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कम पढ़े-लिखे लोग सफल कैसे बनें? Best Motivational Speech In Hindi

कम पढ़े-लिखे लोग सफल कैसे बनें? Best Motivational Speech In Hindi

असफलता से सफलता की कहानी | World Best Motivational Speech In Hindi For Students

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Best Motivational Speech In Hindi

कई बार आपने अपने जीवन में देखा होगा कि बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे लोग भी असफल हो जाते हैं, लेकिन बहुत कम पढ़े-लिखे लोग भी सफल हो जाते हैं। आखिर ये इतना बड़ा उलटफेर हमारे जिंदगी में कैसे हो पाता है?


क्या आप जानते हैं कि इस सफलता के पीछे का असली कारण क्या है तो चलिए आज हम सब इसी बात को समझते हैं। कम पढ़े-लिखे लोग भी सफल कैसे हो जाते हैं, इस बात को समझाने के लिए आप सबको एक मोटिवेशनल कहानी सुनाते हैं।


इस प्रेरणादायक कहानी को बहुत ही ध्यान से पढ़ियेगा और समझियेगा, क्योंकि हो सकता है ये एक कहानी आपकी जीवन, आपके कैरियर, आपकी सोच सब बदल सकता है। तो चलिए असफलता से सफलता दिलाने वाली प्रेरणादायक कहानी के बारे में जानते हैं।


सफलता दिलाने वाली कहानी | Best Motivational Speech For Employee In Hindi For Success


मानव जिंदगी में असफलता से सफलता का स्वाद चखने के लिए क्या सबसे जरूरी होता है ये सफलता दिलाने वाली कहानी आपको भली भांति बता देगी। बस इस प्रेरक हिंदी कहानी को पूरी जरूरी पढ़ियेगा।


एक बार की बात है जब एक बहुत बड़ी जहाज बनाने वाली कम्पनी ने बहुत ही विशाल जहाज बनाया। उस जहाज को बनाने में बहुत सारा समय और बहुत सारा पैसा लगा हुआ था। इस जहाज को बनाने में बहुत सारे इंजीनियर भी लगे हुए थे।


एक समय ऐसा आया जब जहाज बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका था। अब जैसे ही जहाज को चालू किया गया तो वो जहाज चालू ही नहीं हुआ। जब उस जहाज के कम्पनी के मालिक को इस बारे में बताया गया कि इतना बड़ा जहाज बना तो लिया है लेकिन वो चालू नहीं हो रहा है।


जहाज के मालिक ने कहा कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है। आप हमारे राज्य के जो भी सबसे अच्छे इंजीनियर है उनको बुलाइये और उनको दिखाइए कि ये जहाज क्यों चालू नहीं हो रहा है? उनके मैनेजर ने ऐसा ही किया।


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उस राज्य में जितने भी सबसे अच्छे इंजीनियर थे उन सबको उस जहाज को चालू करने के लिए बुलाया गया। सारे इंजीनियर ने जहाज को बहुत गौर से देखा, बहुत देर तक उस जहाज के निरीक्षण में गुजार दिए लेकिन उस जहाज को चालू नहीं कर पाए।


अब मैनेजर थोड़ा परेशान हो गया और अपने मालिक के पास गया। उसने कहा कि अभी जहाज चालू नहीं हो रहा है। जितने भी इंजीनियर आये थे सबने देखा पर कोई उसको चालू नहीं कर पाया। जहाज के मालिक ने कहा कि चलो अभी भी चिंता की कोई बात नहीं है। आप हमारे देश के जो सबसे अच्छे इंजीनियर है उनको बुलाइये। हो सकता है कि वो इसे ठीक कर दें।


उस मैनेजर ने ऐसा ही किया। देश के सबसे अच्छे-अच्छे इंजीनियर को उसने बुलवाया और उस जहाज को चालू करने के लिए कहा। सारे इंजीनियर जहाज को बहुत बारीकी से चेक करने लगे। ऐसा करते हुए लगभग साल भर का समय गुजर चुका था लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। सारे इंजीनियर निराश होकर चले गए पर जहाज चालू नहीं हुआ।


अब वापस मैनेजर अपने मालिक के पास गया और कहा कि जहाज अब भी चालू नहीं हो रहा है। मालिक ने कहा कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। आप विदेशों से दुनिया के सबसे अच्छे-अच्छे इंजीनियर को बुलाइये और उस जहाज को दिखाइए कि ऐसी क्या प्रॉब्लम हो गयी है जिसकी वजह से ये जहाज ठीक नहीं हो पा रहा है।


मैनेजर ने ऐसा ही किया। उसने दुनिया के सबसे अच्छे इंजीनियर बुलाये और जहाज को दिखाया कि इसके अंदर ऐसी क्या प्रॉब्लम हो गयी है जिससे कि ये जहाज चालू नहीं हो रहा है? उन्होंने भी जहाज को चेक करना शुरू किया। लगभग छः महीने बीत गए थे लेकिन अब तक जहाज चालू नहीं हो पाया।


अब सारे लोग परेशान हो गए कि आखिर ये जहाज सुधर क्यों नहीं रहा? निराश होकर मैनेजर अपने मालिक के पास गया और उसने सारा हाल अपने मालिक से सारा किस्सा कह सुनाया। इस बार मालिक भी बहुत चिंतित हो गया कि मैंने इस जहाज के पीछे इतना सारा समय बर्बाद कर दिया, इतने सारे पैसे बर्बाद कर दिए लेकिन इतना करने के बाद भी ये जहाज सुधर नहीं पाया।


आखिरकार मालिक ने तंग आकर मैनेजर से कहा कि अब इस जहाज को ऐसे ही छोड़ देना चाहिए और हमें किसी दूसरे प्रोजेक्ट पर काम करना चाहिए। मैनेजर ने कहा कि ठीक बात है लेकिन हमने इतना सारा समय लगाया है, पैसे लगाया है क्या ये सब ऐसे ही बर्बाद चला जायेगा?


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मेरी बात माने तो आपसे एक सलाह है कि हमारे शहर में छोटी पनडुब्बी बनाने वाला एक मेकैनिक है, जो इस शहर में बहुत ही ज्यादा फेमस है। वो ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं है लेकिन क्या हम इस मामले में उसकी मदद ले सकते हैं?


मालिक ने थोड़ा गुस्से से कहा कि इतने बड़े-बड़े इंजीनियर देश-विदेश से बुलाये। लेकिन जब वो इंजीनियर इस जहाज को ठीक नहीं कर पाए तो क्या एक छोटा सा पनडुब्बी वाला मेकैनिक हमारे इस बड़े जहाज को ठीक कर पायेगा? आप रहने दीजिए।


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लेकिन मैनेजर ने कहा कि नहीं मालिक हम इतना सारा पैसा और समय बर्बाद कर चुके हैं तो क्यों न हम उस व्यक्ति को भी सिर्फ एक बार मौका दें। मैनेजर के विनम्र निवेदन के बाद मालिक ने उसे परमिशन दे दिया।


मैनेजर उस छोटे से पनडुब्बी को बनाने वाले मेकैनिक के पास गया। उसने कहा कि मेकैनिक साहब हमें अपना जहाज आपसे बनवाना है और इसके लिए आपको हमारे जहाज पर चलना है। मेकैनिक ने उस मैनेजर को देखा और कहने लगा कि साहब मैं एक छोटा सा मेकैनिक हूँ। छोटी-छोटी नाव और पनडुब्बियों को बनाता हूँ। मैंने तो इतना बड़ा जहाज अपने जीवन में कभी नहीं देखा है तो फिर मैं आपके जहाज को कैसे बना सकता हूँ?


उस मैनेजर ने कहा कि मुझे पता है कि आपने ऐसा काम कभी नहीं किया है लेकिन आपका इस शहर में बहुत नाम है। जिनका भी नाव और पनडुब्बी खराब होता है वो सभी आपके पास ही लेकर आते हैं और आप उसको बड़ी ही आसानी से बना देते हैं। इस कारण मेरा विश्वास है कि आप कुछ तो हमारा मदद कर ही सकते हैं।


भले ही आपसे वो जहाज बने या न बने लेकिन एक बार चलकर उसे देख तो लीजिए। मेकैनिक उस मैनेजर के बात को मान गया और जहाज पर चलने को तैयार हो गया। जब वो जहाज पर गया तो वो आश्चर्यचकित रह गया क्योंकि उसने अपने पूरे जीवन में इतना बड़ा जहाज कभी भी नहीं देखा था।


सबसे पहले वो मेकैनिक उस जहाज पर चढ़ा और उसने दो तीन घण्टे तक पूरे जहाज पर घुमा और एक-एक मशीन को देखा। मालिक और मैनेजर दोनों वहीं पर खड़े हुए थे। वे दोनों देख रहे थे कि ये छोटा सा मेकैनिक इस बड़े जहाज को देखकर कितना आश्चर्यचकित हो रहा है? वो उसकी हरकत देखकर मुस्कुरा भी रहे थे और सोच में पड़े हुए थे कि इतना छोटा सा मेकैनिक क्या कर सकता है?


लगभग पांच छः घण्टे तक वो मेकैनिक उस जहाज पर घूमता रहा उसके बाद एक समय ऐसा आया जब वो एक जगह पर जाकर रुक गया और बार-बार वहाँ पर देखने लगा, बार-बार सोचने लगा और वहीं पर खड़ा होकर कुछ देखता रहा।


वहाँ पर बाकी जितने भी लोग थे सब उसको बड़े ही ध्यान से देखने लगे कि ये मेकैनिक एक ही जगह पर खड़ा क्यों हो गया और एक ही जगह पर खड़ा होकर क्या सोच रहा है? वो मकैनिक थोड़ी देर वहाँ पर खड़ा रहा और सोचता रहा।


थोड़ी देर बाद उसने अपने झोले से एक हथौड़े को निकाला और उस हथौड़े से एक ही जगह पर तीन बार जोर-जोर से मारा। उसके बाद वो मैनेजर के पास गया और मैनेजर से कहा कि अब इस जहाज को चालु कर के देख लीजिए।


वहाँ पर खड़े मालिक और मैनेजर का दिमाग खराब हो गया कि इसने तो सिर्फ तीन हथौड़े ही मारे, कुछ किया भी नहीं और कह रहा है कि अब जहाज को चालू कर के देख लीजिए। मैनेजर ने ऐसे ही बिना मन के एक बार जहाज को चालू कर के देखा।


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जैसे ही मैनेजर ने जहाज को चालू किया वो जहाज चालू हो गया। सारे लोग आश्चर्यचकित हो गए और दिमाग लगाने लगे कि इसने ऐसा क्या किया कि इतने कम समय में इस जहाज को चालू कर दिया। सभी लोग बहुत ही खुश हो गए और बहुत ही उत्साहित हो गए। मिठाईयां बंटने लगी क्योंकि इतने समय बाद उनका जहाज पूरी तरह चालू हो चुका था।


अब लोगों के मन में ये जानने की उत्सुकता थी कि आखिर ये जहाज चालू कैसे हो गया? सबने उस मेकैनिक से जाकर पूछा कि ये जहाज इतनी जल्दी चालू कैसे हो गया? तो इस मेकैनिक ने बताया कि आपका जहाज पूरी तरह से ठीक था उसमें कोई भी प्रॉब्लम नहीं था। 


बस उसमें एक छोटी से प्रॉब्लम थी। एक छोटी से पंखी थी जो जहाज को चालू करने में बहुत जरूरी थी। वो पंखी कहीं पर फंस रही थी। मैंने दो तीन हथौड़े मारे और वो पंखी फ्री हो गयी। जिसके वजह से आपका जहाज चालु हो गया।


सभी लोग बहुत खुश हो गए। जहाज चालू करने के बाद मेकैनिक वापस अपने दुकान पर चला गया। मालिक ने उस मैनेजर को कहा कि जाइये उस मेकैनिक को उसका फीस पूछकर आइये कि उसका फीस कितना हुआ?


जब मैनेजर उसके पास आया तब मेकैनिक ने उसके हाथ में एक बिल दिया। बिल देखकर मैनेजर थोड़ा मुस्कुराया और अपने मालिक के पास जाकर उस बिल को दे दिया। जब मालिक ने उस बिल को देखा तो मालिक का दिमाग खराब हो गया। उसने मैनेजर से कहा कि ये भी कोई बिल है, इतना बड़ा बिल, किस चीज का?


