगर मंजिल को पाने का जुनून हो तो फिर कोई भी मुश्किल उसे पाने से रोक नहीं सकती है।


पूजा यादव ने भी जब एक बार कुछ करने की ठानी तो उसे पूरा करके ही दम लिया। जो लोग पूजा यादव को लड़की बताकर कमजोर समझते थे आज वहीं लोग इनको सलाम भी करते हैं। इन्होंने समाज की सारी बेड़ियों को तोड़कर हर लड़कियों के लिए एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिससे आज पूरा हरियाणा इन पर गर्व महसूस करता है।


पूजा यादव ने अपने इस सफर के बारे में बताती है कि भले ही गांव में लोग लड़के और लड़कियों में भेदभाव करते थे लेकिन उनको यहाँ तक पहुँचने में परिवार वालों का काफी योगदान रहा है।


इन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि महिला होने के नाते हमेशा से ही एक समस्या का सामना करना पड़ता है क्योंकि आज भी हमारे समाज में लड़के और लड़कियों को समान अधिकार नहीं दिया जाता है।


सरकार के लाख कोशिशों के बावजूद आज भी हमारे समाज में लड़कियों को उतना अधिकार नहीं मिल पाया है जितना कि वे हकदार है।


पूजा यादव से एक इंटरव्यू में अपने इस पद के बारे में पूछे जाने पर बताया कि पुलिस और आम जनता के बीच का जो रिश्ता है उसे पुनः मजबूत बनाने की पूरा प्रयास करूंगी। जिससे लोगों को पुलिस पर भरोसा हो सकें। पूजा यादव का ये पहल लोगों को कितना लाभ पहुँचा सकता है इसका सबको इंतजार रहेगा।


गुजरात के थराड में पोस्टिंग के बाद यहाँ इन्होंने कई सारे शराब माफियाओं को दबोचा है। इसके अलावा लड़कियों को जबरदस्ती देह व्यापार कराने के मामले को उजागर कर और उनको जेल की सलाखों में भेजकर अपने कार्यशैली का परिचय दिया।


आगे इनको ऐसे ही कई सारे सराहनीय कदम उठाने होंगे, जिससे थराड के लोगों को आपराधिक घटनाओं से छुटकारा मिल सकें।


Interesting Facts About IPS Pooja Yadav In Hindi


1. आपको बता दें कि पूजा यादव (Pooja Yadav) आईपीएस अधिकारी बनने से पहले एमटेक किया और विदेश में कुछ साल तक नौकरी भी की है। नौकरी करने के बाद यूपीएससी की कठिन परीक्षा पास करना इनके जज्बे को दर्शाता है।


2.  पूजा यादव को बचपन में कई सारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है। इन्होंने अपने एमटेक की पढ़ाई पूरी करने के लिए पूजा ने कभी बच्चों को ट्यूशन दिया तो कभी रिसेप्शनिस्ट का काम किया।


3. पूजा यादव के सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव होने के कारण इनके इंस्टाग्राम पर 2.5 लाख से भी अधिक फॉलोवर्स है।


4. इनका मानना है कि यूपीएससी की परीक्षा पास करने कई बार असफलता हाथ लगती है, लेकिन हमें इससे हार मानने के बजाय और अच्छे ढंग से तैयारी करने पर हमें इसमें सफलता जरूर मिलती है।


5. पूजा लड़कियों को मोटीवेट करते हुए कहती है कि आज लड़कियों को कई तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन जब आप एक बार सफल हो गयी तो फिर आपसे कोई भेदभाव नहीं करता है।


दोस्तों हमें उम्मीद है कि आपको महिला आईपीएस अधिकारी पूजा यादव की जीवनी काफी पसंद आई होगी। आपने पूजा यादव के कहानी से क्या सीखा कमेंट करके जरूर बताएं।

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दोस्तों आपने एक कहावत तो सुना ही होगा कि "मेरे अंदर हौसला अभी जिंदा है, हम वो है जहाँ मुश्किलें भी शर्मिंदा है।" इस कहावत को ऐसा ही कुछ सही कर दिखाया है पूरी दुनिया में भारत के प्रतिभा लोहा मनवाने और एक नया इतिहास लिखने जा रही है भारत के आंध्रप्रदेश की रहने वाली सिरिशा बांदला ने।


आज हम भारत एक ऐसे जांबाज और बहादुर भारतीय मूल के लड़की के बारे में बात करने वाले हैं, जो भारत के तरफ से अंतरिक्ष में जाने वाली कल्पना चावला के बाद दूसरी लड़की है।


जी हां हम बात कर रहे हैं आंध्रप्रदेश के बहादुर लड़की और भारत की शान सिरिशा बांदला (Sirisa Bandla) के बारे में। तो आइए बिना देर किये जानते हैं कि सिरिशा बांदला की जीवनी के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं।


सिरिशा बांदला कौन है | Who Is Sirisha Bandla In Hindi


सिरिशा बांदला का जन्म आंध्रप्रदेश के गुंटूर शहर में हुआ था। सिरिशा बांदला का परिवार फिलहाल अमेरिका में ही रहता है। उनका पालन पोषण और उनकी पूरी पढ़ाई ह्यूस्टन टेक्सास अमेरिका में हुआ है। सिरिशा पेशे से एक एस्ट्रोनॉट है।


