Translate

Insurance लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Insurance लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जो आप नहीं जानते होंगे | धर्म ग्रँथों की कहानियां

दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जो आप नहीं जानते होंगे | धर्म ग्रँथों की कहानियां

Best 2 Hindu Mythological Stories In Hindi | दो अनसुनी पौराणिक और रहस्यमयी धार्मिक कहानियां


मित्रों आज हम ऐसे दो अनसुनी धार्मिक कहानियां जानेंगे जो इससे पहले शायद आपने कभी नहीं सुना होगा। हम धीरे-धीरे अपनी पुरानी संस्कृति को भूल रहे हैं जो काफी गलत है। हमारी संस्कृति कल भी उतनी ही अच्छी थी जितनी कि आज। 


अपनी हिन्दू संस्कृति को ही बढ़ावा देने के क्रम में हम आपके लिए ये दोनों पुरानी रहस्यमयी पौराणिक कथाएं लेकर आये हैं जो काफी रोचक और धार्मिक है। तो चलिए बिना किसी देरी के इन दोनों अनसुनी धार्मिक ग्रँथों की कहानियों के बारे में जानते हैं।


भगवान शिव जी की पौराणिक रहस्यमयी कथा | Unknown Short Stories Of Hindu Mythology In Hindi

Unknown short stories of hindu mythology in hindi, real hindu god stories in hindi
भगवान शिव जी की अनसुनी कथा

देवों के देव महादेव को क्यों घड़ियाल बनना पड़ा? शर्वशक्तिमान महादेव को क्यों एक तुच्छ प्राणी का रूप लेना पड़ा? सृष्टि के सृजनकर्ता और संहारक जिनका ना ही आदि है और ना ही कोई अंत। भोलेनाथ, शम्भूनाथ, महादेव जैसे दर्जनों नाम वाले महादेव के साथ ऐसा क्यों हुआ जो उन्हें मगरमच्छ का रूप लेकर पानी में जाना पड़ा?


तो आइए जानते हैं भगवान शिव जी की रहस्यमयी पौराणिक कथा के इस रोचक तथ्य के बारे में विस्तार से जानते हैं।


पौराणिक कथाओं के अनुसार देवों के देव महादेव एक बार पर्वत पर तपस्या में लीन थे। तभी देवतागण मिलकर अचानक से उनकी प्रार्थना करने लगे। देवतागण माता पार्वती की अनुसंशा को लेकर उनसे प्रार्थना कर रहे थे। महादेव ने देवताओं की प्रार्थना तो स्वीकार कर लिया। लेकिन विजय के गम्भीरता को देखते हुए वो स्वयं इसका उपाय ढूंढने में लग गए। तो क्या थी वो कथा जिसको लेकर देवतागण को महादेव से प्रार्थना करनी पड़ी। चलिये उसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती महादेव से शादी करने के लिए दृढ़ निश्चय कर चुकी थी। वो सबकुछ त्याग कर घोर तपस्या में जुट गई थी। सालों साल तपस्या में लीन पार्वती की ये दशा देखकर देवता द्रवित हो गए और महादेव से उनकी आराधना को पूर्ण करने की प्रार्थना करने लगे।


महादेव ने देवताओं की प्रार्थना तो स्वीकार कर ली लेकिन अब उनके सामने एक बहुत बड़ी समस्या आ खड़ी हो गयी थी कि वो माता पार्वती के बारे में कैसे पता लगाएं? भगवान स्वयं किस प्रकार से माता पार्वती के सामने जाते? ऐसा करने पर माता पार्वती नाराज भी तो हो सकती थी।


वो इसी सोच में डूबे थे कि तभी उन्हें एक उपाय सुझा। महादेव ने सप्तऋषियों को माता पार्वती की परीक्षा लेने के लिए भेजा। सप्तऋषियों ने महादेव से शादी करने के फैसले के बारे में माता पार्वती जी से पूछा। परन्त फिर भी पार्वती महादेव का गुणगान करते नहीं थक रही थी।


उन्होंने कहा कि वो सर्वगुण सम्पन्न और शक्तिमान है। उनमें ही सारी सृष्टि समायी हुई है। फिर सप्तऋषियों ने महादेव के सैकड़ों अवगुण गिनवाए। परन्त देवी पार्वती अपने फैसले से जरा भी पीछे नहीं हटी और अपने फैसले पर अटल रहते हुए उन्होंने कहा कि महादेव के अलावा वो किसी और से विवाह करना उन्हें मंजूर नहीं है।


ये भी पढ़ें:- अकबर बीरबल की बेहद ही रोचक कहानी।


इसके पश्चात सप्तऋषि वहाँ से लौट आये और पूरी कहानी महादेव को बताई। जिसके बाद उन्होंने स्वयं पार्वती जी की परीक्षा लेने को ठानी। जैसा कि हम सब जानते हैं कि शादी से पहले सभी वर अपने भावी अर्धांगिनी को लेकर सभी सन्देहों को दूर करना चाहते हैं।


इसमें महादेव भी पीछे नहीं रहे। ऐसे में उन्होंने स्वयं पार्वती जी की परीक्षा लेने की योजना बनाई। उधर माता पार्वती जी एक तलाब के किनारे अपनी तपस्या में लीन थी। तभी तलाब के किनारे एक बालक को एक मगरमच्छ ने पकड़ लिया। अपनी जान को खतरे में देखकर बालक शोर मचाने लगा। वो जोर-जोर से मगरमच्छ-मगरमच्छ चिलाकर अपनी जान बचाने के लिए किसी से सहायता मांगने लगा।


पार्वती जी ने जब किसी बच्चे की चीख पुकार सुनी तो उनसे रहा नहीं गया और वो तपस्या छोड़कर उसे बचाने के लिए तलाब के किनारे पहुंच गई। वहाँ उन्होंने देखा कि मगरमच्छ ने एक बालक को पकड़ा हुआ है और वो उसे तलाब में खींचकर अंदर ले जाने की कोशिश कर रहा है।


