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आंखों में आंसू ला देने वाली सच्चे प्यार की दो जबरदस्त प्रेम कहानी

आंखों में आंसू ला देने वाली सच्चे प्यार की दो जबरदस्त प्रेम कहानी

Best 2 Heart Touching Sad & Emotional Cute Real Love Story In Hindi | सच्ची प्रेम कहानी इन हिंदी

Best 2 true & emotional heart touching love story in hindi, short love stories in hindi with moral
Real Love Story In Hindi

आज हम दो ऐसे hindi true love story के बारे में जानेंगे, जिसको पढ़ने के बाद निश्चित ही आपके आंखों से आँसू निकल आएंगे। ये दोनों स्टोरी बहुत ही heart touching & emotional love story है। इन दोनों कहानियों में हम जानेंगे कि एक सच्चा प्यार क्या होता है?


आज अधिकांश लोग सिर्फ अपने मतलब के लिए प्यार करते हैं लेकिन ये 2 true hindi love story आपको दिखाएगी कि प्यार का सही अर्थ क्या होता है? तो चलिए बिना किसी देरी के Best 2 Sad Short True Love Story In Hindi को पढ़ते हैं।


Very Sad True Heart Touching Short Love Story In Hindi | दर्द भरी प्रेम कहानी


बनारस में प्रीति नाम की एक बहुत ही सुंदर लड़की रहती थी। जो बहुत ही चंचल और हँसमुख लड़की थी। उसके पिताजी की एक बहुत बड़ी कम्पनी थी लेकिन प्रीति के पिताजी में इतना अमीर होने पर भी घमंड नाम की कोई चीज नहीं थीं और वह एक बहुत ही अच्छे आदमी थे।


प्रीति के कॉलेज में फाइनल ईयर की पढ़ाई खत्म हो चुकी थी। अब वह अपने पिताजी की कम्पनी में उनके काम में हाथ बंटाना चाहती थी। वह रोज अपने पिताजी के साथ अपने कम्पनी में जाने लगी। प्रीति कम्पनी में सबसे खूब हंसी मजाक करती रहती थी। उसे देखकर कम्पनी में काम करने वालों को ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता था कि वो इस कम्पनी के मालिक की बेटी थी।


उसका स्वभाव इतना अच्छा था कि हर कोई उसकी तारीफ करता रहता था। लेकिन प्रीति को उसके कम्पनी में नौतिक नाम का लड़का उसे छुप-छुप कर देखता था, शायद वो उसे चाहता था। लेकिन वो उस कम्पनी में बहुत ही छोटे पद पर कार्यरत था। इस कारण नैतिक को अपने प्यार का इजहार करने में डर लगता था।


लेकिन प्रीति को एक दिन उस पर शक हो गया कि नैतिक उसे छुपकर देखता है। इसलिए प्रीति ने नैतिक से पूछा कि क्या तुम मुझसे कुछ कहना चाहते हो? ये बात सुनकर नैतिक का होश उड़ गया और वो डर के मारे कुछ बोल भी नहीं पा रहा था। तभी उसका ऐसा मुह देखकर प्रीति को बहुत जोर से हंसी आ गयी और वो वहाँ से चली गयी।


लेकिन शायद प्रीति को उसके प्यार का एहसास नहीं हुआ था। पर नैतिक को उससे बहुत प्यार हो गया था। एक दिन नैतिक ने तो हद ही कर दी। उसने प्रीति के जन्मदिन पर एक कागज में लपेटकर उसके केबिन में गुलाब का फूल रख दिया। जब प्रीति अपने केबिन में गयी तो उसको गुलाब का फूल रखा हुआ मिला।


फूल देखकर वो तुरन्त समझ गयी कि ये फूल जरूर नैतिक ने ही रखी होगा, लेकिन प्रीति को उससे प्यार ही नहीं हुआ था। फिर प्रीति ने नैतिक को अपने केबिन में बुलाया और उससे बड़ी प्यार से कहा- क्या तुम मुझसे करते हो?


इतना सुनते ही नैतिक ने डर के मारे अपनी गर्दन नीचे झुका ली और हिम्मत बांधकर कहा- हाँ, मैम मुझे आपसे पहली ही नजर में न जाने क्यों बेहद प्यार हो गया। जबकि मुझे ये मालूम है कि आप मुझसे कभी भी प्यार नहीं करोगी क्योंकि मैं एक गरीब आदमी हूँ और आप बहुत ही अमीर लड़की हो।


इस बात को सुनकर प्रीति को बहुत बुरा लगा लेकिन वो करती भी क्या? वो तो उससे प्यार भी नहीं करती थी। इसलिए उसने नैतिक ने कहा- नैतिक ये अमीर गरीब क्या लगा रखा है? मैं तो हमेशा से ही तुमलोगों से मिलजुलकर रहती हूँ। इस बात पर नैतिक ने कुछ भी नहीं कहा। फिर प्रीति ने नैतिक का उदास मन देखकर उससे कहा कि मैं तुमसे प्यार तो नहीं कर सकती। मगर मैं तुमसे दोस्ती जरूर करूँगी और ये फूल मैं हमारी दोस्ती के नाम पर ले लेती हूँ।


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नैतिक इस बात से बहुत खुश हो गया और उसने सोचा कि शायद प्रीति मैडम को दोस्ती के बाद एक न एक दिन मुझसे प्यार हो ही जायेगा। अब उन दोनों के बीच में गहरी दोस्ती हो चुकी थी। नैतिक भी दिल का बहुत अच्छा लड़का था और पूरी कम्पनी में सबसे ज्यादा सुंदर और समझदार लड़का था। नैतिक और प्रीति की जोड़ी भी बहुत ही सुंदर थी। बस उनकी जोड़ी में सिर्फ अमीर और गरीब का ही अंतर था।


एक दिन नैतिक ने प्रीति से कहा- प्रीति क्या हम रविवार को कहीं घूमने चलें तो प्रीति ने कहा कि ठीक है। फिर वे दोनों रविवार को बनारस के घाट पर घूमने निकल गए और सभी जगह घूम कर वे दोनों घाट के पास ही बैठ गए। तभी प्रीति ने नैतिक को आजमाते हुए पूछा कि नैतिक क्या सच में तुम मुझसे बेहद प्यार करते हो?


नैतिक ने कहा- तुमको क्या मेरी बातें झूठी लगती है?
इस पर प्रीति ने कहा- नहीं, बस बात ये थी कि मुझे प्यार पर इतना विश्वास नहीं है और मुझे ये बिल्कुल भी यकीन नहीं होता है कि एक प्यार के लिए इंसान इतना पागल कैसे हो सकता है? प्यार क्या होता है ये तो मुझे नहीं पता क्योंकि मुझे अभी तक किसी से भी प्यार नहीं हुआ और ना ही कभी होगा।


इस बात पर नैतिक को बहुत बुरा लग गया और प्रीति का हाथ पकड़कर कहा- प्रीति एक दिन तुम्हें भी किसी से प्यार जरूर होगा और तब तुमको एहसास होगा कि वास्तव में प्रेम क्या होता है?
प्रीति ने कहा- ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा। तुम भी यही हो और मैं भी यहीं हूँ। प्रीति की ऐसी बात सुनकर नैतिक के आंखों में आंसू आ गए।


नौतिक के आंखों में आंसू देखकर प्रीति को बहुत ही बुरा लगता है। तब प्रीति ने नैतिक को आजमाते हुए कहा- अच्छा नैतिक तुम मुझसे बताओ कि तुम मुझे कितना प्यार करते हो?


इतना सुनते ही नैतिक प्रीति को आई लव यू कहकर बनारस के घाट वाले नदी में कूद जाता है। प्रीति ये देखकर बहुत ही डर जाती है और वो वहाँ खड़े कुछ लोगों से उसे बचाने को कहती है। तभी वहाँ खड़े दो-तीन लोग उसे जैसे-तैसे उस नदी ने बाहर निकालते हैं। फिर बड़ी मुश्किल से नैतिक होश में आता है। प्रीति ने कहा- नैतिक जब तुम्हें तैरना ही नहीं आता था तो तुमने इस नदी में छलांग ही क्यों लगाई?


तब नैतिक ने प्रीति से गुस्सा होते हुए कहा- क्या तुम्हें नहीं पता कि मैंने इस नदी में क्यों छलांग लगाई। इस पर प्रीति ने कहा कि मुझे कुछ नहीं पता कि तुमने छलांग क्यों लगाई। तब नैतिक ने उस पर चिल्लाते हुए कहा- मैं इस नदी में इसलिए कूदा ताकि तुमको मेरे सच्चे प्यार पर विश्वास हो जाये।


प्रीति ने कहा- नैतिक, मेरे चक्कर में क्यों तुम अपना वक्त बर्बाद कर रहे हो? मैं सिर्फ तुम्हारी दोस्त हूँ और हमेशा सिर्फ दोस्त ही रहूंगी। ये कहकर प्रीति वहाँ से चली जाती है। नैतिक को इस पर बहुत बुरा लगता है।


प्रीति को भी अब तक नैतिक से कहीं न कहीं प्यार होने लगा था। लेकिन उसको अपने प्यार का एहसास नहीं था। अब प्रीति इसके बाद अपने घर पर आ जाती है। लेकिन वो कुछ परेशान और बेचैन सी लग रही थी और बार-बार उसे नैतिक की याद आ रही थी। साथ ही उसका आई लव यू कहना भी उसके दिल को चीरता हुआ न जाने उससे क्या कह रहा था?


तभी प्रीति को अचानक याद आया कि वो नैतिक को तो उस घाट पर ही छोड़कर आ गयी थी। उसने रात को ही नैतिक को फोन किया। लेकिन उसका फोन ही बंद था। तभी प्रीति ने सोचा कि नैतिक से मैं कल कम्पनी में ही बात कर लुंगी।


अगले दिन प्रीति जब अपने कम्पनी में पहुँची तो सीधा नैतिक के पास ही पहुँची लेकिन नैतिक उस दिन कम्पनी में नहीं आया था। ये देखकर प्रीति को बहुत अजीब लगा। उसे अब रहा नहीं जा रहा था। वो तुरंत अपने पिताजी के केबिन में गयी और बोली- पापा क्या आज नैतिक नहीं आएगा। उसके पिताजी ने कहा- हाँ बेटा आज वो नहीं आएगा। मगर मुझे ये नहीं पता कि वो क्यों नहीं आया?


शायद उसे कुछ काम होगा। इतना सुनकर प्रीति ने केबिन से बाहर आकर नैतिक को फिर से फोन लगाया। लेकिन उसका फोन फिर से बंद बता रहा था। अब प्रीति बेचैन सी होने लगी थी। लेकिन फिर उसने सोचा कि चलो कोई बात नहीं मैं नैतिक से अगले दिन मिल लुंगी।


अगले दिन भी नैतिक कम्पनी में नहीं आया। अब प्रीति को बिल्कुल रहा नहीं गया। वो तुरन्त अपने पापा के केबिन में पहुँचकर किसी फ़ाइल में नैतिक के घर का पता ढूंढने लगी। ये देखकर उसके पापा ने पुछा कि क्या हुआ बेटी? तुम नैतिक के एड्रेस के लिए इतना परेशान क्यों हो रही हो?