दोस्तों सिरिशा बांदला अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की चौथी व्यक्ति है। इनसे पहले केवल राकेश शर्मा, कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष की यात्रा की है।


इनके जीवन की इतनी बड़ी खुशखबरी मिलने के बाद सिरिशा ने ह्यूस्टन टेक्सास में माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि मैं यूनिटी 22 का हिस्सा बनकर बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। जिसका मुख्य मिशन सभी लोगों को जगह उपलब्ध कराना है।


सिरिशा बांदला का जीवन परिचय | Sirisha Bandla Biography Wikipedia In Hindi

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Sirisha Bandla Biography In Hindi

पूरा नाम- सिरिशा बांदला

निकनेम- सिरिशा

जन्मदिवस/Date Of Birth- N/A

जन्म- 1987

प्रोफेशन- भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट

हाइट/Height- 5 फिट 6 इंच

आँख का रंग- काला

उम्र/Age- 34

लिंग/Gender- महिला (Female)

जाति/Caste- बांदला

धर्म/Religion- हिन्दू

जन्मस्थान/Birthplace- गुंटूर आंध्रप्रदेश, भारत

गृहनगर/Hometown- ह्यूस्टन टेक्सास, यूएसए

वर्तमान शहर/Current City- ह्यूस्टन टेक्सास, यूएसए

नेट वर्थ/Net Worth- N/A

हस्बैंड नाम- N/A

बॉयफ्रेंड नाम- सीन हु (Sean Hu)

शौक- ट्रेवलिंग और स्विमिंग

वैवाहिक जीवन- अविवाहित

राष्ट्रियता- भारतीय अमेरिकी

सिरिशा बांदला- इंस्टाग्राम

सिरिशा बांदला- ट्विटर


सिरिशा बांदला की शिक्षा | Sirisha Bandla Qualification


दोस्तों सिरिशा बांदला ने Purdue University से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है और Georgetown University से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) की पढ़ाई की है।


सिरिशा बांदला का परिवार | Sirisha Bandla Family


दोस्तों दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाली सिरिशा बांदला के पिता का नाम डॉ मुरलीधर बांदला है और माता का नाम अनुराधा बांदला है। सिरिशा के भाई का नाम गणेश बांदला और दादा का नाम बांदला रगहिया है।


सिरिशा बांदला का करियर | Surksha Bandla Success Life Story In Hindi


सिरिशा ने साल 2015 में वर्जिन गैलेक्टिक कम्पनी में काम करना शुरू किया और बहुत ही कम समय मे वह कम्पनी में सरकारी मामलों की वाईस प्रेसिडेंट है। उन्होंने हाल ही में एक 747 विमान का उपयोग करके अंतरिक्ष में एक उपग्रह को भी पहुँचाया था।


आपको बता दें कि सिरिशा बांदला का करियर वर्जिन गैलेक्टिक से शुरू नहीं हुआ था। बल्कि इस कम्पनी में काम करने से पहले वे टेक्सास में एक एयरस्पेस इंजीनियर के रूप में भी काम कर चुकी है।


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इसके बाद सिरिशा कमर्शियल स्पेस फ्लाइट फेडरेशन (CSF) में अंतरिक्ष नीति में भी नौकरी की। जहाँ वे एसोसिएट डायरेक्टर भी रह चुकी है।


आपको बता दें कि कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली तीसरी महिला सिरिशा बांदला बन गयी है। सिरिशा रिचर्ड ब्रैंसन की स्पेस कम्पनी वर्जिन गैलेक्टिक्स के अंतरिक्ष यान वर्जिन ऑर्बिट से 11 जुलाई को अंतरिक्ष के सैर पर जाने वाली है।


सिरिशा बांदला के प्रतिभा का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि रिचर्ड ब्रैंसन के 5 अंतरिक्ष यात्रियों में से एक है। सिरिशा वर्जिन गैलेक्टिक कम्पनी के गवर्नमेंट अफेयर्स एंड रिसर्च ऑपरेशन्स की वाईस प्रेसिडेंट भी है।


सिरिशा केवल 6 साल के कार्यकाल में ही वर्जिन गैलेक्टिक कम्पनी में इतना सीनियर पद हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सिरिशा के अंतरिक्ष में जाने के खबर आते ही मानो सोशल मीडिया पर बधाइयां देने वालों की बाढ़ सी आ गयी।


भारतीय मूल के होने के कारण लोगों को सिरिशा के इस सफलता पर काफा गर्व महसूस कर रहे हैं।


सिरिशा Telugu Association Of North America (TANA) से भी जुड़ी हुई है। आपको बता दें कि ये उतरी अमेरिका का सबसे बड़े और पुराना इंडो अमेरिकन संगठन है। कुछ साल पहले ही Telugu Association Of North America (TANA) ने सिरिशा को Youth Star Award से नवाजा गया है।


इसके अलावा सिरिशा American Astronautical Society & Future Space Leaders Foundation के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में भी शामिल है। साथ ही वो पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के यंग प्रोफेशनल एडवाइजरी कॉउंसिल की सदस्य भी है।