बालक देवी को देखकर उनसे अपनी जान बचाने के लिए विनती करने लगा और बच्चा कहने लगा- हे माता! मेरी जान को खतरा है। यदि आप चाहेंगी तो मेरी जान बच सकती है। वैसे भी ना तो मेरी माता है और ना ही पिता। अब आप ही मेरी रक्षा कीजिये। मुझे बचाइए माता।


देवी पार्वती से बच्चे की पुकार सुनकर रहा नहीं गया और उन्होंने मगरमच्छ से कहा- हे मगरमच्छ! इस निर्दोष बालक को छोड़ दीजिए बदले आपको जो चाहिए वो आप मुझसे मांग सकते हैं। जिसके पश्चात मगरमच्छ ने कहा कि एक शर्त पर मैं इसे छोड़ सकता हूँ। आपने तपस्या करके महादेव से जो वरदान प्राप्त किया है, यदि उस तपस्या का फल आप मुझे दे देगी तो मैं इसे छोड़ दूंगी।


पार्वती जी मगरमच्छ के इस शर्त को मान लिया और कहा- लेकिन आपको इस बालक को शीघ्र ही छोड़ना होगा। मगरमच्छ ने देवी को समझाते हुए कहा कि अपने इस फैसले पर फिर से विचार कर लीजिए। जल्दबाजी में आकर कोई वचन न दीजिये क्योंकि आपने हजारों वर्षों तक जिस प्रकार से तपस्या की है वो देवताओं के लिए भी असम्भव है। उसका सारा फल इस बालक के प्राणों के लिए मत गंवाइए।


फिर पार्वती जी ने कहा- मैं फैसला कर चुकी हूं। मेरा इरादा अटल है, मैं आपको अपनी तपस्या का पूरा फल देने को तैयार हूँ परन्तु आप इसे तुरंत मुक्त कर दीजिए। मगरमच्छ ने पार्वती जी से अपनी तपस्या दान करने का वचन ले लिया और जैसे ही पार्वती जी ने अपनी तपस्या का दान किया मगरमच्छ का शरीर तेज से चमकने लगा।


फिर मगरमच्छ ने कहा- देखिये आपके तपस्या के तेज से मेरा शरीर कितना चमकने लगा है। फिर भी मैं आपको अपनी भुल सुधारने का एक मौका और देता हूँ। इसके उत्तर में पार्वती जी ने कहा कि तपस्या तो मैं फिर से कर सकती हूँ लेकिन यदि आप इस निगल जाते तो क्या इसका जीवन वापस मिल पाता?


इस पर मगरमच्छ ने कुछ जवाब नहीं दिया और इधर-उधर देखने लगा। इसी क्रम में देखते ही देखते वो लड़का और मगरमच्छ दोनों अदृश्य हो गए। पार्वती जी को इस पर आश्चर्य हुआ कि ऐसा कैसे हो सकता है कि दोनों एक साथ अचानक से गायब हो गए।


ये भी पढ़ें:- 5 मोटिवेशनल कहानियां जो आपका जीवन बदल सकती है।


लेकिन पार्वती जी ने इस पर अधिक ध्यान नहीं दिया और इस बात पर विचार करने लगी कि उन्होंने अपनी तपस्या का फल तो दान कर दिया पर फिर से इसे कैसे प्राप्त किया जाए? इसके लिए उन्होंने फिर से तपस्या करने का प्रण किया। वो तपस्या करने के लिए तैयारियां करने लगी कि अचानक महादेव उनके सामने अचानक प्रकट हो गए और वो कहने लगे कि हे देवी भला अब तपस्या क्यों कर रही हो?


पार्वती जी ने कहा- हे प्रभु! आपको अपने स्वामी के रूप में पाने के लिए मैंने संकल्प लिया है लेकिन मैंने अपनी तपस्या का फल दान कर दिया है। ऐसे में मैं फिर से वैसे ही घोर तपस्या करके आपको प्रसन्न करना चाहती हूँ। इसके जवाब में महादेव ने कहा कि हे पार्वती! अभी आपने जिस मगरमच्छ को अपनी तपस्या का फल दिया और जिस लड़के की जान बचाई इन दोनों रूपों में मैं ही था।


अनेक रूपों में दिखने वाला मैं एक ही हूँ, मैं अनेक शरीरों में शरीर से अलग निर्विकार हूँ। यह मेरी ही लीला थी। मैं यह देखना चाहता था कि आपका मन प्राणी मात्र में सुख-दुःख का अनुभव करता है कि नहीं। इस पर पार्वती जी ने कहा- हे प्रभु! क्या मैं आपकी परीक्षा में सफल हुई तो महादेव ने उत्तर दिया- हे देवी! आप प्राणियों का सुख-दुःख समझती है, आपमें दया और करुणा दोनों है।


अब आपको और तपस्या करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आपने अपनी तपस्या का फल मुझे ही दिया है। ये सुनकर माता पार्वती अति प्रसन्न हुई और इसके बाद माता पार्वती और भगवान महादेव का विवाह हो गया। तो देखा आपने कि भगवान शिव क्यों घड़ियाल बनें?


