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Fatima Sheikh Indian Educator Biography Wikipedia in Hindi

Fatima Sheikh Indian Educator Biography Wikipedia in Hindi

फातिमा शेख का जीवन परिचय, जन्म, लाइफ स्टोरी, विकिपीडिया | Fatima Sheikh (Indian Educator) Biography, Wikipedia, Life Story, Google Doodle


हम अपने देश के ऐसे कई सारे महान आत्माओं को धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं। इन महान हस्तियों को भूलने के साथ-साथ हम समाज के प्रति किये गए उनके सराहनीय कार्यों को भी भूलते जा रहे हैं।


लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा सर्च इंजन गूगल कभी किसी को नहीं भूलता है। अपने देश के समाज सुधार में अहम भूमिका निभाने वाली फातिमा शेख को उनके आज 191वें जन्मदिन पर गूगल ने शानदार डूडल बनाकर उनको सम्मानित किया है।


कौमी एकता की प्रतीक और देश की प्रथम मुस्लिम महिला शिक्षिका फातिमा शेख के नाम से देश के बहुत ही कम लोग परिचित हैं।


गूगल के डूडल बनाने के साथ ही सभी लोग ये जानने के लिए बेचैन हो गए हैं कि आखिर फातिमा शेख कौन थीं जिनके लिए Google ने इतना बड़ा सम्मान दिया है? आइये इस पोस्ट में हम आपको फातिमा शेख की जीवनी से जुड़ी सारी जानकारी विस्तार से बताते हैं।


फातिमा शेख कौन थी (Who Was Fatima Sheikh in Hindi)

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Fatima Sheikh Biography

भारत की महान महिला समाज सुधारक फातिमा शेख का जन्म 9 जनवरी 1831 को पुणे, भारत में हुआ था। घर में वह अपने भाई उस्मान के साथ रहती थी। फातिमा शेख एक भारतीय महिला शिक्षिका (Indian Educator) थी, जो महान समाज सुधारकों ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की सहयोगी थी।


सावित्रीबाई फुले और फातिमा शेख ने दलित, मुस्लिम महिलाओं और बच्चों के उन समुदायों को पढ़ाया, जिन्हें वर्ग, धर्म या लिंग के आधार पर शिक्षा से वंचित किया गया था। इसी के चलते फातिमा शेख को आधुनिक भारत की पहली महिला मुस्लिम शिक्षक कहा जाता है।


उस समय दलित बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा देखकर इन्होंने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले के स्कूल में दलित बच्चों को शिक्षित करने का काम शुरू किया। इनके साथ-साथ ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले ने भी दलित समुदायों के बच्चों के बीच शिक्षा का अलख जगाने का सराहनीय प्रयास किया।


फातिमा शेख और सावित्रीबाई फुले की मुलाकात उस समय हुई थी जब ये दोनों एक अमेरिकी मिशनरी Cynthia Farrar द्वारा संचालित टीचर ट्रेनिंग संस्थान में नामांकित किया गया था। इसके बाद ये दोनों एक दूसरे से काफी करीबी दोस्त बन गयी।


फातिमा शेख के सराहनीय कार्य | Fatima Sheikh Social Work in Hindi


भारतीय महिलाओं की आइकॉन फातिमा शेख को न सिर्फ भारत की पहली शिक्षक माना जाता है बल्कि इनके समाज सुधारक कार्यों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। फातिमा शेख ने 1848 में स्वदेशी पुस्तकालय की स्थापना की, जो लड़कियों के लिए भारत के पहले स्कूलों में से एक था।


फातिमा शेख ने ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले को उस समय साथ दिया था, जब कुछ कट्टरपंथियों को महिलाओं को शिक्षित करने की इनकी मुहिम पसंद नहीं आयी और इन दोनों को घर से निकाल दिया गया था। तब शेख ने न सिर्फ इन दोनों को अपने घर में रहने के लिए जगह दी, बल्कि लड़कियों की शिक्षा के लिए पुणे में स्कूल खोलने के लिए जगह भी दी।


फातिमा शेख ने सावित्रीबाई फुले के साथ उस समय लड़कियों को पढ़ाने का काम शुरू किया जब शूद्रों से घृणा अपने चरम सीमा पर थी। उस समय शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त नहीं था।


ऐसी विपरीत परिस्थितियों में फातिमा शेख ने न सिर्फ स्कूल में पढ़ाया करती थी, बल्कि हर घर में जाकर लड़कियों को शिक्षा का महत्व समझाती थी और शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करती थीं। जिसके कारण इनको समाज के कुछ वर्गों का काफी आक्रोश भी झेलना पड़ा। लेकिन फातिमा ने हार नहीं मानी और लगातार अपना काम जारी रखा।


फातिमा बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे ले जाने के लिए दिन रात मेहनत करती थी। इन्होंने सावित्रीबाई फुले के उन सभी पांचों स्कूलों में पढ़ाया था जो फुले ने स्थापित किया था। इन्होंने कभी किसी बच्चे के धर्म-जाति के आधार पर नहीं बांटा, बल्कि हर धर्म के बच्चों को काफी स्नेह से शिक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य किया।