सिरिशा फिलहाल वर्जिन ऑर्बिट के वाशिंगटन ऑपरेशन्स के पद को भी सम्भाल रही है।


सिरिशा के पिता डॉक्टर मुरलीधर है, जो एक वैज्ञानिक और अमेरिकी सरकार में सीनियर एग्जीक्यूटिव सर्विसेज के सदस्य भी है।


सिरिशा अंतरिक्ष की यात्रा में मैक्सिको से विंग्ड रॉकेट शिप में उड़ान भरेगी। साथ ही ह्यूमन टेंडेड रिसर्च एक्सपीरियंस के इंचार्ज भी होगी। ताकि अंतरिक्ष यात्रा के समय एस्ट्रोनॉट पर होने वाले असर का अध्ययन कर सकें।


Sirisha Bandla Success Story In Hindi


सिरिशा बांदला का बचपन अमेरिका के टेक्सास में ही बीता है। जहाँ उन्होंने बहुत ही करीब से रॉकेट और स्पेसक्रॉफ्ट को देखा। आसमान में उड़ते इन रॉकेट को देखकर इनके मन में भी स्पेस के बारे में जानने की जिज्ञासा बढ़ने लगी। लेकिन कभी उन्होंने नहीं सोचा था कि उनका ये सपना इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी।


सिरिशा के मुताबिक उनको पहले से ही एयरफोर्स में भर्ती होकर पायलट बनने का शौक था। लेकिन आँख में कुछ समस्या होने के चलते उनका ये सपना अधूरा ही रह गया। लेकिन कौन जानता था कि एक दिन ये लड़की पूरे देश का नाम रोशन करेगी।


सिरिशा के अंतरिक्ष में जाने का खबर से पूरा परिवार सहित पूरा देश उनपर गर्व महसूस कर रहा है।


आपके जानकारी के लिए बता दें कि रिचर्ड ब्रैंसन ने 1 जुलाई को बताया था कि उनकी अगली स्पेस यात्रा 11 जुलाई को होगी। अपने इस अंतरिक्ष यात्रा का एलान करते हुए उन्होंने बताया कि उनकी इस यात्रा में उनको मिलाकर कुल 6 लोग शामिल होंगे।


उन्होंने कहा था कि अंतरिक्ष में किसी और को भेजने से पहले हम अपने कम्पनी के कर्मचारियों को ही मौका देना चाहते थे। इससे अंतरिक्ष यान की परख भी हो जाएगी। रिचर्ड ब्रैंसन की कम्पनी वर्जिन गैलेक्टिक आम लोगों के लिए अंतरिक्ष यात्रा को आसान बनाना चाहती है।


वर्जिन ऑर्बिट अंतरिक्ष यान को कैरियर प्लेन कास्मिक गर्ल के नीचे लगाकर पृथ्वी से लगभग 35000 फिट की ऊंचाई पर ले जाया जाएगा।


आपको बता दें कि कल्पना चावला भारत की पहली ऐसी महिला थी जिन्होंने अंतरिक्ष की यात्रा की थी। लेकिन दुर्भाग्यवश स्पेस शटल कोलंबिया की दुर्घटना में उनको अपनी जान गंवानी पड़ी थी।


सिरिशा बांदला कल्पना चावला के बाद भारत में जन्मी दूसरी ऐसी महिला होंगी जो अंतरिक्ष की यात्रा करने वाली है। अगर बात करें तो राकेश शर्मा भारत के तरफ से सबसे पहले जाने वाले अंतरिक्ष यात्री थे। राकेश शर्मा को अपना प्रेरणा मानने वाली सिरिशा बांदला का सपना आज शाम को पूरा होगा।


उनके इस सपने को सच होने के लेकर जितना वो उत्साहित है उतना ही आज पूरा भारत उत्साहित है। वर्जिन गैलेक्टिक्स कम्पनी के मालिक रिचर्ड ब्रैंसन ने अंतरिक्ष यात्रा शुरू करने से पहले खुशी से सिरिशा बांदला को कंधे पर उठाकर अंतरिक्ष यान तक लेकर गए। इससे बड़ी खुशी सिरिशा के लिए और क्या हो सकती है कि उसका सपना आज पूरा हो गया।


हम सभी उम्मीद करते हैं कि वर्जिन गैलेक्टिक्स का ये अंतरिक्ष मिशन सफलता पूर्वक पूरा हो और सिरिशा वापस आकर अपना अनुभव दुनिया के सामने रख सके।


उम्मीद है कि आपको सिरिशा बांदला की जीवनी काफी पसंद आई होगी। अगर आपको sirisha bandla की कहानी पसन्द आयी हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।


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Rohini Sindhuri IAS Biography Wikipedia In Hindi

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रोहिणी सिंधुरी आईएएस की जीवनी | Rohini Sindhuri IAS Biography Wikipedia, History In Hindi


दोस्तों आज हम एक ऐसे महिला आईएएस अधिकारी की बात करने वाले हैं। जिसने न केवल बहुत ही कम समय अपने कार्यशैली से पूरे देश में नाम कमाया है, बल्कि लोग 'लेडी सिंघम' के नाम से भी जानने लगे हैं।


ऐसे होनहार और काबिल महिला आईएएस अधिकारी का नाम रोहिणी सिंधुरी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रोहिणी सिंधुरी कौन है, इनकी पूरी कहानी क्या है?