अब आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं कि क्या इससे पहले इस भगवान शिव की रहस्यमयी पौराणिक कथा के बारे में जानते थे? साथ ही आपको ये short devotional stories in hindi कैसी लगी ये भी जरूर बतायें।


महाभारत के विदुर की अनसुनी कहानी | Short Religious Stories In Hindi With Moral

Short religious stories in hindi with moral, real hindu mythology stories in hindi
महात्मा विदुर की कहानी

मित्रों इस indian mythological stories in hindi में आप महाभारत के विदुर की अनसुनी कहानी के बारे में जानेंगे कि अगर विदुर महाभारत में युद्ध करते तो क्या होता? तो चलिए इस अनसुनी पौराणिक कथाओं के बारे में जानते हैं।


जैसा कि हम जानते हैं कि महाभारत धर्म और अधर्म का युद्ध था। पांडवों और कौरवों दोनों ही पक्ष में बहुत ही शक्तिशाली योद्धा थे। जैसे अर्जुन, भीम, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य, कर्ण और इन शक्ति से भी परे स्वयं भगवान कृष्ण। कृष्ण की शक्ति की तो कोई तुलना भी नहीं की जा सकती।


परन्तु महाभारत में अन्य सभी शक्तिशाली योद्धाओं से भी शक्तिशाली एक योद्धा थे। जिन्हें हम सब महात्मा विदुर के नाम से जानते हैं। ऐसा कहा जाता है कि विदुर धर्मराज के अवतार थे और यदि वे चाहते तो महाभारत युद्ध में अपने धनुष से पूरी सेना को एक ही पल में नष्ट कर सकते थे।


परन्तु ये सम्भव नहीं हो सका। तो आइए हम जानते हैं कि महात्मा विदुर के इतना शक्तिशाली होने के बाद भी विदुर महाभारत युद्ध को क्यों समाप्त नहीं कर पाए?


ये भी पढ़ें:- सफलता दिलाने वाली 7 जबरदस्त कहानियां।


साथियों विदुर धृतराष्ट्र और पांडु के भाई होने के साथ-साथ कौरवों और पांडवों के काका भी थे। हस्तिनापुर के नरेश शान्तनु और उनकी पत्नी माता सत्यवती के दो पुत्र हुये। जिनके नाम चित्रांगद और विचित्र वीर्य थे। दोनों पुत्रों के बचपन में ही शान्तनु का देहांत हो गया जिससे चित्रांगद और विचित्र वीर्य का पालन भीष्म पितामह के द्वारा किया गया।


यदि आप शान्तनु और भीष्म पितामह के बारे में नहीं जानते हैं तो  हम आपको बता दें कि भीष्म शान्तनु की प्रथम पत्नी गंगा से उत्पन्न हुए थे। शान्तनु ने सत्यवती के सुदरता पर मोहित होकर उनसे विवाह कर लिया। परन्तु विवाह से पूर्व सत्यवती के पिता ने एक शर्त रखी थी कि शान्तनु के पश्चात सत्यवती से उत्पन्न पुत्र ही राजा का पद ग्रहण करेगा न कि उनकी पहली पत्नी गंगा का पुत्र।


शान्तनु के वचन दिया और इसके बाद उनका विवाह माता सत्यवती से हो गयी। इस कारण अपने पिता का वचन रखने के लिए भीष्म आजीवन कुँवारे रहे और चित्रांगद तथा विचित्र वीर्य का अपने बच्चों के समान पालन पोषण किया। चित्रांगद के बड़े होने पर भीष्म पितामह ने उन्हें सिंहासन सौंप दिया।


कुछ समय पश्चात ही गन्धर्वों के साथ हुए युद्ध में चित्रांगद की मृत्यु हो गयी। अब विचित्र वीर्य भी युवावस्था में थे तो भीष्म ने उनका विवाह करने का विचार किया। उसी समय काशीराज की तीन पुत्रियां- अम्बा, अम्बे और अम्बालिका का स्वयंम्बर होने वाला था। भीष्म ने वहाँ जाकर सभी राजाओं को परास्त किया और तीनों कन्याओं का हरण कर लिया। उसके बाद अपने साथ उन्हें हस्तिनापुर लेकर आ गए।


इस पर अम्बा ने भीष्म से कहा कि वो राजा शाल्व से प्रेम करती है और उनसे ही विवाह करना चाहती है। ये सुनकर भीष्म ने अम्बा को राजा शाल्व के पास भिजवा दिया। लेकिन अन्य दोनों कन्याओं का विवाह विचित्र वीर्य के साथ करवा दिया।


कुछ समय के पश्चात ही विचित्र वीर्य को क्षय रोग हो गया और उनकी अचानक मृत्यु हो गयी। तब तक उनकी कोई भी संतान उत्पन्न नहीं हुई थी। वंश खत्म होने के भय से माता सत्यवती ने भीष्म से कहा कि वो विचित्र वीर्य की पत्नियों से पुत्र उत्पन्न करें।


ये भी पढ़ें:- आँखों से आंसू ला देने वाली जबरदस्त सच्ची प्रेम कहानी।


परन्तु भीष्म पितामह ने अपनी प्रतिज्ञा तोड़ने से मना कर दिया। तब सत्यवती ने अपने एक और पुत्र वेद व्यास को स्मरण किया। साथियों वेदव्यास सत्यवती और ऋषि परासर के ही पुत्र थे। वेदव्यास अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए पुत्र उत्पत्ति के लिए तैयार हो गए। उन्होंने अम्बा और अम्बालिका से एक वर्ष तक नियम व्रत का पालन करने के लिए कहा।


फिर एक वर्ष पश्चात उन्होंने माँ सत्यवती से कहा कि अम्बिका और अम्बालिका को एक-एक करके निर्वस्त्र होकर उनके सामने से गुजरना होगा। परन्तु लज्जा के कारण दोनों संकोच करने लगी। सत्यवती के समझाने पर अम्बिका और अम्बालिका ऐसा करने के लिए सहमत हो गयी।


फिर एक वर्ष पश्चात जब वेदव्यास अम्बिका का पास गए तब अम्बिका ने डर से अपने तेज नेत्र बंद कर लिए। कक्ष से बाहर आने पर वेदव्यास ने माता सत्यवती से कहा कि अम्बिका को बहुत ही तेजस्वी पुत्र प्राप्त होगा। परन्त उसने अपने नेत्र बंद कर लिए इसलिए ये पुत्र नेत्रहीन होगा।