प्रीति ने बिना बोले ही नैतिक का पता लेकर वहाँ से चली गयी। अब शायद प्रीति को नैतिक का प्यार याद आ रहा था। जब वो नैतिक के घर पर पहुँची तो वहाँ पर उसके मकान मालिक ने कहा कि बेटी वो यहाँ पर किराए पर रहता था। अब वो कल सुबह ही दिल्ली चला गया क्योंकि उसके माता पिता दिल्ली में ही रहते हैं।


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उसके मकान मालिक ने ये भी कहा कि नैतिक कुछ परेशान लग रहा था और जाते-जाते उसने ये भी कहा कि अब वो बनारस कभी नहीं आएगा। ये सुनकर प्रीति के आंखों में आंसू आ गयी और वो सीधा अपने घर चली गयी। उसे नैतिक की बहुत याद आ रही थी और उसके साथ बिताए हुए सारे पल उसके आंखों के सामने एक सपने के तरह दिखने लगे थे।


साथ ही उसे नैतिक की एक बात याद आने लगी थी कि उसने कहा था एक दिन तुम्हें भी मेरे प्यार का एहसास जरूर होगा और वाकई में वो दिन प्रीति के जीवन में आ ही गया था।


उसे नैतिक की याद हमेशा सत्ता रही थी और मन ही मन इसी इंतजार में रहती थी कि तुम कब आओगे नैतिक? अब उसका जीवन नैतिक के बिना अधूरा था और उसने अब कम्पनी में भी जाना छोड़ दिया और हर रोज सिर्फ नैतिक का ही इंतजार सिर्फ ये सोचकर करती है कि नैतिक एक दिन जरूर आएगा। अगर सही समय पर उसने नैतिक के प्यार को स्वीकार कर लिया होता तो शायद उसे आज ये दिन नहीं देखना पड़ता। 


आपको ये दर्द भरी प्रेम कहानी कैसी लगी, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।


True & Blind Short Love Story In Hindi | सच्चे प्यार की कहानी

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सच्चे प्यार की कहानी

एक कॉल सेंटर के बाहर बहुत लंबी लाइन लगी हुई थी। नौकरी केवल 10 लोगों को मिलना था पर लम्बी लाइन बता रही थी कि नौकरी मिलने की आशा में लगभग 500 से ज्यादा लोग लाइन में खड़े थे। लाइन में एक काजल नाम की अंधी लड़की भी खड़ी थी।


काजल को लोगों के बातचीत से यह अंदाजा लग गया था कि नौकरी का आवेदन करने वाले लोग ज्यादा है। वह मन ही मन इस बात को लेकर बहुत नर्वस हो रही थी कि इतने आदमी के बीच उसको कैसे नौकरी मिलेगी? तभी एक चपरासी ने उसका नाम पुकारा और वह अपनी बहन नेहा का साथ अंदर जाने लगी।


लेकिन चपरासी ने नेहा को रोक दिया। नेहा ने बताना चाहा कि उसकी बहन अंधी है। मगर काजल ने उसके हाथ को दबाती हुई इशारा करके रोक दिया और अकेले ही अंदर जाने का मन बना लिया। काजल इसी भ्रम में थी कि वह अंधी है तो क्या हुआ उसके पास शिक्षा की आँखें तो है।

लेकिन उसका यह भ्रम उस समय टूट गया जब उसे कॉल सेंटर की नौकरी के लिए अनुपयोगी मान कर निष्कासित कर दिया गया। वह वापस बस से रोती हुई अपने शहर जा रही थी। वह नेहा से कह रही थी कि पिताजी ने अपना सारा पैसा मेरी पढ़ाई में लगा दिया। अब अगर मुझे नौकरी नहीं मिली तो दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होगी।


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उसके सीट के पीछे बैठा मनोज उसकी सारी बातें सुन रहा था। वह काजल के पड़ोस में रहता था और मन ही मन काजल को बहुत पसंद करता था। मगर वह जानता था कि हीन भावना की शिकार काजल कभी भी उसकी जीवन साथी बनने को तैयार नहीं होगी।


मनोज को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह किस तरह काजल की मदद करें। सोचते-सोचते आखिर उसके दिमाग में एक खतरनाक विचार ने जन्म लिया। उसने घर आकर काजल से मुलाकात की और स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। हालांकि मैं सुंदर नहीं हूँ और शायद तुम्हारी आँखें होती तो तुम मुझे अस्वीकार कर देती।


ये बात सुनकर काजल की आंखों में आंसू आ गए। उसने कहा कि वे लोग पागल होते हैं जो अपने चाहने वाले को अस्वीकार कर देते हैं। पर मनोज मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकती। तुम अपने लिए कोई आंख वाली लड़की ढूंढ लो। मनोज निराश होकर चला गया।


कुछ ही दिनों में उसे शहर में किसी insurance कम्पनी में नौकरी मिल गयी और वह गांव छोड़कर चला गया। एक दिन गांव में कुछ NGO वाले आये। उनकी नजर काजल पर गयी तो उन्होंने काजल को आशा बंधाई की उसकी आंखें ठीक हो सकती है।


हालांकि काजल को ये विश्वास नहीं हो रहा था लेकिन NGO के लोगों के आश्वासन देने पर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। कुछ दिन के बाद अब काजल की आंखे बिल्कुल ठीक हो चुकी थी और उसकी सुंदरता में चार चांद लगा रहे थे।


इस बार उसने एक MNC कॉल सेंटर में नौकरी के लिए अप्लाई किया और उसे 5 लाख के सालाना वेतन पर अच्छी नौकरी मिल गयी। सब कुछ पहले से ठीक चल रहा था। लेकिन अब उसे मनोज की याद आ रही थी। उसने मनोज को कई जगह खोजा यहां तक कि उसके घर पर भी पूछताछ की मगर मनोज का कहीं पता नहीं चल पा रहा था।


दूसरी ओर काजल की माँ ने उसके लिए लड़का ढूंढना शुरू कर दिया था। पर काजल के दिल में तो मनोज ही बसा था। मनोज के तलाश में काजल ने दिन रात एक के दिए। वह हमेशा यहीं सोचती रहती थी कि जो लड़का एक अंधी लड़की को अपना बनाना चाहता हो उसका दिल कितना सुंदर होगा?


वह मनोज से मिलकर उसको सरप्राइज देना चाहती थी। वह मनोज का हाथ पकड़कर कहना चाहती थी कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूँ। पर इसके लिए मनोज का मिलना भी तो जरूरी था। काजल ने मनोज की तलाश फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, गूगल इत्यादि सब जगह की। पर उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा था।


एक दिन उसे उसी ब्लाइंड स्कूल के एक कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनने का मौका मिला। जिसमें वह खुद कभी पढा करती थी। वह नेहा को साथ लेकर स्कूल की सीढ़ियां चढ़ रही थी तभी ऊपर से नीचे उतर रहा एक लड़का नेहा से टकड़ाकर सीढ़ियों पर से नीचे गिर गया। काजल उसे दौर कर उठाने में मदद करने लगी। वो लड़का कोई और नहीं बल्कि मनोज ही था।


जिसने किसी दिन काजल से अपने प्यार का इजहार किया था। जैसे ही काजल की नजर मनोज पर पड़ी उसके मुह से निकला मनोज तुम। मनोज ने भी काजल की आवाज पहचान ली। मनोज ने फिर कहा- तुम यहाँ क्या कर रही हो? काजल ने कहा- पहले ये बताइये कि आप यहाँ क्या कर रहे हैं?


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मनोज ने कहा- एक एक्सीडेंट में मेरी दोनों आंखे चली गयी इसलिए मैं यहां हूँ। इतना सुनकर काजल का तो दिमाग ही घूम गया। वह मन ही मन सोचने लगी कि क्या यहीँ मनोज है? इतना बदसूरत, इतना काला और आँखे ना होने के वजह से इतना डरावना लगता है।


मनोज ने नेहा से काजल के बारे में पूछा तो काजल ने उसे तुरंत इशारा करके बताया कि उसके बारे में मनोज से नहीं बताए। नेहा ने मनोज से कहा कि काजल तो नहीं आ पाई। मनोज ने थोड़ा उदास होकर पूछा- पर काजल को तो यहाँ चीफ गेस्ट के रूप में बुलाया गया था। 


काजल ने नेहा को इशारे में कुछ बताया। नेहा ने काजल की बात को तुरंत समझ गयी और उसने कहा कि बुलाया तो गया था पर वह अपनी आंखों के अंधेपन की वजह से नहीं आ पाई। इसलिए मैं स्कूल मैनेजमेंट को मना करने आई हूँ।


मनोज ये सब सुनकर और भी उदास हो गया। उसने नेहा से विदा लिया और धीरे-धीरे स्कूल की सीढ़िया उतरने लगा। सीढ़ियों से उतरते हुए उसने अपना मोबाईल निकाला और कुछ नम्बर टटोलने लगा। मनोज को अपने से दूर जाते देख काजल ने राहत की सांस ली और नेहा से कहा कि हमने अभी तो झूठ बोल दिया पर वह हमारा पड़ोसी है। यह झूठ ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाला।


काजल ने ये फैसला किया कि अब उसे चीफ गेस्ट नहीं बनना है वर्ना आज ही मनोज को पूरा झूठ का पता चल जाएगा। काजल ने नेहा को लेकर फिर सीढियां उतरने लगी।


उसने देखा कि मनोज फोन पर गुस्से में किसी से बात करते हुए उतर रहा है। काजल ने नेहा को समझाया कि धीरे-धीरे सीढ़ियों से उतरना वर्ना मनोज हमारी कदमों के आहट से भी पहचान जाएगा। दोनों धीरे-धीरे मनोज के पास से गुजर रहे थे मगर फोन पर चल रही बात को सुनकर काजल को झटका लग गया। वह थोड़ा रुककर मनोज की बातें सुनने लगी।


दरअसल में मनोज फोन पर NGO के लोगों को डांट रहा था कि काजल आज भी नहीं देख पा रही है। वह NGO वालों को बहुत बुरा-भला कह रहा था। आखिर में मनोज के आंखों से ये कहकर आंसू निकल पड़े कि तुमलोगों ने मेरी काजल की जिंदगी बर्बाद कर दी।


काश! मेरे पास और दो आँखे होती तो मैं दुबारा उसे अपनी आंख दान कर देता। मगर इस बार तुम्हारे पास नहीं आता। ये सब बातें सुनकर काजल की आंखों में आंसू भर आये और वह मनोज से जाकर लिपटकर रोने लगी। वह मनोज से माफी मांगने लगी और जितना झूठ नेहा से बुलवाया था उसने सब मनोज को बता दिया।


मनोज ने हँसकर कहा- अरे पगली मैं तो जानता था कि आंखे मिलने पर तुम मुझे अस्वीकार कर दोगी। इसलिए मैं तुमसे ही दूर चला आया। अब मुझे तुम्हारी जरूरत नहीं है क्योंकि जबसे मैंने तुझे अपनी आंखें दी है तब से तुम सिर्फ मेरे आंखों में ही बसती हो।


काजल रोती हुई मनोज के गले लग गयी और उसने कहा कि मुझे तुम्हारी बहुत जरूरत है। शायद मैं भूल गयी थी कि सच्ची सुंदरता क्या होती है? मुझे माफ़ कर दो। काजल अब मनोज के साथ स्कूल की सीढ़ियां चढ़ रही थी क्योंकि उसे दुनिया के सामने एक ऐसे इंसान को लाना था जो अब उसकी नजर देवता था। इसके बाद काजल और मनोज दोनों खुशी से अपनी जिंदगी बिताने लगे।