अगर आप नहीं जानते हैं तो कोई बात नहीं है। हम आपको रोहिणी सिंधुरी की पूरी कहानी बताने वाले हैं और जानने वाले हैं कि अब तक का उनका सफर कैसा रहा है? तो आइये देश के इस चर्चित महिला आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी की जीवनी के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं।


रोहिणी सिंधुरी आईएएस का जीवन परिचय | Rohini Sindhuri IAS Biography In Hindi

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Rohini Sindhuri IAS Biography In Hindi

पूरा नाम- रोहिणी सिंधुरी

निकनेम- रोहिणी

जन्म- 30 मई 1984

उम्र/Age- 37

हाइट- 165 सेमी.

वजन- 60kg

जन्मस्थान/Birthplace- आंध्रप्रदेश(वर्तमान तेलंगाना)

प्रोफेशन- सिविल सर्विसेज

बैच/Batch- 2009

IAS मार्क्स/Marks- 55.78%

आईएएस रैंक/Rank- 43

कैडर- कर्नाटक

होमटाउन- N/A

जाती/Caste- दसारी (Dasari)

धर्म/Religion- हिन्दू

शौक- संगीत सुनना

वैवाहिक जीवन- विवाहित

Present Posting- मैसूर

Husband Occupationसॉफ्टवेयर इंजीनियर

मोबाइल नंबर- N/A

Rohini Sindhuri- Instagram

Rohini Sindhuri- Twitter

सैलरी- N/A

नेट वर्थ- N/A

राष्ट्रीयता- भारतीय


रोहिणी सिंधुरी का परिवार | Rohini Sindhuri IAS Family


पिता का नाम- N/A

माता का नाम- लक्ष्मी रेडी

हसबेंड नाम/Spouse- सुधीर रेडी

बच्चे- एक पुत्र, एक पुत्री

सिस्टर नाम- N/A


Rohini Sindhuri IAS Qualification


रोहिणी सिंधुरी ने प्रारंभिक शिक्षा पास के ही स्कूल से पूरी की। जिसके बाद इन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग से बीटेक की डिग्री हासिल की। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद रोहिणी को सिविल सर्विसेज की नौकरी करने को ठानी।


इनका मेहनत रंग उस समय लाई जब 2009 में UPSC की परीक्षा में पूरे देश में 43वां रैंक लाकर अपने सपने के पंखों को उड़ान की। इसके बाद रोहिणी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज उनकी गिनती देश के होनहार अफसरों में होती है।


रोहिणी सिंधुरी का करियर | Rohini Sindhuri IAS Success Story In Hindi


आईएएस की ट्रेनिंग के बाद रोहिणी सिंधुरी की पहली पोस्टिंग 29 अगस्त 2011 को तुमकुरु में असिस्टेंट कमिश्नर के रूप में हुआ था। इसी कार्य अवधि में तुमकुरु के शहरी विकास विभाग के प्रभारी कमिश्नर के रूप में भी इनकी  नियुक्त की गई।


जहाँ रोहिणी ने एक से एक बढ़कर सराहनीय कार्य किये। जैसे- इनकम टैक्स स्त्रोत को कंप्यूटरीकृत किया, जेसिरोड जैसी अन्य मुख्य सड़कों से अतिक्रमण हटाने का बहुत तेजी से किया, एमजी रोड जैसे व्यस्त सड़कों पर अतिक्रमण हटाने से लेकर सड़क का काम पूरे करने को लेकर इनको लोगों से काफी प्यार मिला।


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31 दिसम्बर 2012 तक अपने इस शानदार कार्यकाल में एक से बढ़कर एक कार्य करने के बाद रोहिणी 10 अगस्त 2013 से 31 मई 2014 तक ग्रामीण विकास और पंचायत राज विभाग, स्वरोजगार परियोजना (एसईपी), बैंगलोर के निदेशक के रूप में काम किया। यहाँ भी इन्होंने अपने टैलेंट से सबक दिल जीत लिया।


इसके बाद 2014 में, रोहिणी को मांड्या जिला पंचायत के सीईओ के रूप में तैनात किया गया था। जहाँ इन्होंने अपने कार्यकाल (2014-15) के दौरान लगभग एक लाख व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कर पूरे देश में नाम बटोरी।


रोहिणी सुर्खियों में तब आयी स्वच्छ भारत अभियान में इनका जिला पूरे राज्य में पहले नम्बर और देश में तीसरे नम्बर पर स्वच्छता के मामले में स्थान पाया। ये सब रोहिणी सिंधुरी के बदौलत ही सम्भव था।


इतना ही नहीं रोहिणी ने केंद्र सरकार द्वारा पेयजल के लिए भेजे गए 65 करोड़ के फंड का सही तरीके से इस्तेमाल कर अपनी पहचान छोड़ी। इस दौरान इन्होंने 100 से भी अधिक पेयजल यूनिट्स की स्थापना की। उनके इस काम से खुश होकर सरकार ने इस काम को और आगे बढ़ाने के लिए 6 करोड़ रुपये का फंड दिया।