ये सुनकर माता सत्यवती को बहुत ही दुःख हुआ। इसके पश्चात वेदव्यास छोटी रानी अम्बालिका के पास गए। वेदव्यास के डरावने रूप को देखकर अम्बालिका बहुत डर गई। जिसके बाद वेदव्यास ने माता सत्यवती से कहा कि अम्बालिका का पुत्र पांडु रोग से ग्रसित होगा।


ये सुनकर माता सत्यवती को और भी दुःख हुआ और उन्होंने अम्बालिका को पुनः वेदव्यास के सामने जाने के लिए कहा। इस बार अम्बालिका ने खुद न जाकर अपनी दासी को वेदव्यास के सामने भेज दिया। दासी उनके सामने जाकर बिल्कुल नहीं घबराई।


तब वेदव्यास जी ने माता सत्यवती से कहा कि इस दासी से उत्पन्न हुआ पुत्र नीतिवान और वेदों का महाज्ञानी होगा। आपको बता दें कि अम्बिका से उत्पन्न हुआ पुत्र ही धृतराष्ट्र, अम्बालिका से उत्पन्न हुआ पुत्र पांडु और दासी से उत्पन्न हुआ पुत्र ही विदुर था।


ऋषि मांडव्य के श्राप के कारण यमराज ने दासी पुत्र के रूप में जन्म लिया और वे आगे चलकर धृतराष्ट्र के मंत्री बनें। विदुर स्वयं धर्म का पालन करते थे और चाहते थे कि धृतराष्ट्र भी धर्म के मार्ग पर चलें। परन्तु दुर्भाग्यवश ऐसा नहीं हो सका। जब भी धृतराष्ट्र पांडवों के हिट की बात करते तब विदुर उन्हें समझाने का प्रयास करते।


पांडवों के प्रति स्नेह देख दुर्योधन उनसे ईर्ष्या करता था। लाक्षागृह के षड्यंत्र में भी विदुर ने उन्हें आगाह किया था और उन्हें इनसे बचने की भी युक्ति बताई थी। विदुर के पास बहुत ही शक्तिशाली और चमत्कारी धनुष था जो उन्हें स्वयं भगवान श्रीकृष्ण से प्राप्त हुआ था।


इस धनुष से वे चाहते थे तो वे युद्ध को एक ही पल में समाप्त कर सकते थे। एक बार विदुर ने दुर्योधन को पांडवों से युद्ध न करने की सलाह भी दी थी। ये सुनकर दुर्योधन बहुत क्रोधित हो गया और विदुर को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। ये सुनकर विदुर ने अपना धनुष तोड़ दिया और युद्ध नहीं लड़ेंगे। उन्हें भलीभाँति ज्ञान था कि यदि वे महाभारत युद्ध का हिस्सा बनेंगे तो उन्हें कौरवों की तरफ से युद्ध करना होगा।


अर्थात अधर्म के पक्ष में युद्ध करना होगा। इसीलिए उन्होंने स्वयं युद्ध न करने का निश्चय किया। साथ ही उन्होंने धृतराष्ट्र को समझाया भी दुर्योधन उनका पूरा खनदान खत्म कर देगा। परंतु विदुर की बात किसी ने नहीं मानी और इसका परिणाम क्या हुआ इससे तो हम सभी अवगत ही है। साथियों महाभारत के विदुर की ये पुरानी रहस्यमयी कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरूर बतायें।


Conclusion Of Hindu Mythology Stories In Hindi


इन दोनों धार्मिक कहानियों के बारे में बताने का हमारा यहीं मकसद था ताकि हम अपनी संस्कृति को याद कर सकें। ये ऐसी कहानी है जो हमें हमारे धर्म से जोड़े रहती है। ऐसी कहानियों को पढ़ने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि हमें ये मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाती है और सही मार्ग ओर चलना सिखाती है।


हम उम्मीद करते हैं कि आपको ये best hindu short mythological stories in hindi काफी अच्छी लगी होगी। अगर आपको हमारा ये पुरानी रहस्यमयी पौराणिक कथाएं अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana in hindi | PMJJBY

Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana in hindi | PMJJBY

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से अपने परिवार को कैसे सुरक्षित करें ?


Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana in hindi,pmjjby
Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana


दोस्तों आज हम बात करेंगे कि pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana क्या है, और ये कैसे काम करती है।दोस्तों अगर हम बात करें कि pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana बारे में तो ये एक टर्म इंश्योरेंस प्लान है।


◆ Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana kya hai(प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना क्या है):-


Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana एक ऐसी योजना है जिसके अंतर्गत आप लोगों को सालाना मात्र ₹330 का प्रीमियम भर के आप लोग ₹200000 तक का इंश्योरेंस कवर पा सकते हैं। यह इंश्योरेंस कवर आप लोगों को आप की मृत्यु के बाद अचानक मृत्यु के बाद आप के नॉमिनी के अकाउंट में ट्रांसफर कर जाता है।


साथियों जरा आप सोचे मात्र ₹330 सालाना ही आपको जमा कर देना यानि कि महीने के लगभग साढे 27 ₹ आपको जमा करने हैं और आप के बाद आपके परिवार को ₹200000 तक का इंश्योरेंस कवर मिल सकता है।


साथियों pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana भारत सरकार के द्वारा शुरू की गई थी जिसका एकमात्र उद्देश्य भारत के सभी लोगों का जीवन बीमा करना था क्योंकि भारत में बहुत कम लोग ही जीवन बीमा कराते हैं। 


अधिकतर जो जॉब करते हैं या फिर कोई जॉब करते हैं या फिर मतलब कि बड़े स्तर पर है,वही लोग अपना जीवन बीमा कर आते हैं।