उसने तो सिर्फ तीन हथौड़े ही मारी है और एक लाख रुपये का बिल बना दिया। मालिक ने मैनेजर से कहा कि हम उसे बिल्कुल एक लाख रुपये देंगे इसमें कोई बड़ी बात नहीं है, हम उसको पूरा एक लाख रुपये ही देंगे। लेकिन उसके पास जाइये और उससे लिखवा कर आइये कि ये इतना ज्यादा बिल किस चीज का है? उसने ऐसा क्या किया कि एक लाख रुपये का बिल हमें बनाकर दिया है।


वो मैनेजर उस मेकैनिक के पास पहुँचा और कहा कि हमारे मालिक ये जानना चाहते हैं कि आपने जो एक लाख रुपये का बिल दिया है ये किस चीज का है? आपने ऐसा क्या किया है हमें उसका पूरा डिटेल्स लिख कर दीजिए।


उस मेकैनिक ने एक और बिल बनाया और मैनेजर को दे दिया। उस बिल को देखकर मैनेजर के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गयी। वो मैनेजर बिल लेकर मालिक के पास आया और उनको दे दिया। जब मालिक ने उस बिल को पढ़ा तो मालिक के भी चेहरे पर मुस्कान आ गयी। फिर उसने अपने मैनेजर को कहा कि ये एक लाख रुपये लो और जाकर उस मेकैनिक को देकर आओ। ये रुपये देने के बाद उसको वहाँ से बुलाते आना और उसको अपनी कम्पनी में जॉइनिंग दे दो क्योंकि अब वो यहीं काम करेगा।


Most Important Point Of This Short Motivational Stroy In Hindi For Success In Life


अब आपलोगों के मन में भी यहीं प्रश्न आ रहा होगा कि उस बिल में ऐसा लिखा क्या था कि उस मेकैनिक को एक लाख रुपये मिल गए और उसे कम्पनी में जॉइनिंग भी दे दी गयी।


आप ध्यान दीजिएगा कि उस मेकैनिक ने क्या कहा? उस बिल में लिखा था कि बीस रुपये हथौड़े मारने के और हथौड़े कहाँ पर मारने है उसके लिए 99980 रुपये। हथौड़े कोई भी मार सकता था लेकिन किसी को ये पता नहीं था कि हथौड़े मारने कहाँ पर है? उसी बात के लिए 99980 रुपये लिए गये।


हमेशा धयान रखिये कि आपके जीवन में डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण चीज है आपका एक्सपीरियंस। अगर आपके पास डिग्रीयां बहुत है लेकिन एक्सपीरियंस नहीं है तो उस डिग्रियों का कोई मतलब नहीं रह जाता है। आपके उस पढ़ाई का कोई मतलब नहीं है।


वहीं पर अगर आपके पास डिग्रीयां नहीं है लेकिन अगर आपके पास किसी काम को करने का बहुत अच्छा एक्सपीरियंस है, बहुत समय से उस फील्ड में काम कर रहे हैं तो वाकई में आपकी जिंदगी आप संवार सकते हैं।


उम्मीद है कि आपको ये best motivational speech in hindi for success काफी पसंद आया होगा। आपको हमारी ये प्रेरणादायक हिंदी कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।


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खाटू श्याम जी की रहस्यमयी कहानी | Unknown Story Of Hindu God Hindi

खाटू श्याम जी की रहस्यमयी कहानी | Unknown Story Of Hindu God Hindi

महाभारत पुराण का रहस्मयी युद्ध कथा | Indian Mythological Hindu God Story In Hindi With Moral

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Indian Mythological Stories In Hindi

धर्मग्रंथ महाभारत में ऐसी बहुत सी रहस्मयी कथाओं का वर्णन मिलता है जिसे अगर मनुष्य अपने जीवन में उतार लें तो उसे ना ही खुद पर कभी अहंकार हो सकता है और ना ही वो खुद को कभी भी शर्वशक्तिमान समझ सकता है।


आज के इस हिंदी कहानी में हम आपको महाभारत से जुड़ी एक ऐसी ही रहस्यमयी पौराणिक कथा के बारे में बताने वाले हैं। इस कथा के माध्यम से हम जानेंगे कि जब महाभारत युद्ध में पांडवों को विजय मिली तो पांचों पाण्डव खुद को अपने विजय का श्रेय देने लगे।


अर्थात युद्ध में विजय प्राप्त करने के कारण पांचों पांडवों को अपने बल पर अहंकार हो गया था। तब श्रीकृष्ण ने उनका अहंकार दूर करने के लिए क्या किया इस रहस्यमयी पौराणिक कहानी के माध्यम से पूरी विस्तार से जानते हैं।


खाटू श्याम जी की रहस्यमयी पौराणिक कहानी | Indian Hindu Mythology Stories In Hindi


स्कन्दपुराण के महेश्वरखण्ड के कुमारिका खण्ड के अनुसार ये रहस्यमयी पौराणिक कहानी उस समय की है जब कौरव और पांडव अपनी-अपनी सेनाओं सहित कुरुक्षेत्र में होने वाले महाभारत युद्ध के लिए एकत्रित हो चुके थे। दोनों ही सेनाओं में इस बात की चर्चा हो रही थी कि कल से शुरू होने वाला युद्ध कितने दिनों में समाप्त होगा और इस युद्ध में कौन विजयी होगा?


उधर इस बात की जानकारी जब घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र बर्बरीक को मिली तो वो अपनी माँ से युद्ध में शामिल होने की आज्ञा लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान में पांडवों के शिविर में पहुँच गया। वहाँ पहुँचकर बर्बरीक सबसे पहले श्रीकृष्ण को प्रणाम किया और फिर बारी-बारी से पांचों पांडवों के चरण स्पर्श किये।


उसी समय पांडवों के शिविर में एक गुप्तचर आया और उसने महाराज युधिष्ठिर को प्रणाम करते हुए कहा कि महाराज! अभी मैं कौरवों के शिविर में गया था। वहाँ मैंने सुना कि राजकुमार दुर्योधन अपने पक्ष के महारथियों से चर्चा कर रहे थे कि कौन सा योद्धा कितने दिनों में सेना सहित पांडवों का वध कर सकता है।


जिसके बाद सर्वप्रथम आपके पितामहः भीष्म ने कहा कि वह आप पांचों भाइयों को सेना सहित एक महीने में समाप्त कर सकते हैं। फिर गुरु द्रोणाचार्य ने कहा कि मैं सेना सहित पांचों पांडवों को पन्द्रह दिन में समाप्त कर सकता हूँ। इसके बाद अश्वत्थामा ने कहा कि वह आपके पांचों भाइयों को सेना सहित दस दिन में समाप्त कर सकते हैं। अगर अंगराज कर्ण के बातों पर विश्वास करें तो आप सभी को वह केवल छः दिनों में मार सकते हैं।


गुप्तचर की ये सब बातें सुनकर युधिष्ठिर चिंतित हो गए और उन्होंने गुप्तचर को शिविर से बाहर जाने को कहा। फिर जब गुप्तचर बाहर चला गया तो युधिष्ठिर ने अपने चारों भाइयों से पूछा कि अनुज! तुमलोग इस युद्ध को कितने दिनों में समाप्त कर सकते हो?


अपने ज्येष्ठ के मुख से ऐसी बात सूनकर चारों भाई एक दूसरे को देखने लगें। उनलोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि इस प्रश्न का क्या उत्तर दिया जाए? तब अर्जुन ने कहा कि भीष्म और गुरु द्रोणाचार्य ने जो घोषणा की है वह सर्वथा असत्य है क्योंकि युद्घ में जय और पराजय का पहले से किया हुआ निश्चय ही झूठा होता है। आपके पक्ष में जो भी योद्धा युद्ध के लिए युद्धभूमि में जाने वाले हैं इनमें से एक भी सारी कौरव सेना का संहार कर सकता है।


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हे ज्येष्ठ! हमारे पक्ष के योद्धाओं के डर से कौरव और उनकी सेना इस प्रकार भाग जाएंगे जैसे सिंह के डर से मृग भाग जाता है। बूढ़े पितामह भीष्म, गुरु द्रोण और कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा से हमें कोई भय करने की जरूरत नहीं है। फिर भी यदि आपके चित को शांति नहीं मिल रहा है तो मैं आपको बता दूँ कि मैं अकेला ही युद्ध में सेना सहित समस्त कौरवों को एक ही दिन में नष्ट कर सकता हूँ।


खाटू श्याम जी की जीवन गाथा


अर्जुन के मुह से ऐसी बातें सुनकर शिविर में मौजूद घटोत्कच पुत्र बर्बरीक से रहा नहीं गया। उसने अर्जुन से कहा कि पितामह अभी आपने जो कहा है वो सही नहीं है क्योंकि मैं सेना सहित कौरवों को कुछ ही पलों में नष्ट कर सकता हूँ।


बर्बरीक के मुख से ऐसी बातें सुनकर शिविर में मौजूद सभी योद्धा आश्चर्यचकित हो गए। अर्जुन की आँखे लज्जा से झुक गयी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- पार्थ बर्बरीक ने अपनी शक्ति के अनुरूप ही बात कही है क्योंकि इसके पास ऐसी शक्ति मौजूद है जो कुछ पल में ही होने वाले इस युद्ध को समाप्त कर सकता है।


फिर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से कहा कि हे वत्स! भीष्म, द्रोण और कर्ण जैसे महारथियों से सुसज्जित कौरवों की सेना को तुम इतना शीघ्र कैसे परास्त कर सकते हो? तुम्हारे पास ऐसा कौन सा अस्त्र है? कृपा करके हमें भी बताओ।


तब बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण से दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा कि प्रभु मेरे तरकस में जो तीन बाण आप देख रहे हैं इन्हीं बाणों की सहायता से मैं पल भर में अपने शत्रुओं को नष्ट कर सकता हूँ। तब श्रीकृष्ण बोले हे बर्बरीक! मैं कहने पर विश्वास नहीं करता, मुझे इसका प्रमाण चाहिए। तब बर्बरीक ने कहा- हे प्रभु! आप ही बताइए कि मैं आपके सामने खुद को किस प्रकार प्रमाणित करूँ।


इसके बाद शिविर में मौजूद पांचों पाण्डव, भीम पुत्र घटोत्कच और बर्बरीक को श्रीकृष्ण एक ऐसे स्थान पर ले गए जहाँ पर पहले से ही एक विशाल बरगद का पेड़ था। वहाँ पहुँचकर श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से कहा- ये पीपल का पेड़ देख रहे हो। इस पेड़ में जितने भी सूखे पते लगे हुए हैं वहीं तुम्हारा लक्ष्य है। अगर तुम इन तीन बाणों से अपने लक्ष्य को भेद दिया तो हमें तुम्हारे वीरता पर कोई संदेह नहीं रहेगा।


भगवान श्रीकृष्ण की बातें सुनकर बर्बरीक ने कहा- आपकी जैसी आज्ञा प्रभु। फिर उसने अपने तरकस से लक्ष्य को चिन्हित करने के लिए एक बाण निकाला और अपने धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ा कर उसे अपने लक्ष्य पर छोड़ दिया। पल भर में ही वह बाण पीपल के पेड़ पर मौजूद सभी सूखे पत्तों को चिन्हित कर वापस अपने तरकस में लौट आया। 


उस बाण के वापस आते ही बर्बरीक ने जैसे ही उन पत्तों को काटने के लिए अपना दूसरा बाण तरकस से निकाला उसी समय एक सूखा पता धरती पर गिर पड़ा। जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पांव के नीचे छिपा लिया।


उधर पहले के ही भांति बर्बरीक ने दूसरे बाण को अपने धनुष की प्रत्यंचा पर चढ़ाकर पीपल के पेड़ पर छोड़ दिया। देखते ही देखते बर्बरीक के इस बाण ने पल भर में ही सारे सूखे पत्तों को काट दिया। परन्तु बर्बरीक का ये दूसरा बाण तरकस में वापस लौटने के बजाय श्रीकृष्ण के पांव के पास जाकर रुक गया।


ये देखकर बर्बरीक ने श्रीकृष्ण से कहा कि हे प्रभु! आपने मेरे द्वारा चिन्हित पत्ते को अपने पांव के नीचे छूपा रखा है। कृपा कर अपना पांव हटा लीजिए क्योंकि मेरे ये बाण अपने लक्ष्य से कभी नहीं चूकते। बर्बरीक की ये बातें सुनकर भगवान श्रीकृष्ण मुस्कुराते हुए कहा- पुत्र बर्बरीक! ये प्रमाणित हो गया कि तुम पल भर में ही इस युद्ध को समाप्त कर सकते हो। किंतु अब तुम्हारा जीवित रहना धर्म के अनुकूल नहीं है।


ये सुनकर घटोत्कच सहित पांचों पांडव हैरान रह गए। फिर युधिष्ठिर सहित सभी पांडव श्रीकृष्ण से पूछा- हे वासुदेव! ये आप क्या कह रहे हैं? ये तो हमारे लिए अच्छी बात है कि बर्बरीक युद्घ में हमारे तरफ से हिस्सा लेगा। फिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?