अपनी यात्रा को और आगे बढ़ाते हुए रोहिणी ने किसानों को सस्टेनेबल खेती करने का आह्वान किया। इसके अलावा इन्होंने शहर में भ्रूण हत्या जैसे मामलों को गम्भीरता से लेते हुए इस रोक लगाने का पूरा प्रयास किया। भ्रूण हत्या रोकने के लिए माता-पिता को शिक्षित करने के लिए कई कार्यक्रम चलाई।


मांड्या जिला पंचायत के सीईओ के रूप में रोहिणी ने कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना संपत्ति दस्तावेज डाउनलोड करने के लिए एक ऐप भी लॉन्च किया।


उनके इस प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2015 में नई दिल्ली में जिला कलेक्टरों को प्रशिक्षित करने के लिए तीन प्रमुख व्यक्तियों में से एक के रूप में चुना।


जिसके बाद साल 2017 में इनका तबादला हसन जिले में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के रूप में कर दिया गया। यहाँ भी रोहिणी ने शिक्षा प्रणाली में सुधार करने के लिए कई कदम उठाए। इनके प्रयासों का ही फल था कि जो साल 2017 में हसन जिला एसएसएलसी परिणामों में राज्य में 31वें नम्बर था दो साल बाद 2019 में पहले नम्बर पहर पहुँच गया।


इसके अलावा हसन जिले में बालू माफियाओं से भी जमकर मुकाबला किया और दोषियों के खिलाफ छापेमारी कर सख्त कार्रवाई भी किया।


वर्तमान में रोहिणी सिंधुरी मैसूर जिले में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के रूप में तैनात है।


Rohini Sindhuri IAS Controversy In Hindi | रोहिणी सिंधुरी न्यूज हिंदी


रोहिणी सिंधुरी को जब 2018 में हसन जिले में मात्र सात महीने में ही स्थानीय राजनेताओं के दबाव के कारण स्थानांतरित कर दिया गया तो इन्होंने तंग आकर हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


कोर्ट के दखल के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने पुनः इनको अपने पद पर वापस नियुक्त कर दिया।


रोहिणी सिंधुरी की present prosting मैसूर जिले में है। जहाँ अभी हाल ही में मैसूर के सिटी कारपोरेशन कमिश्नर शिल्पा नेग ने कोविड-19 महामारी के लिए कुप्रबंधन और गलत जानकारी के लिए आरोप द्वारा रोहिणी सिंधुरी पर आरोप लगाया है। लेकिन रोहिणी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इन सारी बातों का खंडन किया है।


इसके पीछे का असली कहानी क्या है ये तो जांच के बाद ही पता चल पायेगा।


Some Interesting Facts About Rohini Sindhuri IAS In Hindi


● रोहिणी के ही क्लास साथी आईएएस डीके रवि को इनसे प्यार हो गया था। जब रवि ने इनको प्रोपोज किया तो इन्होंने साफ मना कर दिया और कहा कि वह पहले ही शादीशुदा है। जिसके बाद रवि ने 16 मार्च 2015 को आत्महत्या कर लिया।

● रोहिणी कन्नड़, तेलुगु, हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में महारथ हासिल है।

● रोहिणी ने एक ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली की भी शुरुआत की है। जिसके माध्यम से पीड़ित व्यक्ति कभी भी अपनी शिकायत ऑनलाइन जमा कर सकता है।

● रोहिणी जब भी ये खाली रहती है गाना सुनती है। इनको गाना सुनना काफी पसंद है।


हमें उम्मीद है कि आपको रोहिणी सिंधुरी की बायोग्राफी इन हिंदी काफी पसंद आया होगा। आपको रोहिणी सिंधुरी की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा धन्यवाद।

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सचिन पायलट का जीवन परिचय | Sachin Pilot Biography In Hindi

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दोस्तों राजस्थान की राजनीति में एक ऐसा चमकता हुआ नाम जिसके बिना मौजूदा दौर में राजस्थान की सियासत अधूरा लगता है। एक ऐसा सितारा जिसका नाम देश के सबसे कम उम्र में सांसद बनकर संसद पहुँचने का खिताब हासिल है और बहुत ही कम उम्र में एक सफल केंद्रीय मंत्री के तौर पर भी पहचान बनाने का खास रिकॉर्ड है।


सचिन पायलट कौन है? Who Is Sachin Pilot In Hindi


अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन हो सकता है? ऐसे होनहार और युवा नेता का नाम राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट है। आज के मौजूदा दौर में सचिन पायलट कौन है ये हर एक राजनीति से जुड़ा आदमी जानता है। लेकिन उनके जीवन काल में एक ऐसा भी वक्त था, जब इनको दिग्गज नेता राजेश पायलट के बेटे होने के नाते खुद को साबित करना भी बड़ी चुनौती थी।


वैसे कहा जाता है कि एक नामचीन पिता के सामने बेटे को खुद को साबित करने के लिए उनसे भी अधिक मेहनत करना पड़ता है और सफल होकर दिखाना होता है। ठीक यहीं चुनौती सचिन पायलट के पास भी थी।