लेकिन साथियों अक्सर छोटे लोग जैसे कि जो किसान हुए, मजदूर हुए हैं, साथ ही अन्य जो गरीब तबके के लोग हैं, वह न तो जीवन बीमा करा पाते और नहीं, किसी प्रकार का इंश्योरेंस करा पाते।


दोस्तों pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana का एकमात्र उद्देश्य भारत के सभी लोगों का जीवन बीमा कराएं। ताकि उनके कभी भी अकस्मात उनकी मृत्यु हो जाती है तो उनके बाल-बच्चे, माता-पिता या उनके परिवार को कुछ समय के लिए कहीं भी भटकना न पड़े।


दोस्तों प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जुड़ने के लिए आपके पास कम से कम एक बैंक अकाउंट होना चाहिए। अगर आपके पास मल्टीपल बैंक अकाउंट है,या विस्तार से जाने की अगर एक ज्यादा बैंक अकाउंट है तो भी आप लोगों को किसी एक बैंक अकाउंट से इस योजना को जोड़ना है।


दोस्तों अब जान लेते हैं कौन-कौन से एजेंसी इस योजना के अंतर्गत भाग ले रही हैं तो एलआईसी इसका सबसे बड़ा हिस्सेदार है। एलआईसी के साथ एचडीएफसी लाइफ, आईसीआईसीआई लोंबार्ड तथा एसबीआई लाइफ  भी इस योजना के साथ जुड़े हुए हैं। 


अर्थात देश के जितने भी बड़े मतलब कि इंश्योरेंस कंपनियां है सभी इस योजना से जुड़ी हुई हैं।

साथियों pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana (PMJJBY) में निवेश करने के बाद अगर उस व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसके परिवार को सहायता के रूप में दो लाख रुपये दीये जाते हैं। दोस्तों देश के हर एक आदमी को जीवन ज्योति बीमा योजना के लाभ पहुंचे इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 9 मई 2015 को इस योजना को शुरू किया था।

ये जरूर पढ़ें:- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के 3 best लाभ और पूरी जानकारी | PMSBY


चलिये दोस्तों  अब इस टर्म प्लान के बारे में विस्तार से जानते हैं,की इसका मतलब क्या होता है। किसी बीमा कंपनी के टर्म प्लान का मतलब जोखिम से सुरक्षा होता है।टर्म प्लान के policy धारक के मौत होने पर बीमा कंपनी इंश्योरेंस का भुगतान कर देती है।


साथियों आपको और एक बात जान लेना आवश्यक है कि अगर policy लेने वाला व्यक्ति premium समय पूरा होने के बाद तक ठीक रहता है, तो ऐसे स्थिति में उसको कोई लाभ नहीं दिया जाता है। सच कहें तो दोस्तों वास्तव में term insurance बहुत मामूली प्रीमियम पर जोखिमों से सुरक्षा मुहैया कराने का बहुत ही बेहतरीन जरिया होता है।


◆ Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana(PMJJBY) की खासियत:-

Features of Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana,pmjjby, Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana
PMJJBY

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में बीमा खरीदने के लिए किसी मेडिकल जांच की जरूरत नहीं होती है।


● प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा टर्म प्लान के तहत जो न्यूनतम उम्र होती है, वो 18 साल है और अधिकतम आयु 50 साल है। इस policy की maturity की उम्र 55 साल है।


प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत टर्म प्लान को हर साल रिव्यु कराना होता है। इसमें बीमा की रकम 2 लाख रुपये तक है।


प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के लिए सालाना 330 रुपये जमा कराने होते हैं। यह रकम  आपके बैंक खाते से ईसीएस(Electronic clearing service) के जरिये  भी दिया जा सकता है। योजना का रकम में बैंक प्रशासनिक शुल्क भी लगाते हैं। इसके अलावा इस रकम पर GST (Goods & Service Tax) लागू होता है।


● बीमा कवर के दौरान अगर सदस्य की मौत हो जाती है तो 2 लाख रुपये उसके घरवालों को या फिर नॉमिनी को दिया जाता है।


● साथियों अगर आप 1 जून यानी कि जून के महीने में इस योजना से नहीं जुड़ते हैं। अगर आप अगस्त, सितंबर या अक्टूबर मतलब की जून के बाद कभी भी अगर आप इस योजना से जुड़ते हैं तो भी आप लोगों को प्रीमियम के रूप में ₹330 का ही भुगतान करना पड़ेगा ।


● दोस्तों अगर policy लेने वाला व्यक्ति कई बैंक में प्रीमियम चुकाया है, तब भी इस योजना की कुल मृत्यु लाभ 2 लाख से अधिक नहीं हो सकता है।


● कोई भी व्यक्ति pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana को एक साल या उससे ज्यादा समय के लिए चुन सकता है। अगर किसी व्यक्ति ने लम्बी अवधि के लिए बीमा का ऑप्शन चुना है, तो उसका बैंक हर साल प्रीमियम की रकम  बैंक के बचत खाते से खुद काट लेता है।


● साथियों आपके बैंक खाते से प्रीमियम की रकम  काटे जाने के दिन से ही  आपको pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana की सूविधा मिलने लग जाती है।


● दोस्तों policy किसी भी तारिक को खरीदी गई हो पहले साल के लिए उसका कवरेज अगले साल तक 31 मई तक ही लागू होता है।


● pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana की कवर को हर साल 1 जून को बैंक खाते की प्रीमियम की रकम चुका कर रिव्यु की जा सकती है। यह जून से ही करना शुरु होता है। मन करता है तो जून के फर्स्ट वीक में या फिर साल में एक बार आपके अकाउंट से वह ऑटो डेबिट हो जाएगा।  