Conclusion Of Sad & Emotional True Love Story In Hindi


अगर हम किसी से प्यार करते हैं तो हमें ये मालूम होना चाहिए कि वास्तव में सच्चा प्यार क्या होता है? उसकी अमीरी-गरीबी और शरीर का बनावट नहीं देखनी चाहिए। क्या पता आप जिसको उसके कुरूप शरीर के चलते ठुकरा दिया वहीं आपको सबसे ज्यादा खुशी दे पाए और इसकी क्या गारंटी है कि अमीर आदमी ही किसी से प्यार कर सकता है लेकिन गरीब नहीं।


आप किसी से भी प्यार करें लेकिन उसको अमीरी और गरीबी के कारण उससे रिश्ता ना तोड़े और साथ ही अपने प्यार का हमेशा इज्जत करें। अगर आप ये जान गए कि निस्वार्थ प्रेम क्या होता है तो फिर आप कभी भी मिलने की खुशी और बिछड़ने के वियोग से मुक्त रहेंगे।


उम्मीद है आपको ये best 2 real sad & emotional love story in hindi काफी पसंद आई होगी। अगर आपको हमारा ये हिंदी प्रेम कहानी अच्छी लगी हो तो इसे शेयर जरूर करें।

5 मोटिवेशनल कहानियां जो आपका जिंदगी बदल देगी | प्रेरणादायक कहानियां

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5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां | Best 5 Real Life Short Motivational Stories In Hindi For Success

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5 Motivational Stories In Hindi

कहते हैं कि प्रेरणा के अभाव में आदमी अपने जीवन में कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। ये बात सही भी है कि जब तक आपको किसी काम को करने के लिए कोई प्रेरणा नहीं मिलता है आप उस काम को नहीं करते हैं।


इसलिए हम आपके लिए ऐसी 5 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां लेकर आये हैं जो आपको अंदर किसी भी काम को करने की प्रेरणा जगा देगी। तो चलिए बिना किसी देरी के top 5 real life short motivational stories in hindi शुरू करते हैं।


प्रेरक बाल कहानियां | Real Life Dar Motivational Story In Hindi


ये मोटिवेशनल कहानी है दो दोस्तों की, जो एक छोटे से गांव में रहते थे। एक बार वे दोनों किसी काम से शहर गए और वापस अपने गांव लौट रहे थे। उनको अपने गांव तक पहुंचने के लिए एक घने जंगल से गुजरना था। जब वे दोनों उस जंगल से गुजर रहे ठगे तो एक दोस्त को प्यास लगी और वो पानी ढूंढने के लिए रास्ता भटक गए।


थोड़ी ही देर बाद शाम हो गयी और रात होने ही वाली थी। अचानक उन दोनों की नजर एक गुफा पर पड़ी जो कि चारों तरफ से पेड़ों से घिरी हुई थी। उन्होंने सोचा कि रात गुजारने का यहीं जगह ठीक है। फिर दोनों ने कुछ लकड़ी इकट्ठा की और आग जलाकर बैठ गए।


रात का वक्त था और गुफा के अंदर आग जल रही थी। बाहर बिल्कुल अंधेरा था और कुछ जानवरों की आवाजें सुनाई दे रही थी। उन दोनों में से जो एक दोस्त था वो अंदर ही अंदर डरने लगा क्योंकि उसने भूत-प्रेत की कुछ कहानियां सुनी हुई थी। उसने सुना था कि रात के वक्त जंगल में भयानक आत्मायें भटकती है और अगर उनको रात में कोई आदमी मिल जाये तो वो उसको नहीं छोड़ते हैं।


जब उस लड़के ने अपने दोस्त से उन भूत प्रेतों की बात अपने दोस्त से बताई तो उसके दोस्त ने उससे हँसते हुए पूछा कि क्या तूने कभी किसी भूत को देखा है?
तो उसने कहा कि मैंने तो नहीं देखा मगर मेरे जान-पहचान के कुछ लोग हैं जिन्होंने इनको देखा है।


फिर उसके दोस्त ने उसे बहुत समझाने की कोशिश किया कि इस तरह की बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं। अब तुम सो जाओ और मुझे भी सोने दो अब मुझे बहुत तेज नींद आ रही है।


ये कहकर उसका दोस्त वहीं सो गया। लेकिन उसका एक और दोस्त जो अंदर से बिल्कुल डरा हुआ था वो सोने की बहुत कोशिश किया लेकिन उसको डर से नींद नहीं आ रही थी। उसको लग रहा था कि शायद यहाँ पर कहीं कोई है।


उस आग के वजह से पत्थरों पर परछाइयां बन रही थी तो उसको भी देख कर वो डर रहा था। फिर कुछ घन्टे तक ऐसे ही चलता रहा क्योंकि वो भी थका हुआ था तो उसको भी कुछ देर के बाद नींद आ गयी।


जैसे ही उसको नींद आया उसके कुछ देर बाद ही उसको बुरा सपना दिखाई देने लगा। उसने देखा कि सपने में एक बहुत ही भयानक परछाईं उसके नजदीक बढ़ती हुई आ रही है। लड़का अंदर ही अंदर बहुत डरते जा रहा था। वो देख रहा था कि परछाई उसके और पास चली आ रही थी और उस परछाई में एक हाथ उसको नजर आ रहा था जिसके बड़े-बड़े नाखून थे। धीरे-धीरे वो हाथ उसकी तरफ बढ़ता चला गया और उसके गले तक पहुँचने ही वाला था कि तभी वो डर कर के उठ गया।


फिर उसने अपने दोस्त को जोर से पकड़कर के उठाया और उसने अपने दोस्त को बताया कि उसके साथ में क्या हुआ है? लड़के की बात सुनकर उसका दोस्त फिर से हँसने लगा।


फिर उस दोस्त ने लड़के से कहा कि अगर अब तुमको दोबारा से परछाईं दिखे तो तुम वहीं कहना जो मैं तुमको कहने को कह रहा हूँ। फिर देखते हैं कि अब तेरा परछाईं क्या कर लेता है? तुमको अपने अंदर ही अंदर बोलना है कि मैं तुझसे नहीं डरता हूँ सामने आकर दिखा।


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उसके दोस्त ने वैसा ही करने को कहा। फिर दोनों सो गए। थोड़ी ही देर बाद दोबारा से उसके सपने में वहीं परछाईं नजर आयी और वो परछाईं धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगी। लेकिन इस बार वो उस परछाई से डरा नहीं बल्कि उसने अपनी पूरी हिम्मत जुटाकर के उसने वहीं कहा कि मैं तुझसे नहीं डरता सामने आकर दिखा। वो बार-बार ऐसा ही कहता रहा।


जैसे-जैसे वो ऐसा बोलने लगा परछाईं छोटी होती चली गयी और उससे दूर होने लगी। वो बोलता रहा वो परछाईं छोटी होती रही और धीरे-धीरे वो परछाईं गायब हो गयी। बिल्कुल ऐसा ही हमारी जिंदगी में होता है।


हमारे अंदर जितने भी डर है उससे हम जितना भी डरेंगे हम उतना ही छोटे होते चले जाते हैं और वो डर उतने ही बड़े होते चले जाते हैं। लेकिन अगर हम अपने डरों से नहीं डरते हैं बल्कि उसका डंटकर सामना करते हैं तो दुनिया का ऐसा कोई भी डर नहीं है जो कि हमें डरा पाये।


प्रेरणा देने वाली कहानी | Best Motivational Story in Hindi For Students With Moral


एक बार की बात है जब कुछ साइंटिस्ट ने मिलकर नया एक्सपेरिमेंट किया। उन्होंने एक बहुत बड़ा पिंजरा लिया और बहुत सारे बन्दरों को एक साथ रख दिया। वहाँ पर एक सीढ़ी लगा दी। उस सीढ़ी के सबसे ऊपर कुछ केले रख दिये।


फिर वैज्ञानिकों ने मिलकर ऑफ ये उपाय किया कि जैसे ही कोई बन्दर केले लेने के लिए ऊपर चढ़े उसके ऊपर ठंडे पानी की बारिश करने लगते। जैसे ही कोई बन्दर ऊपर चढ़ता उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता तो वे तुरंत नीचे उतर जाते थे। फिर पानी को बंद कर दिया जाते थे।


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फिर दुबारा से कोई बन्दर केले लेने के लिए सीढ़ी पर चढ़ता दुबारा उस पर पानी गिरा दिया जाता था और बन्दर फिर नीचे आ जाते थे। बन्दरों ने इसका मतलब ये निकाला कि जैसे ही कोई सीढ़ी के ऊपर चढ़ता है तो उसके ऊपर ठंडा पानी गिरता है।


फिर उसके बाद में जैसे ही कोई भी बन्दर सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश भी करता तो बाकी के बन्दर सब इकट्ठे होकर के उसको पकड़ते फिर मारते-पीटते हुए उसको नीचे गिरा देते थे। फिर दुबारा कोई बन्दर ऐसा करता था तो उसके साथ भी ऐसा ही किया जाता था।


फिर उन वैज्ञानिकों ने एक नई तरकीब सोची। उन्होंने 5 बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नए बन्दर को उस पिंजरे के अंदर डाल दिया। अब उस नए वाले बन्दर को इन सब बातों के बारे में नहीं पता था। उसको जैसे ही सीढ़ी के ऊपर केले नजर आए वो तुरन्त सीढ़ी के ऊपर चढ़ने लगा।


अबकी बार वैज्ञानिकों ने कोई बारिश नहीं किया लेकिन फिर भी उसको बाकी के बन्दरों ने पकड़ा और पीटना शुरू कर दिया। इस बन्दर को समझ नहीं आया कि उसको क्यों मारा जा रहा है? फिर उसने दुबारा शुरू कोशिश किया। इस बार जैसे ही उसने दुबारा सीढ़ी पर चढ़ने की कोशिश किया तो बन्दरों ने फिर से उसको मारना शुरू कर दिया।


इस तरह होता देख नए बन्दर के दिमाग में ये बैठ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना है। जो भी इस सीढ़ी पर चढ़ेगा उसको मार पड़ेगी। लेकिन सीढ़ी पर चढ़ने के लिए क्यों मार पड़ती है उसको कुछ मालूम नहीं था, पर उसके दिमाग में ये बैठ गया कि अब सीढ़ी पर नहीं चढ़ना है और ना ही किसी को चढ़ने देना है।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने चार बन्दरों में से एक बन्दर को बाहर निकाला और एक नया बन्दर को अंदर डाल दिया। वो नया वाला बन्दर भी वैसा ही किया जो इसके पहले वाले बन्दर ने किया था। वो अंदर जाते ही केले लेने के लिए जैसे ही सीढ़ी पर चढ़ा बाकी के  चार बन्दरों ने उसे पीटना शुरू कर दिया और उसको नीचे गिरा दिया।


उसको कुछ समझ नहीं आया और उसने दुबारा कोशिश किया फिर उसको बन्दरों ने पिट कर नीचे उतार दिया। उस बन्दर को भी कुछ दिन में समझ में आ गया कि सीढ़ी पर चढ़ना मना और उसने सीढ़ी पर चढ़ना बंद कर दिया।


फिर वैज्ञानिकों ने उन पुराने तीनों बन्दरों को एक-एक करके बाहर निकाला और उनके जगह पर तीन नए बन्दरों को अंदर डाल दिया। अब ये पांचों बन्दर नए थे। लेकिन किसी को भी ये पता नहीं था कि उस सीढ़ी पर चढ़ना मना क्यों है? लेकिन उन सबके दिमाग में ये बैठ गया था कि सीढ़ी पर चढ़ने से मार पड़ती है। फिर बन्दरों ने सीढ़ी पर चढ़ना ही बंद कर दिया। जबकि अब कोई ठंडे पानी की बारिश भी नहीं हो रही थी।