ऐसे में सचिन कैसे जमीन से उठकर पूरे देश में अपने नाम का परचम लहराया है आइये इस अनसुने तथ्य को सचिन पायलट की जीवनी के माध्यम से पूरी विस्तार से जानते हैं।


सचिन पायलट की जीवनी | Sachin Pilot Biography in Hindi

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आज के समय में सचिन पायलट की गिनती राजस्थान के दिग्गज नेताओं में होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि सचिन पायलट का जन्म राजस्थान में नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। जी हाँ ये बिल्कुल सत्य है।


सचिन पायलट का जन्म 7 दिसम्बर 1977 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेश पायलट के घर हुआ था।


परिवार में इन सबके अलावा इनकी एक बहन भी है। जिनका नाम सारिका पायलट है। लेकिन उनकी पहचान एक राजनीतिक हस्तियों से नहीं बल्कि एक सफल बिजनेस वीमेन के रूप में होती है। सचिन पायलट का प्रारंभिक जीवन राजनीतिक हस्तियों के बीच में बिता।


सचिन पायलट का जीवन परिचय | Sachin Pilot Wiki


पूरा नाम- सचिन पायलट

निकनेम- सचिन

जन्म/Date Of Birth- 7 सितंबर 1977

जन्मस्थान- सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

उम्र/Age- 43 (2020 के अनुसार)

हाइट- 5 फिट 10 इंच

डिग्री- पोस्ट ग्रेजुएट

प्रोफेशन- कांग्रेस नेता

पद- पूर्व उपमुख्यमंत्री, सांसद, प्रदेश कमेटी अध्यक्ष

राजनीतिक पार्टी- कांग्रेस

पसंदीदा नेता- महात्मा गांधी

जाती/Caste- गुर्जर

धर्म/Religion- हिन्दू

राष्ट्रीयता- भारतीय


सचिन पायलट का परिवार (Family)


पिता का नाम- राजेश पायलट

माता का नाम- रमा पायलट

बहन का नाम- सारिका पायलट

वाइफ- सारा पायलट (फारुख अब्दुल्ला की बेटी)

बेटे का नाम- आरन पायलट और विहान पायलट


सचिन पायलट की शिक्षा | Sachin Pilot Qualification


सचिन पायलट की प्रारंभिक शिक्षा एयरफोर्स बल्कि भारती स्कूल दिल्ली में पूरी हुई। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद सचिन ने स्नातक की पढ़ाई दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से पूरी की।


इसके बाद I.M.T. गाजियाबाद से मार्केटिंग में डिप्लोमा किया है। जिसके बाद इन्होंने व्हार्टन स्कूल ऑफ यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया से एमबीए की डिग्री हासिल की।


Sachin Pilot Full Love Story In Hindi | सचिन पायलट वाइफ

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दोस्तों सचिन पायलट के शादी का किस्सा उनके राजनीतिक जीवन जितना ही मजेदार है। कहा जाता है कि सचिन के लिए 15 जनवरी के दिन बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन इन्होंने समाज की सारी बेड़ियों को तोड़ते हुए जम्मू कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला की बेटी सारा अब्दुल्ला से शादी कर ली थी।


फिल्मी कहानियों की तरह सचिन और सारा ने धर्म, जाती और समाज की बेड़ियों को तोड़कर एक-दूसरे का हो जाना इनके लिए इतना आसान नहीं था।


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साल 2004 में मकर संक्रांति बीतने के बाद दिल्ली के कैनिंग लेन में गहमागहमी जोरों पर थी। इसका मुख्य वजह था, अगले दिन यानी 15 जनवरी को एक ऐसा शादी होने वाला था जिसका गूंज पूरी राजनीतिक गलियारों तक था।


15 जनवरी 2004 को धौंसा से कांग्रेस सांसद और सचिन की माँ रमा पायलट के घर पर सचिन पायलट और सारा अब्दुल्ला ने शादी के बंधन में बंध गए।


सारा के परिवार की तरफ से कोई शामिल नहीं हुआ था क्योंकि पिता फारुख अब्दुल्ला लंदन में थे तो भाई उमर अब्दुल्ला अपेंडिसाइटिस के इलाज के लिए दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल में भर्ती थी। इस शादी के लिए अब्दुल्ला परिवार बिल्कुल भी राजी नहीं था।


जिस देश में धर्म और जाति के नाम पर तलवार निकल जाते हैं, ऐसे में इस शादी को लेकर भी कई तरह के बातें हुई। इसका सबसे बड़ा कारण लड़का हिन्दू और लड़की मुस्लिम थी। लेकिन इन दोनों ने समाज की हर बेड़ियों को तोड़कर शादी कर लिया।


इन दोनों की शादी किसी फिल्मी दुनिया से कम नहीं है। कोई इस शादी को प्यार का मिशाल देता है तो कोई मजहबी विवाद। आपको इनके वैवाहिक जीवन को जानकर तो काफी अच्छा लगा होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों का लव स्टोरी कैसे शुरू हुई थी