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फिर श्रीकृष्ण ने कहा कि आपलोगों को जैसा दिख रहा है वो सत्य नहीं है। ये सुनकर अर्जुन बोले- फिर सत्य क्या है वासुदेव?
तब भगवान ने जवाब दिया- आपलोगों को सारी सच्चाई बर्बरीक ही बताएगा। श्रीकृष्ण के कहे अनुसार बर्बरीक ने सच बताते हुए कहा- पितामह! प्रभु श्रीकृष्ण सही कह रहे हैं क्योंकि मैंने अपने माता को वचन दे रखा है कि युद्ध में जो भी पक्ष निर्बल होगा मैं उसी पक्ष से युद्ध करूँगा।


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ये सुनकर भीम ने कहा- हे वासुदेव! शक्ति की गणना के अनुसार तो युद्ध में हमारा ही पक्ष निर्बल है, फिर आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? तब श्रीकृष्ण ने भीम से कहा- हे भीम! शुरुआत में आपका पुत्र बर्बरीक आपके ही पक्ष से युद्ध लड़ेगा। लेकिन अगले ही पल जब कौरवों का नाश हो जाएगा तो ये आपके विरुद्ध युद्ध करने लगेगा और कौरवों की तरह ये आप सभी का भी विनाश कर देगा।


भगवान श्रीकृष्ण के मुख से ऐसी बात सुनकर बर्बरीक ने उसी क्षण उनके चरण पकड़ लिए और कहा- हे प्रभु! अब आप ही बताइये मैं क्या करूँ?
तब श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को अपना प्राण त्याग करने को कहा। ये सुनकर बर्बरीक ने अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए कहा- भगवान मेरी एक इच्छा है कि मैं भी इस युद्ध में शामिल हो सकूँ और अपनी आंखों से इस युद्ध को देख सकूँ।


ऐसे में अब आप ही बताइये की मेरा क्या होगा? तब भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को अपने दोनों हाथों से उठाते हुए कहा- वीर बर्बरीक! मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि तुम्हारी युद्ध देखने की इच्छा जरूर पूरी होगी लेकिन इसके लिए तुम्हें अपना शीश दान करना होगा। बर्बरीक ने जवाब दिया कि प्रभु जैसी आपकी आज्ञा।


फिर उसने अपने तरकस से एक बाण निकाला और उसे संधान करके ऊपर की ओर छोड़ दिया। देखते ही देखते पल भर में ही उस बाण ने बर्बरीक का सिर धड़ से अलग कर दिया जो श्रीकृष्ण के चरणों में जाकर गिर गया।


उधर बर्बरीक के शीश को कटा हुआ देखकर पांचों पांडव और घटोत्कच शोक से व्याकुल हो गए। फिर भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के सिर को अपने हाथों से उठाया। उसी समय आकाश में देवी जगदम्बिका प्रकट हुई और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को प्रणाम करते हुए कहा- हे वासुदेव! मेरे लिए क्या आज्ञा है?
तब श्रीकृष्ण ने कहा- हे देवी! बर्बरीक के शरीर को अमृत से सींचने की कृपा कीजिये, ताकि वीर बर्बरीक का शरीर अजर-अमर हो जाये।


भगवान का आदेश पाते ही देवी ने कटे हुए सिर को अमृत से सींच कर अजर-अमर कर दिया और स्वयं अंतर्ध्यान हो गयी। फिर बर्बरीक का कटा हुआ सिर भगवान श्रीकृष्ण से कहने लगा- प्रभु, आप धन्य है। आपकी कृपा से मैं इस युद्ध को अपनी आंखों से देख पाऊँगा। अब ऐसा लगता है कि मेरा जीवन सफल हो गया।


इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के सिर को कुरुक्षेत्र के समीप एक पर्वत के चोटी पर अपनी दिव्य शक्ति से स्थापित कर दिया। उसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के कटे हुए सिर से कहा- हे बर्बरीक! तुम पर्वत के इस चोटी से कल से शुरू होने वाले धर्मयुद्ध को देख सकोगे और तुम्हीं इस युद्ध के एक मात्र साक्षी रहोगे।


तुमसे ही आने वाली पीढियां इस धर्मयुद्ध की कथा जान पाएगी। हे बर्बरीक! मैं आज से तुम्हें अपना नाम और शक्ति देता हूँ। जिसके बाद तुम आज से खाटू श्याम के नाम से जाने जाओगे और कलयुग में जो भी तुम्हारी पूजा श्रद्धा तथा भक्ति के साथ करेगा उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।


फिर श्रीकृष्ण के ऐसा कहने के बाद पांडवों ने बर्बरीक के सिर को प्रणाम किया और वे सभी अपने शिविर को लौट आये। अगले दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का धर्मयुद्ध शुरू हो गया। जो अठारह दिनों तक चला। इस युद्ध में कौरव पक्ष के सभी महारथी मारे गए और पांडवों को जीत मिली।


जब भीम के हाथों दुर्योधन के वीरगति प्राप्त होने के बाद पांचों पांडव अपने शिविर में लौट आये। फिर कुछ दिनों बाद पांचों पांडव युद्ध में मिली जीत का श्रेय खुद को देने लगे। एक ने कहा कि उसने युद्ध में धर्म का संचालन धर्मपूर्वक किया इसलिए हम सभी को युद्ध में जीत मिली।


तो किसी ने कहा कि अगर वह पितामह भीष्म को बाणों की सैया पर नहीं सुलाता तो उन्हें युद्ध में जीत हासिल करना असम्भव था। सभी पांचों भाइयों के बीच ये संशोधन चल ही रही थी कि श्रीकृष्ण उस कक्ष में जा पहुंचे और उन सभी से बोले कि किस बात को लेकर आपलोगों में बहस चल रही है।


पांचों पांडवों ने सारी बात श्रीकृष्ण को बताया जिसे सुनकर श्रीकृष्ण मुस्कुराने लगे। तब युधिष्ठिर ने पूछा कि हे वासुदेव! इस युद्ध में जीत का श्रेय किसे देना चाहेंगे। तब श्रीकृष्ण युधिष्ठिर से बोले- इस बात का उत्तर तो वहीं दे सकता है जिसने इस पुरी युद्ध को अपनी आंखों से देखा है और वहीं इस युद्ध का एक मात्र साक्षी भी है।


श्रीकृष्ण के इतना कहते ही पांचों पांडव समझ गए कि वासुदेव बर्बरीक की ही बात कर रहे हैं। फिर पांचों पांडव भगवान श्रीकृष्ण के साथ उस पर्वत पर गये जिसकी चोटी पर से बर्बरीक सम्पूर्ण महाभारत के युद्ध को देखा था।


वहाँ पहुँचने पर बर्बरीक ने श्रीकृष्ण और पांचों पांडवों को सादर प्रणाम किया और श्रीकृष्ण से पूछा- भगवान आप यहाँ किस उद्देश्य से आये हैं। तब श्रीकृष्ण ने कहा- वीर बर्बरीक! तुम्हारे पांचों पितामह स्वयं को इस युद्ध मे जीत का श्रेय दे रहे थे। लेकिन वास्तविकता क्या है ये केवल तुम्हीं बता सकते हो।


तब बर्बरीक ने कहा- पितामह! आपलोग किस आधार पर इस युद्ध में मिली विजय का श्रेय दे रहे हैं? जबकि सत्य तो ये है कि आप सभी किसी से लड़े ही नहीं है। वास्तव में तो युद्ध मेरे प्रभु श्रीकृष्ण कर रहे थे। उन्होंने ही ये युद्ध लड़ा जिसमें वे खुद जीते भी और खुद हारे भी।


बर्बरीक की बातें सुनकर पांचों पांडवों का सिर लज्जा से झुक गया। फिर युधिष्ठिर श्रीकृष्ण से बोले- वासुदेव हमें क्षमा कर दें। हम सभी को अपने-अपने बल का अभिमान हो गया था। अब हम जान गए हैं कि ये युद्ध आपकी मर्जी से हुआ। इसके बाद वे सभी अपने महल को लौट आये।


इस पौराणिक कथा से सीख


इसीलिए तो कहा जाता है कि मनुष्य को कभी भी किसी चीज का अभिमान नहीं करना चाहिए क्योंकि हम तो भगवान के बनाये हुए सिर्फ एक कठपुतली है।


मित्रों उम्मीद करता हूँ कि आपको खाटू श्याम जी की प्रेरणादायक कहानी काफी पसंद आई होगी। अगर आपको महाभारत की ये रहस्यमयी पौराणिक कहानी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें। आपका धन्यवाद।।

दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जो आप नहीं जानते होंगे | धर्म ग्रँथों की कहानियां

दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जो आप नहीं जानते होंगे | धर्म ग्रँथों की कहानियां

Best 2 Hindu Mythological Stories In Hindi | दो अनसुनी पौराणिक और रहस्यमयी धार्मिक कहानियां


मित्रों आज हम ऐसे दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जानेंगे जो इससे पहले शायद आपने कभी नहीं सुना होगा। हम धीरे-धीरे अपनी पुरानी संस्कृति को भूल रहे हैं जो काफी गलत है। हमारी संस्कृति कल भी उतनी ही अच्छी थी जितनी कि आज। 


अपनी हिन्दू संस्कृति को ही बढ़ावा देने के क्रम में हम आपके लिए ये दोनों पुरानी रहस्यमयी पौराणिक कथाएं लेकर आये हैं जो काफी रोचक और धार्मिक है। तो चलिए बिना किसी देरी के इन दोनों अनसुनी धार्मिक ग्रँथों की कहानियों के बारे में जानते हैं।


भगवान शिव जी की पौराणिक रहस्यमयी कथा | Unknown Short Stories Of Hindu Mythology In Hindi

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भगवान शिव जी की अनसुनी कथा

देवों के देव महादेव को क्यों घड़ियाल बनना पड़ा? शर्वशक्तिमान महादेव को क्यों एक तुच्छ प्राणी का रूप लेना पड़ा? सृष्टि के सृजनकर्ता और संहारक जिनका ना ही आदि है और ना ही कोई अंत। भोलेनाथ, शम्भूनाथ, महादेव जैसे दर्जनों नाम वाले महादेव के साथ ऐसा क्यों हुआ जो उन्हें मगरमच्छ का रूप लेकर पानी में जाना पड़ा?


तो आइए जानते हैं भगवान शिव जी की रहस्यमयी पौराणिक कथा के इस रोचक तथ्य के बारे में विस्तार से जानते हैं।


पौराणिक कथाओं के अनुसार देवों के देव महादेव एक बार पर्वत पर तपस्या में लीन थे। तभी देवतागण मिलकर अचानक से उनकी प्रार्थना करने लगे। देवतागण माता पार्वती की अनुसंशा को लेकर उनसे प्रार्थना कर रहे थे। महादेव ने देवताओं की प्रार्थना तो स्वीकार कर लिया। लेकिन विजय के गम्भीरता को देखते हुए वो स्वयं इसका उपाय ढूंढने में लग गए। तो क्या थी वो कथा जिसको लेकर देवतागण को महादेव से प्रार्थना करनी पड़ी। चलिये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती महादेव से शादी करने के लिए दृढ़ निश्चय कर चुकी थी। वो सबकुछ त्याग कर घोर तपस्या में जुट गई थी। सालों साल तपस्या में लीन पार्वती की ये दशा देखकर देवता द्रवित हो गए और महादेव से उनकी आराधना को पूर्ण करने की प्रार्थना करने लगे।


महादेव ने देवताओं की प्रार्थना तो स्वीकार कर ली लेकिन अब उनके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हो गयी थी कि वो माता पार्वती के बारे में कैसे पता लगाएं? भगवान स्वयं किस प्रकार से माता पार्वती के सामने जाते? ऐसा करने पर माता पार्वती नाराज भी तो हो सकती थी।


वो इसी सोच में डूबे थे कि तभी उन्हें एक उपाय सुझा। महादेव ने सप्तऋषियों को माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भेजा। सप्तऋषियों ने महादेव से शादी करने के फैसले के बारे में माता पार्वती जी से पूछा। परन्त फिर भी पार्वती महादेव का गुणगान करते नहीं थक रही थी।


उन्होंने कहा कि वो सर्वगुण सम्पन्न और शक्तिमान है। उनमें ही सारी सृष्टि समायी हुई है। फिर सप्तऋषियों ने महादेव के सैकड़ों अवगुण गिनवाए। परन्त देवी पार्वती अपने फैसले से जरा भी पीछे नहीं हटी और अपने फैसले पर अटल रहते हुए उन्होंने कहा कि महादेव के अलावा वो किसी और से विवाह करना उन्हें मंजूर नहीं है।


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इसके पश्चात सप्तऋषि वहाँ से लौट आये और पूरी कहानी महादेव को बताई। जिसके बाद उन्होंने स्वयं पार्वती जी की परीक्षा लेने को ठानी। जैसा कि हम सब जानते हैं कि शादी से पहले सभी वर अपने भावी अर्धांगिनी को लेकर सभी सन्देहों को दूर करना चाहते हैं।


इसमें महादेव भी पीछे नहीं रहे। ऐसे में उन्होंने स्वयं पार्वती जी की परीक्षा लेने की योजना बनाई। उधर माता पार्वती जी एक तलाब के किनारे अपनी तपस्या में लीन थी। तभी तलाब के किनारे एक बालक को एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया। अपनी जान को खतरे में देखकर बालक शोर मचाने लगा। वो जोर-जोर से मगरमच्छ-मगरमच्छ चिलाकर अपनी जान बचाने के लिए किसी से सहायता मांगने लगा।


पार्वती जी ने जब किसी बच्चे की चीख पुकार सुनी तो उनसे रहा नहीं गया और वो तपस्या छोड़कर उसे बचाने के लिए तलाब के किनारे पहुंच गई। वहाँ उन्होंने देखा कि मगरमच्छ ने एक बालक को पकड़ा हुआ है और वो उसे तलाब में खींचकर अंदर ले जाने की कोशिश कर रहा है।