वो चाहते तो आराम से सीढ़ी पर चढ़ते, केले को तोड़ते और आपस में बांटकर के खा लेते। बिल्कुल ये सब बात भी हमारे जीवन में लागू होता है। हजारों साल पहले कोई रीति-रिवाज बनी होती है। उसके पीछे कोई न कोई वजह होती है लेकिन वो वजह खत्म होने के बाद भी वो प्रथा चलती रहती है। वो रीति-रिवाज चलती रहती है परंतु किसी भी ये जानने की हिम्मत नहीं होती है कि वो क्यों कर रहे हैं और किसलिए कर रहे हैं? बस सबको ये पता है कि ऐसा ही होता है।


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जैसा कि आपने जो अभी कहानी सुनी उसमें बन्दर है जो ये जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, उनको किसी से सवाल पूछना नहीं आता है। परंतु हम तो इंसान है हम किसी से कोई भी सवाल पूछ सकते हैं। लेकिन अगर हम अनजाने में कोई हमेशा की तरह गलती कर रहे हैं और किसी से उसके बारे में जानने की कोशिश नहीं कर रहे हैं तो फिर हमारे में और जानवरों में कोई अंतर नहीं है।


युवाओं के लिए प्रेरणादायक कहानी | Real Life Short Motivational Story in Hindi for Depression


एक छोटा सा गांव था। वहाँ पर एक आदमी पहाड़ पर पत्थर तोड़ने का काम करता था। उसको अपनी जिंदगी से कोई शिकायत नहीं थी। वो पूरा दिन काम करता, मेहनत करता और शाम को जो पैसा मिलता था उसे लेकर अपने परिवार के साथ में समय बिताता और चैन से सो जाता।


एक दिन की बात है जब वो आदमी अपना काम खत्म करके अपने घर जा रहा था तो रास्ते में चलते-चलते उसके मन में एक ख्याल आया कि ये भी कोई जिंदगी है कि सुबह से शाम तक मैं पत्थर तोड़ने का काम करता हूँ और शाम को मुझे थोड़े से पैसे मिलते हैं। इसमें मुश्किल से मेरा और मेरे परिवार का गुजारा हो पाता है।


काश! कुछ ऐसा हो जाये, मुझे कोई ऐसी शक्ति मिल जाये कि जो भी मैं चाहता हूँ वो सच हो जाये। वो अपने घर पर गया और खाना खाया लेकिन उसका ध्यान खाने पर नहीं था। उसके दिमाग में यहीं चल रहा था कि काश! मैं भी अमीर होता। वो आदमी यहीं सोचते-सोचते सो गया।


रात को सोते वक्त उसने सपने में देखा कि जब वह रोज की तरह वो अपना काम खत्म करके अपने घर लौट रहा था तभी अचानक उसने से एक बहुत बड़ा घर देखा। उस घर को देखकर उसके मन में आया कि काश! ये घर मेरा होता और मैं इस घर का मालिक होता।


उसके ऐसा सोचते ही वो उस घर का मालिक बन गया। उसको यकीन ही नहीं ह रहा था कि उसने जो सोचा वो बन चुका है। लेकिन उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी क्योंकि उसको अपने घर के बाहर जोड़ से कुछ शोर सुनाई दिया। जब उसने बाहर देखा तो पाया कि एक बहुत बड़ी रैली निकल रही है और उस रैली के बीच एक बहुत बड़ा नेता हाथ हिला रहा है। वहाँ पर जितने भी लोग खड़े थे सब उसके नाम के नारे लगा रहे थे। सब उसके आगे हाथ जोड़कर खड़े थे, सब उसको देखने के लिए तड़प रहे थे।


तब उसको ये एहसास हुआ कि उस नेता के आगे मैं कितना छोटा हूँ। उसके मन में ख्याल आया कि काश! मैं एक इतना बड़ा नेता होता और मेरे पास भी उतनी ही पावर होती जितना कि इसके पास में है। बस उसको इतना सोचने की देर थी कि वो नेता बन गया। उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि उसके आसपास में हजारों लोगों की भीड़ थी और सब उसको देखने के लिए तरस रहे थे।


लेकिन उसकी ये खुशी भी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। धूप बहुत तेज थी। उस नेता को इतनी धूप और गर्मी में रहने की आदत नहीं थी। धूप की वजह से उसको चक्कर आ गया और वो बेहोश होकर गिर पड़ा। फिर उसको ये एहसास हुआ कि एक नेता सबसे ताकतवर नहीं है ये जो सूरज है यही सबसे ताकतवर है। फिर उसको ये मन में आया कि काश! मैं सूरज बन जाता तो मेरे आगे कोई नहीं टिक पायेगा। 


उसको इतना सोचने की देर थी कि वो सूरज बन गया और वो खुशी से पागल हो गया क्योंकि वो पूरी दुनिया को रोशन कर रहा था। पूरी दुनिया में ऐसा कोई नहीं था जो उसकी रोशनी की रोक सके।


लेकिन उसको ये खुशी भी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी। कुछ देर के बाद आसमान में कुछ काले बादल आये जिसने सूरज की रोशनी को रोक दिया। फिर उसको गए एहसास हुआ कि इस दुनिया में ऐसा भी कोई है जिसमें सूरज के प्रकाश को रोकने का दम है। फिर उसके मन मे गए ख्याल आया कि काश! मैं बादल बन जाता। उसको इतना सोचना था कि वो बादल बन गया और आसमान में उड़ने लगा। उसको ऐसा लगा कि मैं आसमान में उड़ रहा हूँ। मैं जहाँ चाहे वहाँ जा सकता हूँ।


लेकिन कुछ देर बाद वहां पर बहुत तेज हवाएं आयी और उन बादलों को उड़ा कर ले गयी। फिर उसको ये समझ आया कि गए जो बादल है वो सूरज की रोशनी को तो रोक सकता है लेकिन इन हवाओं को नहीं रोक सकता। फिर उसको एहसास हुआ कि काश! मैं हवा बन जाऊं और वो हवा बन गया।


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हवा बनने के बाद में उसको एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव हुआ। वो जब मर्जी आराम से बहता और जब मर्जी तूफान बन करके जिसको भी चाहे उड़ा करके ले जाता। उसको ये विश्वास होने ही लगा था कि इस दुनिया में सबसे ज्यादा शक्तिशाली मैं हूँ तभी उसकी सामना एक बड़े से पहाड़ से हुई। उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी लेकिन वो उस पहाड़ को इतना सा भी नहीं हिला सका। तब उसको ये एहसास हुआ कि इस दुनिया में कोई और भी है जो इस हवा से भी शक्तिशाली है, जिसमें हवा को भी रोकने का दम है।


फिर उसके मन में आया कि काश! मैं पहाड़ होता। उसको इतना सोचना था कि वो पहाड़ बन गया। लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसकी खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई। उसको एक जानी पहचानी से आवाज सुनाई दी। साथ ही साथ उसको कहीं से दर्द होने लगा। उसको एहसास हुआ कि कोई ऐसा है जो उसको तोड़ रहा है, उसको मार रहा है। दर्द से वो चीखने लगा और उसके मन में ये आया कि काश! मैं वो बन जाऊं जो कि इस पहाड़ को तोड़ने का दम रखता है।


लेकिन इस बार उसकी ये ख्वाहिश पूरी नहीं हुई और वो जोर से रोने लगा, चीखने-चिल्लाने लगा, उसने अपनी पूरी जान लगा दी लेकिन वो इस बार वैसा नहीं बन पाया। उसका दर्द बढ़ता ही चला था और दर्द की वजह से जैसे ही उसकी नींद खुली तो उसके सामने एक शीशा था और शीशे में उसने खुद को देखा तो उसको समझ आ गया कि वो क्यों नही बन पा रहा था जो वो बनना चाहता था क्योंकि असलियत में वहीँ हूँ।


इंसान के साथ भी वैसा ही होता है। वो जो होता है उसको लगता है कि वो सबसे कमजोर है जबकि ऐसा नहीं होता है। आप बस ते सोचिए कि आज आप जैसे भी है दुनिया में सबसे ज्यादा ताकतवर है। आप हर मुश्किल को क्षण भर में खत्म कर सकते हैं। अगर आप ऐसी सोच रखते हैं तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको दुःखी नहीं कर सकता।


Emotional Motivational Story In Hindi For Depression | जोश भर देने वाली प्रेरक लघु कहानियां


ये मोटिवेशनल कहानी है दो सच्चे दोस्तों की। उनकी दोस्ती की शुरुआत कुछ ही दिन पहले एक हॉस्पिटल के कमरे में हुई थी। जहाँ पर वे दोनों एडमिट थे। दोनों दोस्तों में से जो एक दोस्त था उसको कुछ ही दिन पहले पैरालिसिस का अटैक आया था। जिसकी वजह से उसकी गर्दन के नीचे की पूरी बॉडी लकवाग्रस्त हो गया था और वो अपनी उंगली तक नहीं हिला सकता था।


पूरे दिन उसके पास जो भी नर्स आती थी उनसे एक ही बात कहता था कि मुझे कोई ऐसी इंजेक्शन दे दो जिससे कि मैं मर जाऊं। अब मैं जीना नहीं चाहता अब मैं ऐसी जिंदगी जी करके क्या करूँगा।


उसका जो दोस्त उस कमरे में था जो चल-फिर नहीं सकता था। वो रोज सुबह और शाम को उस कमरे में खिड़की के पास में जाकर के खड़ा हो जाता था और अपने दोस्त को बताता था कि उस खिड़की के बाहर क्या चल रहा है?


बिल्कुल नीला आसमान, सफेद बादल, उड़ते हुए पंक्षी और हल्की-हल्की हवा प्रकृति की सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं। मतलब बाहर क्या हो रहा है वो सबके बारे में बताता था। शुरू में जब उसने बताना शुरू किया तो उसके दोस्त पर कोई ज्यादा असर नहीं पड़ रहा था लेकिन धीरे-धीरे उसको बाहर की दुनिया देखने की चाह होने लगी।


अब वो सुबह का इंतजार करने लगा कि जल्दी से सुबह हो और मेरा दोस्त मुझे बताए कि बाहर में क्या हो रहा है?  कुछ दिन तक ऐसे ही चलता रहा। फिर एक दिन जब वो उठा तो उसने देखा कि सामने वाला बेड खाली है।


फिर उसने नर्स को बुलाया और पूछा कि क्या उस लड़के को हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गयी है। तो नर्स ने कहा कि उन्होंने तो आपको बताया ही होगा कि उनके पास कुछ ही दिन बाकी है और कल रात को उनकी मृत्यु हो गयी है।


के सुनकर के उसकी पूरी उम्मीद टूट गई क्योंकि केवल उसका दोस्त ही था जिसने उसने बाहर की दुनिया से जोड़ा हुआ था। जिसके वजह से वो जान पाता था कि बाहर की दुनिया में क्या हो रहा है और ये दुनिया कितनी खूबसूरत है?


कुछ दिन तक तो ऐसे ही चलता रहा और वो लड़का अब जीने की चाह छोड़ दी। लेकिन दूसरे तरफ से उसको कहीं न कहीं एक नई चाह पैदा हुई कि काश! मरने से पहले एक बार मैं खुद अपनी आंखों से इस खिड़की के बाहर देखूं कि ये दुनिया कैसी है?