इनका कदम सिर्फ सीमित बच्चों तक पढ़ा कर रुकने वाला नहीं था। इन्होंने 1851 में मुंबई में दो और स्कूलों की स्थापना में बखूबी भाग लिया।


फातिमा शेख जैसी देश में कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने देश व समाज की बेहतरी के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। लेकिन सरकार और समाज ने आजतक इनको वो सम्मान नहीं दिया जिनकी वो हकदार थी। लेकिन गूगल कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करता है।


हालांकि भारत सरकार ने 2014 में अन्य अग्रणी भारतीय शिक्षकों के साथ-साथ उर्दू पाठ्यपुस्तकों में उनकी प्रोफ़ाइल को प्रदर्शित करके उनकी उपलब्धियों पर नई रोशनी डाली। इनके कई सारे सराहनीय प्रयास के लिए गूगल ने 9 जनवरी 2022 को उनकी 191वीं जयंती पर डूडल बनाकर सम्मानित किया।


हम सभी को ऐसे महान समाज सेवी आत्माओं को सम्मान करने की जरूरत है, ताकि हमारे देश और समाज में इनके तरह कई सारे लोग बनें।


आप कमेंट करके बताइये कि आपको फातिमा शेख की जीवनी (Fatima Sheikh Biography in hindi) से हम सभी को क्या सीख लेनी चाहिए। साथ ही फातिमा शेख जैसी महान आइकॉन को किस तरह से सम्मानित करने की जरूरत है? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजियेगा।


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सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको CSK ने IPL 2022 के लिए ट्रायल के लिए बुलाया है?

सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको CSK ने IPL 2022 के लिए ट्रायल के लिए बुलाया है?

सुभ्रांशु सेनापति का जीवन परिचय, रिकॉर्ड, जीवनी, करियर | Subhranshu Senapati Biography, Wikipedia, Career, Record, IPL Team, Salary, Success Story In Hindi


दोस्तों दुनिया की सबसे लोकप्रिय क्रिकेट लीग आईपीएल 2022 की तैयारी सभी टीमों ने शुरू कर दी है। हर टीम अगले सीजन के लिए अपनी तैयारी में कोई भी कसर नहीं छोड़ना चाहती है। एक तरफ अगले कुछ दिनों में IPL 2022 का मेगा ऑक्शन शुरू होने वाला है उससे पहले ही सभी टीमों ने अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को चुनना शुरू कर दिया है।


इसी बीच आईपीएल 2021 की चैंपियन टीम चेन्नई सुपरकिंग्स ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसे सभी क्रिकेट प्रेमी हैरान रह गए। उनके इस निर्णय के लिए सभी दिग्गज को अब भी कुछ समझ नहीं आ रहा है।


हुआ यूं कि चेन्नई सुपरकिंग्स ने आईपीएल 2022 की नई टीम की तैयारी शुरू कर दी है। टीम ने 2022 के लिए खिलाड़ियों का ट्रायल लेना शुरू कर दिया है। इसी बीच चेन्नई ने एक ऐसे खिलाड़ी को ट्रायल के लिए बुलाया जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था।


इस खिलाड़ी का नाम है- सुभ्रांशु सेनापति। आखिर सुभ्रांशु सेनापति कौन है जिनको चेन्नई सुपरकिंग्स जैसी दिग्गज आईपीएल टीम ने अपने टीम में ट्रायल के लिए शामिल किया है। इनके बारे में हर कोई जानने के लिए बेचैन है।


अगर आप भी सुभ्रांशु सेनापति की जीवनी से जुड़े एक-एक चीजों को विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ियेगा। आपको Shubhanshu Senapati Biography in hindi के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी।


सुभ्रांशु सेनापति कौन है | Who Is Shubhanshu Senapati In Hindi


आईपीएल 2022 के लिए चेन्नई सुपरकिंग्स टीम में शामिल किए गए सुभ्रांशु सेनापति का जन्म उड़ीसा के आदिवासी बहुल क्षेत्र केंदुझार में हुआ था। ये उड़ीसा क्रिकेट टीम के कप्तान है। ये दांये हाथ के बल्लेबाज और तेज गेंदबाज है।


इन्होंने बेहद ही कम समय में अपनी धुंआधार बल्लेबाजी के वजह पूरे देश में अपनी एक खास पहचान बनाई है। इनके तूफानी बल्लेबाजी शैली को देखते हुए ही आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक चेन्नई सुपरकिंग्स ने अपनी टीम में शामिल करने के लिए ट्रायल पर बुलाया है।


Shubhranshu Senapati Bio, Wiki, Date Of Birth, Age, Team, Net Worth, Personal Details

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Shubhranshu Senapati Biography