ये भी पढें:- Best Term Insurance in India | 3 सबसे अच्छी टर्म इंश्योरेंस कम्पनी।


इस योजना का कवरेज पीरियड क्या होता है तो दोस्तों 1 जून से लेकर 31 मई तक इस योजना का कवरेज पीरियड होता है। इसे इस दौरान यानी कि 1 साल तक इस दौरान आप कभी भी इस योजना से जुड़ सकते हैं।


साथियों इसके साथ ही एक चीज और आप लोग ख्याल रखेंगे, जिस दिन से आप लोग इस योजना से जुड़ेंगे उस दिन से करीब 45 दिन तक इनरोलमेंट पीरियड होता है तो इस इनरोलमेंट पीरियड के अंतर्गत आपको कोई भी कवरेज नहीं प्राप्त होगा। यानी कि 45 दिनों के बाद ही आप इस योजना का लाभ उठाने के लिए योग्य हो पाएंगे।


साथियों मतलब 45 दिनों के बाद कभी भी अगर आपकी अकस्मात मृत्यु होती है तो आपके परिवार को यानी कि आपके नॉमिनी को ₹200000 तक का इंश्योरेंस कवर अकाउंट में ट्रांसफर किया जाते हैं।


pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana के लिए जो फॉर्म है,वो अलग-अलग भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराए गए हैं। जैसे कि इंग्लिश, हिंदी, बांग्ला, कन्नड़, उड़िया, मराठी,तमिल,तेलुगु इत्यादि भाषाओं में।


◆ प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का लाभ (pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana):-

Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana,pmjjby,benefits of Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana
PM jeevan jyoti bima yojana

साथियों अब बात करते हैं कि  pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana ke labh आप कैसे ले सकते हैं?


दोस्तों अगर आप इस योजना को चालू करवाना चाहते हैं तो आपको कुछ नहीं करना है। बैंक जाकर वहां पर आप लोगों को pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana का एक फॉर्म मिलेगा। वह सभी बैंकों में उपलब्ध है तो वह फॉर्म भरना है।उस फॉर्म में ज्यादा कुछ नहीं भरना होता है।


उसमें मात्र आप लोग को अपना नाम,स्वयं का अकाउंट नंबर जिस अकाउंट से आप लोग ऑटो डेबिट अपने पैसे करवाना चाहते हैं उसका अकाउंट नंबर तथा अपना आधार नम्बर भरना होता है।


pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana से जुड़ने के लिए आप लोग को बता देते हैं कि कैसे इस योजना का क्लेम आप लोग को पाना है। दोस्तों क्लेम करने के लिए जब भी मान लीजिए अकाउंट होल्डर की यानी कि जो भी इस योजना से जुड़ा है, उसकी मृत्यु अचानक होती है तो जो उसका नॉमिनी है, वह बैंक जाएगा।


दोस्तों वहां पर उसको 2 फॉर्म मिलेंगे। एक क्लेम फॉर्म मिलेगा ही, साथ ही एक डिसचार्ज फ्रॉम मिलेगा तो इन दोनों फॉर्म को फिल अप करके आप लोग को बैंक में जमा कर देना है।


साथियों इसके बाद जो जो आईडी प्रूफ लगेगा आपको उसके साथ लगाना है। Death Certificate(मृत्यु प्रमाणपत्र)) यानी कि जो भी व्यक्ति इस योजना से जुड़ा था उसका डेथ सर्टिफिकेट लगेगा। इसके अलावा उस व्यक्ति का आधार कार्ड का पूरा डिटेल और आधार कार्ड की फोटो कॉपी आप लगाएंगे।


साथ ही बैंक डिटेल यानी की पासबुक के फर्स्ट पेज और उसके लास्ट पेज के फोटो कॉपी आप लगाएंगे। तथा दोस्तों नॉमिनी का बैंक डिटेल का फोटो कॉपी लगाएंगे तो इतना सब कुछ आप डिटेल देंगे तो क्लेम का पैसा लगभग 30 दिनों के अंदर ही आपके एकाउंट में यानी कि नॉमिनी के अकाउंट में भेज दिया जाता है। साथियों बहुत ही सिंपल तरीका है क्लेम को पाने का।


साथियों उम्मीद करते हैं कि आप सभी लोगों को pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana के बारे में पूरी तरीके से समझ में आ गया होगा या pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana से सम्बंधित और भी जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप इनकी ऑफिशियल वेबसाइट http://jansuraksha.gov.in/ पर भी जाकर प्राप्त कर सकते हैं।


Best Term Insurance in India | 3 सबसे अच्छी टर्म इंश्योरेंस कम्पनी।

Best Term Insurance in India | 3 सबसे अच्छी टर्म इंश्योरेंस कम्पनी।

Best Term Insurance in India | 3 सबसे अच्छी टर्म इंश्योरेंस कम्पनी।

Best term insurance in india,term insurance,term insurance company in india
Term Insurance

भारत में कौन सा सबसे बेस्ट term insurance plan है जो आपके लिए सबसे अच्छा है। आज हम बात करेंगे इसी के बारे में की भारत में कौन सा term insurance आपको ज्यादा लाभ दे सकता है।


हम भारत के तीन सबसे बेस्ट term insurance के बारे में बात करेंगे और बताएंगे कि कौन सा term insurance सबसे बेस्ट है। और उसको हम तीन अलग अलग 1,2 और 3 का रैंकिंग देंगे। और उसके बाद टोटल 6 मानदंड पर इन term insurance को जानेंगे।


साथियों हम अक्सर एक चीज़ पर ध्यान देते हैं कि कौन सा प्रीमियम सबसे कम है और उसी को हम सबसे अच्छा मैन बैठते हैं, जबकि ऐसा नहीं होता है दोस्तों।और भी बहुत सारे term insurance के मानदंड है जिसके बारे हम विस्तार से जानेंगे।


दोस्तों हम आज बात करेंगे कि भारत में सबसे टॉप तीन कौन सा सबसे बेस्ट term insurance है। तो चलिए शुरू करते हैं आज के इस महत्वपूर्ण टॉपिक के बारे में बिस्तार से जानते हैं-


दोस्तों सबसे पहले हम जिन तीन Company की तुलना करने वाले हैं उनका नाम है-


भारत की 3 सबसे अच्छी टर्म इंश्योरेंस कंपनी ( Top 3 term insurance company in India):


1. LIC
2. HDFC
3. TATA


साथियों इसके अलावा और भी बहुत सारी कम्पनीज होंगी जिसके बारे में आप जानते होंगे, पर उन सबमें बहुत सारी खामियां थी। जिसके वजह से ये तीनों टॉप 3 में हैं। हो सकता है आप और भी कंपनियों का policies लेना चाहते हो ये आपका मन है,पर मेरे हिसाब से Term Insurance के लिये ये तीन सबसे बेस्ट है।


साथियों अब इन तीनों के बारे में विस्तार से जानते हैं। पहले LIC की जानते हैं, फिर HDFC की और फिर उसके बाद TATA की। टोटल हम 6 पॉइंट के बारे में बात करेंगे फिर लास्ट में इन सबका रैंकिंग देंगे।


1. दोस्तों सबसे पहला पॉइंट ये है कि कौन सी कंपनी ने सबसे ज्यादा क्लेम(claim) हैंडल किये हैं। मतलब कहीं ऐसा तो नहीं कि छोटी सी कंपनी है दो-चार सौ क्लैम है,और उतना ही क्लेम हैन्डल किये है।


साथियों क्लेम हैंडल में सबसे आगे LIC है। LIC ने टोटल 750950 क्लेम हैंडल किये हैं। तो HDFC ने टोटल 12946 क्लेम हैंडल किये तो TATA ने 2700 क्लेम हैंडल किये।


जी हाँ दोस्तों ये हो गया कि कितने क्लेम आये हैं और कौन कितने क्लेम हैन्डल किये हैं।


ये जरूर पढ़ें:- Pradhanmantri jeevan jyoti bima yojana in hindi | PMJJBY


◆ Term insurance claim settlement ratio:


Term insurance claim settlement ratio,term insurance
Term insurance claim settlement ratio

2. साथियों अब सबसे महत्वपूर्ण बात ये हैं की किसका क्लेम सेटलमेंट अनुपात सबसे बढ़िया है। अगर मेरे पास 100 क्लेम आये हैं तो कितने पास किये हैं और कितने नहीं।


● LIC ने 97.9% क्लेम पास किये हैं।

● HDFC में एक बात है ,साथियों पहले HDFC का क्लेम सेटलमेंट कम हुआ करता था पर अब बहुत अच्छा हो गया है। और आज HDFC ने 99.04% क्लेम पास किये हैं जो कि बहुत ही सुपर क्लेम सेटेलमेंट अनुपात है।

● अब अगला है TATA का जिन्होंने 99.07% क्लेम सेटलमेंट किये है।


साथियों इसमें एक चीज़ ध्यान देने योग्य बात है,की क्योंकि LIC का क्लेम सेटलमेंट बहुत ज्यादा है इसलिए इसको इग्नोर करना पड़ेगा। अगला बात ये की एक तो हो गया कि 100 क्लेम्स आये उनमे से 99 पास कर दिए।


महत्वपूर्ण बात ये भी होती है कि अगर 1 करोड़ का क्लेम आया, तो कितने अपने पास किये हैं Term Insurance में। बहुत जरूरी है अमाउंट चेक करना जो हम अगले पॉइंट में चेक करेंगे।


3. LIC ने 95% अमाउंट सेटल किये,तो HDFC ने 94% से 95% अमाउंट सेटल किये और TATA से 96% सेटल किया है।


TATA के क्लेम सेटलमेंट अनुपात और अमाउंट सेटलमेंट अनुपात थोड़ा सा ज्यादा है,क्योंकि जो उनके क्लेम्स आये है वो बहुत कम आये हैं,तो हमें वो भी इग्नोर करना पड़ेगा।


साथियों इन तीन पॉइंट्स में हमने देखा कि सबने अच्छा किया है चाहे वो LIC हो ,HDFC हो या फिर TATA ।


◆ Term Insurance Claim rejection ratio:


Term Insurance Claim rejection ratio,term insurance
Term Insurance Claim rejection ratio

4. साथियों ये पॉइंट बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर हम इसे ध्यान ही नहीं देते हैं। आप और हम देखते ही नहीं है और ये पॉइंट ही ज्यादा ध्यान देने योग्य है वो ये है- क्लेम अस्वीकृति अनुपात (Claim rejection ratio)। 


मतलब कितने क्लेम्स आये और कितने रिजेक्ट कर दिये गए। देखना इसलिए जरूरी है कि क्योंकि क्लेम सेटलमेंट और अमाउंट सेटलमेंट में ये हो सकता है कि कुछ क्लेम्स आये हो और प्रॉसेस में चल रहा हो।इसलिए वो उस ratio में नहीं आये हो।


कितने क्लेम्स रिजेक्ट कर दिए हैं ये उस कंपनी ने ये बात जानना बहुत जरूरी है। अगर 1% से ज्यादा क्लेम्स अस्वीकृति (claims rejection) ज्यादा है तो हम वैसी कम्पनी को बाहर रखेंगे।


कुछ कम्पनी ऐसी है जैसे Maxlife। ये कम्पनी तो बहुत अच्छी है पर क्योंकि इनका क्लेम्स अस्वीकृति बहुत ज्यादा था। इसलिए हमने उनको इस लिस्ट से बाहर रखा। क्योंकि 1% से ज्यादा claims rejection ratio बहुत ही खराब है। हमें इससे दूर ही रहना चाहिए।