जैसे-जैसे उसके अंदर ये चाह बढ़ने लगी उसके अंदर एक अजीब सी एनर्जी महसुस होने लगी। फिर एक दिन उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी और किसी तरह से वो बेड से नीचे गिरा और दीवाल पकड़ के वो किसी तरह से उस खिड़की के पास पहुचा और खिड़की को पकड़ के खड़ा हुआ वो खिड़की के बाहर देखा।


लेकिन खिड़की के बाहर देखते ही वो लड़का गुस्से से भर गया। उसने नर्स को जोर से आवाज लगाई और जैसे ही नर्स आयी और उसने नर्स से पूछा कि ये तुमने क्या किया, इस खिड़की के बाहर तुमने काली दीवार क्यों खड़ी कर दी?


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नर्स को समझ नहीं आया कि वो लड़का क्या बोल रहा है और वो बोली मुझे यहाँ आये हुए 5 साल हो गए। जब से मैं यहां आयी हूँ तब से ये काली दीवारें यहां पर है। तब जाकर उसको ये समझ आया कि उसका दोस्त उससे झूठ बोल रहा था और उसने नर्स से पूछा- अगर ये काली दीवार पिछले 5 साल से यहां है तो मेरे दोस्त ने मुझसे झूठ क्यों कहा?


ऐसा सुनकर उसके नर्स ने थोड़ा सा मुस्कुराई और बोली- मैं ये तो नहीं जानती कि उन्होंने आपसे झूठ क्यों कहा? लेकिन मैं इतना जरूर जानती हूँ कि जो भी कुछ उन्होंने आपसे कहा इसी वजह से आप अभी अपने पैरों पर खड़े हैं।


इस मोटिवेशनल कहानी से हमें ये सीखने को मिलता है कि जो हमारे शब्द है उसमें इतनी पावर है जिसकी कोई सीमा नहीं है। वो किसी आदमी को गिरा भी सकता है और किसी को उठा भी सकता है। तो अब आपके ऊपर है कि अपने इस पावर को सही तरह से उपयोग करते हैं या फिर उसका गलत इस्तेमाल।


बच्चों के लिए प्रेरणादायक कहानी | Short Motivational Story In Hindi For Kids


एक बार एक छोटी सी बच्ची हाथ में मिट्टी की गुल्लक लेकर के  भागती हुई मेडिकल के दुकान पर गयी। वो काफी देर तक वहाँ पर खड़ी रही लेकिन दुकानदार का उस पर ध्यान नहीं गया क्योंकि दुकान पर बहुत सारे लोग खड़े हुए थे।


भीड़ ज्यादा होने की वजह से बार-बार दुकानदार से बोलने के बाद भी जब उसने ध्यान नहीं दिया तो उस बच्ची को गुस्सा आया और उस मिट्टी की गुल्लक को वहीं दुकानदार के काउंटर पर जोर से रख दिया।


जिसके बाद वहाँ पर जितने भी लोग थे और दुकानदार था सब उस बच्ची को देखने लगे गए। फिर उस दुकानदार ने उस बच्ची से पूछा कि क्या बात है, आपको क्या चाहिए?


बच्ची ने बड़े ही भोलेपन से बोली कि मुझे एक चमत्कार चाहिए। ये सुनकर दुकानदार को और ना ही वहाँ पर जितने भी लोग थे उन सभी को कुछ समझ नहीं आया। सारे लोग उसकी तरफ देखने लगे। फिर दुकानदार ने बच्ची से कहा कि बेटा यहां चमत्कार तो नहीं मिलता है।


बच्ची को लगा कि दुकानदार झूठ बोल रहा है तो बच्ची ने कहा कि मेरे गुल्लक में बहुत पैसे हैं। आप बताओ आपको कितने पैसे चाहिए। लेकिन मैं आज यहां से चमत्कार लेकर के ही जाऊंगी।


उसी दुकान पर एक दूसरा आदमी खड़ा था। उसने उस बच्ची से पूछा कि आपको चमत्कार क्यों चाहिए? तब उस बच्ची ने अपनी पूरी बात बताई। अभी कुछ दिन पहले मेरे भाई के सर में बहुत तेज दर्द हुआ तो मेरे पापा और मम्मी उसको हॉस्पिटल ले गए। लेकिन मेरा भाई कई दिन तक घर नहीं आया।


मैंने कई बार अपने पापा से पूछा कि भाई कहाँ है? लेकिन मेरे पापा ने मुझे कुछ नहीं बताया। उन्होंने बार-बार यहीं कहा कि वो कल आ जाएगा लेकिन वो आ ही नहीं रहा। फिर मैंने देखा कि मम्मी रो रही है और पापा मम्मी सर कह रहे थे कि उसके इलाज के लिए जितने पैसे चाहिए उतने मेरे पास में नहीं है। अब उसको कोई चमत्कार ही बचा सकता है।


तब मुझे लगा कि मेरे पापा के पास इतने पैसे नहीं है तो क्या हुआ मेरे पास में तो है। मेरे पास जितने भी पैसे थे वो सारे लेकर के मैं इस दवाई के दुकान पर आ गयी। फिर उस आदमी ने उस बच्ची से पूछा कि तुम्हारे पास में कितने पैसे है?


ये सुनते ही उस बच्ची ने अपनी गुल्लक उठायी और जमीन पर पटक कर के तोड़ दिया और पैसे गिनने लगी। बाकी सब लोग उसको खड़े होकर उसको देख रहे थे। थोड़ी देर बाद उसने सारे पैसे अपने हाथ में लिए और बोली मेरे पास पूरे उन्नीस रुपये हैं।


वो जो आदमी वहाँ खड़ा था वो थोड़ा सा मुस्कुराया और बोला- तुम्हारे पास में तो पूरे पैसे हैं इतने का ही तो चमत्कार मिलता है। ये सुनकर वो बच्ची बहुत खुश हो गयी और बोली चलो मैं अपने पापा से आपको मिलवाती हूँ। बाद में पता लगा कि वो आदमी कोई आदमी नहीं था बल्कि उस शहर का बहुत बड़ा न्यूरोसर्जन था।


उसने सिर्फ उन्नीस रुपये में उस बच्ची के भाई की सर्जरी किया और कुछ ही दिन बाद उसका भाई ठीक होकर के घर वापस आ गया। फिर कुछ दिन बाद वो बच्ची, उसका भाई और उसके मम्मी-पापा चारों एक जगह पर बैठे हुए बात कर रहे थे कि उसकी मम्मी ने उसके पापा से पूछा कि अब तो आप बता दो कि ये चमत्कार आपने किया कैसे? तो उन्होंने अपनी बेटी की तरफ देखा और बोले कि ये चमत्कार मैंने नहीं इसने किया है।


इस प्रेरणादायक कहानी से सीखने वाली एक बहुत बड़ी बात है जो हम इस छोटी सी बच्ची से सीख सकते हैं की जिंदगी में कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें कोई रास्ता नहीं नजर आता है और हम हिम्मत हार जाते हैं।


तब हमारे अंदर एक बच्चा होता है जो कोशिश करने से कभी भी पीछे नहीं हटता है। वो हार मानने को तैयार नहीं होता है क्योंकि उसको ना शब्द का ज्ञान नहीं होता है। वो बच्चा जिसके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है क्योंकि वो हर हाल में कोशिश करता ही रहता है और फिर आपने एक प्रसिद्ध वाक्य तप सुना ही होगा- कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।


आपको हमारा ये 5 प्रेरणादायक कहानियां कैसी लगी आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं। साथ ही अगर आपको best 5 real life short motivational stories in hindi for success अच्छी लगी हो तो इसे शेयर करना न भूलिएगा। इतने देर तक हमारे साथ जुड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

जिंदगी बदलने वाली 5 मोटिवेशनल कहानियां | 5 Motivational Stories

जिंदगी बदलने वाली 5 मोटिवेशनल कहानियां | 5 Motivational Stories

Top 5 Short Motivational Stories In Hindi For Success Life | जीवन को बदल देने वाली 5 अच्छी प्रेरणादायक कहानियां

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Top 5 Motivational Stories In Hindi

आज हम जीवन को बदल देने वाली 5 अच्छी प्रेरणादायक कहानी के बारे में जानेंगे जो हमारे जीवन को अच्छी सीख देगी। इन 5 हिंदी कहानियों में जीवन से जुड़ी हर प्रकार की कठिनाइयों को कैसे दूर कर सकते हैं? ये 5 कहानियां आपके जीवन से जुड़ी हर सवालों का जवाब देगी। तो चलिए बिना किसी देरी के उन कहानियों के बारे में जानते हैं।


असली शांति की परिभाषा | Real Life Short Inspirational Stories In Hindi


एक बार की बात है जब एक बहुत बड़ी पेंटिंग संस्था ने ये प्रचार करवाया कि जो भी पेंटर शांति को प्रदर्शित करने वाली सबसे अच्छी पेन्टिंग बनाएगा उसको 10 मिलियन डॉलर आ इनाम मिलेगा।


ये बात देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गयी और पूरी दुनिया से हजारों पेंटर अपनी-अपनी पेंटिंग उस contest में भाग लेने के लिए भेजी। उन हजारों पेंटिंग में से मात्र 100 पेंटिंग को जजों ने फाइनल के लिए चुना और उन 100 पेंटरों को प्रदर्शनी में बुलाया गया। साथ ही साथ मीडिया को भी बुलाया गया।


उन मीडिया वालों के साथ हजारों के संख्या में भीड़ जमा हुई थी। इस contest का इनाम इतना ज्यादा था कि सबको ये जानने की उत्सुकता थी कि इतना बड़ा इनाम आखिर कौन जीतेगा? वो पेंटिंग कैसी होगी, कितनी सुंदर होगी, उसको बनाने वाला कौन होगा? ऐसे-ऐसे सवाल लोगों के मन मे चल रहे थे।


आखिरकार वो दिन आ गया जब उसका विजेता घोषित किया जाने वाला था। वहाँ पर सब पेंटिंग बहुत ही सुंदर थी और एक से बढ़कर एक थी। उसमें से कुछ पेंटिंग ऐसी थी जिसको देखने के लिए पर सबसे ज्यादा भीड़ थी। उन सब पेंटिंग में से एक पेंटिग ऐसी थी जिसमें बिल्कुल साफ पानी की नदी बह रही था, जिसके पीछे कुछ पहाड़ थे और उन बर्फ जमी हुई थी, फिर पहाड़ के पीछे से सूर्य का प्रकाश निकल रहा था।


एक और पेंटिंग ऐसी थी जिसमें पेंटर ने बड़े ही खूबसूरती से शांति को दर्शाया था। यानी कि एक झील में बिल्कुल शांत पानी थी। इतना शांत पानी था कि उसके अंदर के सारे चीज को बड़े ही आसानी से देखा जा सकता था, उसमें बिल्कुल अंधेरे आसमान में तारे चमक रहे थे और एक चांद चमक रहा था।


उसके अलावा एक पेंटिंग ऐसी थी जिसमें बिल्कुल सफेद बादल थे, नीला आसमान था और बिल्कुल हरे- हरे घास थे। यानी कि ये सब पेंटिंग ऐसी थी जिसको देखकर मन को शांति और सुकून कैसे मिले ये सारे गुण उस पेंटिंग में थी।


सारी पेंटिंग एक से बढ़कर एक थी जिसके चलते contest बहुत ही कड़ा बन चुका था। इसलिए जजों को किसी एक पेंटर को विजेता घोषित करना काफी मुश्किल हो गया था। लेकिन आखिरकार किसी तरह एक विजेता को चुना गया और एक पेंटिंग को उन सबमें से चुना गया। सामने सारे लोग, मीडिया वाले, और बहुत सारे लोगों की भीड़ इकट्ठा थी। जबकि जिज्ञासा बढ़ती ही जा रही थी कि आखिर इसका विजेता कौन होगा?