पूरा नाम: शुभ्रांशु प्रदीप सेनापति
निकनेम: शुभ्रांशु
जन्म (Date Of Birth): 30 दिसंबर 1996
जन्मस्थान (Birthplace): केंदुझार, ओड़िसा
उम्र (Age): 25 वर्ष
हाइट: N/A
वजन: N/A
धर्म (Religion): हिंदू
वैवाहिक जीवन: अविवाहित
घरेलू टीम: ओड़ीसा
आईपीएल टीम: चेन्नई सुपरकिंग्स
बैटिंग स्टाइल: दाएं हाथ के बल्लेबाज
गेंदबाजी स्टाइल: दाएं हाथ के मध्यम तेज गेंदबाज
सैलरी (Salary): N/A
नेट वर्थ (Net Worth): 2 करोड़ रुपये
राष्ट्रीयता: भारतीय


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शुभ्रांशु सेनापति का घरेलू क्रिकेट करियर | Shubhranshu Senapati Career In Hindi


शुभ्रांशु ने अपने करियर की शुरुआत रणजी ट्रॉफी के 2016-17 सत्र में ओड़िसा टीम के लिए खेलते हुए किया था। तब वे टीम के लिए काफी उपयोगी साबित हुए थे। अपने दूसरे मैच में ही इन्होंने सौराष्ट्र के खिलाफ खेलते हुए दूसरी पारी में अपना पहला अर्धशतक बनाया। उनके इस बेहतरीन पारी के बदौलत ओड़ीसा की टीम ने 32 रनों से मैच जीतने में कामयाब रही।


इसके बाद शुभ्रांशु रुकने वाले नहीं थे। फिर इन्होंने दिल्ली जैसी मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ 76 रनों की शानदार पारी खेली। लेकिन ये अब भी अपने पहले शतक का इंतजार कर रहे थे। इन्होंने अपना पहला प्रथम श्रेणी शतक राजस्थान के खिलाफ खेलते हुए लगाया था।


इन्होंने इस दौरान 137 रनों की विशाल पारी खेलकर सलामी बल्लेबाज रंजीत सिंह के साथ 200 से अधिक रनों की साझेदारी कर हारती हुई टीम को ड्रा करवाया। हालांकि ये अपने पहले सीजन में क्रिकेट छोटे प्रारूपों में उतने सफल नहीं रहे थे।


शुभ्रांशु कटक और भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में जाकर क्रिकेट खेलने के बजाय केंदुझार में भी खेलना जारी रखा। इन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखने के लिए कभी किसी कोचिंग संस्थान या क्रिकेट क्लब के जॉइन नहीं किया। इन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वे वरिष्ठ क्रिकटरों को खेलते हुए देखकर ही अपने खेल में निखार लाता गया।


शुभ्रांशु ओडिशा प्रीमियर लीग की चैंपियन टीम चिलिका के अहम सदस्य भी थे। इस लीग में शानदार प्रदर्शन के बदौलत वे टीम में स्थायी जगह पर बनाने में कामयाब रहे।


इसके बाद अंडर19 में उनके शानदार प्रदर्शन ने तो सबका दिल जीत लिया। इनके शानदार प्रदर्शन का इनाम भी मिला और इनको ओड़ीसा टीम का कप्तान नियुक्त कर दिया गया। इनके प्रतिभा से तो हर कोई वाकिफ था। लेकिन इनके बारे में लोगों के बीच चर्चा तब शुरू हुई जब इन्होंने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ 179 रन की बेहद ही धुंआधार पारी खेली। इस दौरान इन्होंने तीन पारियों में 248 रन बनाए।


इनके बेहतरीन प्रदर्शन के बदौलत ही इनको रणजी टीम में शामिल कर लिया गया। अपने रणजी टीम में सेलेक्शन को सही ठहराते हुए इन्होंने शानदार प्रदर्शन कर सभी का दिल जीत लिया और टीम को क्वार्टर फाइनल तक ले जाने में अहम भूमिका निभाई।


इनका 2017-18 का घरेलू सीजन भी काफी बेहतरीन रहा। इन्होंने 8 पारियों में 53.37 की बेहतरीन औसत से 427 रन बनाए। इस दौरान शुभ्रांशु ने दो शतक लगाया और ओड़ीसा टीम के लिए मध्यक्रम में अपना स्थान हमेशा के लिए पक्का कर लिया।


शुभ्रांशु सेनापति को CSK ने क्यों बुलाया जानें असली वजह


शुभ्रांशु को CSK द्वारा टीम में शामिल करने का मुख्य वजह है इनका घरेलू क्रिकेट में शानदार और धुंआधार प्रदर्शन। इन्होंने इस साल विजय हजारे ट्राफी में अपनी टीम के तरफ से टॉप स्कोरर रहे। इन्होंने इस दौरान कुल 5 मैच खेले और 1 शतक, 2 अर्धशतक सहित 275 रन बनाए।


वहीं जिसको लेकर इनकी हर जगह चर्चा हो रही है वो है टी20 क्रिकेट में प्रदर्शन। ओड़ीसा के इस बल्लेबाज ने इस साल टी20 फॉर्मेट में खेले गए सैय्यद मुश्ताक अली ट्रॉफी में 5 मैचों में 138 रन बनाए। जिसमें उन्होंने 5 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के लगाए।


शुभ्रांशु ने अपने छोटे से टी20 क्रिकेट करियर में 26 मैचों में 637 रन बनाए हैं। इस दौरान इन्होंने 50 चौके और 24 छक्के लगाए हैं। इन्हीं दोनों टूर्नामेंट में इनके द्वारा किए शानदार प्रदर्शन के बदौलत CSK ने सेनापति को ट्रायल के लिए बुलाया है।


चेन्नई सुपरकिंग्स ने खुद इसके बारे में ट्वीट करके जानकारी दी। जिसके बाद ओडिशा क्रिकेट ने खुद ट्वीट करके अपनी खुशी प्रकट किया।


इनके शानदार करियर को देखते हुए ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज लोचान मोहंती और सेक्रेटरी संजय बेहेरा को उम्मीद है कि शुभ्रांशु सेनापति चेन्नई सुपरकिंग्स के ट्रायल में सफल रहेंगे और टीम में अपना जगह बनाने में कामयाब रहेंगे।


आपको शुभ्रांशु सेनापति को लेकर क्या लगता है, क्या ये IPL के सबसे सफल टीमो में से एक चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) के ट्रायल में सफल हो पाएंगे और टीम में जगह बनाने में कामयाब रहेंगे। अपना राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखिए।


साथ ही अगर आपको शुभ्रांशु सेनापति की जीवनी पसंद आई हो तो इसे सही जरूर करें धन्यवाद।

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Myntra CEO Nandita Sinha Biography, Wikipedia, Salary, Education

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नंदिता सिन्हा का जीवन परिचय | Nandita Sinha (Flipcart) Biography, Age, Success Story In Hindi


फैशन और सौंदर्य जगत की सबसे मशहूर E-Commerce कम्पनियों में से एक Myntra ने 12 नवंबर 2021 को नंदिता सिन्हा को कम्पनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ, CEO) नियुक्त किया है।


नंदिता 1 जनवरी 2022 से अपना पदभार संभालेगी। बेहद कम उम्र में इतनी ऊंची पड़ हासिल करने के वजह से नंदिता आज हर जगह चर्चा का विषय बनी हुई है। सब जानना चाहते हैं कि आखिर Myntra New CEO नंदिता सिन्हा कौन है, जिनको कम्पनी का सबसे बड़ा पड़ देने का निर्णय किया गया है।


अगर आप नंदिता सिन्हा की जीवनी के बारे में हर एक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ियेगा। आपको नंदिता सिन्हा के जीवन से जुड़े ऐसी जानकारी मिलेगी जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। तो आइये बिना देर किए Nandita Sinha Biography In Hindi के बारे में पूरी विस्तार से जानते हैं।


Myntra सीईओ नंदिता सिन्हा कौन है (Who Is Nandita Sinha In Hindi)


नंदिता सिन्हा वर्तमान में e-commerce की दिग्गज कम्पनी Flipcart में Customer Growth, Media & Engagement की वाईस प्रेसिडेंट है। फ्लिपकार्ट में 2013 से जुड़ने के बाद से ही नंदिता ने कम्पनी के कई बड़े पदों पर अपनी सेवायें दी है।


इन्होंने फ्लिपकार्ट की सबसे बड़े selling event में से एक Big Billion Days की सफलता में अहम भूमिका निभाई।


Myntra के वर्तमान सीईओ Amar Nagaram ने लगभग 3 साल तक अपनी सेवाएं देने के बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। जिसके बाद Nandita Sinha को कम्पनी का सीईओ बनाया गया है। कम्पनी ने ये फैसला नंदिता के 15 साल से भी अधिक ई-कॉमर्स क्षेत्र में अनुभव और शानदार नेतृत्व को देखते हुए लिया गया है।


आपके जानकारी के लिए बता दें कि नंदिता ई-कॉमर्स क्षेत्र में ऐसी पहली महिला होगी जो कम्पनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पदभार संभालेगी।


फ्लिपकार्ट में अपने 8 साल के कार्यकाल के दौरान नंदिता ने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम करते हुए अपने सफल बिजनेस माइंड का परिचय दिया है। फ्लिपकार्ट में शामिल होने से पहले इन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड और ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड में भी काम कर चुकी है। इसके अलावा नंदिता ई-कॉमर्स साइट MyBabyCart.com की सह-संस्थापक भी रह चुकी है।


इनके नियुक्ति के बाद फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने अपने बयान में कहा कि "मुझे पूरा विश्वास है कि Myntra के कारोबार को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में नंदिता अहम भूमिका निभाएगी।"


इतने बड़े पद पर नियुक्ति के बाद नंदिता ने बयान जारी करते हुए कहा कि "मैं अपने इस नई भूमिका को लेकर बहुत उत्साहित हूं। Myntra के बहुत ही प्रतिभाशाली टीम के साथ काम करते हुए मुझे पूरी उम्मीद है कि myntra के फैशन को लोकतांत्रिक बनाने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में अपने जिम्मेदारी अच्छी तरह से निभाऊंगी।"


नंदिता सिन्हा फ्लिपकार्ट की शिक्षा (Nandita Sinha Flipkart Educational Qualification)