LIC का Claims rejection ratio है - 0.89%

HDFC का Claims rejection ratio है - 0.52%

TATA का Claims rejection ratio है - 0.93%


तीनों का Claims rejection ratio जो है वो 1% से कम है।इसलिए हम इसको इग्नोर कर सकते हैं।


◆ Term Insurance Solvency Ratio:

Term Insurance Solvency Ratio,term insurance
Term Insurance Solvency Ratio

5. दोस्तों अब हम बात करेंगे solvency ratio की। solvency ratio का मतलब ये हुआ कि कितना मेरे पास क्लैम आने का उम्मीद है और हमने कितना अमाउंट रिजर्व रखा है। हर कम्पनी को 1.5 का ratio रखना जरूरी है आज के नियमों के अनुसार।


और साथ ही साथ शायद आपको एक नियम पता नहीं होगा वो है - Force majeure


मतलब कोई ऐसी परिस्थिति आ जाये जिसमें बहुत त्राहि-त्राहि मच गई,और सब कुछ बर्बाद हो गया। मान लिजिये एक प्राकृतिक आपदा जैसा हो गया,जिसमें कंपनी का ratio या क्लेम्स रिजेक्ट भी कर सकती है। आप सही हो फिर भी रिजेक्ट कर सकती है।


साथियों इसलिए देखना जरूरी होगा कि किसका solvency ratio अच्छा है। जीतना ज्यादा अच्छा होगा उतना आपके लिए अच्छा साबित होगा। ऐसी खराब परिस्थितियों में भी आपका rejection नहीं होगा।


Term Isurance में न क्लेम्स रिजेक्ट होना बहुत ज्यादा मुश्किल है और वो नहीं होना चाहिए। थोड़े से सस्ते प्रीमियम लेने से बचना चाहिए या फिर इसको नहीं लेना चाहिए। साथियों बाकी ये सब पॉइंट भी term insurance लेते समय ध्यान रखना चाहिए।


तो चलिए दोस्तों अब जानते हैं किसका कितना solvency ratio है।


● LIC का solvency ratio है- 1.60

● HDFC का solvency ratio है- 1.88 और

● TATA का solvency ratio है- 2.50 के आसपास


6. दोस्तों अब अगला बात हम ये समझेंगे की प्रीमियम किसमे कितना ज्यादा आने वाला है। क्योंकि Term Insurance का प्रीमियम पहले ही भीत कम होता है।


साथियों term insurance में मुख्य बात ये होती हैं कि जब क्लेम आये,और आप इस दुनिया में नहीं हो तब जब आपके परिवार वाले क्लेम लेने आये तब क्लेम रिजेक्ट नहीं होनी चाहिए। इसलिये दोस्तों एक बार फिर कहूंगा कि सस्ते प्रीमियम लेने से बचें उनसे दूर रहें।


ये जरूर पढ़ें:- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के 3 best लाभ और पूरी जानकारी | PMSBY


साथियों प्रीमियम की बात करें तो सबसे ज्यादा होने वाला है LIC का। जी हाँ दोस्तों निश्चित ही सबसे ज़्यादा LIC का होगा। उसके बाद HDFC का होगा। और तीसरे नम्बर पर TATA का होगा।क्योंकि थोड़ा टाटा अभी नया है,इसलिये थोड़ा सस्ता पड़ता है। तीनों हीं policies ठीक है।


साथियों अब हम बात करेंगे रैंकिंग का। जी हाँ दोस्तों premium LIC का बहुत ज्यादा होता है, इसलिये LIC के साथ HDFC भी रखा और TATA का थोड़ा कम होता है ,इसलिए TATA को भी रखा। इसमें HDFC और LIC के प्रीमियम में बहुत ज्यादा अंतर आ जायेगा। HDFC का काफी कम होगा, TATA का और भी कम होगा LIC की तुलना में।


अब हम बात करते हैं कि किसका Term Insurance सबसे बेस्ट है और कौन सा फर्स्ट है। इन सबको देखने के बाद पता चलता है कि तीनों की अच्छा है। आप किसी का भी लीजिये अच्छा है कोई टेंशन लेने वाली बात नहीं है। पर फिर भी इनको रैंकिंग देने की कोशिश करते हैं।


तो साथियों पहले नम्बर जो हमने रखा है, वो है- LIC और HDFC। क्योंकि दोस्तों HDFC का प्रेफरेंस थोड़ी इसलिये दी है क्योंकि HDFC की प्रीमियम थोड़ा कम है,LIC के तुलना में थोड़ा नहीं ज्यादा कम है। Claim ratio भी बहुत अच्छा है और HDFC बैंक भी बहुत अच्छा है।


अगर आप premium थोड़ा सा reasonable लेना चाहते हैं तो HDFC का लें। अगर आप ये सोचते हो कि प्रीमियम कोई भी हो चलेगा तो LIC का लें। दोनों का term insurance poilicies अच्छा है।


दूसरे नम्बर पर रखा है TATA को। TATA का प्रीमियम कम होगा hdfc से 5% या 10% कम होगा। पर अगर आप HDFC या LIC का प्रीमियम लेते हैं तो अच्छा होगा। क्योंकि एक बात ध्यान देना है कि TATA अभी नया है।


 इसलिए आपको ये बात ध्यान देने योग्य है। वैसे तीनों सभी term insurance कंपनियों में सबसे बेस्ट है। आप किसी का भी ले सकते हैं, तीनों में कोई दिक्कत नहीं आएगा।


पर रैंकिंग की बात करें तो पहले नम्बर पर HDFC, दूसरे पर LIC और तीसरे नम्बर पर TATA को रखेंगें।



आपको और ये जानकारी कैसी लगी कमेंट कर के हमें जरूर बताइयेगा।