तभी जजों ने उस पेंटिंग को सबके सामने लाया तो वहाँ बैठे सारे लोग हैरान रह गए और सब एक-दूसरे का मुह देखने लगें। किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिरकार हो क्या रहा है? इसका कारण था कि जिस पेंटिंग को विजेता के लिए चुना गया था वो दूर-दूर तक शांति को नहीं दर्शा रही थीं। तो सबको लगा कि शायद जजों से कोई गलती हुई है या फिर गलती से किसी दूसरे पेंटिंग को दिखा दिया गया है।


उनमें से कुछ पेंटर्स एक साथ गए और जाकर के उनसे पूछा- क्या ये गलती से कहीं दूसरी पेंटिंग तो आपने नहीं दिखा दी है? तो वहाँ पर बैठे जज ने कहा- नहीं इसी पेंटिंग को आज के विजेता के लिए चुना गया है। सारे पेंटर्स ये जवाब सुनकर गुस्से से भर गए और सबने मिलकर इसका बहिष्कार किया।


ये देखकर सारे मीडिया वाले अपनी-अपनी जगह से उठकर उन जजों के पास गए और उनसे पूछा कि आप इस पेंटिंग को विजेता होने का कारण बताइये। ये सुनकर जज थोड़ा मुस्कुराए और बोले- एक बार ध्यान से देखिए इस पेंटिंग को। शायद आपको कुछ नजर आए जो आपको दूर से नजर नहीं आ रहा है। क्योंकि आप सबने ने एक चीज तो देख ली कि इस पेंटिंग में आंधी है, तूफान है, चारो तरफ सब तहस-नहस हो रहा है, आसमान में बिजली कड़क रही है, काले बादल है।


लेकिन आपने अभी तक एक चीज नहीं देखी कि इस पेंटिंग में एक घर भी है। उस घर में एक छोटी सी खिड़की है। जहाँ पर एक आदमी खड़ा हुआ है। ध्यान से जाकर के देखिये वो जो आदमी खड़ा होकर बाहर देख रहा है उसके चेहरे पर कोई डर नहीं है बल्कि एक हल्की सी मुस्कान है। एक ठहराव है, एक सुकून है और यहीं है शांति का असली मतलब


यानी कि शांति का ये मतलब नहीं है कि हमारे बाहर सबकुछ शांत है और फिर हम शांत है क्योंकि ऐसी दूसरी तरफ जिसका मन शांत है उसके बाहर चाहे कुछ भी हो रहा है चाहे बाहर आंधी-तूफान क्यों न आ रहा हो, चाहे उसके आसपास सब तहस-नहस ही क्यों न हो रहा हो लेकिन वो अंदर से हमेशा शांत रहेगा। यहीं है शांति का असली मतलब।


एक छोटे बच्चे की प्रेरणादायक कहानी | Top Motivational Stories In Hindi For Kids


एक बार की बात है। एक छोटे से गांव में एक आदमी रहता था। उसके घर के पास में एक पहाड़ था। जहाँ पर वो रोज सुबह में जाता और थोड़ी देर के लिए वो बैठता और फिर वापस आ जाता। रोज की तरह ही वो सुबह-सुबह उस पहाड़ पर जा रहा था। पीछे से उसका छोटा सा बेटा आया और आकर के उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- मैं भी आपके साथ चलूंगा।


उसने पहले तो अपने लड़के को समझाया और मना किया। फिर कहा- रास्ता छोटा है और चढ़ाई बहुत ज्यादा है तो तुम मेरे साथ नहीं चल पाओगे। लेकिन जब उसका बेटा नहीं माना तो दोनों पहाड़ पर चढ़ने लगे।


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अकबर बीरबल की बेहद ही रोचक कहानी।


पिता ने बेटे का हाथ कस के पकड़ा हुआ था। बाएं हाथ की तरफ पहाड़ थे और दाहिने हाथ के तरफ गहरा खाई था। रास्ता बहुत ही पतला और छोटा था। वे दोनों पहाड़ की चोटी पर पहुचने ही वाले थे कि रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर आता था।


पिता को पता था कि रास्ते में ये पत्थर रोज आता है और बगल से निकल गया क्योंकि वो रोज आता था। लेकिन जो उसका बेटा था उसका ध्यान कहीं और था। उसका घुटना उस पत्थर से जाकर टकड़ा गया और जोर चीखने लगा। जैसे ही वो चीखा उसकी आवाज उन पहाड़ों में गूंजने लगी। 


इससे पहले उस बच्चे ने कभी भी अपनी आवाज नहीं सुनी थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ क्या हो रहा है और थोड़ा सा घबरा गया। उसे लगा कि शायद कहीं कोई है जो छुपकर के उसे देख रहा है और उसका मजाक उड़ा रहा है।


फिर उस बच्चे ने बोला कि कौन हो तुम? फिर वो आवाज पहाड़ों से टकड़ा कर उसको सुनाई दिया। जब उस बच्चे ने दुबारा अपनी आवाज सुनी तो उसको गुस्सा आ गया। उसे लगा कि कौन है जो मेरा मजाक उड़ा रहा है? फिर उसने गुस्से से कहा- मैं तुमको छोडूंगा नहीं। फिर जैसे ही उसने इस आवाज को सुना वो लड़का घबरा गया।


उसके पिता ये देखकर समझ गए कि ये क्या हो रहा है? उसने अपने पिता का हाथ और जोर से पकड़ लिया। उसने कहा- कौन है जो मुझे इतना तंग कर रहा है? उसके पिता ये सुनकर थोड़ा सा मुस्कुराए और खाई की तरफ देखकर जोर से बोले- मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


ये सुनकर वो बच्चा हैरान हो गया। उसे समझ नहीं आया कि उसके साथ हो क्या रहा है? वहीं इंसान जो उसका मजाक उड़ा रहा है, उसको तंग कर रहा है वो मेरे पिता से कह रहा है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


उसके पिता ने अपने बेटे के तरफ देखा और समझ गए कि उसके मन में क्या चल रहा है? तो उन्होंने दुबारा जोर से कहा- तुम बहुत अच्छे हो। ऐसा सुनकर उनका बेटा भी थोड़ा सा मुस्कुराया और अपने पिता से पूछा कि ये क्या हो रहा है?


फिर उसके पिता ने अपने बेटे को समझाया और कहा- ये जो तुम आवाज सुन रहे हो ये किसी और की नहीं है बल्कि ये तुम्हारी ही आवाज है जो पहाड़ों में गूंज रही है जो इन पहाड़ों में गूंज रही है। तुम्हे अपनी ही आवाज सुनाई दे रही है। जैसा तुम बोलते हो ठीक वैसा ही तुमको सुनाई देता है।


अगर तुम गुस्से से कुछ कहोगे तो तुमको गुस्से वाला आवाज ही सुनाई देगा लेकिन अगर तुम कुछ कहोगे तो वो आवाज भी अच्छी सुनाई देगी। बिल्कुल इसी तरह हमारी जिंदगी में भी होता है। जैसा तुम अपने मन में इस जिंदगी के बारे में सोचते हो ठीक उसी तरह ये जिंदगी भी बिल्कुल तुम्हारे लिए वैसी ही हो जाती है।


अगर तुम मन ही मन अपने आप को ये बोलते रहोगे की मेरी जिंदगी तो बहुत बुरी है तो तुम्हारी जिंदगी सच में बहुत बुरी हो जाएगी। वहीं पर अगर तुम अपने जिंदगी से प्यार करोगे तो तुम्हारी जिंदगी भी तुमसे प्यार करेगी। ये बात सुनकर लड़का बहुत आश्चर्यचकित हो गया।


फिर वे दोनों उस पहाड़ की चोटी पर गए। लेकिन बच्चे के दिमाग में ये बात घूम रही थी और फिर वो बच्चा खिलखिलाकर हँसा और उसने अपने दोनों हाथों को खोलते हुए अपनी पूरी ताकत लगाकर बोला- ये जिंदगी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।


जीवन को सीख देने वाली कहानी | Short Inspirational Moral Stories For Adults In Hindi


एक बार की बात है, एक बहुत बड़ा नेता एक साधु के छोटे से आश्रम में गया क्योंकि उसने उस साधु के बारे में बहुत कुछ सुना था। उसके मन में एक बात आया कि मैं भी एक बार जाकर उस साधु को देखता हूँ कि आखिर लोग उस साधु की इतनी तारीफ क्यों करते हैं?


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जब वो नेता उस आश्रम में गया तो उसने देखा कि एक छोटे से कमरे में कालीन बिछा हुआ था और वहाँ पर कुछ लोग बैठे हुए थे और उनके सामने साधु जी बैठे हुए थे। वो नेता अंदर गया तो उसके साथ चार बॉडीगार्ड भी थे और उसको ये आदत थी कि वो जहाँ पर भी जाता था लोग अपनी जगह पर खड़े हो जाते थे, उसकी तरफ देखते तय, हाथ जोड़ते थे,अपनी सर झुकाते थे लेकिन यहाँ पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।


साधु ने उसकी तरफ देखा तक नहीं, क्योंकि साधु किसी के सवाल का जवाब दे रहे थे। नेता को ऐसा देखकर गुस्सा आ गया। उसको लगा कि ये मेरी बेइजती है तो उस नेता ने साधु के बात को बीच में ही काटते हुए गुस्से से बोला- मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ। साधु उसकी तरफ देखते हुए बोले- आप थोड़ा देर रुकिए, पहले मैं इनके सवाल का जवाब दे लूँ उसके बाद मैं आपसे बात करूँगा। तबतक आप चाहे तो बैठ सकते हैं।


साधु को बस इतना कहना था कि उस नेता का चेहरा गुस्से से लाल हो गया और उसने अपना सारा गुस्सा साधु के ऊपर निकाल दिया। अभी तक वो नेता बहुत तमीज से बात कर रहा था, आदर से बात कर रहा था लेकिन अब वो गाली गलौज पर उतर आया। नेता ने साधु से कहा- तुझे पता भी है मैं कौन हूँ और तू किससे बात कर रहा है?