बालक देवी को देखकर उनसे अपनी जान बचाने के लिए विनती करने लगा और बच्चा कहने लगा- हे माता! मेरी जान को खतरा है। यदि आप चाहेंगी तो मेरी जान बच सकती है। वैसे भी ना तो मेरी माता है और ना ही पिता। अब आप ही मेरी रक्षा कीजिये। मुझे बचाइए माता।


देवी पार्वती से बच्चे की पुकार सुनकर रहा नहीं गया और उन्होंने मगरमच्छ से कहा- हे मगरमच्छ! इस निर्दोष बालक को छोड़ दीजिए बदले आपको जो चाहिए वो आप मुझसे मांग सकते हैं। जिसके पश्चात मगरमच्छ ने कहा कि एक शर्त पर मैं इसे छोड़ सकता हूँ। आपने तपस्या करके महादेव से जो वरदान प्राप्त किया है, यदि उस तपस्या का फल आप मुझे दे देगी तो मैं इसे छोड़ दूंगी।


पार्वती जी मगरमच्छ के इस शर्त को मान लिया और कहा- लेकिन आपको इस बालक को शीघ्र ही छोड़ना होगा। मगरमच्छ ने देवी को समझाते हुए कहा कि अपने इस फैसले पर फिर से विचार कर लीजिए। जल्दबाजी में आकर कोई वचन न दीजिये क्योंकि आपने हजारों वर्षों तक जिस प्रकार से तपस्या की है वो देवताओं के लिए भी असम्भव है। उसका सारा फल इस बालक के प्राणों के लिए मत गंवाइए।


फिर पार्वती जी ने कहा- मैं फैसला कर चुकी हूं। मेरा इरादा अटल है, मैं आपको अपनी तपस्या का पूरा फल देने को तैयार हूँ परन्तु आप इसे तुरंत मुक्त कर दीजिए। मगरमच्छ ने पार्वती जी से अपनी तपस्या दान करने का वचन ले लिया और जैसे ही पार्वती जी ने अपनी तपस्या का दान किया मगरमच्छ का शरीर तेज से चमकने लगा।


फिर मगरमच्छ ने कहा- देखिये आपके तपस्या के तेज से मेरा शरीर कितना चमकने लगा है। फिर भी मैं आपको अपनी भुल सुधारने का एक मौका और देता हूँ। इसके उत्तर में पार्वती जी ने कहा कि तपस्या तो मैं फिर से कर सकती हूँ लेकिन यदि आप इस निगल जाते तो क्या इसका जीवन वापस मिल पाता?


इस पर मगरमच्छ ने कुछ जवाब नहीं दिया और इधर-उधर देखने लगा। इसी क्रम में देखते ही देखते वो लड़का और मगरमच्छ दोनों अदृश्य हो गए। पार्वती जी को इस पर आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों एक साथ अचानक से गायब हो गए।


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लेकिन पार्वती जी ने इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया और इस बात पर विचार करने लगी कि उन्होंने अपनी तपस्या का फल तो दान कर दिया पर फिर से इसे कैसे प्राप्त किया जाए? इसके लिए उन्होंने फिर से तपस्या करने का प्रण किया। वो तपस्या करने के लिए तैयारियां करने लगी कि अचानक महादेव उनके सामने अचानक प्रकट हो गए और वो कहने लगे कि हे देवी भला अब तपस्या क्यों कर रही हो?


पार्वती जी ने कहा- हे प्रभु! आपको अपने स्वामी के रूप में पाने के लिए मैंने संकल्प लिया है लेकिन मैंने अपनी तपस्या का फल दान कर दिया है। ऐसे में मैं फिर से वैसे ही घोर तपस्या करके आपको प्रसन्न करना चाहती हूँ। इसके जवाब में महादेव ने कहा कि हे पार्वती! अभी आपने जिस मगरमच्छ को अपनी तपस्या का फल दिया और जिस लड़के की जान बचाई इन दोनों रूपों में मैं ही था।


अनेक रूपों में दिखने वाला मैं एक ही हूँ, मैं अनेक शरीरों में शरीर से अलग निर्विकार हूँ। यह मेरी ही लीला थी। मैं यह देखना चाहता था कि आपका मन प्राणी मात्र में सुख-दुःख का अनुभव करता है कि नहीं। इस पर पार्वती जी ने कहा- हे प्रभु! क्या मैं आपकी परीक्षा में सफल हुई तो महादेव ने उत्तर दिया- हे देवी! आप प्राणियों का सुख-दुःख समझती है, आपमें दया और करुणा दोनों है।


अब आपको और तपस्या करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आपने अपनी तपस्या का फल मुझे ही दिया है। ये सुनकर माता पार्वती अति प्रसन्न हुई और इसके बाद माता पार्वती और भगवान महादेव का विवाह हो गया। तो देखा आपने कि भगवान शिव क्यों घड़ियाल बनें?


अब आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि क्या इससे पहले इस भगवान शिव की रहस्यमयी पौराणिक कथा के बारे में जानते थे? साथ ही आपको ये short devotional stories in hindi कैसी लगी ये भी जरूर बतायें।


महाभारत के विदुर की अनसुनी कहानी | Short Religious Stories In Hindi With Moral

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महात्मा विदुर की कहानी

मित्रों इस indian mythological stories in hindi में आप महाभारत के विदुर की अनसुनी कहानी के बारे में जानेंगे कि अगर विदुर महाभारत में युद्ध करते तो क्या होता? तो चलिए इस अनसुनी पौराणिक कथाओं के बारे में जानते हैं।


जैसा कि हम जानते हैं कि महाभारत धर्म और अधर्म का युद्ध था। पांडवों और कौरवों दोनों ही पक्ष में बहुत ही शक्तिशाली योद्धा थे। जैसे अर्जुन, भीम, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कर्ण और इन शक्ति से भी परे स्वयं भगवान कृष्ण। कृष्ण की शक्ति की तो कोई तुलना भी नहीं की जा सकती।


परन्तु महाभारत में अन्य सभी शक्तिशाली योद्धाओं से भी शक्तिशाली एक योद्धा थे। जिन्हें हम सब महात्मा विदुर के नाम से जानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि विदुर धर्मराज के अवतार थे और यदि वे चाहते तो महाभारत युद्ध में अपने धनुष से पूरी सेना को एक ही पल में नष्ट कर सकते थे।


परन्तु ये सम्भव नहीं हो सका। तो आइए हम जानते हैं कि महात्मा विदुर के इतना शक्तिशाली होने के बाद भी विदुर महाभारत युद्ध को क्यों समाप्त नहीं कर पाए?


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साथियों विदुर धृतराष्ट्र और पांडु के भाई होने के साथ-साथ कौरवों और पांडवों के काका भी थे। हस्तिनापुर के नरेश शान्तनु और उनकी पत्नी माता सत्यवती के दो पुत्र हुये। जिनके नाम चित्रांगद और विचित्र वीर्य थे। दोनों पुत्रों के बचपन में ही शान्तनु का देहांत हो गया जिससे चित्रांगद और विचित्र वीर्य का पालन भीष्म पितामह के द्वारा किया गया।


यदि आप शान्तनु और भीष्म पितामह के बारे में नहीं जानते हैं तो  हम आपको बता दें कि भीष्म शान्तनु की प्रथम पत्नी गंगा से उत्पन्न हुए थे। शान्तनु ने सत्यवती के सुदरता पर मोहित होकर उनसे विवाह कर लिया। परन्तु विवाह से पूर्व सत्यवती के पिता ने एक शर्त रखी थी कि शान्तनु के पश्चात सत्यवती से उत्पन्न पुत्र ही राजा का पद ग्रहण करेगा न कि उनकी पहली पत्नी गंगा का पुत्र।


शान्तनु के वचन दिया और इसके बाद उनका विवाह माता सत्यवती से हो गयी। इस कारण अपने पिता का वचन रखने के लिए भीष्म आजीवन कुँवारे रहे और चित्रांगद तथा विचित्र वीर्य का अपने बच्चों के समान पालन पोषण किया। चित्रांगद के बड़े होने पर भीष्म पितामह ने उन्हें सिंहासन सौंप दिया।


कुछ समय पश्चात ही गन्धर्वों के साथ हुए युद्ध में चित्रांगद की मृत्यु हो गयी। अब विचित्र वीर्य भी युवावस्था में थे तो भीष्म ने उनका विवाह करने का विचार किया। उसी समय काशीराज की तीन पुत्रियां- अम्बा, अम्बे और अम्बालिका का स्वयंम्बर होने वाला था। भीष्म ने वहाँ जाकर सभी राजाओं को परास्त किया और तीनों कन्याओं का हरण कर लिया। उसके बाद अपने साथ उन्हें हस्तिनापुर लेकर आ गए।


इस पर अम्बा ने भीष्म से कहा कि वो राजा शाल्व से प्रेम करती है और उनसे ही विवाह करना चाहती है। ये सुनकर भीष्म ने अम्बा को राजा शाल्व के पास भिजवा दिया। लेकिन अन्य दोनों कन्याओं का विवाह विचित्र वीर्य के साथ करवा दिया।


कुछ समय के पश्चात ही विचित्र वीर्य को क्षय रोग हो गया और उनकी अचानक मृत्यु हो गयी। तब तक उनकी कोई भी संतान उत्पन्न नहीं हुई थी। वंश खत्म होने के भय से माता सत्यवती ने भीष्म से कहा कि वो विचित्र वीर्य की पत्नियों से पुत्र उत्पन्न करें।


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परन्तु भीष्म पितामह ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने से मना कर दिया। तब सत्यवती ने अपने एक और पुत्र वेद व्यास को स्मरण किया। साथियों वेदव्यास सत्यवती और ऋषि परासर के ही पुत्र थे। वेदव्यास अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए पुत्र उत्पत्ति के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अम्बा और अम्बालिका से एक वर्ष तक नियम व्रत का पालन करने के लिए कहा।


फिर एक वर्ष पश्चात उन्होंने माँ सत्यवती से कहा कि अम्बिका और अम्बालिका को एक-एक करके निर्वस्त्र होकर उनके सामने से गुजरना होगा। परन्तु लज्जा के कारण दोनों संकोच करने लगी। सत्यवती के समझाने पर अम्बिका और अम्बालिका ऐसा करने के लिए सहमत हो गयी।


फिर एक वर्ष पश्चात जब वेदव्यास अम्बिका का पास गए तब अम्बिका ने डर से अपने तेज नेत्र बंद कर लिए। कक्ष से बाहर आने पर वेदव्यास ने माता सत्यवती से कहा कि अम्बिका को बहुत ही तेजस्वी पुत्र प्राप्त होगा। परन्त उसने अपने नेत्र बंद कर लिए इसलिए ये पुत्र नेत्रहीन होगा।


ये सुनकर माता सत्यवती को बहुत ही दुःख हुआ। इसके पश्चात वेदव्यास छोटी रानी अम्बालिका के पास गए। वेदव्यास के डरावने रूप को देखकर अम्बालिका बहुत डर गई। जिसके बाद वेदव्यास ने माता सत्यवती से कहा कि अम्बालिका का पुत्र पांडु रोग से ग्रसित होगा।


ये सुनकर माता सत्यवती को और भी दुःख हुआ और उन्होंने अम्बालिका को पुनः वेदव्यास के सामने जाने के लिए कहा। इस बार अम्बालिका ने खुद न जाकर अपनी दासी को वेदव्यास के सामने भेज दिया। दासी उनके सामने जाकर बिल्कुल नहीं घबराई।


तब वेदव्यास जी ने माता सत्यवती से कहा कि इस दासी से उत्पन्न हुआ पुत्र नीतिवान और वेदों का महाज्ञानी होगा। आपको बता दें कि अम्बिका से उत्पन्न हुआ पुत्र ही धृतराष्ट्र, अम्बालिका से उत्पन्न हुआ पुत्र पांडु और दासी से उत्पन्न हुआ पुत्र ही विदुर था।


ऋषि मांडव्य के श्राप के कारण यमराज ने दासी पुत्र के रूप में जन्म लिया और वे आगे चलकर धृतराष्ट्र के मंत्री बनें। विदुर स्वयं धर्म का पालन करते थे और चाहते थे कि धृतराष्ट्र भी धर्म के मार्ग पर चलें। परन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका। जब भी धृतराष्ट्र पांडवों के हिट की बात करते तब विदुर उन्हें समझाने का प्रयास करते।


पांडवों के प्रति स्नेह देख दुर्योधन उनसे ईर्ष्या करता था। लाक्षागृह के षड्यंत्र में भी विदुर ने उन्हें आगाह किया था और उन्हें इनसे बचने की भी युक्ति बताई थी। विदुर के पास बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारी धनुष था जो उन्हें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण से प्राप्त हुआ था।


इस धनुष से वे चाहते थे तो वे युद्ध को एक ही पल में समाप्त कर सकते थे। एक बार विदुर ने दुर्योधन को पांडवों से युद्ध न करने की सलाह भी दी थी। ये सुनकर दुर्योधन बहुत क्रोधित हो गया और विदुर को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। ये सुनकर विदुर ने अपना धनुष तोड़ दिया और युद्ध नहीं लड़ेंगे। उन्हें भलीभाँति ज्ञान था कि यदि वे महाभारत युद्ध का हिस्सा बनेंगे तो उन्हें कौरवों की तरफ से युद्ध करना होगा।


अर्थात अधर्म के पक्ष में युद्ध करना होगा। इसीलिए उन्होंने स्वयं युद्ध न करने का निश्चय किया। साथ ही उन्होंने धृतराष्ट्र को समझाया भी दुर्योधन उनका पूरा खनदान खत्म कर देगा। परंतु विदुर की बात किसी ने नहीं मानी और इसका परिणाम क्या हुआ इससे तो हम सभी अवगत ही है। साथियों महाभारत के विदुर की ये पुरानी रहस्यमयी कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।


Conclusion Of Hindu Mythology Stories In Hindi


इन दोनों धार्मिक कहानियों के बारे में बताने का हमारा यहीं मकसद था ताकि हम अपनी संस्कृति को याद कर सकें। ये ऐसी कहानी है जो हमें हमारे धर्म से जोड़े रहती है। ऐसी कहानियों को पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि हमें ये मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती है और सही मार्ग ओर चलना सिखाती है।


हम उम्मीद करते हैं कि आपको ये best hindu short mythological stories in hindi काफी अच्छी लगी होगी। अगर आपको हमारा ये पुरानी रहस्यमयी पौराणिक कथाएं अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

आंखों में आंसू ला देने वाली सच्चे प्यार की दो जबरदस्त प्रेम कहानी

आंखों में आंसू ला देने वाली सच्चे प्यार की दो जबरदस्त प्रेम कहानी

Best 2 Heart Touching Sad & Emotional Cute Real Love Story In Hindi | सच्ची प्रेम कहानी इन हिंदी

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Real Love Story In Hindi

आज हम दो ऐसे hindi true love story के बारे में जानेंगे, जिसको पढ़ने के बाद निश्चित ही आपके आंखों से आँसू निकल आएंगे। ये दोनों स्टोरी बहुत ही heart touching & emotional love story है। इन दोनों कहानियों में हम जानेंगे कि एक सच्चा प्यार क्या होता है?


आज अधिकांश लोग सिर्फ अपने मतलब के लिए प्यार करते हैं लेकिन ये 2 true hindi love story आपको दिखाएगी कि प्यार का सही अर्थ क्या होता है? तो चलिए बिना किसी देरी के Best 2 Sad Short True Love Story In Hindi को पढ़ते हैं।


Very Sad True Heart Touching Short Love Story In Hindi | दर्द भरी प्रेम कहानी


बनारस में प्रीति नाम की एक बहुत ही सुंदर लड़की रहती थी। जो बहुत ही चंचल और हँसमुख लड़की थी। उसके पिताजी की एक बहुत बड़ी कम्पनी थी लेकिन प्रीति के पिताजी में इतना अमीर होने पर भी घमंड नाम की कोई चीज नहीं थीं और वह एक बहुत ही अच्छे आदमी थे।


प्रीति के कॉलेज में फाइनल ईयर की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी। अब वह अपने पिताजी की कम्पनी में उनके काम में हाथ बंटाना चाहती थी। वह रोज अपने पिताजी के साथ अपने कम्पनी में जाने लगी। प्रीति कम्पनी में सबसे खूब हंसी मजाक करती रहती थी। उसे देखकर कम्पनी में काम करने वालों को ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता था कि वो इस कम्पनी के मालिक की बेटी थी।


उसका स्वभाव इतना अच्छा था कि हर कोई उसकी तारीफ करता रहता था। लेकिन प्रीति को उसके कम्पनी में नौतिक नाम का लड़का उसे छुप-छुप कर देखता था, शायद वो उसे चाहता था। लेकिन वो उस कम्पनी में बहुत ही छोटे पद पर कार्यरत था। इस कारण नैतिक को अपने प्यार का इजहार करने में डर लगता था।


लेकिन प्रीति को एक दिन उस पर शक हो गया कि नैतिक उसे छुपकर देखता है। इसलिए प्रीति ने नैतिक से पूछा कि क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो? ये बात सुनकर नैतिक का होश उड़ गया और वो डर के मारे कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। तभी उसका ऐसा मुह देखकर प्रीति को बहुत जोर से हंसी आ गयी और वो वहाँ से चली गयी।


लेकिन शायद प्रीति को उसके प्यार का एहसास नहीं हुआ था। पर नैतिक को उससे बहुत प्यार हो गया था। एक दिन नैतिक ने तो हद ही कर दी। उसने प्रीति के जन्मदिन पर एक कागज में लपेटकर उसके केबिन में गुलाब का फूल रख दिया। जब प्रीति अपने केबिन में गयी तो उसको गुलाब का फूल रखा हुआ मिला।


फूल देखकर वो तुरन्त समझ गयी कि ये फूल जरूर नैतिक ने ही रखी होगा, लेकिन प्रीति को उससे प्यार ही नहीं हुआ था। फिर प्रीति ने नैतिक को अपने केबिन में बुलाया और उससे बड़ी प्यार से कहा- क्या तुम मुझसे करते हो?


इतना सुनते ही नैतिक ने डर के मारे अपनी गर्दन नीचे झुका ली और हिम्मत बांधकर कहा- हाँ, मैम मुझे आपसे पहली ही नजर में न जाने क्यों बेहद प्यार हो गया। जबकि मुझे ये मालूम है कि आप मुझसे कभी भी प्यार नहीं करोगी क्योंकि मैं एक गरीब आदमी हूँ और आप बहुत ही अमीर लड़की हो।


इस बात को सुनकर प्रीति को बहुत बुरा लगा लेकिन वो करती भी क्या? वो तो उससे प्यार भी नहीं करती थी। इसलिए उसने नैतिक ने कहा- नैतिक ये अमीर गरीब क्या लगा रखा है? मैं तो हमेशा से ही तुमलोगों से मिलजुलकर रहती हूँ। इस बात पर नैतिक ने कुछ भी नहीं कहा। फिर प्रीति ने नैतिक का उदास मन देखकर उससे कहा कि मैं तुमसे प्यार तो नहीं कर सकती। मगर मैं तुमसे दोस्ती जरूर करूँगी और ये फूल मैं हमारी दोस्ती के नाम पर ले लेती हूँ।


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नैतिक इस बात से बहुत खुश हो गया और उसने सोचा कि शायद प्रीति मैडम को दोस्ती के बाद एक न एक दिन मुझसे प्यार हो ही जायेगा। अब उन दोनों के बीच में गहरी दोस्ती हो चुकी थी। नैतिक भी दिल का बहुत अच्छा लड़का था और पूरी कम्पनी में सबसे ज्यादा सुंदर और समझदार लड़का था। नैतिक और प्रीति की जोड़ी भी बहुत ही सुंदर थी। बस उनकी जोड़ी में सिर्फ अमीर और गरीब का ही अंतर था।


एक दिन नैतिक ने प्रीति से कहा- प्रीति क्या हम रविवार को कहीं घूमने चलें तो प्रीति ने कहा कि ठीक है। फिर वे दोनों रविवार को बनारस के घाट पर घूमने निकल गए और सभी जगह घूम कर वे दोनों घाट के पास ही बैठ गए। तभी प्रीति ने नैतिक को आजमाते हुए पूछा कि नैतिक क्या सच में तुम मुझसे बेहद प्यार करते हो?


नैतिक ने कहा- तुमको क्या मेरी बातें झूठी लगती है?
इस पर प्रीति ने कहा- नहीं, बस बात ये थी कि मुझे प्यार पर इतना विश्वास नहीं है और मुझे ये बिल्कुल भी यकीन नहीं होता है कि एक प्यार के लिए इंसान इतना पागल कैसे हो सकता है? प्यार क्या होता है ये तो मुझे नहीं पता क्योंकि मुझे अभी तक किसी से भी प्यार नहीं हुआ और ना ही कभी होगा।


इस बात पर नैतिक को बहुत बुरा लग गया और प्रीति का हाथ पकड़कर कहा- प्रीति एक दिन तुम्हें भी किसी से प्यार जरूर होगा और तब तुमको एहसास होगा कि वास्तव में प्रेम क्या होता है?
प्रीति ने कहा- ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा। तुम भी यही हो और मैं भी यहीं हूँ। प्रीति की ऐसी बात सुनकर नैतिक के आंखों में आंसू आ गए।


नौतिक के आंखों में आंसू देखकर प्रीति को बहुत ही बुरा लगता है। तब प्रीति ने नैतिक को आजमाते हुए कहा- अच्छा नैतिक तुम मुझसे बताओ कि तुम मुझे कितना प्यार करते हो?


इतना सुनते ही नैतिक प्रीति को आई लव यू कहकर बनारस के घाट वाले नदी में कूद जाता है। प्रीति ये देखकर बहुत ही डर जाती है और वो वहाँ खड़े कुछ लोगों से उसे बचाने को कहती है। तभी वहाँ खड़े दो-तीन लोग उसे जैसे-तैसे उस नदी ने बाहर निकालते हैं। फिर बड़ी मुश्किल से नैतिक होश में आता है। प्रीति ने कहा- नैतिक जब तुम्हें तैरना ही नहीं आता था तो तुमने इस नदी में छलांग ही क्यों लगाई?


तब नैतिक ने प्रीति से गुस्सा होते हुए कहा- क्या तुम्हें नहीं पता कि मैंने इस नदी में क्यों छलांग लगाई। इस पर प्रीति ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता कि तुमने छलांग क्यों लगाई। तब नैतिक ने उस पर चिल्लाते हुए कहा- मैं इस नदी में इसलिए कूदा ताकि तुमको मेरे सच्चे प्यार पर विश्वास हो जाये।


प्रीति ने कहा- नैतिक, मेरे चक्कर में क्यों तुम अपना वक्त बर्बाद कर रहे हो? मैं सिर्फ तुम्हारी दोस्त हूँ और हमेशा सिर्फ दोस्त ही रहूंगी। ये कहकर प्रीति वहाँ से चली जाती है। नैतिक को इस पर बहुत बुरा लगता है।


प्रीति को भी अब तक नैतिक से कहीं न कहीं प्यार होने लगा था। लेकिन उसको अपने प्यार का एहसास नहीं था। अब प्रीति इसके बाद अपने घर पर आ जाती है। लेकिन वो कुछ परेशान और बेचैन सी लग रही थी और बार-बार उसे नैतिक की याद आ रही थी। साथ ही उसका आई लव यू कहना भी उसके दिल को चीरता हुआ न जाने उससे क्या कह रहा था?


तभी प्रीति को अचानक याद आया कि वो नैतिक को तो उस घाट पर ही छोड़कर आ गयी थी। उसने रात को ही नैतिक को फोन किया। लेकिन उसका फोन ही बंद था। तभी प्रीति ने सोचा कि नैतिक से मैं कल कम्पनी में ही बात कर लुंगी।


अगले दिन प्रीति जब अपने कम्पनी में पहुँची तो सीधा नैतिक के पास ही पहुँची लेकिन नैतिक उस दिन कम्पनी में नहीं आया था। ये देखकर प्रीति को बहुत अजीब लगा। उसे अब रहा नहीं जा रहा था। वो तुरंत अपने पिताजी के केबिन में गयी और बोली- पापा क्या आज नैतिक नहीं आएगा। उसके पिताजी ने कहा- हाँ बेटा आज वो नहीं आएगा। मगर मुझे ये नहीं पता कि वो क्यों नहीं आया?


शायद उसे कुछ काम होगा। इतना सुनकर प्रीति ने केबिन से बाहर आकर नैतिक को फिर से फोन लगाया। लेकिन उसका फोन फिर से बंद बता रहा था। अब प्रीति बेचैन सी होने लगी थी। लेकिन फिर उसने सोचा कि चलो कोई बात नहीं मैं नैतिक से अगले दिन मिल लुंगी।


अगले दिन भी नैतिक कम्पनी में नहीं आया। अब प्रीति को बिल्कुल रहा नहीं गया। वो तुरन्त अपने पापा के केबिन में पहुँचकर किसी फ़ाइल में नैतिक के घर का पता ढूंढने लगी। ये देखकर उसके पापा ने पुछा कि क्या हुआ बेटी? तुम नैतिक के एड्रेस के लिए इतना परेशान क्यों हो रही हो?


प्रीति ने बिना बोले ही नैतिक का पता लेकर वहाँ से चली गयी। अब शायद प्रीति को नैतिक का प्यार याद आ रहा था। जब वो नैतिक के घर पर पहुँची तो वहाँ पर उसके मकान मालिक ने कहा कि बेटी वो यहाँ पर किराए पर रहता था। अब वो कल सुबह ही दिल्ली चला गया क्योंकि उसके माता पिता दिल्ली में ही रहते हैं।


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उसके मकान मालिक ने ये भी कहा कि नैतिक कुछ परेशान लग रहा था और जाते-जाते उसने ये भी कहा कि अब वो बनारस कभी नहीं आएगा। ये सुनकर प्रीति के आंखों में आंसू आ गयी और वो सीधा अपने घर चली गयी। उसे नैतिक की बहुत याद आ रही थी और उसके साथ बिताए हुए सारे पल उसके आंखों के सामने एक सपने के तरह दिखने लगे थे।


साथ ही उसे नैतिक की एक बात याद आने लगी थी कि उसने कहा था एक दिन तुम्हें भी मेरे प्यार का एहसास जरूर होगा और वाकई में वो दिन प्रीति के जीवन में आ ही गया था।


उसे नैतिक की याद हमेशा सत्ता रही थी और मन ही मन इसी इंतजार में रहती थी कि तुम कब आओगे नैतिक? अब उसका जीवन नैतिक के बिना अधूरा था और उसने अब कम्पनी में भी जाना छोड़ दिया और हर रोज सिर्फ नैतिक का ही इंतजार सिर्फ ये सोचकर करती है कि नैतिक एक दिन जरूर आएगा। अगर सही समय पर उसने नैतिक के प्यार को स्वीकार कर लिया होता तो शायद उसे आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। 


आपको ये दर्द भरी प्रेम कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।


True & Blind Short Love Story In Hindi | सच्चे प्यार की कहानी

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सच्चे प्यार की कहानी

एक कॉल सेंटर के बाहर बहुत लंबी लाइन लगी हुई थी। नौकरी केवल 10 लोगों को मिलना था पर लम्बी लाइन बता रही थी कि नौकरी मिलने की आशा में लगभग 500 से ज्यादा लोग लाइन में खड़े थे। लाइन में एक काजल नाम की अंधी लड़की भी खड़ी थी।


काजल को लोगों के बातचीत से यह अंदाजा लग गया था कि नौकरी का आवेदन करने वाले लोग ज्यादा है। वह मन ही मन इस बात को लेकर बहुत नर्वस हो रही थी कि इतने आदमी के बीच उसको कैसे नौकरी मिलेगी? तभी एक चपरासी ने उसका नाम पुकारा और वह अपनी बहन नेहा का साथ अंदर जाने लगी।


लेकिन चपरासी ने नेहा को रोक दिया। नेहा ने बताना चाहा कि उसकी बहन अंधी है। मगर काजल ने उसके हाथ को दबाती हुई इशारा करके रोक दिया और अकेले ही अंदर जाने का मन बना लिया। काजल इसी भ्रम में थी कि वह अंधी है तो क्या हुआ उसके पास शिक्षा की आँखें तो है।

लेकिन उसका यह भ्रम उस समय टूट गया जब उसे कॉल सेंटर की नौकरी के लिए अनुपयोगी मान कर निष्कासित कर दिया गया। वह वापस बस से रोती हुई अपने शहर जा रही थी। वह नेहा से कह रही थी कि पिताजी ने अपना सारा पैसा मेरी पढ़ाई में लगा दिया। अब अगर मुझे नौकरी नहीं मिली तो दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होगी।


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उसके सीट के पीछे बैठा मनोज उसकी सारी बातें सुन रहा था। वह काजल के पड़ोस में रहता था और मन ही मन काजल को बहुत पसंद करता था। मगर वह जानता था कि हीन भावना की शिकार काजल कभी भी उसकी जीवन साथी बनने को तैयार नहीं होगी।


मनोज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह काजल की मदद करें। सोचते-सोचते आखिर उसके दिमाग में एक खतरनाक विचार ने जन्म लिया। उसने घर आकर काजल से मुलाकात की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। हालांकि मैं सुंदर नहीं हूँ और शायद तुम्हारी आँखें होती तो तुम मुझे अस्वीकार कर देती।


ये बात सुनकर काजल की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि वे लोग पागल होते हैं जो अपने चाहने वाले को अस्वीकार कर देते हैं। पर मनोज मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। तुम अपने लिए कोई आंख वाली लड़की ढूंढ लो। मनोज निराश होकर चला गया।


कुछ ही दिनों में उसे शहर में किसी insurance कम्पनी में नौकरी मिल गयी और वह गांव छोड़कर चला गया। एक दिन गांव में कुछ NGO वाले आये। उनकी नजर काजल पर गयी तो उन्होंने काजल को आशा बंधाई की उसकी आंखें ठीक हो सकती है।


हालांकि काजल को ये विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन NGO के लोगों के आश्वासन देने पर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कुछ दिन के बाद अब काजल की आंखे बिल्कुल ठीक हो चुकी थी और उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।


इस बार उसने एक MNC कॉल सेंटर में नौकरी के लिए अप्लाई किया और उसे 5 लाख के सालाना वेतन पर अच्छी नौकरी मिल गयी। सब कुछ पहले से ठीक चल रहा था। लेकिन अब उसे मनोज की याद आ रही थी। उसने मनोज को कई जगह खोजा यहां तक कि उसके घर पर भी पूछताछ की मगर मनोज का कहीं पता नहीं चल पा रहा था।


दूसरी ओर काजल की माँ ने उसके लिए लड़का ढूंढना शुरू कर दिया था। पर काजल के दिल में तो मनोज ही बसा था। मनोज के तलाश में काजल ने दिन रात एक के दिए। वह हमेशा यहीं सोचती रहती थी कि जो लड़का एक अंधी लड़की को अपना बनाना चाहता हो उसका दिल कितना सुंदर होगा?


वह मनोज से मिलकर उसको सरप्राइज देना चाहती थी। वह मनोज का हाथ पकड़कर कहना चाहती थी कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूँ। पर इसके लिए मनोज का मिलना भी तो जरूरी था। काजल ने मनोज की तलाश फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, गूगल इत्यादि सब जगह की। पर उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।


एक दिन उसे उसी ब्लाइंड स्कूल के एक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनने का मौका मिला। जिसमें वह खुद कभी पढा करती थी। वह नेहा को साथ लेकर स्कूल की सीढ़ियां चढ़ रही थी तभी ऊपर से नीचे उतर रहा एक लड़का नेहा से टकड़ाकर सीढ़ियों पर से नीचे गिर गया। काजल उसे दौर कर उठाने में मदद करने लगी। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि मनोज ही था।


जिसने किसी दिन काजल से अपने प्यार का इजहार किया था। जैसे ही काजल की नजर मनोज पर पड़ी उसके मुह से निकला मनोज तुम। मनोज ने भी काजल की आवाज पहचान ली। मनोज ने फिर कहा- तुम यहाँ क्या कर रही हो? काजल ने कहा- पहले ये बताइये कि आप यहाँ क्या कर रहे हैं?


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मनोज ने कहा- एक एक्सीडेंट में मेरी दोनों आंखे चली गयी इसलिए मैं यहां हूँ। इतना सुनकर काजल का तो दिमाग ही घूम गया। वह मन ही मन सोचने लगी कि क्या यहीँ मनोज है? इतना बदसूरत, इतना काला और आँखे ना होने के वजह से इतना डरावना लगता है।


मनोज ने नेहा से काजल के बारे में पूछा तो काजल ने उसे तुरंत इशारा करके बताया कि उसके बारे में मनोज से नहीं बताए। नेहा ने मनोज से कहा कि काजल तो नहीं आ पाई। मनोज ने थोड़ा उदास होकर पूछा- पर काजल को तो यहाँ चीफ गेस्ट के रूप में बुलाया गया था। 


काजल ने नेहा को इशारे में कुछ बताया। नेहा ने काजल की बात को तुरंत समझ गयी और उसने कहा कि बुलाया तो गया था पर वह अपनी आंखों के अंधेपन की वजह से नहीं आ पाई। इसलिए मैं स्कूल मैनेजमेंट को मना करने आई हूँ।


मनोज ये सब सुनकर और भी उदास हो गया। उसने नेहा से विदा लिया और धीरे-धीरे स्कूल की सीढ़िया उतरने लगा। सीढ़ियों से उतरते हुए उसने अपना मोबाईल निकाला और कुछ नम्बर टटोलने लगा। मनोज को अपने से दूर जाते देख काजल ने राहत की सांस ली और नेहा से कहा कि हमने अभी तो झूठ बोल दिया पर वह हमारा पड़ोसी है। यह झूठ ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला।


काजल ने ये फैसला किया कि अब उसे चीफ गेस्ट नहीं बनना है वर्ना आज ही मनोज को पूरा झूठ का पता चल जाएगा। काजल ने नेहा को लेकर फिर सीढियां उतरने लगी।


उसने देखा कि मनोज फोन पर गुस्से में किसी से बात करते हुए उतर रहा है। काजल ने नेहा को समझाया कि धीरे-धीरे सीढ़ियों से उतरना वर्ना मनोज हमारी कदमों के आहट से भी पहचान जाएगा। दोनों धीरे-धीरे मनोज के पास से गुजर रहे थे मगर फोन पर चल रही बात को सुनकर काजल को झटका लग गया। वह थोड़ा रुककर मनोज की बातें सुनने लगी।


दरअसल में मनोज फोन पर NGO के लोगों को डांट रहा था कि काजल आज भी नहीं देख पा रही है। वह NGO वालों को बहुत बुरा-भला कह रहा था। आखिर में मनोज के आंखों से ये कहकर आंसू निकल पड़े कि तुमलोगों ने मेरी काजल की जिंदगी बर्बाद कर दी।


काश! मेरे पास और दो आँखे होती तो मैं दुबारा उसे अपनी आंख दान कर देता। मगर इस बार तुम्हारे पास नहीं आता। ये सब बातें सुनकर काजल की आंखों में आंसू भर आये और वह मनोज से जाकर लिपटकर रोने लगी। वह मनोज से माफी मांगने लगी और जितना झूठ नेहा से बुलवाया था उसने सब मनोज को बता दिया।


मनोज ने हँसकर कहा- अरे पगली मैं तो जानता था कि आंखे मिलने पर तुम मुझे अस्वीकार कर दोगी। इसलिए मैं तुमसे ही दूर चला आया। अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है क्योंकि जबसे मैंने तुझे अपनी आंखें दी है तब से तुम सिर्फ मेरे आंखों में ही बसती हो।


काजल रोती हुई मनोज के गले लग गयी और उसने कहा कि मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है। शायद मैं भूल गयी थी कि सच्ची सुंदरता क्या होती है? मुझे माफ़ कर दो। काजल अब मनोज के साथ स्कूल की सीढ़ियां चढ़ रही थी क्योंकि उसे दुनिया के सामने एक ऐसे इंसान को लाना था जो अब उसकी नजर देवता था। इसके बाद काजल और मनोज दोनों खुशी से अपनी जिंदगी बिताने लगे।


Conclusion Of Sad & Emotional True Love Story In Hindi


अगर हम किसी से प्यार करते हैं तो हमें ये मालूम होना चाहिए कि वास्तव में सच्चा प्यार क्या होता है? उसकी अमीरी-गरीबी और शरीर का बनावट नहीं देखनी चाहिए। क्या पता आप जिसको उसके कुरूप शरीर के चलते ठुकरा दिया वहीं आपको सबसे ज्यादा खुशी दे पाए और इसकी क्या गारंटी है कि अमीर आदमी ही किसी से प्यार कर सकता है लेकिन गरीब नहीं।


आप किसी से भी प्यार करें लेकिन उसको अमीरी और गरीबी के कारण उससे रिश्ता ना तोड़े और साथ ही अपने प्यार का हमेशा इज्जत करें। अगर आप ये जान गए कि निस्वार्थ प्रेम क्या होता है तो फिर आप कभी भी मिलने की खुशी और बिछड़ने के वियोग से मुक्त रहेंगे।


उम्मीद है आपको ये best 2 real sad & emotional love story in hindi काफी पसंद आई होगी। अगर आपको हमारा ये हिंदी प्रेम कहानी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

5 मोटिवेशनल कहानियां जो आपका जिंदगी बदल देगी | प्रेरणादायक कहानियां

5 मोटिवेशनल कहानियां जो आपका जिंदगी बदल देगी | प्रेरणादायक कहानियां

5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Best 5 Real Life Short Motivational Stories In Hindi For Success

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5 Motivational Stories In Hindi

कहते हैं कि प्रेरणा के अभाव में आदमी अपने जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। ये बात सही भी है कि जब तक आपको किसी काम को करने के लिए कोई प्रेरणा नहीं मिलता है आप उस काम को नहीं करते हैं।


इसलिए हम आपके लिए ऐसी 5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां लेकर आये हैं जो आपको अंदर किसी भी काम को करने की प्रेरणा जगा देगी। तो चलिए बिना किसी देरी के top 5 real life short motivational stories in hindi शुरू करते हैं।


प्रेरक बाल कहानियां | Real Life Dar Motivational Story In Hindi


ये मोटिवेशनल कहानी है दो दोस्तों की, जो एक छोटे से गांव में रहते थे। एक बार वे दोनों किसी काम से शहर गए और वापस अपने गांव लौट रहे थे। उनको अपने गांव तक पहुंचने के लिए एक घने जंगल से गुजरना था। जब वे दोनों उस जंगल से गुजर रहे ठगे तो एक दोस्त को प्यास लगी और वो पानी ढूंढने के लिए रास्ता भटक गए।


थोड़ी ही देर बाद शाम हो गयी और रात होने ही वाली थी। अचानक उन दोनों की नजर एक गुफा पर पड़ी जो कि चारों तरफ से पेड़ों से घिरी हुई थी। उन्होंने सोचा कि रात गुजारने का यहीं जगह ठीक है। फिर दोनों ने कुछ लकड़ी इकट्ठा की और आग जलाकर बैठ गए।


रात का वक्त था और गुफा के अंदर आग जल रही थी। बाहर बिल्कुल अंधेरा था और कुछ जानवरों की आवाजें सुनाई दे रही थी। उन दोनों में से जो एक दोस्त था वो अंदर ही अंदर डरने लगा क्योंकि उसने भूत-प्रेत की कुछ कहानियां सुनी हुई थी। उसने सुना था कि रात के वक्त जंगल में भयानक आत्मायें भटकती है और अगर उनको रात में कोई आदमी मिल जाये तो वो उसको नहीं छोड़ते हैं।


जब उस लड़के ने अपने दोस्त से उन भूत प्रेतों की बात अपने दोस्त से बताई तो उसके दोस्त ने उससे हँसते हुए पूछा कि क्या तूने कभी किसी भूत को देखा है?
तो उसने कहा कि मैंने तो नहीं देखा मगर मेरे जान-पहचान के कुछ लोग हैं जिन्होंने इनको देखा है।


फिर उसके दोस्त ने उसे बहुत समझाने की कोशिश किया कि इस तरह की बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं। अब तुम सो जाओ और मुझे भी सोने दो अब मुझे बहुत तेज नींद आ रही है।


ये कहकर उसका दोस्त वहीं सो गया। लेकिन उसका एक और दोस्त जो अंदर से बिल्कुल डरा हुआ था वो सोने की बहुत कोशिश किया लेकिन उसको डर से नींद नहीं आ रही थी। उसको लग रहा था कि शायद यहाँ पर कहीं कोई है।


उस आग के वजह से पत्थरों पर परछाइयां बन रही थी तो उसको भी देख कर वो डर रहा था। फिर कुछ घन्टे तक ऐसे ही चलता रहा क्योंकि वो भी थका हुआ था तो उसको भी कुछ देर के बाद नींद आ गयी।


जैसे ही उसको नींद आया उसके कुछ देर बाद ही उसको बुरा सपना दिखाई देने लगा। उसने देखा कि सपने में एक बहुत ही भयानक परछाईं उसके नजदीक बढ़ती हुई आ रही है। लड़का अंदर ही अंदर बहुत डरते जा रहा था। वो देख रहा था कि परछाई उसके और पास चली आ रही थी और उस परछाई में एक हाथ उसको नजर आ रहा था जिसके बड़े-बड़े नाखून थे। धीरे-धीरे वो हाथ उसकी तरफ बढ़ता चला गया और उसके गले तक पहुँचने ही वाला था कि तभी वो डर कर के उठ गया।


फिर उसने अपने दोस्त को जोर से पकड़कर के उठाया और उसने अपने दोस्त को बताया कि उसके साथ में क्या हुआ है? लड़के की बात सुनकर उसका दोस्त फिर से हँसने लगा।


फिर उस दोस्त ने लड़के से कहा कि अगर अब तुमको दोबारा से परछाईं दिखे तो तुम वहीं कहना जो मैं तुमको कहने को कह रहा हूँ। फिर देखते हैं कि अब तेरा परछाईं क्या कर लेता है? तुमको अपने अंदर ही अंदर बोलना है कि मैं तुझसे नहीं डरता हूँ सामने आकर दिखा।


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उसके दोस्त ने वैसा ही करने को कहा। फिर दोनों सो गए। थोड़ी ही देर बाद दोबारा से उसके सपने में वहीं परछाईं नजर आयी और वो परछाईं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी। लेकिन इस बार वो उस परछाई से डरा नहीं बल्कि उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर के उसने वहीं कहा कि मैं तुझसे नहीं डरता सामने आकर दिखा। वो बार-बार ऐसा ही कहता रहा।


जैसे-जैसे वो ऐसा बोलने लगा परछाईं छोटी होती चली गयी और उससे दूर होने लगी। वो बोलता रहा वो परछाईं छोटी होती रही और धीरे-धीरे वो परछाईं गायब हो गयी। बिल्कुल ऐसा ही हमारी जिंदगी में होता है।


हमारे अंदर जितने भी डर है उससे हम जितना भी डरेंगे हम उतना ही छोटे होते चले जाते हैं और वो डर उतने ही बड़े होते चले जाते हैं। लेकिन अगर हम अपने डरों से नहीं डरते हैं बल्कि उसका डंटकर सामना करते हैं तो दुनिया का ऐसा कोई भी डर नहीं है जो कि हमें डरा पाये।


प्रेरणा देने वाली कहानी | Best Motivational Story in Hindi For Students With Moral


एक बार की बात है जब कुछ साइंटिस्ट ने मिलकर नया एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने एक बहुत बड़ा पिंजरा लिया और बहुत सारे बन्दरों को एक साथ रख दिया। वहाँ पर एक सीढ़ी लगा दी। उस सीढ़ी के सबसे ऊपर कुछ केले रख दिये।


फिर वैज्ञानिकों ने मिलकर ऑफ ये उपाय किया कि जैसे ही कोई बन्दर केले लेने के लिए ऊपर चढ़े उसके ऊपर ठंडे पानी की बारिश करने लगते। जैसे ही कोई बन्दर ऊपर चढ़ता उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता तो वे तुरंत नीचे उतर जाते थे। फिर पानी को बंद कर दिया जाते थे।


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फिर दुबारा से कोई बन्दर केले लेने के लिए सीढ़ी पर चढ़ता दुबारा उस पर पानी गिरा दिया जाता था और बन्दर फिर नीचे आ जाते थे। बन्दरों ने इसका मतलब ये निकाला कि जैसे ही कोई सीढ़ी के ऊपर चढ़ता है तो उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता है।


फिर उसके बाद में जैसे ही कोई भी बन्दर सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश भी करता तो बाकी के बन्दर सब इकट्ठे होकर के उसको पकड़ते फिर मारते-पीटते हुए उसको नीचे गिरा देते थे। फिर दुबारा कोई बन्दर ऐसा करता था तो उसके साथ भी ऐसा ही किया जाता था।


फिर उन वैज्ञानिकों ने एक नई तरकीब सोची। उन्होंने 5 बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नए बन्दर को उस पिंजरे के अंदर डाल दिया। अब उस नए वाले बन्दर को इन सब बातों के बारे में नहीं पता था। उसको जैसे ही सीढ़ी के ऊपर केले नजर आए वो तुरन्त सीढ़ी के ऊपर चढ़ने लगा।


अबकी बार वैज्ञानिकों ने कोई बारिश नहीं किया लेकिन फिर भी उसको बाकी के बन्दरों ने पकड़ा और पीटना शुरू कर दिया। इस बन्दर को समझ नहीं आया कि उसको क्यों मारा जा रहा है? फिर उसने दुबारा शुरू कोशिश किया। इस बार जैसे ही उसने दुबारा सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश किया तो बन्दरों ने फिर से उसको मारना शुरू कर दिया।


इस तरह होता देख नए बन्दर के दिमाग में ये बैठ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना है। जो भी इस सीढ़ी पर चढ़ेगा उसको मार पड़ेगी। लेकिन सीढ़ी पर चढ़ने के लिए क्यों मार पड़ती है उसको कुछ मालूम नहीं था, पर उसके दिमाग में ये बैठ गया कि अब सीढ़ी पर नहीं चढ़ना है और ना ही किसी को चढ़ने देना है।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने चार बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नया बन्दर को अंदर डाल दिया। वो नया वाला बन्दर भी वैसा ही किया जो इसके पहले वाले बन्दर ने किया था। वो अंदर जाते ही केले लेने के लिए जैसे ही सीढ़ी पर चढ़ा बाकी के  चार बन्दरों ने उसे पीटना शुरू कर दिया और उसको नीचे गिरा दिया।


उसको कुछ समझ नहीं आया और उसने दुबारा कोशिश किया फिर उसको बन्दरों ने पिट कर नीचे उतार दिया। उस बन्दर को भी कुछ दिन में समझ में आ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना और उसने सीढ़ी पर चढ़ना बंद कर दिया।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने तीनों बन्दरों को एक-एक करके बाहर निकाला और उनके जगह पर तीन नए बन्दरों को अंदर डाल दिया। अब ये पांचों बन्दर नए थे। लेकिन किसी को भी ये पता नहीं था कि उस सीढ़ी पर चढ़ना मना क्यों है? लेकिन उन सबके दिमाग में ये बैठ गया था कि सीढ़ी पर चढ़ने से मार पड़ती है। फिर बन्दरों ने सीढ़ी पर चढ़ना ही बंद कर दिया। जबकि अब कोई ठंडे पानी की बारिश भी नहीं हो रही थी।


वो चाहते तो आराम से सीढ़ी पर चढ़ते, केले को तोड़ते और आपस में बांटकर के खा लेते। बिल्कुल ये सब बात भी हमारे जीवन में लागू होता है। हजारों साल पहले कोई रीति-रिवाज बनी होती है। उसके पीछे कोई न कोई वजह होती है लेकिन वो वजह खत्म होने के बाद भी वो प्रथा चलती रहती है। वो रीति-रिवाज चलती रहती है परंतु किसी भी ये जानने की हिम्मत नहीं होती है कि वो क्यों कर रहे हैं और किसलिए कर रहे हैं? बस सबको ये पता है कि ऐसा ही होता है।


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जैसा कि आपने जो अभी कहानी सुनी उसमें बन्दर है जो ये जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, उनको किसी से सवाल पूछना नहीं आता है। परंतु हम तो इंसान है हम किसी से कोई भी सवाल पूछ सकते हैं। लेकिन अगर हम अनजाने में कोई हमेशा की तरह गलती कर रहे हैं और किसी से उसके बारे में जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं तो फिर हमारे में और जानवरों में कोई अंतर नहीं है।


युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी | Real Life Short Motivational Story in Hindi for Depression


एक छोटा सा गांव था। वहाँ पर एक आदमी पहाड़ पर पत्थर तोड़ने का काम करता था। उसको अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वो पूरा दिन काम करता, मेहनत करता और शाम को जो पैसा मिलता था उसे लेकर अपने परिवार के साथ में समय बिताता और चैन से सो जाता।


एक दिन की बात है जब वो आदमी अपना काम खत्म करके अपने घर जा रहा था तो रास्ते में चलते-चलते उसके मन में एक ख्याल आया कि ये भी कोई जिंदगी है कि सुबह से शाम तक मैं पत्थर तोड़ने का काम करता हूँ और शाम को मुझे थोड़े से पैसे मिलते हैं। इसमें मुश्किल से मेरा और मेरे परिवार का गुजारा हो पाता है।


काश! कुछ ऐसा हो जाये, मुझे कोई ऐसी शक्ति मिल जाये कि जो भी मैं चाहता हूँ वो सच हो जाये। वो अपने घर पर गया और खाना खाया लेकिन उसका ध्यान खाने पर नहीं था। उसके दिमाग में यहीं चल रहा था कि काश! मैं भी अमीर होता। वो आदमी यहीं सोचते-सोचते सो गया।


रात को सोते वक्त उसने सपने में देखा कि जब वह रोज की तरह वो अपना काम खत्म करके अपने घर लौट रहा था तभी अचानक उसने से एक बहुत बड़ा घर देखा। उस घर को देखकर उसके मन में आया कि काश! ये घर मेरा होता और मैं इस घर का मालिक होता।


उसके ऐसा सोचते ही वो उस घर का मालिक बन गया। उसको यकीन ही नहीं ह रहा था कि उसने जो सोचा वो बन चुका है। लेकिन उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी क्योंकि उसको अपने घर के बाहर जोड़ से कुछ शोर सुनाई दिया। जब उसने बाहर देखा तो पाया कि एक बहुत बड़ी रैली निकल रही है और उस रैली के बीच एक बहुत बड़ा नेता हाथ हिला रहा है। वहाँ पर जितने भी लोग खड़े थे सब उसके नाम के नारे लगा रहे थे। सब उसके आगे हाथ जोड़कर खड़े थे, सब उसको देखने के लिए तड़प रहे थे।


तब उसको ये एहसास हुआ कि उस नेता के आगे मैं कितना छोटा हूँ। उसके मन में ख्याल आया कि काश! मैं एक इतना बड़ा नेता होता और मेरे पास भी उतनी ही पावर होती जितना कि इसके पास में है। बस उसको इतना सोचने की देर थी कि वो नेता बन गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसके आसपास में हजारों लोगों की भीड़ थी और सब उसको देखने के लिए तरस रहे थे।


लेकिन उसकी ये खुशी भी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। धूप बहुत तेज थी। उस नेता को इतनी धूप और गर्मी में रहने की आदत नहीं थी। धूप की वजह से उसको चक्कर आ गया और वो बेहोश होकर गिर पड़ा। फिर उसको ये एहसास हुआ कि एक नेता सबसे ताकतवर नहीं है ये जो सूरज है यही सबसे ताकतवर है। फिर उसको ये मन में आया कि काश! मैं सूरज बन जाता तो मेरे आगे कोई नहीं टिक पायेगा। 


उसको इतना सोचने की देर थी कि वो सूरज बन गया और वो खुशी से पागल हो गया क्योंकि वो पूरी दुनिया को रोशन कर रहा था। पूरी दुनिया में ऐसा कोई नहीं था जो उसकी रोशनी की रोक सके।


लेकिन उसको ये खुशी भी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। कुछ देर के बाद आसमान में कुछ काले बादल आये जिसने सूरज की रोशनी को रोक दिया। फिर उसको गए एहसास हुआ कि इस दुनिया में ऐसा भी कोई है जिसमें सूरज के प्रकाश को रोकने का दम है। फिर उसके मन मे गए ख्याल आया कि काश! मैं बादल बन जाता। उसको इतना सोचना था कि वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसको ऐसा लगा कि मैं आसमान में उड़ रहा हूँ। मैं जहाँ चाहे वहाँ जा सकता हूँ।


लेकिन कुछ देर बाद वहां पर बहुत तेज हवाएं आयी और उन बादलों को उड़ा कर ले गयी। फिर उसको ये समझ आया कि गए जो बादल है वो सूरज की रोशनी को तो रोक सकता है लेकिन इन हवाओं को नहीं रोक सकता। फिर उसको एहसास हुआ कि काश! मैं हवा बन जाऊं और वो हवा बन गया।


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हवा बनने के बाद में उसको एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव हुआ। वो जब मर्जी आराम से बहता और जब मर्जी तूफान बन करके जिसको भी चाहे उड़ा करके ले जाता। उसको ये विश्वास होने ही लगा था कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली मैं हूँ तभी उसकी सामना एक बड़े से पहाड़ से हुई। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी लेकिन वो उस पहाड़ को इतना सा भी नहीं हिला सका। तब उसको ये एहसास हुआ कि इस दुनिया में कोई और भी है जो इस हवा से भी शक्तिशाली है, जिसमें हवा को भी रोकने का दम है।


फिर उसके मन में आया कि काश! मैं पहाड़ होता। उसको इतना सोचना था कि वो पहाड़ बन गया। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। उसको एक जानी पहचानी से आवाज सुनाई दी। साथ ही साथ उसको कहीं से दर्द होने लगा। उसको एहसास हुआ कि कोई ऐसा है जो उसको तोड़ रहा है, उसको मार रहा है। दर्द से वो चीखने लगा और उसके मन में ये आया कि काश! मैं वो बन जाऊं जो कि इस पहाड़ को तोड़ने का दम रखता है।


लेकिन इस बार उसकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हुई और वो जोर से रोने लगा, चीखने-चिल्लाने लगा, उसने अपनी पूरी जान लगा दी लेकिन वो इस बार वैसा नहीं बन पाया। उसका दर्द बढ़ता ही चला था और दर्द की वजह से जैसे ही उसकी नींद खुली तो उसके सामने एक शीशा था और शीशे में उसने खुद को देखा तो उसको समझ आ गया कि वो क्यों नही बन पा रहा था जो वो बनना चाहता था क्योंकि असलियत में वहीँ हूँ।


इंसान के साथ भी वैसा ही होता है। वो जो होता है उसको लगता है कि वो सबसे कमजोर है जबकि ऐसा नहीं होता है। आप बस ते सोचिए कि आज आप जैसे भी है दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर है। आप हर मुश्किल को क्षण भर में खत्म कर सकते हैं। अगर आप ऐसी सोच रखते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको दुःखी नहीं कर सकता।


Emotional Motivational Story In Hindi For Depression | जोश भर देने वाली प्रेरक लघु कहानियां


ये मोटिवेशनल कहानी है दो सच्चे दोस्तों की। उनकी दोस्ती की शुरुआत कुछ ही दिन पहले एक हॉस्पिटल के कमरे में हुई थी। जहाँ पर वे दोनों एडमिट थे। दोनों दोस्तों में से जो एक दोस्त था उसको कुछ ही दिन पहले पैरालिसिस का अटैक आया था। जिसकी वजह से उसकी गर्दन के नीचे की पूरी बॉडी लकवाग्रस्त हो गया था और वो अपनी उंगली तक नहीं हिला सकता था।


पूरे दिन उसके पास जो भी नर्स आती थी उनसे एक ही बात कहता था कि मुझे कोई ऐसी इंजेक्शन दे दो जिससे कि मैं मर जाऊं। अब मैं जीना नहीं चाहता अब मैं ऐसी जिंदगी जी करके क्या करूँगा।


उसका जो दोस्त उस कमरे में था जो चल-फिर नहीं सकता था। वो रोज सुबह और शाम को उस कमरे में खिड़की के पास में जाकर के खड़ा हो जाता था और अपने दोस्त को बताता था कि उस खिड़की के बाहर क्या चल रहा है?


बिल्कुल नीला आसमान, सफेद बादल, उड़ते हुए पंक्षी और हल्की-हल्की हवा प्रकृति की सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं। मतलब बाहर क्या हो रहा है वो सबके बारे में बताता था। शुरू में जब उसने बताना शुरू किया तो उसके दोस्त पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ रहा था लेकिन धीरे-धीरे उसको बाहर की दुनिया देखने की चाह होने लगी।


अब वो सुबह का इंतजार करने लगा कि जल्दी से सुबह हो और मेरा दोस्त मुझे बताए कि बाहर में क्या हो रहा है?  कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन जब वो उठा तो उसने देखा कि सामने वाला बेड खाली है।


फिर उसने नर्स को बुलाया और पूछा कि क्या उस लड़के को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी है। तो नर्स ने कहा कि उन्होंने तो आपको बताया ही होगा कि उनके पास कुछ ही दिन बाकी है और कल रात को उनकी मृत्यु हो गयी है।


के सुनकर के उसकी पूरी उम्मीद टूट गई क्योंकि केवल उसका दोस्त ही था जिसने उसने बाहर की दुनिया से जोड़ा हुआ था। जिसके वजह से वो जान पाता था कि बाहर की दुनिया में क्या हो रहा है और ये दुनिया कितनी खूबसूरत है?


कुछ दिन तक तो ऐसे ही चलता रहा और वो लड़का अब जीने की चाह छोड़ दी। लेकिन दूसरे तरफ से उसको कहीं न कहीं एक नई चाह पैदा हुई कि काश! मरने से पहले एक बार मैं खुद अपनी आंखों से इस खिड़की के बाहर देखूं कि ये दुनिया कैसी है?


जैसे-जैसे उसके अंदर ये चाह बढ़ने लगी उसके अंदर एक अजीब सी एनर्जी महसुस होने लगी। फिर एक दिन उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी और किसी तरह से वो बेड से नीचे गिरा और दीवाल पकड़ के वो किसी तरह से उस खिड़की के पास पहुचा और खिड़की को पकड़ के खड़ा हुआ वो खिड़की के बाहर देखा।


लेकिन खिड़की के बाहर देखते ही वो लड़का गुस्से से भर गया। उसने नर्स को जोर से आवाज लगाई और जैसे ही नर्स आयी और उसने नर्स से पूछा कि ये तुमने क्या किया, इस खिड़की के बाहर तुमने काली दीवार क्यों खड़ी कर दी?


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नर्स को समझ नहीं आया कि वो लड़का क्या बोल रहा है और वो बोली मुझे यहाँ आये हुए 5 साल हो गए। जब से मैं यहां आयी हूँ तब से ये काली दीवारें यहां पर है। तब जाकर उसको ये समझ आया कि उसका दोस्त उससे झूठ बोल रहा था और उसने नर्स से पूछा- अगर ये काली दीवार पिछले 5 साल से यहां है तो मेरे दोस्त ने मुझसे झूठ क्यों कहा?


ऐसा सुनकर उसके नर्स ने थोड़ा सा मुस्कुराई और बोली- मैं ये तो नहीं जानती कि उन्होंने आपसे झूठ क्यों कहा? लेकिन मैं इतना जरूर जानती हूँ कि जो भी कुछ उन्होंने आपसे कहा इसी वजह से आप अभी अपने पैरों पर खड़े हैं।


इस मोटिवेशनल कहानी से हमें ये सीखने को मिलता है कि जो हमारे शब्द है उसमें इतनी पावर है जिसकी कोई सीमा नहीं है। वो किसी आदमी को गिरा भी सकता है और किसी को उठा भी सकता है। तो अब आपके ऊपर है कि अपने इस पावर को सही तरह से उपयोग करते हैं या फिर उसका गलत इस्तेमाल।


बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानी | Short Motivational Story In Hindi For Kids


एक बार एक छोटी सी बच्ची हाथ में मिट्टी की गुल्लक लेकर के  भागती हुई मेडिकल के दुकान पर गयी। वो काफी देर तक वहाँ पर खड़ी रही लेकिन दुकानदार का उस पर ध्यान नहीं गया क्योंकि दुकान पर बहुत सारे लोग खड़े हुए थे।


भीड़ ज्यादा होने की वजह से बार-बार दुकानदार से बोलने के बाद भी जब उसने ध्यान नहीं दिया तो उस बच्ची को गुस्सा आया और उस मिट्टी की गुल्लक को वहीं दुकानदार के काउंटर पर जोर से रख दिया।


जिसके बाद वहाँ पर जितने भी लोग थे और दुकानदार था सब उस बच्ची को देखने लगे गए। फिर उस दुकानदार ने उस बच्ची से पूछा कि क्या बात है, आपको क्या चाहिए?


बच्ची ने बड़े ही भोलेपन से बोली कि मुझे एक चमत्कार चाहिए। ये सुनकर दुकानदार को और ना ही वहाँ पर जितने भी लोग थे उन सभी को कुछ समझ नहीं आया। सारे लोग उसकी तरफ देखने लगे। फिर दुकानदार ने बच्ची से कहा कि बेटा यहां चमत्कार तो नहीं मिलता है।


बच्ची को लगा कि दुकानदार झूठ बोल रहा है तो बच्ची ने कहा कि मेरे गुल्लक में बहुत पैसे हैं। आप बताओ आपको कितने पैसे चाहिए। लेकिन मैं आज यहां से चमत्कार लेकर के ही जाऊंगी।


उसी दुकान पर एक दूसरा आदमी खड़ा था। उसने उस बच्ची से पूछा कि आपको चमत्कार क्यों चाहिए? तब उस बच्ची ने अपनी पूरी बात बताई। अभी कुछ दिन पहले मेरे भाई के सर में बहुत तेज दर्द हुआ तो मेरे पापा और मम्मी उसको हॉस्पिटल ले गए। लेकिन मेरा भाई कई दिन तक घर नहीं आया।


मैंने कई बार अपने पापा से पूछा कि भाई कहाँ है? लेकिन मेरे पापा ने मुझे कुछ नहीं बताया। उन्होंने बार-बार यहीं कहा कि वो कल आ जाएगा लेकिन वो आ ही नहीं रहा। फिर मैंने देखा कि मम्मी रो रही है और पापा मम्मी सर कह रहे थे कि उसके इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए उतने मेरे पास में नहीं है। अब उसको कोई चमत्कार ही बचा सकता है।


तब मुझे लगा कि मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं है तो क्या हुआ मेरे पास में तो है। मेरे पास जितने भी पैसे थे वो सारे लेकर के मैं इस दवाई के दुकान पर आ गयी। फिर उस आदमी ने उस बच्ची से पूछा कि तुम्हारे पास में कितने पैसे है?


ये सुनते ही उस बच्ची ने अपनी गुल्लक उठायी और जमीन पर पटक कर के तोड़ दिया और पैसे गिनने लगी। बाकी सब लोग उसको खड़े होकर उसको देख रहे थे। थोड़ी देर बाद उसने सारे पैसे अपने हाथ में लिए और बोली मेरे पास पूरे उन्नीस रुपये हैं।


वो जो आदमी वहाँ खड़ा था वो थोड़ा सा मुस्कुराया और बोला- तुम्हारे पास में तो पूरे पैसे हैं इतने का ही तो चमत्कार मिलता है। ये सुनकर वो बच्ची बहुत खुश हो गयी और बोली चलो मैं अपने पापा से आपको मिलवाती हूँ। बाद में पता लगा कि वो आदमी कोई आदमी नहीं था बल्कि उस शहर का बहुत बड़ा न्यूरोसर्जन था।


उसने सिर्फ उन्नीस रुपये में उस बच्ची के भाई की सर्जरी किया और कुछ ही दिन बाद उसका भाई ठीक होकर के घर वापस आ गया। फिर कुछ दिन बाद वो बच्ची, उसका भाई और उसके मम्मी-पापा चारों एक जगह पर बैठे हुए बात कर रहे थे कि उसकी मम्मी ने उसके पापा से पूछा कि अब तो आप बता दो कि ये चमत्कार आपने किया कैसे? तो उन्होंने अपनी बेटी की तरफ देखा और बोले कि ये चमत्कार मैंने नहीं इसने किया है।


इस प्रेरणादायक कहानी से सीखने वाली एक बहुत बड़ी बात है जो हम इस छोटी सी बच्ची से सीख सकते हैं की जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें कोई रास्ता नहीं नजर आता है और हम हिम्मत हार जाते हैं।


तब हमारे अंदर एक बच्चा होता है जो कोशिश करने से कभी भी पीछे नहीं हटता है। वो हार मानने को तैयार नहीं होता है क्योंकि उसको ना शब्द का ज्ञान नहीं होता है। वो बच्चा जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है क्योंकि वो हर हाल में कोशिश करता ही रहता है और फिर आपने एक प्रसिद्ध वाक्य तप सुना ही होगा- कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


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