चलिए हम आपको बताते हैं। दरअसल सचिन पायलट और अब्दुल्ला परिवार में पहले से दोस्ताना सम्बंध थे। इसलिए एक-दूसरे के घर आना-जाना लगा रहता था। इस तरह ये दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे।


शादी से पहले ये दोनों लंदन में थे। जहाँ इन दोनों की मुलाकात किसी पारिवारिक कार्यक्रम में हुआ था। इस मुलाकात के बाद ये दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे। दोनों के बीच नजदीकियां भी बढ़ने लगी थी।


पढ़ाई खत्म करने के बाद सचिन भारत लौट आये थे, जबकि सारा अभी भी पढ़ाई के लिए लंदन में ही थी। दूर होने के बावजूद भी इन दोनों ने एक-दूसरे से फोन से बात करना नहीं छोड़ा। बात अब शादी तक पहुँच चुकी थी।


सचिन किसी तरह अपने परिवार को मनाने में कामयाब हो गए लेकिन सारा के परिवार वालों ने साफ मना कर दिया था। हालांकि सचिन पायलट को अब्दुल्ला परिवार में पसंद किया जाता था लेकिन शादी नहीं करना चाहते थे।


जिसके बाद इन दोनों फारुख अब्दुल्ला की गैरमौजूदगी में इन दोनों ने दिल्ली में शादी कर ली। आज इन दोनों की शादी के लगभग 17 साल हो गए हैं और ये दोनों हर समय एक-दूसरे का साथ रहकर खुश है।


समय बीतने के साथ अब्दुल्ला परिवार का इनके प्रति कड़वाहट खत्म होने लगी थी। जिसके बाद फारुख अब्दुल्ला ने कई बार सचिन के साथ मंचों पर भी नजर आए।


सचिन पायलट का राजनीतिक करियर | Sachin Pilot Success Story In Hindi


पढ़ाई पूरी करने के बाद सचिन पायलट ने मल्टी नेशनल कम्पनी में लगभग दो साल तक काम किया। लेकिन सन 2000 में पिता राजेश पायलट के निधन के बाद अपने पीछे छोड़ गए राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी सचिन पर ही आ गयी थी।


कहते हैं कि सचिन पायलट का राजस्थान की राजनीति में प्रवेश उतना अच्छा नहीं रहा। एक तरफ सड़क दुर्घटना में पिता की मृत्यु तो दूसरी तरफ राजस्थान में गुर्जर नेता की कमी। जाटों को आरक्षण मिलने के बाद अन्य जाती भी आरक्षण की मांग करने लगी थी।


ऐसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने बहुत बड़ी संकट खड़ा था क्योंकि राजेश पायलट के बाद गुर्जर जाती को संभालने वाला कोई बड़ा नेता नहीं था।


ऐसे में सचिन पायलट का राजस्थान की राजनीति में आगमन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।


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पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए राजनीति के बुलंदियों को छूना किसी सपने के सच होने से कम नहीं होता है। विरासत के मिली राजनीति के राह को चुनकर सचिन पायलट ने जो मुकाम हासिल किया है इसका पूरा श्रेय उन्हीं को जाता है।


कम उम्र में पिता का आकस्मिक निधन ने सचिन को कम उम्र में ही काफी आत्मविश्वासी बना दिया। जिसका नतीजा हुआ कि सचिन पायलट देश के सबसे कम उम्र में संसद जाने वाले नेता बनें।


विरासत में मिली राजनीति सफल कुर्सी को संभाल पाना सबके लिए आसान नहीं होता है। लेकिन सचिन पायलट ने न सिर्फ राजनीति के शिखर तक पहुँचे बल्कि अपने पिता के नाम को और आगे तक बढ़ाया।


आपको बता दें कि सचिन पायलट का सबसे कम उम्र के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बचपन में पिता राजेश पायलट के चुनावी रैलियों में सचिन और उनकी बहन सारिका भी जाति थी। जहाँ वे अपने पिता के लिए वोट मांगा करते थे।


बचपन में राजनीति से उनकी इस छोटी सी पारी के शुरुआत से किसी को भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन देश के सबसे बड़े पंचायत धौंसा का प्रतिनिधित्व करेंगे।


2004 में धौंसा से अपना पहला चुनाव लड़े जहाँ उनको बहुमत प्राप्त हुआ और पहली बार में ही 26 वर्ष की उम्र में देश के सबसे युवा सांसद बनकर संसद पहुँचे। इस चुनाव में उनकी पत्नी सारा ने भी गली-गली घूमकर अपने पति के लिए वोट मांगा था। इसके बाद 2009 में सचिन ने अजमेर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। जहाँ उनको काफी अधिक वोटों से जीत हासिल हुई।


दुबारा चुनाव जीतने के बाद पायलट को मनमोहन सिंह सरकार में इनको कॉरपोरेट अफेयर्स का राज्यमंत्री बनाया गया। लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में सचिन अपना सीट बचाने में नाकामयाब रहे। जहाँ बीजेपी ने पूरे राजस्थान की लोकसभा सीटों पर कब्जा कर लिया था और नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया गया था।


2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद सचिन पायलट के कंधे पर दुबारा सत्ता में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान इनका मुकाबला तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से सीधे था।