साधु ने मुस्कुराते हुए कहा- मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन है और आप कहाँ से आये हैं? लेकिन आप जो कोई भी है, अगर आप चाहते हैं कि मैं आपसे बात करूं या आपके सवाल का जवाब दूं तो आपको कुछ देर रुकना होगा।


साधु के ऐसा कहते ही नेता गुस्से से पागल हो गया और वहीँ सबके सामने चीखने चिल्लाने लगा। अब मैं तुझे असली औकात दिखाऊंगा। तूने मुझसे पंगा लेकर ठीक नहीं किया। तुझे पता भी है मैं तेरे बारे में क्या सोचता हूँ? साधु ने फिर उसकी तरफ देखा और बड़े ही प्रेम से कहा- मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप मेरे बारे में क्या सोचते हैं? आप जो चाहे मेरे बारे में सोच सकते हैं।


फिर उस नेता ने बोला कि तू ये सुनना चाहता है कि नहीं या फिर मैं  सबके सामने तुझे बताऊंगा कि मैं तेरे बारे में क्या सोचता हूँ? तू एक बहुत ही घटिया इंसान है, तू कोई साधु नहीं है ढोंगी है, पाखंडी है और जितने लोग यहाँ बैठे हैं उन सबको तुम बेवकूफ बना रहे हो। 


तेरा बस एक ही मकसद है कि इन लोगों के जेब में जितना भी पैसा है वो सब तेरे पास में आ जाये। तू अपने फायदे के लिए इनलोगों का इस्तेमाल कर रहा है और अब मैं तुझे नहीं छोड़ने वाला। तेरा असली चेहरा पूरी दुनिया के सामने पर्दाफाश करके रहूँगा।


उस नेता के इतना बोलने के बाद भी उस साधु के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बनी ही रही। ये देखकर वो और गुस्से से तिलमिला गया। उसने बोला कि अब मैं यहाँ एक मिनट भी नहीं रुकने वाला। लेकिन अभी भी तेरे पास में मौका है अगर तू मुझसे माफी मांग लेगा तो हो सकता है कि मैं तुझे माफ कर दूं।


इतना सब होने के बाद भी साधु शांत था और उनके चेहरे पर एक अलग सी मुस्कान झलक रही थी। उन्होंने अपनी आंखें बंद कर ली। फिर साधु ने अपनी आंखें खोली और हाथ जोड़कर कहा- मुझे आपसे कोई गिला-शिकवा नहीं है। मेरे मन में आपके लिए कोई भी गलत ख्याल नहीं है, जो भी अभी आपने मेरे बारे में कहा वो आपकी सोच थी तो मुझे आपमें कोई भी बुराई नजर नहीं आती, मुझे आप एक भले इंसान लगते हैं।


साधु के इतना कहते ही नेताजी के दिमाग सातवें आसमान पर पहुँच गया। उनके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी क्योंकि उस साधु ने वहीं कहा जो बाकी सब लोग उसको कहते थे। वो नेता खुश होकर अपने घर को चला गया और जाकर के अपने पिताजी के साथ में बैठ गया। उसके पिताजी की आंखे बंद थी और वो ध्यान में थे।


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पूरी जिदंगी उन्होंने सिर्फ लोगों की सेवा की और बदले में किसी से कुछ भी नहीं मांगी। थोड़ी देर बाद जब उन्होंने अपनी आंखें खोली और अपने बेटे को सामने देखा तो उनके बेटे के चेहरे पर एक अजीब सी खुशी थी। जो आज से पहले उन्होंने कभी नहीं देखी थी। फिर उसने एक-एक करके बताया कि आज उसके साथ क्या-क्या हुआ? मतलब उसने साधु के साथ घटी हर एक घटना को पूरे विस्तार से अपने पिता को बताया।


जब उसके पिताजी ने ये सब सुना तो वे थोड़े से मुस्कुराए और बोले- साधु ने तुम्हारी तारीफ नहीं कि है क्योंकि उन्होंने वो नहीं कहा जो तुम हो बल्कि उन्होंने वो कहा जो वो खुद है। वहीं तुमने उनको जो कुछ कहा वो ये नहीं कहा कि जो वो है बल्कि तुमने वो कहा जो तुम खुद हो।


यहीं बात वेदों में भी कही गयी है। ये दुनिया तुम्हें वैसी नहीं दिखती है जैसा ये दुनिया है बल्कि ये दुनिया वैसी ही दिखती है जो तुम खुद हो। जिसकी नजर जैसी है उसके लिए ये दुनिया वैसी ही है। अगर तुम अपनी दुनिया को बदलना चाहते हो तो इसका सिर्फ एक ही तरीका है अपनी नजरिया बदल लो।


गुस्से को कंट्रोल और काबू कैसे करें? Short Inspirational Stories For Students In Hindi


ये कहानी है एक छोटी सी बच्ची की। जिसको बात-बात पर बहुत गुस्सा आता था। जब उसको गुस्सा आता था तो वो ये नहीं देखती थी कि उसके सामने कौन है? जो उसके मन में आता था वो सब बोल देती थी। कई बार तो वो कुछ चीजें उठाती और जमीन पर जोर से पटक देती थी।


उसके माँ-बाप अपनी लड़की के ऐसी बर्ताव को लेकर बहुत परेशान रहते थे। उनको समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें? उस बच्ची को वे बहुत समझाने की कोशिश किये लेकिन वो बच्ची समझने को तैयार ही नहीं थी।


फिर उसकी माँ ने उसकी टीचर से बात की क्योंकि एक ट्यूशन टीचर ही ऐसी थी जिसकी वो बात सुनती थी। उसकी टीचर ने उसके माँ-बाप से कहा- आप चिंता न करो। आने वाले कुछ दिनों में आपकी बेटी बिल्कुल ठीक हो जाएगी। उसकी माँ को समझ नहीं आया लेकिन उन्होंने सोचा कि कोशिश करने में क्या जाता है?


रोज की तरह ही जब वो टीचर आयी तो उसने उस बच्ची को कहा कि आज हम पढ़ाई नहीं करेंगे बल्कि हम एक गेम खेलेंगे। फिर टीचर ने उस बच्ची को एक घर के पीछे ले गयी और उन्होंने उस बच्ची को कहा- गेम ये है कि जब भी तुमको गुस्सा आये तो तुमको एक कील लेनी है और यहाँ पर आकर के इस दीवाल में गाड़ देना है।


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फिर उस बच्ची ने उस टीचर से पूछा कि इससे क्या होगा तो उस टीचर ने कहा- जब ये गेम खत्म हो जाएगा तो तुम्हें अंत में एक पुरस्कार दिया जाएगा। उस बच्ची ने भी उस दिन से ऐसा ही करना शुरू कर दिया जैसा कि उस टीचर ने कहा था। उसको जब भी गुस्सा आता तो वो जाती और जाकर के एक कील इस दीवार में गाड़ देती।


उस लड़की को बहुत गुस्सा आने के वजह से पहले ही दिन वहाँ पर 10 से ज्यादा कीलें गड़ गयी। लेकिन उन किलों को गाड़ने के लिए बार-बार उन दीवारों के पीछे जाना पड़ता था और जाकर के उस कील को गाड़ना पड़ता था। इससे बचने के लिए उसके दिमाग में एक सवाल आया कि जितनी मेहनत मैं इस कील को गाड़ने में लगाती हूँ उससे कम मेहनत में अपने गुस्से को काबू कर सकती हूँ।


अगले दिन वहाँ पर 8 कीलें गड़ी, फिर उसके अगले दिन 5 फिर चार फिर तीन फिर दो फिर 1 फिर एक ऐसा भी दिन आया जब उसको एक बार भी उसको गुस्सा नहीं आया और उस दिन एक भी कील उस दीवार में नहीं गड़ी।


वो बच्ची बहुत खुश हो गई। उसने खुशी से अपने टीचर के पास गई और जाकर के उनको बताया कि देखो मैम आज मैंने एक भी कील उस दीवार में नहीं गाड़ी क्योंकि मेरे को एक बार भी गुस्सा नहीं आया। ये सुनकर मैम ने उसको थोड़ी सी शाबाशी दी और उसके साथ उस दीवार के सामने के जाकर के खड़ी हो गयी।


अब मैम ने उस बच्ची को कहा की अभी गेम खत्म नहीं हुआ है। अब तुम्हें जिस भी दिन बिल्कुल गुस्सा नहीं आता है उस दिन के अंत में एक कील को इस दीवार से निकाल दोगी। बच्ची ने भी वैसा ही करना शुरू कर दिया। लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब उस दीवार से सारी कीलें बाहर निकल गयी।


फिर वो बच्ची बहुत खुश हो गयी और उसने अपनी मैम के पास जाकर के बोला कि अब उस दीवार में एक भी कील नहीं है। टीचर बच्ची के साथ में जाकर उस दीवाल के सामने खड़ी हो गयी और उसने देखा कि अब एक भी कील नहीं है इस दीवाल में। मैम ने उस बच्ची को उसकी फेवरेट चॉकलेट उसको गिफ्ट दिया और कहा कि तुम इस प्राइज को जीत गयी हो।


बच्ची बहुत खुश हो गयी। फिर टीचर ने उस बच्ची से पूछा कि क्या तुमको इस दीवाल में कुछ नजर आ रहा है? बच्ची ने कहा- नहीं मैम, मुझे तो कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। इसमें से सारी कीलें बाहर निकल गयी है। तो उस टीचर ने कहा- ध्यान से देखो शायद तुमको इसमें कुछ नजर आए।


उस बच्ची ने दुबारा देखा और कहा- जो कीलें मैंने दीवार में गाड़ी थी उसकी कुछ निशान मुझे नजर आ रहे हैं। फिर उसकी मैम ने इस बच्ची से कहा- क्या तुम इस निशान को मिटा सकती हो? बच्ची सकपका गयी और बोली मैम भला ये कैसे हो सकता है?


मैम ने जवाब दिया- जिस तरह तुम इस दीवाल से कील को तो निकाल सकती हो लेकिन उसमें पड़े निशान को नहीं मिटा सकती। ठीक उसी तरह से होता है जब तुम गुस्सा करती हो। जब तुम किसी पर भी गुस्सा करती हो तो उनके दिल पर बहुत चोट लगती है, बहुत दर्द होता है और वहाँ पर एक निशान बन जाता है।


उस निशान को चाह कर भी तुम हटा नहीं सकती। फिर चाहे तुम उनसे जितना मर्जी माफी मांग लो। ये सुनकर उस बच्ची को अपनी गलती का एहसास हो गया और वो रोने लगी। बच्ची वहाँ से भागती हुई अपनी माँ के पास गई और जाकर उनके गले लग गयी।


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फिर उसने बोला- माँ मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी। आज के बाद मैं कभी भी गुस्सा नहीं करूँगी। उस दिन के बाद उस बच्ची ने कभी गुस्सा नहीं किया।


जिंदगी बदलने वाली कहानी | Real Life Short Motivational Stories For Students In Hindi


एक बार एक लड़की ने एंट्रेंस एग्जाम पास करने के लिए बहुत से कोशिश किया लेकिन उसके बाद भी वो एग्जाम पास नहीं कर पाई। जिसके वजह से वो अंदर से पूरी तरह से टूट गयी। जिसके चलते वो बहुत परेशान रहने लगी। उसके पिता से अपनी बेटी की ऐसी हालत नहीं देखी गयी।


फिर उन्होंने एक दिन अपनी बेटी को बुलाया और कहा कि तुम मेरे साथ एक बार किचन में चलो मुझे तुमको कुछ दिखाना है। किचन में उन्होंने पहले से ही गैस स्टोव के ऊपर तीन बर्तन रखे हुए थे। फिर उन्होंने उन तीनों बर्तन के अंदर पानी भरा। एक बर्तन के अंदर कुछ आलू डाले, एक के अंदर कुछ अंडे और एक के अंदर कुछ कॉफी बिन्स। उन तीनों को उबलने के लिए छोड़ दिया।


बीस मिनट तक उन तीनों को उबलते हुए हो गए और बाप बेटी वहीं पर खड़े होकर एक-दूसरे को देख रहे थे। इतने देर से वहाँ पर खड़े रहने से बेटी को थोड़ा गुस्सा आया और पिता से बोली- आप यहां खड़े होकर क्या कर रहे हो?