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Nandita Sinha

नंदिता ने Faculty Of Management Studies (FMS), Delhi यूनिवर्सिटी से 2005 में Marketing & Strategy में MBA किया है। इसके अलावा इन्होंने 2003 में IIT BHU से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है।


Nandita Sinha Flipkart Salary & Net Worth


Myntra की नई सीईओ नंदिता सिन्हा की सैलरी और नेट वर्थ के बारे में बात किया जाए तो इन्होंने अभी तक इसके बारे में कभी किसी को नहीं बताया है। लेकिन आप इनके काम और ऊंचे पद को देखते हुए सैलरी और नेटवर्थ का अंदाजा लगा ही सकते हैं।


Nandita Sinha Flipkart Bio, Wiki, Age, Linkedin, Personal Details


पूरा नाम: नंदिता सिन्हा
निकनेम: नंदिता
जन्म (Date Of Birth): 1986
जन्मस्थान (Birthplace): N/A
उम्र (Age): 35 वर्ष
प्रोफेशन (Profession): ई-कॉमर्स क्षेत्र
अनुभव (Experience): 15 साल
पद: वाईस प्रेसिडेंट, फ्लिपकार्ट और Myntra सीईओ
वर्तमान नियुक्ति: वाईस प्रेसिडेंट, फ्लिपकार्ट कस्टमर ग्रोथ, मीडिया और एंगेजमेंट
उच्चतम शिक्षा: एमबीए
वैवाहिक जीवन: विवाहित
हस्बैंड नाम: N/A
धर्म (Religion): हिन्दू
राष्ट्रीयता: भारतीय


Nandita Sinha Linkedin


अगर आप नंदिता सिन्हा से जुड़ना चाहते हैं अथवा उनके बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप इनके Linkedin profile को फॉलो कर सकते हैं।

Nandita Sinha Linkedin Profile


दोस्तों, हमें उम्मीद है कि आपको Nandita Sinha Ki Jivani काफी पसंद आई होगी। साथ ही आपको नंदिता सिन्हा के जीवन से जुड़े हर जानकारी प्राप्त हो गई होगी। अगर आपको Nandita Sinha Biography In Hindi पसंद आई हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।

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अभिनेता पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography

अभिनेता पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography

पुनीत राजकुमार का जीवन परिचय | Puneet Rajkumar Biography, Wikipedia, Age, Death Cause, Life Story In Hindi


दोस्तों, कोरोना महामारी के बाद लोगों में हार्ट अटैक की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। जब से कोरोना ने दस्तक दी है तब से देश के बड़े-बड़े कलाकारों ने दिल का दौरा पड़ने से इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं।


पिछले कुछ दिनों में इरफान खान, सिद्धार्थ मल्होत्रा, ऋषि कपूर इत्यादि ने दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु के शिकार हो चुके हैं। एक के बाद एक कई बड़े एक्टर इस साल दिल का दौरा पड़ने से दुनिया छोड़ चुके हैं।


अब एक कन्नड़ अभिनेता और साउथ सुपरस्टार पुनीत राजकुमार का भी 29 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। पुनीत के निधन से पूरा फ़िल्म जगत शोक में डूबा हुआ है। इनके निधन पर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने शोक जताया है।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि साउथ के सुपरस्टार अभिनेता पुनीत राजकुमार कौन है? अगर आप भी इनके जीवन से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो Puneet Rajkumar Biography In Hindi को जरूर पढिये।


पुनीत राजकुमार कौन है (Who Is Puneet Rajkumar In Hindi)


पुनीत राजकुमार दक्षिण भारत के सबसे सफल अभिनेताओं में से एक थे। ये एक्टर होने के साथ-साथ एक सफल सिंगर और प्रोड्यूसर भी है। इन्होंने अब तक 29 फिल्मों में काम किया है। ये साउथ के सुपरस्टार आर राजकुमार के बेटे और केएफआई के प्रमुख स्टार शिवराज कुमार  हैं। जिनका 29 अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से बैंगलोर के एक अस्पताल में 46 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।


इनके निधन की खबर सुनते ही पूरा फ़िल्म जगत सदमे है। हर कोई इनके परिवार के लिए सम्वेदना व्यक्त कर रहा है।


Puneet Rajkumar Bio, Wiki, Age, Religion, Death, Date Of Birth


पूरा नाम: पुनीत राजकुमार
निकनेम: पुनीत, अप्पू, पावर स्टार
जन्म/ Date Of Birth: 17 मार्च 1975
जन्मस्थान/ Birthplace: चेन्नई
उम्र/ Age: 46 वर्ष
मृत्यु/ Death: 29 अक्टूबर 2021, बैंगलुरू
धर्म/ Religion: हिन्दू
पहला फ़िल्म: वसंत गीता, 1980
अंतिम फ़िल्म: राजकुमार, 2017
प्रोफेशन/ Profession: अभिनेता, सिंगर, प्रोड्यूसर
फ़िल्म इंडस्ट्री: कन्नड़ फ़िल्म
राष्ट्रीयता: भारतीय


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पुनीत राजकुमार का परिवार (Puneet Rajkumar Family)


पिता का नाम: आर राजकुमार

माता का नाम: पर्वतम्मा राजकुमार

वाइफ का नाम: अश्विनी रेवनाथ

बच्चे: द्रिथि और वन्धिता


पुनीत राजकुमार का करियर (Puneet Rajkumar Success Story In Hindi)


दोस्तों, पुनीत राजकुमार बतौर एक्टर एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में केवल 5 साल के उम्र में अपना करियर शुरू किया था। 1980 में इन्होंने पहली बार टेलीविजन की दुनिया में एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में 'वसंत गीता' से की थी।


इसके बाद 1981 में 'भाग्यवन्त' फिर 1982 में Chalisuva, 1983 में Eradu Nakshatragalu और फिर 1985 में Bettada Hoovu एक के बाद एक धमाकेदार फिल्में देकर इन्होंने बचपन मे ही सबको अपने एक्टिंग का दीवाना बना लिया।


Bettada Hoovu में रामु के किरदार के लिए तो इनको नेशनल फ़िल्म अवार्ड फ़ॉर बेस्ट चाइल्ड का अवार्ड भी दिया गया। इनको शानदार अभिनय के लिए कर्नाटक स्टेट बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट का खिताब दिया गया।


इन्होंने अबतक 29 से भी अधिक फिल्मों में काम किया है। इनकी गिनती कन्नड़ फ़िल्म में सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में होती है। इनकी एक्शन फिल्मों को लोग काफी पसंद करते हैं।


इनकी बतौर अभिनेता के रूप में अंतिम फ़िल्म 2017 में आई राजकुमार थी। जिसमे इन्होंने सिद्धार्थ का बेहतरीन रोल अदा किया था।


इन्होंने सिंगिंग में भी अपना हाथ आजमाया। 2008 में आई वंशी फिल्म में जोते जोतेयली गाना तो उस साल की सबसे सुपरहिट गानो में से एक रही थी।


इन्होंने अपने पिता के इच्छानुसार बैंगलोर में एक होटल का निर्माण भी करवाया है। ये अपनी माता के साथ खुद को फिल्मों के अलावा सामाजिक कार्यों में भी व्यस्त रहते हैं।


पुनीत राजकुमार की मृत्यु कैसे हुई (Puneet Rajkumar Death Cause In Hindi)


पुनीत को 29 अक्टूबर 2021 को जिम में एक्सरसाइज करने के दौरान दिल का दौरा पड़ा। जिसके बाद उनको बैंगलोर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ कार्डियक अरेस्ट होने से इनका निधन हो गया।


इनके निधन के समाचार सुनकर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने दुख प्रकट किया है और कहा है कि दुःख के इस घड़ी में मेरी संवेदनायें परिवार के साथ है।


दोस्तों आपको Puneet Rajkumar Biography In Hindi के बारे में जानकर कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइयेगा।

कौन थे कानो जिगोरो जिनके लिए Google ने डूडल बनाया | Kano Jigoro Biography

कौन थे कानो जिगोरो जिनके लिए Google ने डूडल बनाया | Kano Jigoro Biography

Kano Jigoro Martial Artist Biography Wikipedia, Death Cause, Education, Life Story In Hindi (कानो जिगोरो की जीवनी, लाइफ स्टोरी, मृत्यु का कारण, जुडो का आविष्कार)


दोस्तों, आज हम एक ऐसे महान हस्ती के बारे में जानने वाले हैं जिसने इस पूरी दुनिया को एक बहुत अनमोल भेंट दिया है। जिसके बिना आज शायद कोई मार्शल आर्ट का नाम नहीं सुनता, जिसके बिना कोई जुडो का नाम नहीं सुनता।


हाँ हम बात कर रहे हैं जुडो के आविष्कार करने वाले कानो जिगोरो के बारे में, जिसने अपनी जिद के बदौलत इस दुनिया को बहुत ही मूल्यवान तोहफा दिया। इनके सम्मान में गूगल ने 161वें जन्मदिन पर शानदार डूडल बनाकर सम्मानित किया है।


लेकिन क्या आप जानते हैं कि कानो जिगोरो कौन थे? इनके किस जिद ने जुडो का आविष्कार कराया? अगर आप कानो जिगोरो की जीवनी से जुड़ी हर बात को जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढियेगा।


कानो जिगोरो कौन थे (Who Was Kano Jigoro In Hindi)


कानो जिगोरो का जन्म जापान के मिकेज शहर में 28 दिसंबर 1860 को एक शराब बनाने वाले परिवार में हुआ था। तब से ही इस महान शखस का जन्मदिन हर साल 28 तारीख को पूरी दुनिया सम्मान के साथ मनाती है।


यहाँ तक कि Google ने भी इनके सम्मान में 28 अक्टूबर 2021 को कानो जिगोरो के 161वें जन्मदिन पर बहुत ही शानदार डूडल बनाकर सम्मानित किया।


कानो जिगोरो दुनिया भर में प्रसिद्ध जुडो के संस्थापक थे। इसके अलावा वे एक जापानी शिक्षक और एथलीट भी थे। आपको बता दें कि जूडो पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने वाला पहला जापानी मार्शल आर्ट था और आधिकारिक रूप से ओलंपिक खेलों में हिस्सा बनने वाला पहला आर्ट था।


इन सबका श्रेय केवल और केवल कानो को ही जाता है। पूरी दुनिया में इनके द्वारा ही काले और सफेद बेल्ट का उपयोग एवम मार्शल आर्ट के सदस्यों के बीच सापेक्ष रैंकिंग दिखाने के लिए डैन रैंकिंग की शुरुआत की गई थी।


कानो अपने पूरे जीवनकाल में एक शिक्षक के भांति पूरी जीवन बिताये। चाहे वो 1898 से 1901 तक शिक्षा मंत्रालय में प्राथमिक शिक्षा निदेशक के रूप में हो अथवा वर्ष 1900 से 1920 तक टोक्यो हायर नार्मल स्कूल के अध्यक्ष के रूप में। इन्होंने अपना अधिकांश समय शिक्षा के क्षेत्र में ही बिताया।


आपको बता दें कि कानो ने 1910 के दशक के जापान के पब्लिक स्कूल के कार्यक्रमों में जूडो और केंडो को हिस्सा बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।


शिक्षा के अलावा कानो अंतरराष्ट्रीय खेलों में भी अग्रणी थे। इनकी मुख्य उपलब्धियों में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) का पहला एशियाई सदस्य होना शामिल है। जिसमें इन्होंने वर्ष 1909 से 1938 तक अपनी सेवा देते रहे।


फिर कानो यहीं पर रुकने वालों में से नहीं थे। इन्होंने वर्ष 1912 और 1936 के बीच आयोजित अधिकांश ओलंपिक खेलों में आधिकारिक तौर पर जापान का प्रतिनिधित्व किया और 1940 के ओलंपिक खेलों के लिए एक प्रमुख प्रवक्ता के रूप में सेवारत हुए।


कानो के आधिकारिक सम्मान और अलंकरण में "फर्स्ट ऑर्डर ऑफ मेरिट",  ग्रैंड ऑर्डर ऑफ द राइजिंग सन और थर्ड इंपीरियल की डिग्री भी शामिल था।


कानो को उनके शानदार उपलब्धियों के चलते 14 मई 1999 को इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन (IJF) हॉल ऑफ फ़ेम के पहले सदस्य के रूप में शामिल किया गया था।


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कानो जिगोरो की जीवन कहानी (Kano Jigoro Life Story In Hindi)

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कानो के पिता कानो जिरोसाकू एक दत्तक पुत्र थे। वे वर्षों से चली आ रही पारिवारिक बिजनेस में न जाकर एक पुजारी और शिपिंग लाइन में एक वरिष्ठ क्लर्क के रूप में काम किया। इनके पिता को शिक्षा से काफी लगाव था। वे चाहते थे कि उनका बेटा अच्छी शिक्षा प्राप्त कर कुछ अच्छा करे।


इसके लिए उन्हें कानो जिगोरो को उच्च शिक्षा देने में कोई कमी नहीं की। उन्होंने उस समय के सबसे विद्वान शिक्षक रहे नव-कन्फ्यूशियस विद्वान यामामोटो चिकुन और अकिता शुसेत्सु जैसे शिक्षकों के पास कानो को पढ़ने के लिए भेजा।


जब कानो केवल 9 साल का था तब कानो के माता की मृत्यु हो गयी। जिसके बाद इनके पिता अपना पूरा परिवार लेकर जापान की राजधानी टोक्यो लेकर आ गए। इन्होंने अपने बेटे कानो का दाखिला एक निजी स्कूल में करा दिया।


1874 में उन्होंने अपने बेटे कानो को अंग्रेजी और जर्मन भाषा में अच्छी पकड़ बनाने के लिए यूरोपीय देशों द्वारा संचालित एक निजी स्कूल में भेज दिया।


किशोरावस्था में इनके शरीर का छोटे आकार और बौद्धिक स्वभाव के कारण अक्सर छात्र उनको धमकाया करते थे। कभी-कभी तो कुछ छात्र इनको स्कूल के बाहर पीटने भी लगते थे।


जिससे तंग आकर कानो जिगोरो ये सोचने लगे कि ऐसा क्या किया जाए कि उनका भी शरीर मजबूत हो। इसी बीच इनकी मुलाकात एक ऐसे आदमी से हो गयी जो जुजुत्सु करना जानता था। उसने कानो को बताया कि अगर तुम ये सिख जाते हो तो तुम्हारा शरीर भी मजबूत बन जायेगा।


उस आदमी ने इनको सिखाया कि कैसे एक छोटा और कमजोर आदमी भी एक मजबूत और हटे कटे आदमी को धूल चटा सकता है?


इसके बाद तो मानो कानो के शरीर मे बिजली कौंध गयी। उन्होंने तुरन्त ही फैसला कर लिया कि अब वे जुजुत्सु जरूर सीखेंगे। पिता का लाख मना करने के बावजूद जिगोरो ने जुजुत्सु सीखने के लिए उतावले हो गए।


कुछ समय तक तो इनके पिता भी बेटे को ऐसा करने से बचने के लिए कहते रहे। लेकिन बेटे की गहरी रुचि और लगन को देखते हुए उन्होंने ये कहकर हामी भर दी कि तुमको इस क्षेत्र में महारत हासिल करनी होगी। तभी तुमको ये सीखने दिया जाएगा। कानो ने भी पिता को इस बात के लिए हामी भर दी।


फिर एक बार जब कानो जिगोरो जुडो की तरफ गए फिर तो पूरी दुनिया को जुडो का पाठ पढ़ाकर ही छोड़ा। आज पूरी दुनिया में कानो के द्वारा बनाया गया जुडो को बड़ी संख्या में लोग सीखते हैं।


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कानो जिगोरो ने जुडो का आविष्कार कैसे किया?


जूडो का जन्म पहली बार जुजुत्सु के बीच हुए एक मैच के दौरान हुआ था, जब कानो ने अपने बड़े प्रतिद्वंद्वी को मैट पर लाने के लिए एक पश्चिमी कुश्ती चाल को शामिल किया था। जुजुत्सु में उपयोग की जाने वाली सबसे खतरनाक तकनीकों को हटाकर, उन्होंने "जूडो" बनाया, जो कानो के व्यक्तिगत ऊर्जा का अधिकतम कुशल उपयोग और स्वयं एवम दूसरों की पारस्परिक समृद्धि पर आधारित एक सुरक्षित और सहकारी खेल है।


वर्ष 1882 में, कानो ने टोक्यो में अपना खुद का एक मार्शल आर्ट जिम 'कोडोकन जूडो संस्थान' खोला, जहां उन्होंने वर्षों तक जूडो का विकास किया। उन्होंने इस खेल में 1893 में महिलाओं का खेल में स्वागत किया।


कानो जिगोरो की मृत्यु कैसे हुई (Kano Jigoro Death Cause In Hindi)


वर्ष 1934 के बाद से ही कानो ने खराब स्वास्थ्य के कारण सार्वजनिक जगहों पर अपने हुनर का प्रदर्शन दिखाना बन्द कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार इनके गुर्दे की पथरी के कारण इनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा। जिसके बाद से ही लोगों को लगने लगा था कि कानो जिगोरो अब ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहेंगे।


इतनी शारीरिक परेशानियों के बावजूद कानो ने ओलंपिक जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेना नहीं छोड़ा। जिसके बाद 4 मई 1938 को कानो की एक समुद्र यात्रा में बहुत ही दुखद निधन हो गया।


इनके मृत्यु का कारण उस समय निमोनिया को बताया गया था। लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके भोजन में जहर देकर मारने की भी बात कही गयी थी। लेकिन इनके मृत्यु का असली सच क्या है अभी तक इसकी कोई पुख्ता सबूत नहीं है।


कानो के मरने के साथ जूडो नहीं मरा। इसके बजाय, 1950 के दशक के दौरान, जूडो क्लब दुनिया भर में उभरे, और 1964 में जूडो को टोक्यो ओलंपिक में एक ओलंपिक खेल के रूप में पेश किया गया और 1972 में म्यूनिख ओलंपिक में फिर से शुरू किया गया।


आखिरकार कानो जिगोरो के मरने के बाद जुडो को जो सम्मान वो दिलाना चाहते थे वो मिल गया। बहरहाल, उनकी असली विरासत उनका आदर्शवाद था।


कानो ने 1934 में दिए एक भाषण में कहा था "सूर्य के नीचे कुछ भी शिक्षा से बड़ा नहीं है। एक व्यक्ति को शिक्षित करके और उसे अपनी पीढ़ी के समाज में भेजकर, हम आने वाली सौ पीढ़ियों का योगदान देते हैं।"


कानो 1909 में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के पहले एशियाई सदस्य बने और 1960 में IOC ने जूडो को एक आधिकारिक ओलंपिक खेल के रूप में मंजूरी दी।


Kano Jigoro Bio, Wiki, Date Of Birth, Death, Age, Personal Details


पूरा नाम: कानो जिगोरो
निकनेम: कानो
जन्म: 28 अक्टूबर 1860
जन्मदिन/ Date Of Birth: 28 अक्टूबर
जन्मस्थान/ Birthplace: जापान के मिकेज शहर
मृत्यु/ Death: 4 मई 1938
मृत्यु स्थल: हिकावा मारू जापान
उम्र/ Age: 77 वर्ष
प्रोफेशन: शिक्षक, एथलीट
पॉपुलर होने का कारण: जुडो के संस्थापक
मार्शल आर्ट स्टाइल: जुडो जुजुत्सु


Kano Jigoro Family


पिता का नाम: कानो जिरोसाकू
माता का नाम: N/A
वाइफ का नाम: N/A


दोस्तों आपको जुडो के संस्थापक कानो जुगोरो की जीवनी कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताइयेगा। साथ ही आपने Kano Jigoro Biography In Hindi पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें धन्यवाद।।

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