पार्टी को मजबूत करने के लिए सचिन सड़कों पर उतरे। जहाँ उनको लाठियां भी खानी पड़ी। लेकिन 2018 में दुबारा पार्टी को राजस्थान की सत्ता में वापस लाने में सफल रहे।


इस जीत के बाद सचिन का कद पार्टी में और बढ़ गया। जहाँ उनको कमेटी अध्यक्ष के साथ-साथ प्रदेश का उपमुख्यमंत्री भी बनाया गया।

राजनीति में एक युवा नेता के रूप में प्रवेश करने से लेकर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री बनने तक सचिन पायलट का सफर इतना भी आसान नहीं रहा था।


मौजूदा दौर में कांग्रेस के सबसे युवा नेताओं के लिस्ट में सचिन पायलट का नाम सबसे पहले आता है। कहा जाता है कि सचिन पायलट राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं। इसका सबसे खास वजह है कि ये दोनों एक ही पीढ़ी के नेता है।


आज के समय में सचिन जैसे युवा दिग्गज नेता की मांग न केवल राजस्थान में है बल्कि पूरे देश में भी है।


सचिन पायलट अशोक गहलोत ताजा खबर | Sachin Pilot Latest News In Hindi


पिछले कुछ समय से राजस्थान में राजनीतिक हलचल ने पूरे देश में सचिन पायलट को चर्चा में ला दिया। इस हलचल में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता होते हुये भी एक दूसरे के विरोधी नजर आ रहे हैं।


एक तरफ सचिन पायलट तो दूसरी तरफ अशोक गहलोत। सचिन के समर्थक उनको मुख्यमंत्री देखना चाहते थे और गहलोत के समर्थक उनको।


इस प्रकार ये कलह अपनी चरम सीमा पर पहुँच गया और आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आई। इस दौरान सचिन अपने समर्थित विधायकों के साथ राजस्थान छोड़कर हरियाणा आ गए। जिसके बाद इनपर आरोप लगाया गया कि सचिन पायलट ने बीजेपी से हाथ मिला लिया है।


ये गतिरोध लगभग एक महीने तक चलता रहा। इसके बाद पार्टी के बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद दोनों के बीच मतभेद खत्म हुआ। लेकिन इसके बाद इनको अपने प्रदेश कमेटी अध्यक्ष पद और उपमुख्यमंत्री पद गंवाना पड़ा।


अभी हाल ही में सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच जारी मनमुटाव फिर से सामने आया है। फिर से पार्टी के बीच भारी गतिरोध देखने को मिल रहा है। सचिन ने कांग्रेस के केंद्रीय समिति से बातचीत करने की भी कोशिश की। उनका कहना है कि पार्टी में छिड़ी हुई गतिरोध को जल्द से जल्द आलाकमान के द्वारा दूर करना चाहिए।


लेकिन इसके बाद सचिन के लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आयी और अब भी राजस्थान कांग्रेस के सबसे बड़े नेता के रूप में इनकी पहचान होती है।


पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि इनके अंदर मुख्यमंत्री बनने का हर गुण मौजूद है। इसलिए इनको ये पद जरूर देना चाहिए।


हाल ही में कांग्रेस की हुई बैठक में सचिन पायलट को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। ऐसे में ये तय माना जा रहा है कि अशोक गहलोत को सचिन पायलट इस सियासी उठापटक में मात देने में सफल हो चुके हैं।


Sachin Pilot Net Worth


दोस्तों जैसा कि आपको पता होगा कि हर चुनाव से पहले उम्मीदवार को अपनी सम्पति का ब्यौरा देना पड़ता है।2018 में विधानसभा चुनाव में दिए हलफनामे में सचिन पायलट ने हलफनामे में अपनी सम्पति का ब्यौरा चुनाव आयोग को देते हुए कहा था कि इनका नेट वर्थ 5.39 करोड़ रुपये है।


FAQ About Sachin Pilot

Q1. सचिन पायलट का गोत्र क्या है?
Ans. विधूडी
Q2. सचिन पायलट के कितने बच्चे हैं?
Ans. दो
Q3. सचिन पायलट के बहन के पति का नाम क्या है?
Ans. विशाल चौधरी
Q4. सचिन पायलट का गांव कौन सा है
Ans. वैदपुरा
Q5 राजेश पायलट के पिता का नाम क्या है?
Ans. राजेश पायलट
Q6. सचिन पायलट के वाइफ का नाम क्या है?
Ans. सारा पायलट
Q7. सचिन पायलट क्या गुर्जर जाती के है?
Ans. हाँ
Q8. सचिन पायलट का मोबाइल नंबर क्या है?
Ans. N/A
Q9. सचिन पायलट की उम्र कितनी है?
Ans. 43 वर्ष
Q10. सचिन पायलट का जन्म स्थान कौन-सा है?
Ans. सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
Q11. राजेश पायलट की मृत्यु कैसे हुई?
Ans. सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट की मृत्यु 55 वर्ष की उम्र में एक सड़क दुर्घटना में हो गयी थी।

हमें उम्मीद है कि आपको Sachin Pilot Biography In Hindi काफी पसंद आया होगा। आपको सचिन पायलट की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं धन्यवाद।


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