उसके पिता ने कहा- सिर्फ एक मिनट रुको तुमको सब समझ आ जायेगा। फिर उसके बाद उन्होंने एक-एक करके उन तीनों गैस स्टोव को बंद कर दिया। उसमें से आलू निकाले और एक प्लेट में रख दिये, दूसरे बर्तन में से अंडे निकालकर उसको एक बर्तन में रख दिये और फिर तीसरे बर्तन में से वो कॉफी बिन्स निकाले और उसको भी एक प्लेट में रख दिये।


फिर उन्होंने अपनी बेटी से कहा- तुम्हें क्या दिख रहा है तो ऐसा सुनकर उनकी बेटी को गुस्सा आ गया। उसने बोला कि इसमें देखना क्या है- एक में अंडे है, एक में आलू है और एक में कॉफी बिन्स है।


फिर उसके पिता ने कहा- एक बार इनको छूकर के देखो शायद तुम्हें कुछ समझ में आ जाये। तो उस लड़की ने सबसे पहले आलू को छुआ और थोड़ा सा दबाया यो वो बिल्कुल सॉफ्ट हो चुके थे। उसके बाद उस लड़की के पिता ने उन अंडों को तोड़ा तो वो थोड़े हार्ड थे और फिर उन्होंने कॉफी वाला कप उठाकर कहा- एक बार इसको सूंघ के देखो तो जब उनकी बेटी ने उसको सूंघा तो उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी।


फिर उन्होंने अपनी बेटी से कहा- तुमने ध्यान से देखा कि क्या हुआ है यहाँ पर? ये तीनों ने बिल्कुल भी एक ही परिस्थितियों को झेला लेकिन तीनों ने अलग-अलग तरीके से व्यवहार किया।


पहला जब हमने आलू को पानी मे डाला था उस समय ये बहुत हार्ड था लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद में ये बिल्कुल सॉफ्ट हो गए यानी कि कमजोर पड़ गए। दूसरे थे अंडे जो गर्म पानी में जाने से पहले अंदर से बिल्कुल भी कमजोर थे लेकिन गर्म पानी में जाने के बाद अंदर से मजबूत हो गए। तीसरी थी कॉफी जिसने ऐसा कुछ किया जो इन दोनों से अलग था।


यानी कि उसने गर्म पानी में जाकर खुद को नहीं बदला बल्कि उस गर्म पानी को ही बदल दिया। बिल्कुल इसी तरह से हमारी जिंदगी में भी होता है। तुम्हारे ऊपर है कि तुमको इन तीनों में से क्या बनना है? 


पहला आलू के जैसा यानी कि तुम्हारी जिंदगी में कोई मुश्किल आये तो तुम पूरी तरह से टूट जाओ, कमजोर पड़ जाओ। दूसरा उस अंडे के जैसा यानी कि जैसे ही तुम्हारी जिंदगी में कुछ मुश्किलें आये वो मुश्किलें तुमको तोड़े नहीं बल्कि तुम अंदर से और स्ट्रांग हो जाओ या फिर तीसरा यानी कि कॉफी के जैसा।


यानी कि जब तुम्हारी जिंदगी में कुछ मुश्किलें आये तो तुम उन मुश्किलों का ना सिर्फ डंटकर के सामना करो बल्कि अपनी जिंदगी को हो बदल दो।

करियर चुनते समय इन बातों का जरूर ध्यान रखें वर्ना असफलता हाथ लगेगी।

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How Can I Choose My Right Career After 12th In Hindi | सही करियर का चुनाव कैसे करें

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How Can I Choose My Right Career

आजकल के जमाने में किसी की भी लड़कों के सामने सबसे बड़ी समस्या यहीं रहती है कि सही कैरियर का चुनाव कैसे करें? आज के समय लड़कों के सामने सबसे बड़ी problem यहीं रहती है कि कौन सा career उनके लिए बेस्ट है, मैं किस काम को करने से उनको खुशी मिलेगी और जीवन में अच्छी तरक्की मिलेगी।


आज काम तो हर कोई करता है कि लेकिन उनको ये पता ही नहीं होता कि उनको आगे चलकर करना क्या है, उनका career किस फील्ड में होगा? उनका कोई goal ही नहीं होता इसलिए वो अपने life वो achievement हासिल नहीं कर पाते जिसका वो हकदार थे।


मान लीजिए कि आपका उम्र 20 साल है तो आपको अभी तक तो इतना पता चल ही गया होगा कि आपको कौन सा काम करने में सबसे ज्यादा मजा आता है, आपको किस तरह के काम करने में सबसे ज्यादा खुशी मिलती है?


आपके मन में बस यहीं सवाल उठता होगा कि मेरे लिए कौन सा काम अच्छा रहेगा, अपना कैरियर कैसे चुनें? तो चलिए हम how can I choose my right career in hindi चुनने में मदद करते हैं और बताते हैं कि आपके लिए कौन सा career चुनना सही रहेगा?


How to Choose Right Career Planning in Hindi | विद्यार्थी अपने भविष्य का चुनाव कैसे करें


क्या आप जानते हैं कि आज के समय में कैरियर सही ना चुन पाने का सबसे बड़ा कारण ये है कि आपका कैरियर आप नहीं बल्कि कोई और चुनता है। आप किस समाज है, आप किस परिवार से जुड़े हुए हैं, अगर आपके आसपास कोई इंजीनियर है, कोई डॉक्टर है, कोई दरोगा है तो आपके परिवार के लोग बस यहीं कहते हैं कि उसका लड़का इंजीनियर है तो तुमको भी वहीं बनना है भले ही आपका दिमाग उसके लिए है ही नहीं, आप उसके लिए बनें ही ना हो।


हर आदमी की अलग-अलग सोच होती है, हर आदमी के पास एक अपना हुनर होता है जो किसी और के पास नहीं होता है, कुछ आपके अंदर ऐसा है जो केवल आप ही कर सकते हैं। फिर क्यों आप दूसरे के लिए बनाए गए काम को करके अपना कैरियर खराब कर रहे हैं, जिसमें आपको कभी सफलता मिल ही नहीं सकती।


जरा सोचिए अगर नरेंद्र मोदी को जबरदस्ती एक क्रिकेटर बनाया गया तो क्या वो आज भारत के प्रधानमंत्री बन पाते, क्या केएल राहुल को गेंदबाजी करने को बोला जाए तो क्या वो कभी इतने सफल हो पाते, क्या बिल गेट्स को जबरदस्ती गायक बनाया गया होता तो क्या वो आज इतने सफल हो पाते?


इन सबका जवाब बस एक ही होगा- शायद नहीं क्योंकि वे उसी काम को अपना कैरियर बनाएं जिसमें उनको काम करना अच्छा लगता था और जिसमें वो अपना शत प्रतिशत दे सकते थे।


आज सबसे ज्यादा बेरोजगारी का कारण यहीं है कि लगभग 99% लोगों अपना खुद का कैरियर चुन पाते हैं। इसलिए वो आगे जाकर या तो असफल रह जाते हैं या फिर उतने सफल नहीं हो पाते जितना कि वो हो सकते थे। फिर जब उनको किसी काम में मन नहीं लगता है तो निराश हो जाते हैं।


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हो सकता है कि आज आप जो काम कर रहे हैं हो सकता है कि वो आप अपने मन से नहीं कर रहे हैं, उसमें आपका कोई दिलचस्पी नहीं है, आप वो काम किसी और के कहने पर कर रहे हैं? अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो आप अपने जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आप अपने लाइफ में कभी सफल नहीं हो सकते हैं।


Best Career Development Tips In Hindi | सही करियर बनाने और चुनने के तरीके


अपना सही कैरियर चुनने का तरीका ये है कि पहले खुद से एक बार पूछिये कि मुझे क्या करना चाहिए, मैं किस काम को बेहतर तरीके से कर सकता हूँ? अगर आप एक बार अपना सही goal सेट कर लिए तो आप अपने कैरियर के आधा जंग ऐसे ही जीत लिया।


एक बार आप अपना goal सेट कर लीजिए। अभी आपके लिए ये improtant नहीं है कि आप इस समय कम पैसा कमा रहे हैं या ज्यादा कमा रहे हैं, बल्कि important ये है कि आप आने वाले समय में क्या करने वाले हो?


वहाँ पर भी पैसे से ज्यादा important ये है कि जो आप काम करने वाले हैं उसमें आपका interest है कि नहीं है। हो सकता है कि आप महीने का एक लाख रुपये कमा रहे हैं या उससे ज्यादा या कम कमा रहे हैं लेकिन इतना तो सोचिए आप जो करना चाहते थे वहीं कर रहे हैं इससे बड़ी बात आपके लिए क्या हो सकता है?


आप अभी अपने कैरियर के शुरुआती दौर में है ऐसे में बिल्कुल भी जल्दबाजी न करें क्योंकि आपका जीवन और भी ज्यादा लम्बा चलने वाला है। ऐसे में आप इतने लंबे समय तक अपने life के साथ कैसे समझौता कर सकते हैं? आप अगर कर रहे हैं तो आप भले ही कुछ पैसा कमा पा रहे हैं लेकिन आपको अंदर से खुशी कभी नहीं मिलेगा।


सबके दिमाग में बस एक ही सवाल रहता है कि बस कैसे भी जॉब मिल जाये तो मेरी लाइफ सेट हो जाएगी। मैं आपसे पूछता हूँ कि कोई भी जॉब करके सिर्फ पैसा कमाना ही life है। आप एक बात हमेशा ध्यान रखें कि अपना life खुद डिज़ाइन कर सकते हैं। उसको जैसा मर्जी वैसा बना सकते हैं।


आप इसी बात से डरते हैं न कि अगर मैं इस काम को करूँगा तो लोग आपके बारे में क्या कहेंगे, मेरे बारे में क्या सोचेंगे? अगर आप ऐसा सोचते हैं तो सबसे पहले इस तरह की बात अपने मन से निकाल दीजिये क्योंकि आपसे लोग उतने ही दिन तक आपके बारे में पूछते हैं जब तक आप बर्बाद न हो जाओ। लोग आपको चाहते ही है कि आप अपने लाइफ में कुछ कर नहीं पाये।


इसलिए आप लोगों की फिक्र छोड़िए और जो आपका दिल कहें उसी में अपना कैरियर बनायें क्योंकि जो कैरियर आप चुनेंगे वो आपके लिए सबसे बेस्ट होगा। आप कैरियर चुनते समय बस इतना ही ध्यान रखें कि आपको जितना जॉब की जरूरत है उतना ही लोगों को आपकी जरूरत है। इसलिए आप अपने काम को कम मत आंकिये।


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आप जो भी कैरियर चुने उसके अनुसार, अपने फील्ड के अनुसार जो लोग उसमें पहले से कुछ अच्छा कर चुके हैं उनसे मिलें, उनसे बात करें कि कैसे वो यहाँ तक पहुँचे, उनसे कैरियर मार्गदर्शन प्राप्त करें, उसके बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करें? ऐसा करने से आपको जल्दी success मिलेगी।


Conclusion Of How To Choose Right Career In Hindi | करियर गाइड


इन सब बातों को आप अच्छे तरीके से समझ गए होंगे कि how to choose my right career in hindi. इसलिए आप कभी भी उसमें करियर नहीं बनाये जिसमें लोग आपको करने के लिए कहते हैं बल्कि आप अपना career उसमें बनाइये जिसमें आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती है और आप उसमें अच्छा कर सकते हैं।


हम उम्मीद करते हैं कि आपको अच्छी तरह से समझ आ गया होगा कि सही करियर का चुनाव कैसे करें? फिर भी अगर आपको करियर गाइड से सम्बंधित कोई सहायता चाहिए तो हमसे कमेंट करके जरूर पूछें। अगर आपको हमारा ये पोस्ट अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें।